देवी सरस्वती के 108 नाम: संपूर्ण सूची और अर्थ
देवी सरस्वती के 108 नाम: हिंदू धर्म में हर देवी-देवता को कई नामों से पुकारा जाता है। हमारे यहां देवी-देवताओं को कई नामों से पुकारा जाता है।
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भगवान कृष्ण के 108 नाम: भगवान श्री कृष्ण को इस जगत के पालनकर्ता भगवान विष्णु का ही अवतार माना जाता है| बता दें कि विष्णु जी के अवतार भगवान श्री कृष्ण के 108 नाम (भगवान कृष्ण के 108 नाम) हैं और हर नाम का एक अलग अर्थ है|
आज इस लेख में हम आपको भगवान श्री कृष्ण के 108 नाम (भगवान कृष्ण के 108 नाम) के साथ-साथ उनके अर्थ के बारे में भी बताएंगे|

भगवान श्री कृष्ण का जन्म द्वापर युग में हुआ| बताया जाता है कि श्री कृष्ण का जन्म मथुरा में हुआ था, जिसमें उनकी पालन पोषण करने वाली माता यशोदा और नंद जी शामिल थे। भगवान श्री कृष्ण ने अपने जीवन में जो भी लीलाएं की|
उनके अनुसार भगवान श्री कृष्ण के 108 नाम (भगवान कृष्ण के 108 नाम) बताए गए हैं तो आइए जानते हैं क्या हैं भगवान श्री कृष्ण के 108 नाम (भगवान कृष्ण के 108 नाम) और उनका हिंदी अर्थ|
इसी के साथ हम आपको एक ऐसी वेबसाइट में बता रहे है, जिसकी सहायता से ऑनलाइन किसी भी पूजा जैसे सत्यनारायण पूजा (Satyanarayan Puja), रुद्राभिषेक पूजा और काल सर्प दोष पूजा (काल सर्प दोष पूजा) के लिए बहुत ही आसानी से पंडितजी बुक कर सकते है| इसी के साथ हमसे जुड़ने के लिए आप Whatsapp पर भी हमसे संपर्क कर सकते है|
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नाम |
अर्थ |
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अजेय |
जिसने कभी भूल न की हो |
| आदिदेव |
समस्त देवताओं के स्वामी |
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अचला |
गोकू |
| अजन्मा |
जिसकी शक्ति अनंत हो |
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अद्भुतह |
अद्भुत देव |
| आदित्या |
अदिति देवी के पुत्र |
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अमृत |
अमृत के समान रूप वाले |
| अजया |
जीवन तथा मृत्यु के विजेता |
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आनंद सागर |
कृपा करने वाले |
| अनादिह |
जो सर्वप्रथम है |
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अनंता |
अंतहीन देव |
| अक्षरा |
अविनाशी प्रभु |
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अनिरुद्ध |
जिनका कोई विरोध न कर सके |
| अनाया |
जिसका कोई भी स्वामी न हो |
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अनंतजीत |
सदा विजयी होने वाला |
| गोपालप्रिया |
ग्वालों के प्रिय |
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गोपाल |
ग्वालों के साथ क्रीडाएं करने वाले |
| धर्माध्यक्ष |
धर्म के स्वामी |
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द्वारकाधीश |
द्वारका के अधिपति |
| देवकीनंदन |
माता देवकी के पुत्र |
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देवेश |
देवताओं के भी देवता |
| देवाधिदेव |
देवों के देव |
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दयानिधि |
सब पर दया करने वाले |
| दान |
वरदान देने वाले |
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दयाल |
करुणा के भण्डार |
| चतुर्भुज |
चार भुजाओं वाले |
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बाल गोपाल |
भगवान श्री कृष्ण का बाल्य रूप |
| बलि |
सर्वशक्तिमान |
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अपराजित |
जिन्हें कभी हराया न जा सके |
| अव्युक्ता |
माणभ की भांति ही स्पष्ट |
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जनता के राष्ट्रपति |
तीन लोकों के स्वामी |
| मदन |
प्रेम के प्रतीक |
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कृष्ण |
सांवले रंग वाले |
| लक्ष्मीकांत |
देवी लक्ष्मी के देवता |
|
कंजलोचन |
जिनके कमल के समान नेत्र है |
| कामसंतका |
कंस का वध करने वाले |
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कमलनाथ |
देवी लक्ष्मी के प्रभु |
| कमलनयन |
कमल के समान नेत्र |
|
-ज्योतिरादित्य |
सूर्य के समान चमक वाले |
| जनार्दन |
सभी को वरदान देने वाले |
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जयंतह |
समस्त दुश्मनों को पराजित करने वाले |
| जगदीशा |
सभी के रक्षक |
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जगन्नाथ |
सम्पूर्ण ब्रह्मांड के ईश्वर |
| जगद्गुरु |
ब्रह्मांड के गुरु |
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गोंडा |
गाय, प्रकृति और भूमि के प्रेमी |
| हरी |
प्रकृति के देवता |
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ज्ञानेश्वर |
ज्ञान के देवता |
| अधिकार |
सभी इन्द्रियों के दाता |
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हिरण्यगर्भ |
सर्वशक्तिमान सृष्टिकर्ता |
| सहस्राकाश |
जिनके हजारों नेत्र हों |
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पुरुषोत्तम |
सबसे उत्तम पुरुष |
| रविलोचन |
सूर्य के समान जिनके नेत्र हो |
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प्रतिनिधि |
सभी प्राणियों के नाथ |
| पुण्य |
निर्मल व्यक्तित्व वाले |
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परम पुरुष |
श्रेष्ठ व्यक्तित्व वाले |
| पार्थसारथी |
अर्जुन के सारथी |
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परब्रह्मन |
परम सत्य |
