Die vier Purusharthas erklärt: Dharma, Artha, Kama und Moksha
Im menschlichen Leben gibt es verschiedene Arten von Wünschen und Zielen, die als die vier Purusharthas beschrieben werden. Sie behalten…
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Es ist nicht einfach लोगों के लिए बहुत ही महत्वपूर्ण है| लेकिन अब इस विज्ञान के आगे हिन्दू संस्कृति की कोई मान्यता नहीं रही है| हमारे हिन्दू धर्म में Ja लगाने का बहुत ही अधिक महत्व बताया गया है| माथे पर तिलक को लगाना हमारे हिन्दू धर्म की संस्कृति को झलकाता है|
अगर सीधी भाषा में बोला जाएं तो तिलक हिन्दू धर्म के लोगो की पहचान है| प्राचीन काल में जब बड़े – बड़े राजा – महाराजा किसी शुभ कार्य के लिए जाते थे तो माथे पर Ja अवश्य ही लगवाते थे| इसके अलावा भी वह जब युद्ध के लिए जाते थे तो युद्ध में विजय पाने के लिए अपने इष्ट देव को याद करके माथे पर तिलक लगाकर जाते थे|

हिन्दू धर्म की मान्यताओं के अनुसार वैसे तो Es ist nicht einfach Ja भी तिलक को गले, हृदय, दोनों हाथ, पीठ और नाभि को मिलाकर अन्य 12 जगहों पर तिलक लगाया जाता है| हिन्दू धर्म में तिलक लगाने को बहुत ही शुभ माना जाता है| आज के समय में लोग वैज्ञानिकों की ज्यादा मानने लगे है|
वैज्ञानिकों ने भी इस बात की पुष्टि कर दी है कि तिलक को माथे पर लगाने के कई सारे फायदे है| उनका भी मानना है कि तिलक को मस्तक पर लगाने से शरीर में शांति और ऊर्जा की अनुभूति होती है| भारत देश में हिन्दू धर्म में तिलक अनेक प्रकार के है| तिलक कई प्रकार के होते है जैसे – भस्म तिलक, चन्दन तिलक, रोली तिलक, सिंदूर तिलक इत्यादि अनेकों प्रकार के तिलक होते है|
सनातन धर्म में सभी मतों के लोगों के लिए जैसे Nein शैव, शाक्त और वैष्णव एवं अन्य सम्प्रदाय में तिलक अलग – अलग प्रकार के होते है| हिन्दू धर्म में लोग अधिकतर लाल रंग के कुमकुम का तिलक लगाते है|
हिन्दू धर्म में स्त्रियाँ भी पूजा करने के पश्चात लाल कुमकुम का ही तिलक लगाती है क्योंकि लाल रंग को ऊर्जा और स्फूर्ति का प्रतीक भी माना जाता है| तिलक स्त्रियों की सुन्दरता में वृद्धि कर देता है| तिलक देवी माता की पूजा से जुड़ा हुआ है| देवी माँ की पूजा करने के बाद माता के आशीर्वाद के स्वरुप में तिलक को मस्तक पर लगाया जाता है|
माता के पूजन के बाद तिलक लगाने से आशीर्वाद तो मिलता ही है| साथ ही देवी माँ की असीम कृपा भी प्राप्त होती है| इसके अलावा चन्दन का तिलक लगाने से सभी पापों का नाश होता है| चन्दन का तिलक लगाने से यह प्राणों की रक्षा भी भी करता है| तथा लक्ष्मी माँ का आशीर्वाद भी बना रहता है|
चन्दन का तिलक लगाने से ज्ञान भी सक्रिय रहता है| शैवों की परंपरा के अनुसार यह लोग चन्दन की आड़ी रेखा के रूप में ही तिलक लगता है| दूसरी ओर शाक्त सम्प्रदाय के लोग अधिकतर सिंदूर से बना तिलक ही लगाते है| सिंदूर को शाक्त मत में उग्रता का प्रतीक माना जाता है| यह तिलक लगाने वाले की शक्ति और तेज को बढ़ाने में सहायता करता है|
इनमे से कुछ प्रमुख प्रकार के तिलक भी है जैसे – लालश्री तिलक, रामानंद तिलक, विष्णुस्वामी Ja इत्यादि कुल चौसठ प्रकार के तिलक वैष्णव धर्म में माने जाते है जिनके बारें में हम आगे इस आर्टिकल के माध्यम से सम्पूर्ण विस्तार से जानेंगे|
तिलक चार प्रकार के होते है या हम ये भी यह भी Ich habe es nicht geschafft, es zu tun तैयार किया जाता है| ये चार प्रकार निम्न है –
कुमकुम हल्दी चूना मिलकर बना होता है| यह हमारे आज्ञा चक्र की शुद्धि करता है| साथ ही कैल्शियम प्रदान करते हुए ज्ञान चक्र को भी सक्रिय कर देता है|
केसर का तिलक मस्तिष्क को शांत और शीतल रखने का कार्य करता है|
