Yogini Ekadashi 2026: Datum, Parana-Zeit, Katha und Bedeutung
Yogini Ekadashi 2026 wird am Freitag, dem 10. Juli 2026, begangen und ist der Verehrung von Lord Vishnu gewidmet.
0%
भारत देश को त्योहारों का देश भी कहा जाता है क्योकि भारत देश के लोग सभी प्रकार के त्योहारों को बहुत ही उत्सुकता से मनाते है|
खासकर हिन्दू धर्म के लोग अपने त्योहारों को बहुत ही उत्साह से मनाते है| Ja छठ पूजा 2026 के बारे में बात करेंगे|
यह त्यौहार भी हिन्दू धर्म में सम्पूर्ण विधि विधान से मनाया जाता है| छठ पूजा हिन्दुओं का प्रमुख त्योहार है| इस त्यौहार को अधिकतर बिहार, उत्तर प्रदेश तथा भारत देश के अन्य राज्यों में भी मनाया जाता है|

यह त्यौहार हिन्दू धर्म के पंचांग के अनुसार Nein Chhath-Puja का त्यौहार कार्तिक मास की शुक्ल पक्ष की छठी तिथि को मनाया जाता है|
छठ पूजा का यह त्यौहार कुल चार दिनों तक मनाया जाता है| इस चार दिनों में त्यौहार की अलग – अलग प्रथा को पूर्ण किया जाता है|
छठ पूजा के इस शुभ अवसर पर भगवान सूर्य देव की उपासना की जाती है| सूर्योपासना के इस छठ पूजा के त्यौहार को बहुत ही शुभ माना जाता है|
छठ पूजा का त्यौहार भगवान सूर्य देव और उनकी पत्नी उषा को समर्पित किया गया है| यह त्यौहार बिहारवासियों के लिए बहुत ही महत्व रखता है| इस त्यौहार को बिहार के साथ – साथ उत्तर प्रदेश, झारखंड तथा नेपाल के भी कई हिस्सों में मनाया Ja है|
Mehr als 36 घंटों तक उपवास रखती है| तथा अपने पति व पुत्र की लम्बी आयु के लिए कामना करती है| प्रत्येक वर्ष यह त्यौहार अलग – अलग तिथि को मनाया जाता है|
इस वर्ष छठ पूजा 2026 का यह पावन त्यौहार 13. September 2026, 16. Dezember 2026 2026, सोमवार तक मनाया जाएगा तो आइये जानते है इस प्रसिद्ध त्यौहार के बारे और भी बातें।
| छठ पूजा का दिन | छठ पूजा तिथि (2026) | छठ पूजा अनुष्ठान |
|---|---|---|
| शुशु्रवार. | 13. November 2026 | Baden und Essen |
| Samstag | 14. November 2026 | खरना |
| Danke | 15. November 2026 | संध्या अर्घ्य (शाम 05:27) |
| Nein | 16. November 2026 | सूर्योदय/ उषा अर्घ्य (सुबह 06:44) |
यह. छठ पर्व या छठ पूजा का त्योहार त्यौहार कार्तिक मास की शुक्ल पक्ष की षष्ठी तिथि को मनाया जाता है|
ऐसे तो यह त्यौहार सम्पूर्ण भारत देश में मनाया जाता है किन्तु मुख्यत: यह त्यौहार Ja, उत्तरप्रदेश, पूर्वांचल, तथा नेपाल देश के भी कई हिस्सों में मनाया जाता है|
मान्यता है कि छठ पूजा का त्यौहार भोजपुरी का सबसे बड़ा व बहुत ही महत्वपूर्ण पर्व है| छठ पूजा के त्यौहार को बिहार राज्य में बहुत ही उत्साह और धूमधाम से मनाया जाता है|
यह एक मात्र ऐसा पर्व है जो कि भारत देश में वैदिक काल से चला आ रहा है| Das ist nicht alles संस्कृति भी बन चुका है|
इस त्यौहार को मुख्य रूप से ऋषियों के द्वारा लिखे गए ऋग्ववद. में बताए गए सूर्य पूजन, उषा पूजन और आर्य परंपरा के अनुसार मनाया जाता है|
ऐसा कहा जाता है कि बिहार में इस त्यौहार को हिन्दू धर्म के लोगों के साथ साथ मुस्लिम धर्म Ja भी मनाते है| पिछले कुछ समय में यह त्यौहार यह भारत देश के साथ सम्पूर्ण विश्व भर में भी प्रचलित होता जा Ja है|
मान्यताओं के अनुसार छठ पूजा का त्यौहार सूर्य, प्रकृति, जल, वायु और उनकी बहन छठी मइया Ja समर्पित किया गया है|
छठ पूजा के त्यौहार अनुष्ठान बहुत ही कठोर है| यह त्यौहार चार दिनों तक मनाया जाता है| इस पूजा के अनुष्ठानों में पवित्र स्नान, पीने के पानी से दूर रहना, उपवास, बहुत देर तक पानी में खड़ा रहना तथा भगवान सूर्यदेव को अर्घ्य देना भी शामिल है|
इस चार दिन तक चलने वाले त्यौहार में महिलाएँ 36 घंटों तक उपवास रखती है| तथा अपने पति व पुत्र की लम्बी आयु के लिए कामना करती है|
छठ पूजा के त्यौहार को मनाने के पीछे कई सारी कथाए चली आ रही है| लेकिन आज हम जिस कथा के बारे में आपको बताएँगे उस कथा का उल्लेख ऋग्वेद ग्रंथ में किया गया है|
जैसा कि हमने आपको बताया है कि प्राचीन समय से छठ पूजा के त्यौहार का बहुत ही महत्व है| इसकी शुरुआत महाभारत काल में माता कुंती के द्वारा ही की गई थी|

