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Jagannath-Tempel: जाने जगन्नाथ मंदिर के रहस्य तथा यात्रा की जानकारी

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99PanditJi Geschrieben von: 99PanditJi
Zuletzt aktualisiert am:Juli 6, 2024
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भारत देश की सबसे प्राचीन तथा पवित्र सात नगरियों में से भगवान जगन्नाथ मंदिर (Jagannath-Tempel). है| पौराणिक कथाओं के अनुसार यह मंदिर भगवान Mehr als 8 Monate भगवान श्री कृष्ण को समर्पित किया गया है|

भारत देश के पूर्व में बंगाल की खाड़ी के पूर्वी छोर पर स्थित यह पुरी नगरी भुवनेश्वर से थोड़ी ही दूरी पर स्थित है जो कि उड़ीसा की राजधानी है| माना जाता है कि प्राचीन समय में इस उड़ीसा राज्य को उत्कल प्रदेश के नाम से जाना जाता था| जगन्नाथ मंदिर (Jagannath-Tempel) को इस धरती का वैकुंठ भी माना जाता है|

जगन्नाथ मंदिर

इस जगन्नाथ मंदिर (Jagannath-Tempel) को श्री पुरुषोत्तम क्षेत्र, नीलांचल, नीलगिरी तथा श्री जगन्नाथ पूरी के नाम से भी जाना जाता है| माना जाता है कि इस स्थान पर लक्ष्मीपति भगवान विष्णु ने तरह – तरह कार्य व लीलाएं की थी|

पौराणिक ग्रंथो जैसे ब्रह्म पुराण तथा स्कन्द पुराण में बताया गया है कि भगवान विष्णु पुरुषोत्तम नीलमाधव के रूप में जगन्नाथ पूरी में अवतरित हुए थे तथा वहां निवास करने वाले सबर जाति के पूज्य देवता बन गए| सबर जनजाति के मुख्य देवता होने के कारण भगवान जगन्नाथ का रूप यहाँ पर कलीबाई देवताओं की भांति दिखाई देते है|

वैदिक पुराण के अनुसार नीलगिरी में पुरुषोत्तम भगवान श्री हरि की पूजा की जाती है| पुरुषोत्तम हरि को इस स्थान पर भगवान श्री राम का रूप माना जाता है| स्कन्द पुराण में भगवान जगन्नाथ मंदिर (Jagannath-Tempel) का भौगोलिक वर्णन किया गया है|

(Jagannath-Tempel) के बारे सभी बातें बताएँगे| Ja, das ist es 99Pandit के बारे में बताएँगे| 99Pandit एक ऐसा ऑनलाइन प्लेटफार्म है| जहाँ आप घर बैठे मुहूर्त के अनुसार अपना पंडित ऑनलाइन आसानी से बुक कर सकते हो |

जगन्नाथ मंदिर में पूजा तथा दर्शन का समय – Gottesdienstzeiten und Darshan in Jagannath-Tempel

समय  आरती / पूजा 
Datum: 05:00 Uhr  द्वार पीठ और मंगल आरती
Datum: 06:00 Uhr  Ja, ja
Datum: 06:00 Uhr und 06:30 Uhr अबकाश
Datum: 06:45 Uhr  मैलम
Datum: 07:00 Uhr und 08:00 Uhr  सहनमेला
Datum: 08:00 Uhr  बेशालगी 
Datum: 08:00 bis 08:30 Uhr  रोशा होम सूर्य पूजा और द्वारपाल
Datum: 09:00 Uhr  गोपाल बल्लव पूजा
Datum: 10:00 Uhr  सकल धूप
Datum: 10:00 bis 11:00 Uhr  मैलम और भोग मंडप 
Uhrzeit: 11:00 Uhr und 01:00 Uhr  मद्यनहा
Vor 01:00 Uhr vor 01:30 Uhr  मध्यानहा पहुधा
Heute um 05:30 Uhr  संध्या आरती
07:00 Uhr 08:00 Uhr  संध्या धूप 
Heute um 08:00 Uhr  मैलम और चंदना लगी
Heute um 09:00 Uhr  बडाश्रीनगर वेशा
9:30 Uhr 10:30 Uhr  बडाश्रीनगर भोग 
Heute um 12:00 Uhr  खाता सेजा लागी और पाहुड़ा

