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Neues Jahr 2026: जानिए व्रत कथा, शुभ मुहूर्त और पूजा की विधि

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Schalini Mischra Geschrieben von: Schalini Mischra
Zuletzt aktualisiert am:August 7, 2025
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September 2026: भारत देश में अनेको देवी – देवताओं की पूजा की जाती है| सभी लोग अलग – अलग देवी – देवताओं को मानते है और उन्हें अपना इष्ट मानकर उनकी आराधना करते है| जैसा कि आप को पता है हिन्दू धर्म में हर माह ही कोई ना कोई सा त्यौहार आता ही रहता है|

आज हम आपको इस आर्टिकल के माध्यम से September 2026 के बारे में सारी आपको देंगे जैसे कि इसका शुभ मुहूर्त क्या होगा और पूजा की विधि क्या होगी| September 2026 को वरलक्ष्मी व वरलक्ष्मी नोम्बू के नाम से भी जाना जाता है|

Varalakshmi Vratam

यह त्यौहार हिन्दू धर्म में काफी महत्वपूर्ण है| हिन्दू धर्म की सभी विवाहित महिलाएं इस दिन वरलक्ष्मी व्रत करती है और माँ वरलक्ष्मी की पूजा की जाती है|

वरलक्ष्मी में वर का अर्थ वरदान देने वाली से है| Die letzte Woche des Jahres 2026 में अलग महत्व में है| 21. September 2026 2026 मनाया जाएगा|

मान्यता है कि यह व्रत श्रावण मास के अंतिम शुक्रवार को किया जाता है| इस व्रत को करने से भक्तों की दरिद्रता दूर होती है और उन पर माता रानी की कृपा होती है|

इस वरलक्ष्मी के व्रत को अधिकतर दक्षिणी भारत के लोग मानते है| इस दिन पुरे भारत देश में सभी जगहों पर विवाहित महिलाएं इस व्रत को करती है|

इस व्रत को करके वह माता वरलक्ष्मी से अपने Ja, das ist nicht der Fall Ja करने के लिए प्रार्थना करती है और पूरे दिन उपवास रखकर माता वरलक्ष्मी की पूजा करती है| इस व्रत को करने से भक्त के जीवन से सभी प्रकार Ja, das ist alles Ja है|

Das Jahr 2026 ist noch nicht abgeschlossen 

Mai 2026 

Am 21. September 2026 wurde er veröffentlicht की है।

2026. September 2025

  • सिंह लग्न पूजा मुहूर्त – Mittwoch, 05:54 Uhr, 08:11 Uhr
  • वृश्चिक लग्न पूजा मुहूर्त – Sonntag, 12:47 Uhr, 03:05 Uhr
  • कुम्भ लग्न पूजा मुहूर्त – Sonntag, 06:52 Uhr, 08:20 Uhr
  • वृषभ लग्न पूजा मुहूर्त – Mittwoch, 11:21 Uhr, Freitag, 01:17 Uhr, 22. September

Im Jahr 2026 wurde das Jahr 2025 beendet है| आपको यही सलाह दी जाती है कि आप इन्ही में से किसी भी मुहूर्त में पूजा को संपन्न कर सकते है|

वरलक्ष्मी व्रतं क्यों मनाया जाता है  

भारत हर त्यौहार से संबंधित आस्थाओं और मान्यताओं को अपने में समेट कर रखता है| यहाँ हर दिन किसी न किसी देवी – देवताओं के त्यौहार या उनसे सम्बंधित व्रत आते ही रहते है|

हमारे देश को तीज – त्यौहार व व्रत उपासना आदि के लिए जाना जाता है| यहाँ सप्ताह के सातों दिन किसी ना किसी भगवान को समर्पित है|

यह वो व्रत है जो हर सप्ताह की तिथि अनुसार आते है| इनके अलावा कुछ ऐसे भी व्रत जो सप्ताह के अनुसार नहीं आते है| इनका एक निश्चित दिन होता है| Ja krishna janmashtami का व्रत भाद्र माह में कृष्ण पक्ष की अष्टमी को किया जाता है|

उसी प्रकार ही यह वरलक्ष्मी या वरलक्ष्मी नोम्बू का व्रत वर्ष में एक ही बार सावन माह के Ja शुक्रवार को मनाया जाता है|