Chandan को शांत को करके मानसिक शांति प्रदान करता है|
भस्म से बने तिलक को लगाने से यह मस्तक के रोम छिद्रों में उपस्थित सभी विषाणुओं को नष्ट कर देता है|
सनातन धर्म में तिलक के अनेको प्रकारों का विवरण किया गया है| अलग – अलग धर्म और सम्प्रदाय के अनुसार तिलक को विभिन्न प्रकारों में बांटा गया है| शैव, शाक्त और वैष्णव आदि सम्प्रदाय शामिल है|

सिंदूर को शाक्त सम्प्रदाय में उग्रता का प्रतीक माना जाता है| यह तिलक लगाने वाले की शक्ति और तेज को बढ़ाने में सहायता करता है| वैष्णव सम्प्रदाय में कुल चौसठ प्रकार के भिन्न – भिन्न तिलक का वर्णन किया गया है| इनमे से कुछ प्रमुख प्रकार के तिलक भी है जैसे – लालश्री तिलक, रामानंद तिलक, विष्णुस्वामी Ja इत्यादि कुल चौसठ प्रकार के तिलक वैष्णव धर्म में माने जाते है|
इन सब में सबसे प्रमुख तिलक रामानंद तिलक और विष्णुस्वामी तिलक है| विष्णु स्वामी तिलक दोनों भोहों के बीच में दो चौड़ी खड़ी रेखाओं से बना होता है| रामानंद तिलक भी विष्णु स्वामी तिलक की भांति ही है| इसमें उस विष्णुस्वामी तिलक के मध्य में कुमकुम की खड़ी रेखा खींची जाती है|
सोमवार का दिन भगवान शंकर को समर्पित किया गया है| इस वार का ग्रह चंद्रमा को माना गया है| हिन्दू धर्म के अनुसार चंद्रमा को मन का कारक माना गया है| अपने मन को काबू में करने के लिए दिमाग को शांत रखना आवश्यक है| इसके लिए इस दिन सफ़ेद चन्दन का तिलक लगाना उचित माना गया है| यदि आप चाहे तो भस्म या विभूति से भी तिलक लगा सकते है|
हिन्दू धर्म के अनुसार मंगलवार का दिन हिन्दू देवी – देवताओं में Hanuman को समर्पित किया गया है| इस वार का ग्रह भी मंगल को माना गया है| मंगल ग्रह लाल रंग का नेतृत्व करता है| इस दिन लाल चन्दन या फिर चमेली के तेल में घुले हुए सिंदूर के तिलक को लगाना शुभ माना गया है| Es ist nicht einfach कार्यक्षमता में भी अत्यंत बढ़ोतरी होती है|
यह दिन भगवान गणेश जी और देवी माँ दुर्गा को समर्पित किया गया है| इस दिन के स्वामी के रूप में Der Planet Merkur को जाना जाता है| इस दिन सूखे सिंदूर, जिसमे कोई सा भी तेल ना मिला रखा हो लगाया जाता है| इस तिलक को लगाने से व्यक्ति की बुद्धि में सुधार होता है|
गुरूवार को बृहस्पति के नाम से भी पहचाना जाता है| बृहस्पति को ऋषियों का गुरु माना जाता है| गुरूवार का यह दिन ब्रह्मा जी समर्पित किया गया है| इस दिन का स्वामी बृहस्पति ग्रह है| बृहस्पति ग्रह पीले रंग या सफ़ेद मिले हुए पीले रंग का प्रतिनिधित्व करता है|
इसलिए इस दिन सफ़ेद चन्दन को घिसकर उसमे केसर मिलाकर उसका तिलक लगाना चाहिए| इस दिन हल्दी का तिलक भी लगाया जा सकता है| इससे मन में आने सकारात्मक विचारों में वृद्धि होगी और आर्थिक तंगी भी दूर होगी|
यह दिन भगवान विष्णु की धर्मपत्नी माता लक्ष्मी जी को समर्पित है| इस दिन के स्वामी शुक्र ग्रह ही है| शुक्र ग्रह को दैत्यराज भी कहा जाता है क्योंकि शुक्राचार्य असुरों के गुरु थे| इस दिन लाल चंदन का तिलक लगाना बहुत ही शुभ माना जाता है| Das ist nicht der Fall बल्कि साथ ही साथ सुख – समृद्धि भी बढ़ती है|
शनिवार का दिन एक नहीं बल्कि तीन देवता, क़ाल भैरव, शनिदेव और यमराज को समर्पित किया गया| इस दिन विभूति, भस्म या लाल चन्दन का तिलक लगाने से भैरव भगवान प्रसन्न होते है और सभी कष्टों का निवारण करते है|
रविवार का दिन भगवान विष्णु और सूर्य देव का दिन है| इस दिन के स्वामी सूर्य ग्रह है जो सभी ग्रहों के राजा है| इस दिन लाल चन्दन या हरि चन्दन का तिलक लगाने से Lord Vishnu की विशेष कृपा प्राप्त होती है और मान – सम्मान में बढ़ोतरी होती है|
तिलक लगाने का मंत्र