 

जगन्नाथ मंदिर कैसे पहुंचे – So erreichen Sie den Jagannath-Tempel 

Der Tempel des Jagannath-Tempels (Jagannath-Tempel) ist 3 Stunden lang है, जो निम्न प्रकार है –

Mehr erfahren – So erreichen Sie den Jagannath-Tempel mit dem Flug in Hindi

जगन्नाथ मंदिर (Jagannath-Tempel) के सबसे नजदीकी हवाई अड्डा भुवनेश्वर हवाई अड्डा है| यह हवाई अड्डा लगभग सभी प्रमुख शहरों के हवाई अड्डों से जुड़ा हुआ है| आपको सबसे पहले हवाई जहाज की सहायता से भुवनेश्वर हवाई अड्डे पर जाना होगा|

उसके पश्चात आपको बस या ट्रेन की सहायता से पुरी जाना होगा| पुरी रेलवे स्टेशन से भगवान जगन्नाथ मंदिर (Jagannath-Tempel) की दूरी लगभग 2 किलोमीटर है| रेलवे स्टेशन से जगन्नाथ मंदिर (Jagannath-Tempel) तक जाने के लिए आपको बहुत ही आसानी से ऑटो या रिक्शा की Nein मिल जाएगी| 

ट्रेन से जगन्नाथ मंदिर कैसे पहुंचे – Wie man den Jagannath-Tempel mit dem Zug erreicht auf Hindi 

Jagannath Tempel) के सबसे नजदीकी रेलवे स्टेशन पुरी रेलवे स्टेशन है| जगन्नाथ मंदिर (Jagannath-Tempel) की दूरी रेलवे स्टेशन से 2 किमी है| यह रेलवे स्टेशन सभी शहरों से जुड़ा हुआ है| फिर भी आपको पुरी के लिए ट्रेन नहीं मिले तो आपको भुवनेश्वर के लिए ट्रेन लेनी होगी| भुवनेश्वर रेलवे स्टेशन पहुँचने के पश्चात आप पुरी के लिए बस या दूसरी ट्रेन भी ले सकते है|

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बस से जगन्नाथ मंदिर कैसे पहुंचे – So erreichen Sie den Jagannath-Tempel mit dem Bus auf Hindi 

पुरी तक जाने के लिए बस उड़ीसा के आस – पास के राज्यों से डायरेक्ट ही बसे मिल जाएगी, लेकिन यदि आपके शहर से जगन्नाथ पुरी मंदिर की दूरी ज्यादा अधिक है तो हम आपको यही सलाह देंगे कि ऐसी परिस्थिति में आपको बस के द्वारा यात्रा करने से बचना चाहिए| इसके अपेक्षा आपको ट्रेन या हवाई जहाज से सफ़र करना चाहिए, जो कि आपके लिए काफी आरामदायक रहेगा| 

जगन्नाथ मंदिर का पौराणिक इतिहास – Mythologische Geschichte des Jagannath-Tempels auf Hindi

Es ist nicht einfach वनपर्व में बताया गया है| इस मंदिर के संदर्भ में एक बहुत ही पौराणिक कथा चली आ रही है जो इस मंदिर के इतिहास को भी दर्शाती है| एक समय की बात है राजा इंद्रद्युम्न मालवा का राजा था| जिनके पिता का नाम भारत तथा माता का नाम सुमति था|