आज के समय में सभी को एक सुख – समृद्धि के परिपूर्ण जीवन चाहिए| माता रानी का यह व्रत आपको अपने जीवन में सभी कठिनाइयों से मुक्त कर देगा और आपको जीवन में Ja – समृद्धि प्रदान करेगा|

इस दिन माँ वरलक्ष्मी का उपवास करने से, जो माँ लक्ष्मी का ही एक रूप है, कभी भी भक्तों के जीवन Nein धन – धान्य से सम्बंधित किसी भी प्रकार भी समस्या नहीं आती है|

हिन्दू धर्म में मान्यता है कि पुरुष, महिला का भाग्य उनका स्वयं का ही होता है| जैसा कि आप देखते ही होंगे कि पुरुष धन कमाने के लिए बहुत मेहनत करता है|

वही महिलाएं भी अपने पति के लम्बी उम्र के लिए प्रार्थना करती है| वरलक्ष्मी ही एक ऐसा व्रत है जिसे पति और पत्नी दोनों साथ में ही रखते है|

इसके व्रत के प्रभाव से घर – परिवार में सुख – समृद्धि बनी रहती है और महिलाओं को संतान प्राप्ति का सौभाग्य मिलता है|

वरलक्ष्मी पूजा के लिए सामग्री – Varalakshmi Puja Samagri

जब भी हम किसी भी देवी – देवताओं की पूजा करते है या किसी के द्वारा पूजा करवाते है तो पूजा के Nein कुछ आवश्यक सामग्री की जरूरत होती है| आज हम उन्ही सामग्री के बारे में जानेंगे|

  • देवी वरलक्ष्मी की मूर्ति 
  • फूल माला 
  • Kurkuma
  • कुमकुम 
  • चन्दन का पाउडर 
  • Vibhuti 
  • शीशा 
  • आम पत्र 
  • Ja 
  • Ja 
  • पान के पत्ते 
  • Panchamrit 
  • Banane 
  • दही 
  • दूध 
  • Räucherstäbchen 
  • मौली
  • Wasser 
  • कर्पुर 
  • पूजा की घंटी 
  • प्रसाद 
  • तेल का दीपक 
  • intakt 

Erstmals im Jahr 2026

  • सुबह जल्दी उठकर स्नान करके माता लक्ष्मी को नमन कीजिये और सफ़ेद रंग के वस्त्र Ja कीजिये|
  • जहाँ आप पूजा करे उस जगह पर चॉक की सहायता से रंगोली बनाना चाहिए|
  • घर के सभी कोनों में गंगाजल का छिड़काव करके घर की शुद्धि करें और व्रत का संकल्प ले|
  • देवी मां की प्रतिमा को अच्छे से वस्त्र पहना कर आभूषण व कुमकुम से माता का शृंगार करें|
  • एक चौकी लीजिये उसपर लाल कपड़ा बिछाए और गणेश Es ist nicht einfach कीजिये|

September 2026

  • इस बात का अवश्य ध्यान रखें कि माँ लक्ष्मी की प्रतिमा का मुख पूर्व दिशा की ओर है| यह भक्त के लिए बहुत लाभदायक होता है|
  • पूजा वाली जगह पर थोड़े से चावल फैला दे|
  • इसके बाद एक कलश ले और उसके चारों ओर चन्दन का लेप करें|
  • कलश को आधे से ज्यादा चावल से भर दीजिये|
  • उसके पश्चात कलश में पान के पत्ते, चांदी का सिक्का और खजूर डालिए|
  • एक नारियल पर चन्दन,कुमकुम लगाकर उसे कलश के ऊपर रखिए|
  • कलश के ऊपर रखे हुए नारियल के चारों ओर आम के पत्ते लगाये|
  • एक थाली लेकर उसमे नया लाल रंग का कपड़ा बिछाकर उसे चावल के ऊपर रख दे|
  • देवी माँ की प्रतिमा के सामने तेल का दीपक अवश्य लगाये|
  • गणेश जी के सामने घी का दीपक जलाएं|
  • कलश और अक्षत से माँ वरलक्ष्मी का स्वागत कीजिये|
  • देवी माँ को चंदन पाउडर, कुमकुम, इत्र, फूलों की माला, हल्दी, धूप, कपड़े और मिठाई अर्पित कीजिये|
  • देवी लक्ष्मी को प्रसन्न करने के लिए मंत्र का जप कीजिये|
  • वरलक्ष्मी व्रत की कथा पढ़े और देवी माँ की आरती करें|
  • पूजा का समापन होने के बाद देवी माँ को भोग लगाएं और प्रसाद का वितरण कीजिये|

Mein Name ist Maa Varalakshmi Ki Aarti

ॐ जय लक्ष्मी माता, मैया जय लक्ष्मी माता |
तुमको निस दिन सेवत हर – विष्णु – विधाता || ॐ जय …..