भगवान सूर्य देव की पूजा करने से ही माता कुंती को पुत्र कर्ण की प्राप्ति हुई थी| इसके बाद कर्ण ने भी भगवान सूर्यदेव की पूजा करना प्रारम्भ कर दिया| दानवीर कर्ण सूर्य देव का बहुत ही बड़ा भक्त था|
कर्ण प्रतिदिन ही लम्बे समय तक बहुत गहरे पानी में खड़े होकर सूर्यदेव की पूजा करता था तथा Ja देव को अर्घ्य देता है| भगवान सूर्य देव की कृपा से कर्ण एक महान योद्धा बना था| जब से ही सूर्य को अर्घ्य देने की परंपरा चली आ रही है|
वही दूसरी ओर माना जाता है कि पांडवो की पत्नी द्रौपदी भी प्रतिदिन भगवान सूर्य देव की पूजा Ja थी| द्रौपदी अपने परिवार के स्वास्थ्य व लम्बी उम्र के लिए भगवान सूर्यदेव की प्रार्थना करती है|
जिस समय पांडव अपना सम्पूर्ण राजपाट हार गए थे| उस समय द्रौपदी ने छठ का व्रत करके भगवान सूर्यदेव की पूजा की थी| इसकी वजह से पांडवों को उनका खोया हुआ राज पाट पुनः मिल गया था|
इसलिए माना जाता है कार्तिक मास की षष्ठी को छठ पूजा करने से घर में सुख – समृद्धि बढती है| तथा मनवांछित फल की प्राप्ति भी होती है|
इस दिन भगवान सूर्यदेव को जल चढ़ाते समय निम्न मंत्रो का जप करने से सूर्य देवता का आशीर्वाद मिलता है –
इस त्यौहार को मुख्य रूप से ऋषियों के द्वारा लिखे गए ऋग्वेद में बताये गए सूर्य पूजन, उषा पूजन और आर्य परंपरा के अनुसार मनाया जाता हैं|
ऐसा कहा जाता है कि बिहार में इस त्यौहार को हिन्दू धर्म के लोगों के साथ साथ मुस्लिम धर्म Ja भी मनाते है| Im Jahr 2026 ist das Jahr 2025 in vollem Gange है|

यह त्यौहार चार दिनों तक मनाया जाता है| इस पूजा के अनुष्ठानों में पवित्र स्नान, पीने के पानी से दूर रहना, उपवास, बहुत देर तक पानी Nein खड़ा रहना तथा भगवान सूर्यदेव को अर्घ्य देना भी शामिल है|
छठ पर्व को महापर्व भी कहा जाता है ऐसा इसलिए है क्योंकि इसे सम्पूर्ण आस्था और श्रद्धा से Ja जाता है|
इसी वजह से आज सम्पूर्ण भारत देश में छठ पूजा 2026 का त्यौहार बहुत ही उत्साह व धूमधाम के साथ Nein जाता है|
इस पूजा को करने के लिए साफ़ – सफाई का बहुत ही अच्छे ध्यान रखना अनिवार्य होता है| इस दिन नशीले पद्धार्थो व मांस आदि का सेवन करने से बचना चाहिए|
Ich bin seit 2026 im Jahr 2025 dabei बारें में काफी बाते जानी है| आज हमने छठ पूजा पूजन के फ़ायदों के बारे में भी जाना| हम उम्मीद करते है कि हमारे द्वारा बताई गयी जानकारी से आपको कोई ना कोई मदद मिली होगी|
इसके अलावा भी अगर आप किसी और पूजा के बारे में जानकारी लेना चाहते है। तो आप हमारी वेबसाइट 99Pandit पर जाकर सभी तरह की पूजा या त्योहारों के बारे में सम्पूर्ण जानकारी ले सकते है|
किसी भी तरह की पूजा करने के लिए हमें बहुत सारी तैयारियां करनी होती है| गावों में पूजा आसानी से हो जाती है लेकिन शहरों में लोगों के पास समय की कमी होती है|
जिस वजह से वह लोग पूजा नहीं करवा पाते है तो उनकी इस समस्या का समाधान हम लेकर आये है 99Pandit के साथ| यह सबसे बेहतरीन प्लेटफार्म है जिससे आप किसी पूजा के लिए ऑनलाइन पंडित जी को बुक कर सकते है|
Inhaltsverzeichnis