राजा इंद्रद्युम्न को सपने के माध्यम से भगवान जगन्नाथ के दर्शन हुए थे| आपकी जानकारी के लिए बता दे कि कई सारे Das ist alles द्वारा किये गए यज्ञों के बारे में विस्तार से बताया गया है| मान्यताओं के अनुसार राजा इंद्रद्युम्न ने कई सारे विशाल यज्ञ किये तथा एक सरोवर का निर्माण किया|

जगन्नाथ मंदिर

माना जाता है कि एक दिन राजा इंद्रद्युम्न के सपने में भगवान जगन्नाथ ने दर्शन दिए तथा राजा Nein कहा कि नीलांचल पर्वत पर स्थित एक गुफा में उनकी मूर्ति स्थित है| उसे नीलमाधव कहा जाता है| भगवान जगन्नाथ ने राजा को एक मंदिर बनवाकर उसमें उनकी मूर्ति को स्थापित करने के लिए कहा| अगले दिन तुरंत ही राजा ने अपने लोगों को नीलांचल पर्वत पर मूर्ति की खोज करने के लिए भेज दिया| राजा के द्वारा भेजे गए लोगों में एक ब्राह्मण भी था| जिसका नाम विद्यापति था| 

Es ist nicht einfach लोग नीलमाधव की पूजा करते थे तथा उस मूर्ति को उस गुफा में छुपा कर रखा हुआ है| विद्यापति ने चालाकी से सबर कबीले के मुखिया की पुत्री से विवाह कर लिया तथा उस गुफा में Ja मूर्ति चुरा ली| इसके पश्चात उसने मूर्ति राजा को दे दी| मूर्ति के चोरी हो जाने की वजह से कबीले के लोग बहुत ही दुखी हो गए| अपने भक्तों को दुखी देखकर भगवान भी गुफा में वापस लौट गए| 

आधी बनी मूर्ति की कहानी – 

इसके पश्चात भगवान जगन्नाथ ने राजा से कहा कि समुन्द्र में तैरती हुई एक बड़ी लकड़ी को लाकर Ja मूर्ति का निर्माण किया जाए| राजा ने अपने लोगों को लकड़ी लाने के लिए भेजा लेकिन कोई ही व्यक्ति उसे उठा नहीं पाया| तब राजा इंद्रदयूम्न ने सबर काबिले के मुखिया की सहायता ली| काबिले का मुखिया अकेला ही उस बड़ी लकड़ी को उठा कर ले आया|

इसके बाद भगवान विश्वकर्मा उससे मूर्ति का निर्माण करने के लिए एक वृद्ध व्यक्ति के रूप में आये| विश्वकर्मा जी ने मूर्ति को बनाने के लिए 21 दिन का समय माँगा| तथा उनसे कहा कि 21 दिन तक उन्हें मूर्ति बनाते हुए कोई नहीं देखेगा|

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किन्तु राजा के द्वारा इस शर्त का उल्लंघन करने पर भगवान विश्वकर्मा ने उन मूर्तियों को आधा ही छोड़ दिया| राजा इंद्रदयूम्न ने इसे भगवान जगन्नाथ की इच्छा मानकर उन आधी बनी हुई मूर्तियों को ही मंदिर में स्थापित कर दिया|

उस समय से लेकर अभी तक भगवान विश्वकर्मा के द्वारा बनाई गयी भगवान नीलमाधव तथा उनके दोनों भाई बहनों की मूर्तियाँ इस प्रकार से ही विद्यमान है| जगन्नाथ मंदिर (Jagannath-Tempel) 30 Tage – 30 Minuten मंदिर स्थित है| 

जगन्नाथ मंदिर पुरी मनाए जाने वाले त्यौहार – Festivals Gefeiert im Jagannath-Tempel Puri