उमा , रमा ,ब्रह्माणी, तुम ही जग माता |
सूर्य – चंद्रमा ध्यावत, नारद ऋषि गाता || Ja ….

तुम पाताल – निरंजनि, सुख सम्पत्ति दाता |
जो कोई तुमको ध्यावत, रिद्धि – सिद्धि – धन पाता || ॐ जय….
तुम पाताल – निवासिनि, तुम ही शुभदाता |
कर्म – प्रभाव – प्रकाशिनी, भवनिधि की त्राता || ॐ जय….

जिस घर तुम रहती, तहं सब सद्गुण आता |
सब संभव हो जाता, मन नहिं घबराता || ॐ जय….

तुम बिन यज्ञ न होते, वस्त्र न कोई पाता |
खान – पान का वैभव सब तुमसे आता || ॐ जय….

शुभ – गुण मंदिर सुंदर, क्षीर निधि जाता |
रत्न चतुर्दश तुम बिन कोई नहिं पाता || ॐ जय….

महालक्ष्मीजी जी की आरती, जो कोई नर गाता |
उर आनंद समाता, पाप उतर जाता || ॐ जय……

माता वरलक्ष्मी को प्रसन्न करने का मंत्र

Benutzername: स्वयं सुकृतिना भवनेश्वलक्ष्मी: |
पापात्मनां कृतधियां हृदयेषु बुद्धि: ||

श्रद्धा सतां कुलजनप्रभवस्य लज्जा |
तां त्वां नता: स्म परिपालय देवि विश्वम ||

वरलक्ष्मी व्रत कथा – Varalakshmi Vrat Katha

Es ist nicht einfach में आज हम आपको इस आर्टिकल माध्यम से बताएँगे| इस व्रत से जुड़ी एक पौराणिक कथा के अनुसार मगध राज्य में एक कुंडी नाम का गाँव हुआ करता था|

इस गाव में एक महिला रहती थी| उसका नाम चारुमती था| जिसे माता लक्ष्मी में बहुत अटूट विश्वास था| वह हर दिन माता लक्ष्मी का पूजन करती थी|

उसकी निस्वार्थ भक्ति से माँ लक्ष्मी उनसे प्रसन्न हो गयी| एक दिन माता लक्ष्मी चारुमती के सपने में आई और उन्हें वरलक्ष्मी व्रत को करने का सुझाव दिया|

चारुमती ने यह बात अपने आस – पास की सभी महिलाओं को बताई| सभी ने एक साथ यह व्रत श्रावण मास के अंतिम शुक्रवार के दिन किया|

चारुमती के साथ ही सभी महिलाओं ने भी इस व्रत को किया| सभी ने माता लक्ष्मी की पूजा और कलश की स्थापना की| उन्होंने कलश के चारों ओर परिक्रमा करके देवी माँ की पूजा की|

जिसकी वजह से लक्ष्मी माँ ने उनके घर को सोने से भर दिया, उन्हें सोने के आभूषणों से अलंकृत Nein दिया|

सभी महिलाओं में चारुमती को धन्यवाद दिया क्योंकि उसने ही उन्हें इस व्रत के बारे में कहा था| मान्यता यह भी हैं कि इस व्रत के विषय में भगवान शिव ने माँ पार्वती को भी बताया था|

वरलक्ष्मी व्रत के नियम – Schnelle Regeln von Varalakshmi Vrat

माँ वरलक्ष्मी के व्रत को करने के भी कुछ नियम Ich habe es nicht geschafft बहुत लाभ होगा किन्तु यदि आपने इनका उल्लंघन किया तो आपको इसके लिए माता रानी द्वारा दंड भी मिल सकता है तो आइये जानते है कि वो नियम क्या है :-

