Diwali 2026 Datum: हमारे इस भारत में कई सम्प्रदाय के लोग निवास करते है। आज हम हिन्दू धर्म के त्यौहार के बारे में बात करेंगे। ऐसे तो हिन्दू धर्म में बहुत सारे त्यौहार आते है।
लेकिन. दीपावली 2026 का त्यौहार हिन्दू धर्म के साथ साथ सम्पूर्ण भारत देश में बहुत ही हर्षोल्लास व खुशहाली के Ja मनाया जाता है। दीपावली को कई लोग दिवाली के नाम से भी जानते होंगे।
दिवाली का त्यौहार हिन्दुओं में नए साल के समान ही मनाया जाता है। दीपावली का त्यौहार धार्मिक दृष्टि से देखा जाए तो भी हिन्दू धर्म के लोगों के लिए बहुत ही महत्वपूर्ण माना जाता है। इस दिन सभी अपने घरों में दीपक जलाते है।

दीपावली 2026 (Diwali 2026) का त्यौहार बड़े – बड़े शहरों से लेकर छोटे – छोटे गाँवों में भी मनाया जाता है| Es ist nicht einfach भी कई सारी वस्तुएं खरीदी जाती है।
दिवाली के दिन जब गाँव के प्रत्येक घरों में दीपक जलते है| तो उन सारे दीपकों की रोशनी से पूरा गाँव ही जगमगा जाता है।
दीपावली के दिन भगवान श्री राम अपना वनवास समाप्त कर व रावण का वध करके अपनी आयोध्या नगरी Nein वापस लौटे थे।
इसलिए इस दिन को सम्पूर्ण भारत और सनातन धर्म में दीपावली (दिवाली) के रूप में मनाया जाता है। दिवाली को प्रकाश व रोशनी का त्यौहार भी कहा जाता है।
इस दिन को बुराई पर अच्छाई की जीत के पर्व के रूप में भी मनाया जाता है। Im Jahr 2026 wurde das Jahr 2025 beendet प्रारम्भ होता है और भाई दूज के दिन समाप्त हो जाता है।
हिन्दू धर्म के पंचांग के अनुसार दीपावली का यह पावन त्यौहार प्रत्येक वर्ष में कार्तिक मास के 15 Minuten vor dem Ende इस वर्ष दीपावली का यह पवित्र त्यौहार 08 नवंबर 2026 मनाया 2026
दिवाली की शुभ तिथि व मुहूर्त – Wann war Diwali im Jahr 2026 im indischen Kalender?
| Datum |
समय |
| September 2026 |
08. November 2026 |
| लक्ष्मी पूजा मुहूर्त |
06:27 Uhr und 08:27 Uhr |
| प्रदोष काल |
06:02 Uhr und 08:34 Uhr |
| वृषभ काल |
06:27 Uhr und 08:27 Uhr |
| अमावस्या तिथि प्रारम्भ |
08. September 2026, 11:27 Uhr |
| अमावस्या तिथि समाप्त |
09. September 2026, Mittwoch – 12:31 Uhr |
Diwali के साथ अन्य भी कई सारे त्यौहार भी आते है जैसे – दीपदान, धनतेरस, गोवर्धन पूजा, तथा भाई दूज. Es ist nicht einfach सुप्रसिद्ध त्यौहार है।
Warum wird das Diwali-Fest gefeiert?