स्नान यात्रा या देव स्नान पूर्णिमा – Snan Yatra oder Dev Snan Purnima

देव स्नान का यह महोत्सव जगन्नाथ पुरी के सुप्रसिद्ध महोत्सवों में से ही एक है| इस दिन को भगवान जगन्नाथ के जन्मदिन के रूप में भी मनाया जाता है| यह त्यौहार ज्येष्ठ महीने की पूर्णिमा तिथि को मनाया जाता है| माना जाता है कि इस दिन जगन्नाथ भगवान को मंदिर के परिसर में स्थित शीतला माता मंदिर के पास स्थित 108 पानी के घड़ों से स्नान करवाया जाता है|

भगवान को स्नान करवाने के पश्चात उन्हें हती वेशा धारण करवाई जाती है| भगवान को स्नान करवाने के पश्चात भगवान श्री कृष्ण के ही रूप भगवान जगन्नाथ तथा भक्तों में Ja भी प्रकार का कोई अंतर नहीं होता है| जगन्नाथ मंदिर (Jagannath-Tempel) में प्रतिदिन सभी भक्तों के लिए भोजन बनाया जाता है|

Autorin – Hera Panchami 

हेरा पंचमी एक बहुत ही प्रसिद्ध अनुष्ठान माना जाता है जो कि भगवान जगन्नाथ के गुंडिचा मंदिर में रहने पर किया जाता है| पुरी की प्रसिद्ध रथ यात्रा तथा कार महोत्सव के पश्चात भगवान 9 दिनों तक गुंडिचा मंदिर में निवास करते है| उनके यहां निवास करने दौरान ही हेरा पंचमी का अनुष्ठान किया जाता है| 

बहुदा यात्रा – Bahuda Yatra 

यह यात्रा तीनों रथों की जगन्नाथ मंदिर (Jagannath-Tempel) की वापसी यात्रा मानी जाती है| 10 वे दिन भगवान अपनी बहुदा यात्रा शुरू करते है| वापसी यात्रा में वही समय प्रणाली काम में ली जाती है जो कि यारा के शुरू होने के समय ली गई हो| 

रथ यात्रा या श्री गुंडिचा यात्रा – Rath Yatra oder Shri Gundicha Yatra 

प्रत्येक वर्ष मानसून के समय में भगवान जगन्नाथ अपने भाई बलभद्र तथा अपनी बहन सुभद्रा के साथ अपने मंदिर से ग्रामीण क्षेत्रों से होते हुए, अपने बगीचे के महल तक भव्य रथों पर Ja करके छुट्टियों पर जाते है| हिन्दू धर्म की मान्यताओं ने भारत देश के सबसे बड़े व प्रसिद्ध धार्मिक त्यौहार को जन्म दिया| जिसे वर्तमान में रथ यात्रा (Rath Yatra) या रथ महोत्सव के नाम से भी जाना जाता है| 

पंचक – Panchak 

माना जाता है कि इस दिन लोग भगवान के विभिन्न अवतारों की प्रतीक्षा करते है| भगवान को सभी भक्तों के द्वारा अलग – अलग वेशा जैसे दलकिया वेशा, लक्ष्मी नृसिंह वेशा, त्रिविक्रम वेशा तथा अंत के समय में भगवान को राजराजेश्वर वेशा में सजाया जाता है|

चंदना यात्रा – Chandana Yatra

यह चन्दन यात्रा उत्सव प्रत्येक वर्ष होने वाली रथ यात्रा के रथों के निर्माण की शुरुआत Ja प्रतीक माना जाता है| 

Das ist nicht alles स्थल – Jagannath-Tempel Beliebte Touristenorte in Puri

Strand – Puri Beach 

आपकी जानकारी के लिए बता दे कि यदि आप पुरी जाते है तो आप वहा पर साफ़ सुथरे तथा कांच के सामान पानी में स्नान करने का आनंद ले सकते है| Es ist nicht einfach, es zu tun, nicht wahr भगवान जगन्नाथ मंदिर (Jagannath-Tempel) Mehr als 2.5 Monate