चन्दनस्य महत्पुण्यं पवित्रं पापनाशनम् |
आपदं हरते नित्यं लक्ष्मीस्तिष्टि सर्वदा ||
तिलक के बिना आपके द्वारा किया गया कोई भी धार्मिक कार्य मान्य नहीं है| इसलिए कभी भी बिना तिलक के पूजा नहीं करनी चाहिए| हमेशा भगवान को लगाने के बाद जो तिलक बचे| उसका ही इस्तेमाल करना चाहिए| हिन्दू धर्मग्रंथों के अनुसार किसी भी पूजा, पितृकर्म और देवा आदि सभी पूजा करने से पहले मस्तक पर तिलक जरूर लगाना चाहिए|
Das ist nicht der Fall
केशवानन्न्त गोविन्द बाराह पुरुषोत्तम |
पुण्यं यशस्यमायुष्यं तिलकं मे प्रसीदतु ||
कोई भी ब्राह्मण यदि बिना तिलक के रहता है तो उसे दोष लगता है| इसलिए ब्राह्मण को हमेशा तिलक लगाए रखना चाहिए|
भगवान को तिलक लगाने का मंत्र –
श्रीखंडं चन्दनं दिव्यं गंधाढयं सुमनोहरम |
विलेपनं सुरश्रेष्ठ चन्दनं प्रतिगृह्यताम ||
ॐ तं यज्ञं बर्हिषि प्रौक्षन पुरुषं जातमग्रतः |
तेन देवा अयजन्त साध्या ऋषयश्च ये ||
हिंदू धर्म के अनुसार तिलक को लगाने के भी कुछ Ich habe es nicht geschafft बताया गया है| हमे भी तिलक लगाते समय उन नियमों का पालन करना चाहिए| Es ist nicht einfach शामिल है| जिन व्यक्तियों को मोक्ष की कामना है|
उन्हें अंगूठे से तिलक निकलना चाहिए| Es ist nicht einfach मध्यमा उंगली से तिलक लगाए| सुख व शांति की कामना करने वाले व्यक्ति को अनामिका उंगली से तिलक लगाए|
Es ist nicht einfach शत्रु के नाश के लिए Zeigefinger की सहायता से मस्तिष्क पर तिलक लगाना चाहिए| तिलक को सही नियम से लगाए जाने पर यह व्यक्ति के जीवन में खुशहाली भर देता है|
हिन्दू धर्म में तिलक लगाने बहुत बड़ा महत्व और तिलक लगाने के कई सारे लाभ भी बताये गए है| तिलक कई प्रकार के होते है| तेवल लगाने मात्र से ही मनुष्य का व्यक्तित्व काफी प्रभावशाली होता है|
तिलक लगाने से व्यक्ति के आत्म विश्वास और आत्मबल में वृद्धि होती है| नियमित रूप से मस्तक पर तिलक लगाने से मस्तक में शीतलता बनी रहती है और लोग सुख व शांति का अनुभव करते है| तिलक लगाने से कई तरह की मानसिक बिमारियों से छुटकारा मिलता है|

तिलक लगाने से मस्तिष्क में सेराटोनिन हर्मोन स्त्रावित होता है| जिससे व्यक्ति की उदासी दूर होती है और मन में उत्साह की भावना को जगाता है| हल्दी से बना तिलक लगाने से त्वचा से सभी कीटाणु मर जाते है|
हल्दी में ऐसे तत्व होते है जो हमारी त्वचा पर उपस्थित कीटाणुओं को नष्ट कर देता है| धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, चन्दन का तिलक लगाने से मनुष्य के सभी पापों का नाश होता है| Ich habe es nicht geschafft से ग्रहों के दोषों का नाश होता है| और मनुष्य के सौभाग्य में बढ़ोतरी होती है|
हमने इस आर्टिकल के माध्यम से आपको तिलक का हिन्दू धर्म में क्या महत्व है, के बारे में बताया| माथे पर तिलक के प्रकार कितने होते है, तिलक कितने प्रकार के होते है तथा तिलक का क्या महत्व है| इसके अलावा भी अगर आप किसी और पूजा के बारे में जानकारी लेना चाहते है। तो आप हमारी वेबसाइट पर जाकर सभी तरह की पूजा या त्योहारों के बारे में सम्पूर्ण ज्ञान ले Ja है।
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Q.Was ist los mit dir?
A.हिन्दू धर्म में तिलक लगाना इस बात संकेत है कि उस व्यक्ति ने किस धर्म से अपनी अध्यात्म की शिक्षा प्राप्त की है|
Q.Was ist los?
A.हिन्दू धर्म में तिलक भगवान के आशीर्वाद का प्रतीक है|
Q.तिलक कहाँ लगाना चाहिए ?
A.Es ist nicht einfach लगाना चाहिए|
Q.तिलक लगाने से क्या लाभ है ?
A.तिलक लगाने से ग्रहों से होने वाले दोष व नकारात्मक प्रभावों से मुक्ति मिलती है|
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