यह त्यौहार कार्तिकमास के 15वें दिन अमावस्या को मनाया जाता है। यदि हम बात करे इस दीपावली के त्यौहार को क्यों मनाया जाता है तो उसके लिए अनेकों कथाए प्रचलित है, लेकों को ज्ञात है वो भगवान श्री राम के 14 के वनवास के लौटने की कथा है।
इसके अलावा भी और कथाए है। जिनके बारे में आपको पता नहीं है और हम आज इस लेख के माध्यम से आपको उन सभी कथाओं से अवगत करवाएँगे। जिनके बारे में आपको पता नहीं है –
राम जी का पुन: आगमन
वाल्मीकि जी के द्वारा लिखी गई रामायण ने बताया है कि जब भगवान श्री राम रावण का वध करने व अपनी पत्नी सीता को बचाकर अपने भाई लक्ष्मण के साथ अयोध्या लौटे थे। उस दिन पुरे नगर के सभी घरों में दीपक जल रहे थे।
माना जाता है कि उस दिन सम्पूर्ण अयोध्या नगरी दीपों से जगमगा उठी थी। भगवान श्री राम के वनवास पूर्ण करके लौटने पर ही दिवाली का यह पावन त्यौहार मनाया जाता है।
इस दिन प्रत्येक में गाँव में दीपक जलाए गए थे। तब से ही दिवाली को अंधकार पर विजय का पर्व भी माना गया है।
भगवान श्री कृष्ण के द्वारा नरकासुर का अंत
माना जाता है कि इस दिन भगवान श्री कृष्ण ने अपनी पत्नी सत्यभामा की सहायता से राक्षस नरकासुर का अंत किया था। Es ist nicht einfach श्राप मिला हुआ था।
उस दिन कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि थी। नरकासुर के आतंक से मुक्ति पाने की खुशी में वहां के लोगों ने दीपोत्सव मनाया था। जिसके अगले दिन दीपावली का त्यौहार मनाया गया।
पांडवों की घर वापसी
आपकी जानकारी के लिए बता दे कि भगवान श्री राम के भांति ही पांडवो को भी अज्ञातवास के कारण Ja राज्य छोड़ना पड़ा था।
उनकी पुनः घर वापसी पर पुरे हस्तिनापुर को दीपो के द्वारा सजाया गया था। तब से ही दिवाली Es hat begonnen.
माँ लक्ष्मी का अवतार
Es ist nicht einfach समुद्र मंथन के समय माता लक्ष्मी में इस पृथ्वी पर अवतार लिया था|
माता लक्ष्मी जी को धन और समृद्धि प्रदान करने वाली देवी के रूप में भी जाना जाता है| Das ist nicht der Fall साथ – साथ माता लक्ष्मी पूजा की जाती है|
माँ काली का रौद्र रूप
Es ist nicht einfach का वध करने के लिए जब महाकाली का रूप धारण किया Ja उसका वध करने के पश्चात भी माता पार्वती का क्रोध शांत नहीं हो रहा था|
तब माता पार्वती के क्रोध को शांत करने के लिए भगवान शिव माता पार्वती के चरणों में आ गये थे| उस समय भगवान शिव के स्पर्श से ही पार्वती माँ का क्रोध शांत हो गया था|
इसी कारण से दीपावली के दिन उनके शांत रूप माता लक्ष्मी का भी पूजन किया जाता है| Ja अलावा इस दिन रात को माता काली की पूजा का भी विधान माना गया है|
दिवाली पूजन की सामग्री सूची – Diwali Pujan Samagri-Liste
| वस्तु |
माम्ता |
| रोली |
1 पैकेट |
| कलावा (मौली) |
2 नग |
| सिंदूर |
1 पैकेट |
| Nelken |
1 पैकेट |
| Kardamom |
1 पैकेट |
| सुपारी |
4 नग |
| heiliger Faden |
4 नग |
| Schatz |
1 शीशी |
| Ja |
1 शीशी |
| गंगाजल |
1 शीशी |
| पानी वाला नारियल |
1 नग |
| पीला कपड़ा |
2 Retweets und Antworten |
| धूपबत्ती |
1 पैकेट |
| रुई बत्ती लंबी वाली |
1 पैकेट |
| रुई बत्ती गोल बत्ती |
1 पैकेट |
| घी |
500 Minuten |