इस बीच को भारत के सबसे साफ़ तथा सुन्दर तटों की श्रेणी में भी शामिल किया गया है| इस बीच पर भारत देश के अलावा विदेशों से भी कई Es ist kein Problem दृश्यों को देखने के लिए आते है|

जगन्नाथ मंदिर

जगन्नाथ मंदिर – Jagannath-Tempel

पुरी में स्थित भगवान जगन्नाथ मंदिर (Jagannath-Tempel) सम्पूर्ण भारत देश में सभी लोगों के द्वारा भली – भांति परिचित है| Der Tempel des Jagannath-Tempels (Jagannath-Tempel) के कारण ही जाना जाता है|

पौराणिक कथाओं के अनुसार यह जगन्नाथ मंदिर (Jagannath-Tempel) भगवान श्री कृष्ण को समर्पित किया गया है| इस मंदिर में भगवान श्री कृष्ण के साथ उनके भाई बलभद्र तथा बहन सुभद्रा के भी विग्रह स्थापित किये गए है| इन तीनों विग्रह को एक बहुत ही खास प्रकार की लकड़ी से बनाया जाता है| जिसे प्रत्येक 12 साल में बदल दिया जाता है| 

Autor: Narendra Pokhari 

यह एक बहुत ही विशाल तथा पवित्र तालाब है जो कि पुरी में स्थित जगन्नाथ मंदिर (Jagannath-Tempel) के करीब 1 किमी दूर दंडी माला साही क्षेत्र में बना हुआ है| Es ist nicht einfach भी जाना जाता है|

इस पोखरी को उड़ीसा राज्य का सबसे बड़ा टैंक भी माना जाता है| इसका निर्माण 15 Tage vor dem Ende des Spiels देव राय जी के द्वारा करवाया गया था| इस तालाब की गहराई ज़मीन 10 फीट तक मानी जाती है| आपकी जानकारी के लिए बता दे कि इस तालाब के बिल्कुल मध्य में एक मंदिर भी स्थित है| 

Tempelanlage – Loknath-Tempel 

यह मंदिर पुरी शहर का सबसे पुराना मंदिर है| इसका निर्माण 11 वी शताब्दी में किया गया था| यह मंदिर भगवान शिव को समर्पित किया गया है| प्राचीन कथाओं के अनुसार माना जाता है कि इस मंदिर के अन्दर जो शिवलिंग स्थापित है, उसका निर्माण स्वयं भगवान श्री राम के द्वारा किया गया है|

यह मंदिर 4 खण्डों में विभाजित किया गया है| इस मंदिर का निर्माण सामान्य पत्थरों के 30 Minuten vor dem Ende des Spiels हुआ है| इस मंदिर की दीवारों पर हिन्दू धर्म से संबंधित देवी – देवताओं के चित्र बने हुए है| 

पुरी जगन्नाथ मंदिर के कुछ रहस्य – Einige interessante Fakten über den Puri Jagannath Tempel