| ईश्वर |
सभी जीवों के प्रभु |
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पद्महस्ता |
जिनके हाथ कमल के समान है |
| पद्मनाभ |
कमल के आकार की नाभि वाले |
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निरंजन |
सबसे उत्तम |
| निर्गुण |
जिनमे कोई भी अवगुण न हो |
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नारायन |
सबको अपनी शरण में लेने वाले |
| मुरली मनोहर |
मुरली बजाकर मोहने वाले |
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नंदगोपाल |
नंद बाबा के पुत्र |
| मुरलीधर |
मुरली धारण करने वाले |
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मोहन |
सभी को आकर्षित करने वाले |
| मुरली |
बांसुरी बजाने वाले प्रभु |
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मनोहर |
बहुत ही सुन्दर रूप रंग वाले |
| मनमोहन |
सबका मन मोह लेने वाले |
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मयूर |
मुकुट पर मोर पंख धारण करने वाले |
| माधव |
ज्ञान के भण्डार |
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महेन्द्र |
इंद्र के स्वामी |
| मधुसूदन |
मधु – दानवों का वध करने वाले |
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योगिनाम्पति |
योगियों के स्वामी |
| वृषभ पर्व |
धर्म के भगवान |
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यदवेंद्रा |
यादव वंश के मुखिया |
| योगी |
प्रमुख गुरु |
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विश्वरूपा |
ब्रह्मांड के हित में रूप धारण करने वाले |
| विश्वात्मा |
ब्रह्मांड की आत्मा |
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विश्वकर्मा |
ब्रह्मांड के निर्माता |
| विश्वमूर्ति |
पूर्ण ब्रह्मांड का रूप |
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विष्णु |
भगवान विष्णु के स्वरूप |
| वासुदेव |
हर जगह पर विद्यमान रहने वाले |
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विश्वदक्शिनह |
निपुण एवं कुशल |
| वैकुण्ठनाथ |
स्वर्ग में निवास करने वाले |
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वर्धमानह |
जिनका कोई आकार न हो |
| त्रिविक्रम |
तीनों लोकों के विजेता |
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स्वर्गपति |
स्वर्ग के राजा |
| उपेन्द्र |
इंद्र के भाई |
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सुमेध |
सर्व बुद्धिमान |
| सुदर्शन |
रूपवान |
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सुरेशम |
सभी जीव जंतुओं के देव |
| श्रीकांत |
अद्भुत सौंदर्य के स्वामी |
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श्यामसुंदर |
सांवले रंग में भी सुंदर दिखने वाले |
| श्याम |
जिनका रंग सांवला हो |
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शंतह |
शांत दिमाग |
| श्रेष्ठ |
महान |
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सर्वेश्वर |
सभी देवताओं से ऊंचे |
| सत्यव्त |
श्रेष्ठ व्यक्तित्व वाले देवता |
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सत्य वचन |
सत्य कहने वाले |
| सनातन |
जिसका कभी अंत न हो |
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सर्वपालक |
सभी का पालन करने वाले |
| सर्वजन |
सब कुछ जानने वाले |
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सहस्रजीत |
हजारों को जीतने वाले |
| सहस्रपात |
जिनके हजारों पैर हो |
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साक्षी |
समस्त देवों के गवाह |
| केशव |
लंबे एवं काले उलझा ताले |
आज इस लेख के माध्यम से हमने आपको भगवान श्री कृष्ण के 108 नाम (भगवान कृष्ण के 108 नाम) और 108 मंत्रों के बारे में बताया है|
ऐसा माना जाता है कि जो भक्त भगवान श्री कृष्ण की पूजा करने के बाद 108 भक्तों के साथ पूर्ण श्रद्धा का जाप करता है तो उनके उस भक्त को भगवान श्री कृष्ण की कृपा प्राप्त होती है|
श्री कृष्ण के 108 किले का जाप करने से भक्तों का सारा संकट दूर हो जाता है और श्री कृष्ण उन्हें हमेशा जीवन में सही मार्ग दिखाते हैं|

भगवान श्री कृष्ण के 108 नाम (108 Names of Lord Krishna) के साथ – साथ ही इस लेख बताए गए 108 मंत्रों का नियमित रूप से जाप करना, 108 नामों का जाप करने के समान ही है| इन 108 नामों के मंत्रों का जाप करने से भगवान श्री कृष्ण अपने भक्तों के बहुत ही प्रसन्न होते है|
भगवान श्री कृष्ण की पूजा करने से भक्तों की सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती है| जन्माष्टमी के समय श्री कृष्ण के 108 नाम एवं मंत्रों का जाप करना जातक के लिए बहुत ही लाभकारी सिद्ध होता है|
श्री कृष्ण जन्म अष्टमी तिथि का दिन हुआ था| इस कारण से भगवान श्री कृष्ण की जन्मतिथि को कृष्ण जन्माष्टमी के नाम से भी जाना जाता है|
इस दिन सभी भक्त भगवान श्री कृष्ण की पूजा करते हैं और अपने सभी मन को पूर्ण करने के लिए प्रार्थना करते हैं
कृष्ण जन्माष्टमी के दिन भगवान श्री कृष्ण की पूजा तथा श्री कृष्ण के 108 नाम (108 Names of Lord Krishna) का जाप करने से भक्तों के जीवन से सभी कठिनाइयां दूर होती है|
इसके अलावा अगर आपको शिव तांडव स्तोत्रम् [शिव तांडव स्तोत्रम], सरस्वती जी की आरती [सरस्वती आरती], या कनकधारा स्तोत्रम् पसंद हैKanakdhara Stotra] आदि भिन्न-भिन्न प्रकार की आरतियाँ, चालीसा व व्रत कथा पढना चाहते है तो आप हमारी वेबसाइट 99पंडित पर विजिट कर सकते है|
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