| सरसो का तेल |
500 Minuten |
| दियाळी |
1 नग |
| सकोरा |
10 नग |
| कमल बीज |
11 नग |
| पंचमेवा |
200 Minuten |
| धान की खील |
200 Minuten |
| धान का चूरा |
200 Minuten |
| खील खिलोने |
200 Minuten |
| लक्ष्मी गणेश प्रतिमा |
- |
| लक्ष्मी यंत्र |
1 नग |
| भगवान के वस्त्र एवं आसान |
- |
| पंचामृत की व्यवस्था पहले से निर्माण करे |
- |
| माचिस |
1 नग |
| Kapoor |
1 पैकेट |
| फल (अनार सरीफा विशेष एवं अन्य फल) |
- |
| मिष्ठान |
wie erforderlich |
| फूल माला |
- |
| फूल खुले |
20 Euro |
| पान पते |
5 नग |
| कमल |
आवश्यकतानुसार जो वर्षभर प्रयोग कर सके |
| नौवीं (कॉपी एवं किताब आवश्यकतानुसार) |
- |
कुबेर की पोटली के लिए सामग्री
| वस्तु |
माम्ता |
| माचिस |
1 पैकेट |
| गोमती चक्र |
5 नग |
| Kodi |
11 नग |
| खड़ी धनिया |
50 Minuten |
| सुपाड़ी |
11 नग |
| कमल बीज |
11 नग |
| धुंधची |
11 नग |
| चांदी अथवा स्वर्ण सिक्का |
3 नग |
| Kontakt |
1 नग |
दीपावली पूजन का मंत्र – Deepawali Pujan Mantra
दिवाली के दिन माता लक्ष्मी जी का आव्हान करते है| माँ लक्ष्मी को धन देवी भी कहा जाता है| जो भी दीपावली के दिन माता लक्ष्मी की सच्ची श्रद्धा से प्रार्थना करता है|
उसे उनकी कृपा अवश्य ही प्राप्त होती है| उनकी असीम कृपा पाने के लिए आप इस निम्न मंत्र Das ist alles –
|| ॐ ह्रीं श्रीं लक्ष्मीभ्यो नमः॥ ॐ श्रीं ह्रीं श्रीं कमले कमलालये प्रसीद प्रसीद ॐ श्रीं ह्रीं श्रीं महालक्ष्मयै नम:॥
इस मंत्र का दीपावली के दिन 108 बार जप करने से माता लक्ष्मी का आशीर्वाद मिलता है|
2026 – Diwali Puja Vidhi (Schritt für Schritt)
- इस दिन भगवान Gott Ganesha और माता लक्ष्मी जी का पूजन किया जाता है| इसके लिए आपको सबसे पहले जिस भी जगह आप पूजा कर रहे हो, उस स्थान को अच्छे से साफ़ कर ले| इसके पश्चात एक चौकी ले और उसपर लाल या पीले रंग का कपडा बिछा दीजिये|
- इसके पश्चात भगवान गणेश जी और माता लक्ष्मी जी की मूर्तियों को चौकी पर स्थापित किया जाता है| अगर आप मूर्ति लाने में असमर्थ है| याद रखे कि माता लक्ष्मी जी मूर्ति को गणेश जी मूर्ति के दाहिनी ओर ही रखें|

- पूजा के समय इनके साथ भगवान कुबेर, सरस्वती माता और कलश की भी स्थापना अवश्य करें|
- दीपावली की पूजा करने से पहले चौकी पर और पूजा के स्थान पर गंगाजल अवश्य छिडके| इसके पश्चात अपने हाथ में पीले या लाल रंग के फूल रखे|
- अब पूजा की शुरुआत करते हुए सबसे पहले भगवान गणेश जी का पूजन कीजिए| और उन्हें प्रसन्न करने के लिए मंत्रों का जाप करें|
- भगवान गणेश जी का पूजन करते समय निम्न मंत्र का जाप लगातार करते रहे – 'गजाननम् भूत भू गणादि सेवितं कपित्थ जम्बू फलचारुभक्षणम्। उमासुतं सु शोक विनाशकारकं नमामि विघ्नेश्वरपाद पंकजम्।
- इसके पश्चात गणेश जी को तिलक लगाएं और उन्हें दूर्वा और मोदक का प्रसाद चढ़ाइए|
- भगवान गणेश जी के साथ ही माता लक्ष्मी जी का पूजन करें| सबसे पहले लक्ष्मी माता को लाल सिंदूर का तिलक लगाए और माता लक्ष्मी से सम्बंधित श्री सूक्त मंत्र का निश्चित रूप से जाप करें|
- दिवाली के दिन भगवान गणेश जी और माता लक्ष्मी जी का पूजन करने के पश्चात मध्य रात्रि में Ja माता की पूजा यानी काली पूजा करने का विधान माना गया है|