  1. माना जाता है कि भगवान जगन्नाथ मंदिर (Jagannath-Tempel) के ऊपर जो लाल रंग का ध्वज है, वह सदा ही हवा की विपरीत दिशा में लहराता है| ऐसा क्यों होता है इसके बारे में अभी तक वैज्ञानिकों को किसी भी प्रकार का प्रमाण नहीं मिला है|
  2. जगन्नाथ मंदिर (Jagannath-Tempel) दुनिया का सबसे ऊंचा तथा भव्य मंदिर माना जाता है| 4 Stunden vor dem Ende des Spiels हुआ है तथा इसकी ऊंचाई 214 फुट है| यहाँ की एक खास बात यह है कि इस मंदिर के गुम्बद की छाया कभी नहीं बनती है| Es ist nicht einfach सकते है कि हमारे पूर्वज कितने बेहतरीन कलाकार रहे होंगे| इस मंदिर का निर्माण 7वी सदी हुआ था|
  3. इस मंदिर के गुम्बद के ऊपर से आज तक एक भी पक्षी को उड़ते हुए नहीं देखा गया है| हालाँकि इस मंदिर के ऊपर से हवाई जहाज का उड़ना मना है| आपने अन्य मंदिरों में देखा होगा कि उनके ऊपर कई सारे पक्षी उड़ते हुए दिखाई देते है लेकिन Ja मंदिर के ऊपर आपको कोई पक्षी बैठा या उड़ता हुआ नहीं दिखाई देगा|
  4. माना जाता है कि इस मंदिर का रसोई घर दुनिया का सबसे बड़ा रसोई घर माना जाता है| Die Gesamtdauer beträgt 300 Minuten 500 सहयोगियों के साथ मिलकर बनाया जाता है| इस मंदिर में जितना भी प्रसाद बनाया जाता है| वह कभी भी व्यर्थ नहीं जाता है|
  5. यह मंदिर समुन्द्र तट के काफी नजदीक है| जगन्नाथ मंदिर (Jagannath-Tempel). अन्दर प्रवेश करेंगे तो आपको पास में स्थित समुद्र के पानी की आवाज़ बिल्कुल भी नहीं आएगी| Es ist nicht einfach आपको समुद्र की आवाज़ आने लगेगी|  

Abschluss

Es ist nicht einfach जगन्नाथ मंदिर (Jagannath-Tempel) से संबंधित कई सारी बातें जानी| जैसे कि मंदिर तक कैसे पहुंचा जा सकता है| इसके अलावा हमने जगन्नाथ मंदिर (Jagannath-Tempel) के आस – पास के पर्यटक स्थल के बारे में आपको जानकारी दी|

हम उम्मीद करते है कि हमारे द्वारा दी गई जानकारी आपको जरूर पसंद आई होगी| अलावा यदि आप किसी अन्य मंदिर जैसे तिरुपति बालाजी मंदिर (Tirupati-Balaji-Tempel) या श्री कालहस्ती मंदिर (Srikalahasti-Tempel) के बारे में जानकारी प्राप्त करना चाहते है तो आप हमारी वेबसाइट 99Pandit पर विजिट कर सकते है| 

अगर आप हिन्दू धर्म से सम्बंधित किसी पूजा जैसे – वाहन पूजा (Fahrzeug-Puja), भूमि पूजा (Bhoomi Puja) इत्यादि हेतु पंडित जी की तलाश कर रहे है तो आपको बता दे की 99Pandit Das ist nicht alles Ich habe es nicht geschafft ऑनलाइन आसानी से बुक कर सकते हो |

यहाँ बुकिंग प्रक्रिया बहुत ही आसान है| बस आपको "Buchen Sie einen Pandit" विकल्प का चुनाव करना होगा और अपनी सामान्य जानकारी जैसे कि अपना नाम, मेल, पूजन स्थान, Ja, ja पूजा का चयन के माध्यम से आप आपना पंडित बुक कर सकेंगे|

Weitere Informationen finden Sie unter FAQs

Q.Warum ist das nicht der Fall?

A.श्री कृष्ण ही भगवान जगन्नाथ के रूप में विराजमान हैं। यहां उनके साथ उनके ज्येष्ठ भ्राता बलराम और बहन सुभद्रा भी हैं|

Q.Warum ist das nicht der Fall?

A.माना जाता है कि भगवान जगन्नाथ मंदिर के ऊपर जो लाल रंग का ध्वज है, वह सदा ही हवा की विपरीत Ja में लहराता है|

Q.Was ist mit dir?

A.मुख्य गुंबद की छाया हमेशा इमारत पर ही पड़ती है, इसलिए किसी भी समय अदृश्य हो जाती है|

Q.Warum nicht?

A.कथाओं के अनुसार भगवान जगन्नाथ को भगवान श्री कृष्ण का अवतार माना जाता है|

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