नमस्ते भक्तों! Warum ist das nicht der Fall? आपकी खोज यहाँ खत्म होती है। हम आपके लिए लाए हैं Sanso Ki Mala Pe Songtext auf Hindi का सबसे आसान वर्जन।
Mehr als 500 Tage vor dem Kauf बना हुआ है। इसमें मीराबाई ने अपनी हर साँस को श्री कृष्ण के नाम की माला बना दिया है।
उनका निस्वार्थ प्रेम आज भी इस गीत को बहुत खास बनाता है। यह भजन नुसरत फतेह अली खान की आवाज़ में पूरी दुनिया में अमर हो गया.
उन्होंने इसे एक नया सूफी रंग दिया जिसने सबको जोड़ दिया।आज बच्चा हो या बुजुर्ग, हर कोई इस धुन पर झूम उठता है। 99Pandit के इस ब्लॉग में आपको भजन के पूरे बोल मिलेंगे।
हम आपको इसका गहरा अर्थ और इतिहास भी बहुत सरल तरीके से समझाएंगे। चलिए मिलकर गाते हैं।
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साँसों की माला पे सिमरूं मैं, पी का नाम,
अपने मन की मैं जानूँ, और पी के मन की राम,
साँसों की माला पे सिमरूं मैं पी का नाम,
अपने मन की मैं जानूँ और पी के मन की राम,
साँसों की माला पे, सिमरूं मैं पी का नाम,
साँसों की माला पे, सिमरूं मैं पी का नाम ॥
जीवन का श्रृंगार है प्रीतम, माँग का सिन्दूर,
माँग का सिन्दूर,
जीवन का श्रृंगार है प्रीतम, माँग का सिन्दूर,
प्रीतम की नज़रों से गिरकर, जीना है किस काम,
प्रीतम की नज़रों से गिरकर, जीना है किस काम,
साँसों की, साँसों की,
साँसों की माला पे सिमरूं मैं पी का नाम,
साँसों की माला पे, सिमरूं मैं पी का नाम ॥
प्रेम के रंग में ऐसी डूबी, बन गया एक ही रूप,
बन गया एक ही रूप,
प्रेम के रंग में ऐसी डूबी, बन गया एक ही रूप,
प्रेम की माला जपते जपते, आप बनी मैं श्याम,
प्रेम की माला जपते जपते, आप बनी मैं श्याम,
साँसों की, साँसों की,
साँसों की माला पे सिमरूं मैं पी का नाम,
साँसों की माला पे, सिमरूं मैं पी का नाम ॥
प्रीतम का कुछ दोष नहीं है वो तो है निर्दोष,
वो तो है निर्दोष,
अपने आप से बातें कर के, हो गयी मैं बदनाम,
अपने आप से बातें कर के, हो गयी मैं बदनाम,
साँसों की, साँसों की,
साँसों की माला पे सिमरूं मैं पी का नाम,
साँसों की माला पे, सिमरूं मैं पी का नाम ॥
प्रेम पियाला जब से पिया है, जी का है ये हाल,
जी का है ये हाल,
प्रेम पियाला जब से पिया है, जी का है ये हाल,
अंगारों पे नींद आ जाए, काँटों पे आराम,
अंगारों पे नींद आ जाए, काँटों पे आराम,
साँसों की, साँसों की,
साँसों की माला पे सिमरूं मैं पी का नाम,
साँसों की माला पे, सिमरूं मैं पी का नाम ॥
अपने मन की मैं जानूँ, और पी के मन की राम,
साँसों की माला पे सिमरूं मैं पी का नाम,
अपने मन की मैं जानूँ और पी के मन की राम,
साँसों की माला पे, सिमरूं मैं पी का नाम,
साँसों की माला पे, सिमरूं मैं पी का नाम ॥
Sanso Ki Mala Pe Songtexte auf Hindi शरीर से नहीं, बल्कि आत्मा से होती है। चलिए आध्यात्मिक अर्थ बहुत ही सरल भाषा में समझते हैं।
भजन में बार-बार आने वाले „पी“ शब्द का अर्थ बहुत ही प्यारा है। Das ist „पी“. कृष्ण हैं। वह उन्हें अपना स्वामी, सखा और परमात्मा मानती हैं, इसलिए उन्हें प्यार से „पी“ कहकर पुकारती हैं।
मीराबाई कहती हैं कि उन्हें हाथ में पकड़ने वाली माला की ज़रूरत नहीं है। उनकी तो हर आती-जाती साँस ही अब श्री कृष्ण के नाम की माला बन गई है। वह अपनी हर धड़कन में अपने „पी“ यानी कृष्ण को याद करती है।
मीराबाई के लिए भगवान कृष्ण की भक्ति ही उनके जीवन का असली श्रृंगार और गहना है। वह कहती है कि अगर वह अपने प्रीतम (ईश्वर) की नज़रों से गिर गईं, तो जीवन का कोई मोल नहीं।
यह पंक्ति बताती है कि जब प्यार बहुत गहरा होता है, तो भक्त और भगवान एक हो जाते हैं। मीराबाई कृष्ण की भक्ति में ऐसी खो गईं कि उनका अपना अहंकार पूरी तरह मिट गया। अब उन्हें खुद के भीतर भी सिर्फ अपने प्यारे श्याम ही नजर आते हैं।
मीराबाई श्री कृष्ण की याद में खोई रहती थीं और अकेले में उनसे बातें करती थीं। दुनिया के लोगों को यह पागलपन लगता था, इसलिए वह समाज में बदनाम हो गईं। लेकिन मीराबाई के लिए दुनिया की परवाह से बड़ा भगवान का प्रेम और साथ था।
Es ist nicht einfach, das zu tun के दुख बहुत छोटे लगने लगते हैं। मीराबाई कहती हैं कि कृष्ण के प्रेम में उन्हें अंगारों पर भी सुख की नींद आ सकती है। यह लाइन हमें सिखाती है कि सच्ची भक्ति जीवन की हर मुश्किल को आसान बना देती है।
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Sanso Ki Mala Pe Songtext auf Hindi केवल एक भजन नहीं है। यह मीराबाई की आत्मा की एक गहरी पुकार है। यह हमें सिखाता है कि हर साँस में ईश्वर का वास है।
इसे रोज़ सुनने से मन को बहुत शांति मिलती है। यह आपके जीवन में निस्वार्थ प्रेम और भक्ति भर देता है। यह संगीत तनाव को दूर कर हृदय को पूरी तरह शुद्ध करता है।
मीराबाई जैसी सच्ची भक्ति के लिए सही पूजा विधि बहुत ज़रूरी है। शास्त्र के अनुसार की गई पूजा ही पूर्ण फल देती है। Lord Krishna की कृपा पाने के लिए शुद्ध भाव अनिवार्य है।
यह कालजयी भजन मूल रूप से प्रसिद्ध कवयित्री और कृष्ण भक्त मीराबाई ने लिखा था।
इस भजन को पारंपरिक रूप से कई संतों ने गाया, लेकिन इसे आधुनिक पहचान नुसरत फतेह अली खान ने दी।
हाँ, इस भजन की मूल रचना मीराबाई की है, जिसमें बाद में सूफी गायकों ने कुछ शब्द जोड़े।
इसका अर्थ है अपनी हर आती-जाती साँस को श्री कृष्ण के नाम की माला बनाकर उनकी भक्ति करना।
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