- इसके पश्चात गणेश जी और माता लक्ष्मी जी आरती करे और उन्हें भोग चढ़ाए| तथा आरती होने के बाद भोग को प्रसाद के रूप में सभी लोगों में बाँट दीजिये|
दीपावली पूजन के लाभ – Vorteile von Deepawali Pujan
- Es ist nicht einfach व्यापारियों के लिए ख़ास कमाई के लिए होता है|
- दीपावली का यह पावन त्यौहार आपसी रिश्तों में मिठास लाता है|
- इस दिन सभी प्रकार के व्यापार में बहुत ज्यादा फायदा होता है| क्योंकि इस दिन सभी अपने – अपने घरों के लिए नये – नये सम्मान लेते है| जैसे – कपड़े, इलेक्ट्रॉनिक सम्मान, मिठाइयाँ आदि|
- दिवाली के दिन सफाई का बहुत ही बड़ा महत्व है| इस दिन घर के आस – पास का परिवेश और वातावरण बहुत ही शुद्ध रहता है क्योंकि सभी अपने घर की साफ़- Ja का आचे से ध्यान रखते है| Es ist nicht einfach मिलता है| इस दिन सभी अपने – अपने घर को नये रंग रंगते है|
- इसके अलावा भी कुटीर उद्योगों को भी इस दिन व्यापार में बहुत फायदा होता है|
दिवाली के दिन ध्यान देने योग्य बातें
September 2026. Die letzte Woche ist vorbei पता होना चाहिए जैसे की –
- दीपावली पूजन के समय अपना ध्यान केवल भगवान की सच्चे मन की गयी पूजा उपासना में होना चाहिए तथा जब अपने मुख पर रखे|
- दीपावली पूजन के दौरान लक्ष्मी पूजन के बाद एकाक्षी नारियल का पूजन करना आपके लिए शुभ Ja, पूजन के बाद इस नारियल को पीले वस्त्र में लपेटकर पूजा स्थल पर रख दें|
- दीपावली पूजन के बाद हर कमरे में Hülse बजाना चाहिए जिससे सकारात्मक ऊर्जा का प्रवाह घर की चारो दिशाओ में होता है|
- अगर पूजन के दौरान किसी प्रकार की पूजन Das ist nicht alles बिलकुल न होये| ऐसा न करके आप त्रुटि होने पर भगवान से क्षमा – याचना कर सकते है| इससे भगवान आपको क्षमा कर देते है|
दीपावली पूजा का महत्व – Bedeutung von Deepawali Puja
दिवाली का त्यौहार हिन्दुओं में नए साल के समान ही मनाया जाता है| दीपावली का त्यौहार धार्मिक दृष्टि से देखा जाए तो भी हिन्दू धर्म के लोगों के लिए बहुत ही महत्वपूर्ण माना जाता है|
इस दिन सभी अपने घरों में दीपक जलाते है| दीपावली का त्यौहार बड़े – बड़े शहरों से लेकर छोटे – छोटे गाँवों में भी मनाया जाता है| Es ist nicht einfach भी कई सारी वस्तुएं खरीदी जाती है|

दिवाली के दिन जब गाँव के प्रत्येक घरों में दीपक जलते है| तो उस सारे दीपों की रोशनी से पूरा गांव ही जगमगा जाता है| दिवाली का त्यौहार Dhanteras के दिन प्रारम्भ होता है और भाई दूज के दिन समाप्त हो जाता है|
2026 का यह पावन त्यौहार प्रत्येक वर्ष में Mehr als 15 Monate अमावस्या को मनाया जाता है|
दिवाली को प्रकाश व रोशनी का त्यौहार भी कहा जाता है| इस दिन को बुराई पर अच्छाई की जीत के पर्व के रूप में भी मनाया जाता है|
Fazit
आज हमने इस आर्टिकल के माध्यम से दीपावली 2026 के बारें में काफी बाते जानी है| आज हमने दीपावली 2026 (Deepawali 2026) पूजन के फ़ायदों के बारे में भी जाना| हम उम्मीद करते है कि हमारे द्वारा बताई गयी जानकारी से आपको कोई ना कोई मदद मिली होगी|
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