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Varuthini Ekadashi Vrat Katha: पाठ करे वरूथिनी एकादशी व्रत कथा का

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99PanditJi Geschrieben von: 99PanditJi
Zuletzt aktualisiert am:15. März 2024
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Varuthini Ekadashi Vrat Katha: वैशाख माह के कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि के दिन वरूथिनी एकादशी का उपवास किया जाता है| वरूथिनी एकादशी तिथि के दिन भगवान विष्णु की पूजा की जाती है तथा वरूथिनी एकादशी व्रत कथा (Varuthini Ekadashi Vrat Katha) का श्रवण भी किया जाता है| वरूथिनी एकादशी के दिन वरूथिनी एकादशी व्रत कथा (Varuthini Ekadashi Vrat Katha) का पाठ करने से जातको को शुभ फल की प्राप्ति होती है|

वरूथिनी एकादशी व्रत कथा

सभी एकादशी तिथि का एक अलग महत्व है| वरूथिनी एकादशी का व्रत करने से जातक को शारीरिक तथा मानसिक कष्टों से मुक्ति प्राप्त होती है| इस एकादशी का व्रत करने से व्यक्ति को मृत्यु के पश्चात मुक्ति भी मिल जाती है| आइये जानते है वरूथिनी एकादशी तथा वरूथिनी एकादशी व्रत कथा (Varuthini Ekadashi Vrat Katha) के बारे में|

इसके अलावा यदि आप ऑनलाइन किसी भी पूजा जैसे गृह प्रवेश पूजा (Griha Pravesh Puja), सत्यनारायण पूजा (Satyanarayan Puja), तथा विवाह पूजा (Hochzeits-Puja) के लिए आप हमारी वेबसाइट 99Pandit की सहायता से ऑनलाइन पंडित बहुत आसानी से बुक Nein सकते है|

यहाँ बुकिंग प्रक्रिया बहुत ही आसान है| बस आपकोBuchen Sie einen Pandit” विकल्प का चुनाव करना होगा और अपनी सामान्य जानकारी जैसे कि अपना नाम, मेल, पूजा स्थान, Ja, ja पूजा का चयन के माध्यम से आप अपना पंडित बुक कर सकेंगे|

Die Bedeutung von Varuthini Ekadashi Vrat Katha

युधिष्ठिर भगवान श्री कृष्ण से बोले कि – भगवन ! आपने मुझसे चैत्र महीने के शुक्ल पक्ष में आने वाली एकादशी जिसे कामदा एकादशी के नाम से भी Ja जाता है है| हे प्रभु आप स्वदेज, जरायुज चारों प्रकारों के जीवों को उत्पन्न, पालन तथा नाश करने वाले है|

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Ich habe es nicht geschafft शुक्ल एकादशी के बारे में मुझे कुछ जानकारी प्रदान करे| Was ist los? Was ist los? इसकी व्रत करने से किस प्रकार के फल की प्राप्ति होती है| सब विधि पूर्वक बताएं|

इस पर भगवान श्री कृष्ण ने कहा – हे राजन! वैशाख माह के कृष्ण पक्ष में आने वाली एकादशी तिथि वरूथिनी एकादशी के नाम से जाना जाता है| यह वरूथिनी एकादशी व्रत कथा का प्रभाव सौभाग्य प्रदान करने वाली, समस्त पापों को नष्ट करने वाला तथा अंत के समय में मोक्ष प्रदान करने वाला है| इस वरूथिनी एकादशी व्रत कथा (Varuthini Ekadashi Vrat Katha) के बारे में अब मैं तुमसे कहने वाला हूँ|

Der Autor ist Varuthini Ekadashi Vrat Katha

पौराणिक काल में नर्मदा नदी के किनारे पर एक मान्धाता नामक एक राजा राज था| कहा जाता है कि वह राजा बहुत ही तपस्वी तथा दानवीर थे| एक समय की बात है कि वह राजा जंगल के बीच में अपनी तपस्या में लीन थे| कुछ समय पश्चात वहां पर एक जंगली भालू आ गया तथा तपस्या में लीन राजा के पैर को चबाने लगा| कुछ देर के बाद वह भालू राजा का पैर चबाता हुआ उन्हें घसीट कर जंगल में ले गया|

वरूथिनी एकादशी व्रत कथा

जब वह भालू राजा को घसीट कर ले जा रहा था| तब राजा बहुत घबरा रहे थे किन्तु तापस धर्म की पालना करते हुए उन्होंने क्रोध तथा हिंसा न Mehr भगवान विष्णु से प्रार्थना करने लगा व करुणा भाव से उन्हें पुकारने लगा| राजा की पुकार सुनकर भगवान विष्णु उसकी सहायता हेतु प्रकट हुए| जिसके पश्चात भगवान विष्णु ने अपने सुदर्शन चक्र से उस भालू का वध कर दिया किंतु तब तक वह भालू राजा का पूरा पैर खा चुका था|

अपने पैर को गवाने के कारण राजा मान्धाता विलाप कर रहे थे| जिसे देख भगवान विष्णु को बहुत ही दुःख हुआ तथा उन्होंने राजा से कहा – हे वत्स! तुम इसका शोक मत करो| इस भालू ने जो तुम्हारा हाल किया है, यह तुम्हारे पिछले जन्म का अपराध है| इसकी पूर्ति के लिए तुम मथुरा में जाओ तथा Es ist nicht einfach वरूथिनी एकादशी व्रत करो| वरूथिनी एकादशी व्रत के प्रभाव से तुम पुनः सुदृढ़ अंगों वाले हो जाओगे|

भगवान विष्णु के कहे अनुसार राजा मान्धाता मथुरा नगरी में गए तथा पूर्ण श्रद्धा के साथ वरूथिनी एकादशी व्रत को किया| इस एकादशी व्रत के प्रभाव से राजा का शरीर पुनः सुदृढ़ अंगों वाला हो गया तथा इस वरूथिनी एकादशी Es ist nicht einfach प्राप्ति हुई| इसलिए जो भी व्यक्ति भय से पीड़ित हो, उसे वरूथिनी एकादशी का व्रत अवश्य करना चाहिए|

Oft gestellte Frage

Q.वरुथिनी एकादशी के दिन भगवान विष्णु के किस Warum nicht?

A.इस एकादशी के दिन भगवान विष्णु के वराह अवतार की पूजा की जाती है|

Q.Was ist mit dir?

A.यह वरूथिनी एकादशी तिथि सौभाग्य प्रदान करने वाली Ja में मोक्ष प्रदान करने वाली है|

Q.Warum nicht?

A.वैशाख माह के कृष्ण पक्ष की एकादशी के दिन वरूथिनी एकादशी का उपवास किया जाता है|

Q.राजा मान्धाता को भगवान विष्णु ने उनके सुदृढ़ अंगों को पुनः पाने के लिए क्या मार्ग Ja?

A.भगवान विष्णु बोले – इस भालू ने जो तुम्हारा हाल किया है, यह तुम्हारे पिछले जन्म का अपराध है| इसकी पूर्ति के लिए तुम मथुरा में जाओ तथा Es ist nicht einfach वरूथिनी एकादशी का व्रत करो| वरूथिनी एकादशी व्रत के प्रभाव से तुम पुनः सुदृढ़ अंगों वाले हो जाओगे|

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