Sanso Ki Mala Pe Songtext auf Hindi: साँसों की माला पे सिमरूं मैं भजन
नमस्ते भक्तों! Warum ist das nicht der Fall? आपकी खोज यहाँ खत्म होती है। हम आपके…
0%
मोक्षदा एकादशी व्रत कथा: मार्गशीर्ष माह के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि को मोक्षदा एकादशी (Mokshada Ekadashi) के रूप में जाना जाता है|
जैसा कि आप सभी लोगों को ज्ञात है कि हिन्दू धर्म में एकादशी तिथि का बहुत ही बड़ा महत्त्व Ja गया है| लगभग हर एकादशी तिथि में भगवान श्री विष्णु की पूजा की जाती है| मोक्षदा एकादशी (Mokshada Ekadashi) के दिन भगवान विष्णु की पूर्ण विधि-विधान से पूजा करनी चाहिए|

माना जाता है कि मोक्षदा एकादशी (Mokshada Ekadashi) के दिन भगवान विष्णु की पूजा करने से भक्तो को अपार सुख-समृद्धि तथा मोक्ष की प्राप्ति होती है|
इस दिन मोक्षदा एकादशी व्रत कथा (Mokshada Ekadashi Vrat Katha) को पढने तथा सुनने का बहुत बड़ा महत्व बताया गया है|
आज हम इस लेख की सहायता से आपको मोक्षदा एकादशी (Mokshada Ekadashi) के महत्व तथा मोक्षदा एकादशी व्रत कथा (Mokshada Ekadashi Vrat Katha) के बारे में बताएँगे|
इसके आलवा यदि आप ऑनलाइन किसी भी पूजा जैसे मंगल भात पूजा (Mangal Bhat Puja), ऋण मुक्ति पूजा (Rin Mukti Puja), तथा रुद्राभिषेक पूजा (Rudrabhishek Puja) के लिए आप हमारी वेबसाइट 99Pandit की सहायता से ऑनलाइन पंडित बहुत आसानी से बुक कर सकते है| Es ist nicht einfach Whatsapp पर भी हमसे संपर्क कर सकते है|
धर्मराज युधिष्ठिर ने भगवान श्रीकृष्ण से Keine Sorge! मैंने मार्गशीर्ष कृष्ण एकादशी जिसे मोक्षदा एकादशी (Mokshada Ekadashi) भी कहा जाता है, के बारे सम्पूर्ण विस्तार से सुना है|
किन्तु आप अब मुझे मार्गशीर्ष शुक्ल पक्ष एकादशी में आने वाली एकादशी के बारे में बताइए Ja Warum nicht? Was ist los? इसकी व्रत करने से किस प्रकार के फल की प्राप्ति होती है|
इस पर भगवान श्रीकृष्ण बोले – हे युधिष्ठिर मार्गशीर्ष माह के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि Ja मोक्षदा एकादशी (Mokshada Ekadashi) कहा जाता है|
माना जाता है कि मोक्षदा एकादशी (Mokshada Ekadashi) व्रत को करने मोक्ष की प्राप्ति एवं चिंतामणि की भांति ही सभी मनोकामनाएँ पूर्ण होती है|
इसकी मोक्षदा एकादशी (Mokshada Ekadashi) व्रत की सहायता आप अपने पितरों के सभी दुखों को भी खत्म कर सकते है|
Mokshada Ekadashi Vrat Katha (Mokshada Ekadashi Vrat Katha) के बारे में बताऊंगा| जिसको मोक्षदा एकादशी (Mokshada Ekadashi) के दिन पढ़ना बहुत ही शुभ माना जाता है|
बहुत ही पुराने समय की बात है एक गोकुल नामक शहर में वैखानस नाम के राजा का शासन था| माना जाता है कि उस राजा के राज्य में चारों वेदों के बहुत बड़े ज्ञाता ब्राह्मण रहते थे|
वह राजा अपनी प्रजा के प्रति बहुत ही दयालु था एवं उनका पुत्रवत पालन करता है| एक बार रात्रि के समय राजा को एक स्वप्न आया|