  • व्रत के दिन अपने दिमाग पर गलत विचारों को हावी ना होने दे|
  • इस दिन किसी के साथ भी दुर्व्यवहार ना करें|
  • व्रत वाले दिन ब्रह्मचर्य का पालन कीजिये|
  • सिगरेट और शराब जैसे नशीले पदार्थों का सेवन ना करें और मांसाहारी भोजन करने से बचें|
  • लोगो से कम मिले और अपने हृदय व शरीर को साफ़ रखे|
  • इस दिन लड़ाई – झगड़ों से बचे|
  • इस दिन किसी भी अपमानजनक शब्दों का प्रयोग न करें|
  • अपने मन से स्वार्थ की भावना को त्याग दे|

वरलक्ष्मी व्रतं के दिन ध्यान देने योग्य बातें – Wichtige Fakten über Varalakshmi Vrathm

इस व्रत को करते वक्त कुछ ध्यान देने योग्य बातें :

  • इस दिन व्रत करने वाले भक्तों को साफ़ – सफाई का ध्यान खासतौर पर रखना चाहिए| सुबह जल्दी उठकर अपने सभी कामों से निवृत होकर स्नान आदि करके भगवान का ध्यान कीजिये| पूरे घर की अच्छे से सफाई कीजिये|
  • उतर – पूर्व दिशा पूजा का स्थान रखना अति उत्तम रहेगा|
  • इसके बाद देवी माँ की प्रतिमा को अच्छे से गंगाजल से स्नान करवाए उसके बाद तिलक लगाना चाहिए| गणेश जी को भी गंगाजल से स्नान कराएं| 
  • पूजा स्थल पर माँ देवी और गणेश जी की प्रतिमा के सामने एक चावल से भरा कलश रखे| 
  • इसके पश्चात दीपक जलाकर गणेश जी और माँ लक्ष्मी की पूजा करें|
  • अगर हो सके तो पूजा में घर के सभी सदस्यों को भी शामिल कीजिए| 
  • पूजा करने के पश्चात वरलक्ष्मी की व्रत कथा का पाठ करें| 
  • अंत में भोग लगाकर सभी को प्रसाद बाँटिये|  

वरलक्ष्मी व्रतं का महत्व – Bedeutung von Varalakshmi Vrathm

इस व्रत को करने का मुख्य उद्देश्य देवी माँ का आशीर्वाद पाना ही है| इस व्रत को करने के लिए कोई अधिक कठोर नियम नहीं है| Ja, das ist es अनुष्ठान मुश्किल है बल्कि माँ लक्ष्मी को प्रसन्न करने लिए एक छोटी सी प्रार्थना ही काफी है|

जैसा कि आप सभी को पता है कि माँ लक्ष्मी धन, सुख, समृद्धि, धन, भाग्य, उदारता और साहस की देवी है| अधिकांश महिलाएं यह व्रत माँ लक्ष्मी को प्रसन्न करके उनका आशीर्वाद लेने के लिए करती है|

September 2026

सभी महिलाएं अपने – अपने पतियों की लम्बी उम्र के लिए माँ लक्ष्मी से प्रार्थना करती है और Ja संतान पाने के लिए माता रानी से कामना करती है| इसे महिलाओं का त्यौहार भी कहा जाता है| स्कन्दपुराण में वरलक्ष्मी व्रत का महत्व बताया गया है|

Ich habe es nicht geschafft मुख्यतः अपने पतियों व बच्चों की लम्बी उम्र की कामना के लिए करती है| हिन्दू धर्म की मान्यता के अनुसार इस दिन माँ वरलक्ष्मी की पूजा करना अष्टलक्ष्मी की पूजा Ja के समान है|

वरलक्ष्मी व्रत का अनुष्ठान करवाने के लिए पंडित जी को 99Pandit hat es geschafft बिल्कुल उचित मूल्य में|

Abschluss

हमने आपको इस आर्टिकल के माध्यम से वरलक्ष्मी व्रतं के बारे में बहुत अच्छे से बता दिया| आपको सिर्फ सच्चे मन से देवी मां की पूजा करनी है जिससे आप को उनका आशीर्वाद मिले और उनकी Ja आपके ऊपर बनी रहे|

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