Es ist nicht einfach है| यह देखकर राजा को बहुत आश्चर्य हुआ| सुबह होते ही राजा अपने विद्वान ब्राह्मणों के साथ गया तथा उन्हें अपने स्वप्न के बारे में बताया|
Es ist nicht einfach पिता को नरक में कष्ट सहते हुए देखा तथा उन्होंने Ich liebe dich! मैं नरक में हूँ| मुझे यहाँ से मुक्त करवाओ|
जिस समय मैंने अपने पिता के द्वारा यह सुना उस समय से ही में बहुत परेशान हो रहा हूँ| मेरे मन भी अशांत है|
उस स्वप्न के बाद से ही मुझे इस राज्य, पुत्र, स्त्री, हाथी, घोड़े, धन आदि कहीं पर भी सुख प्रतीत नहीं हो रहा है|
Warum ist das nicht der Fall? राजा ने उन सभी से कहा कि हे ब्राह्मण देवताओं ! इस दुःख के कारण मेरा सम्पूर्ण शरीर भीतर से जल रहा है|
मुझ पर कृपा करके तप, व्रत, दान आदि कोई ऐसा उपाय बताएं जिससे मेरे पिता को मुक्ति मिल सके| राजा ने कहा कि ऐसे पुत्रों का जीवन पूर्ण रूप से व्यर्थ है जो अपने माता-पिता का उद्धार नहीं Nein सकते है|
जिस प्रकार एक चंद्रमा सम्पूर्ण जगत में प्रकाश कर देता है, उसी प्रकार एक सर्वोत्तम पुत्र जो कि अपने माता पिता का उद्धार कर सकता है, वह हजारों मूर्ख पुत्रों से बेहतर है|
ब्राह्मणों ने राजा कहा कि हे मान्यवर ! यहाँ पास ही भूत,वर्तमान तथा भविष्य के ज्ञाता पर्वत ऋषि का आश्रम है|
Ich habe es nicht geschafft अवश्य करेंगे| ब्राह्मणों के कहने पर राजा उन मुनि के आश्रम में पहुंचे|
उस आश्रम बहुत सारे ऋषि-मुनि तपस्या कर रहे थे| उसी स्थान पर पर्वत ऋषि भी विराजमान थे| राजा ने पर्वत ऋषि को साष्टांग दंडवत प्रणाम किया|
ऋषि ने राजा से उनकी कुशलता के बारे में पूछा| Ich habe es nicht geschafft कृपा से राज्य में सब कुछ कुशल मंगल है किन्तु Nicht wahr से मेरे मन में अशांति हो रही है|
राजा के इतना कहने पर पर्वत मुनि ने अपनी आँखे बंद की तथा भूतकाल को विचारने लगे| कुछ ही समय के पश्चात पर्वत ऋषि ने कहा – हे राजन ! Es ist nicht einfach पिताजी के द्वारा किये गए कर्मों के बारे में पता लगाया है|
उन्होंने अपने पिछले जन्म में कामातुर होकर एक पत्नी को रति प्रदान की किन्तु सौत के कहने Ja दूसरी पत्नी को ऋतुदान मांगने पर भी नहीं दिया|
उनके द्वारा किये गए इसी पापकर्म के कारण ही उन्हें नरकलोक में जाना पड़ा| पर्वत मुनि के ऐसा कहने पर राजा ने उनसे इसका समाधान बताने के लिए कहा|
तब मुनि ने कहा – हे राजन ! आपको अपने पिता की नरक से मुक्ति कराने के लिए मार्गशीर्ष एकादशी का व्रत करना चाहिए|
इस एकादशी व्रत के प्रभाव से आपके पिता को नरक से मुक्ति अवश्य मिल जाएगी| Es ist nicht einfach एवं उनके कहे अनुसार ही अपने पूरे परिवार के Ja मोक्षदा एकादशी (Mokshada Ekadashi) का व्रत किया तथा उसका सम्पूर्ण पुण्य अपने पिताजी को समर्पित कर दिया|
इस मोक्षदा एकादशी (Mokshada Ekadashi) व्रत को करने उसके पिता को मुक्ति मिल गयी और स्वर्ग जाते हुए अपने पुत्र से कहने लगे – हे पुत्र तेरा कल्याण हो| यह कहकर स्वर्ग की चले गए|
Inhaltsverzeichnis