अधिक मास 2026: तिथियां, महत्व और दो ज्येष्ठ माह होने का कारण
अधिक मास 2026 एक अनोखी खगोलीय घटना है जिसमें हिंदू पंचांग 13 महीनों का हो जाएगा। लोग यह भी मानते हैं कि...
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आप क्या जानते हैं? आपके बच्चे का पहला निवाला बहुत खास है। यह सिर्फ पेट भरता नहीं है। यह बच्चे का भविष्य और स्वभाव भी तय करता है। हिन्दू धर्म में अन्नप्राशन एक बड़ा संस्कार है।
लेकिन क्या आप इसे किसी भी दिन कर सकते हैं? बिल्कुल नहीं। ज्योतिष के अनुसार गलत समय हानि हो सकती है।
इससे बच्चे की सेहत पर बुरा असर पड़ता है। साल 2026 में चिन्ह की स्थिति बहुत अलग है। यह समय आपके बच्चे के लिए 'अमृत' बन सकता है।
आप क्या अन्नप्राशन मुहूर्त 2026 की सही तारीख ढूंढ रहे हैं? यहां आपको लड़के और लड़कियों के लिए अलग-अलग नियम मिलेंगे।
हम आपको 'वास्तु परीक्षण' की गुप्त परंपरा भी सिखाते हैं। आइए, 99पंडित के साथ यह यात्रा शुरू करें। अपने बच्चे के लिए सबसे पहले भोजन की सलाह लें।
क्या आप अपने बच्चे के लिए सबसे अधिक छूट वाले दिन ढूंढ रहे हैं? वर्ष 2026 में कई दिन ऐसे हैं जब ग्रह-नक्षत्र बहुत अनुकूल हैं।
यहां महीनों के अनुसार अन्नप्राशन मुहूर्त 2026 की मुख्य सूची दी गई है:
| तारीख | दिन | समय अंतराल |
| 1 . मीन | गुरूवार | 07:45 - 10:23, 11:51 - 16:47, 19:01 - 22:52 |
| 5 . मीन | मस्तक | 08: 25 - 13: 00 |
| 9 . मीन | शुक्रवार | 20: 50 - 23: 07 |
| 12 . मीन | मस्तक | 14:08 - 18:18, 20:38 - 22:56 |
| 21 . मीन | जून | 07:45 - 10:32, 11:57 - 17:43, 20:03 - 22:20 |
| 23 . मीन | शुक्रवार | 15: 20 - 19: 55 |
| 28 . मीन | जून | 10: 05 - 15: 00 |
| तारीख | दिन | समय अंतराल |
| 6 फ़रवरी | शुक्रवार | 07:37 - 08:02, 09:29 - 14:25, 16:40 - 23:34 |
| 18 फ़रवरी | जून | 18: 13 - 22: 46 |
| 20 फ़रवरी | शुक्रवार | 07:26 - 09:59, 11:34 - 15:45 |
| तारीख | दिन | समय अंतराल |
| 20 मार्च | शुक्रवार | 09:45 - 11:40, 11:40 - 13:55, 13:55 - 16:14 |
| 25 मार्च | जून | 09:25 - 11:21, 13:35 - 14:20 |
| 27 मार्च | शुक्रवार | 10:37 - 11:13, 11:13 - 13:28 |
| तारीख | दिन | समय अंतराल |
| 20 सेकंड | मस्तक | 04: 35 AM - 07: 28 AM |
| 21 सेकंड | मंगलवार | 04: 15 AM - 04: 58 AM |
| 26 सेकंड | रविवार | 04: 53 AM - 08: 27 PM |
| 27 सेकंड | मस्तक | 09: 18 PM - 09: 35 PM |
| 29 सेकंड | जून | 04: 51 AM - 07: 52 PM |
| तारीख | दिन | समय अंतराल |
| 1 मिनटों | शुक्रवार | 10: 00 AM - 09: 13 PM |
| 3 मिनटों | रविवार | 07: 10 AM - 10: 28 PM |
| 5 मिनटों | मंगलवार | 07:39 अपराह्न - 05:37 पूर्वाह्न (6 मई) |
| 6 मिनटों | जून | 05: 37 AM - 03: 54 PM |
| 7 मिनटों | गुरूवार | 06:46 अपराह्न - 05:35 पूर्वाह्न (8 मई) |
| 8 मिनटों | शुक्रवार | 05: 35 AM - 12: 21 PM |
| 13 मिनटों | जून | 08:55 अपराह्न - 05:31 पूर्वाह्न (14 मई) |
| 14 मिनटों | गुरूवार | 05: 31 AM - 04: 59 PM |
| तारीख | दिन | समय अंतराल |
| 21 मिनट | रविवार | 09: 31 AM - 11: 21 AM |
| 22 मिनट | मस्तक | 06:01 पूर्वाह्न – 04:44 पूर्वाह्न (23 जून) |
| 23 मिनट | मंगलवार | 04: 44 AM - 05: 43 AM |
| 24 मिनट | जून | 09:29 पूर्वाह्न – 02:38 पूर्वाह्न (25 जून) |
| 26 मिनट | शुक्रवार | 02:46 अपराह्न - 04:45 पूर्वाह्न (27 जून) |
| 27 मिनट | शनिवार | 04: 45 AM - 05: 41 PM |
| तारीख | दिन | समय अंतराल |
| 15 नवम्बर | जून | 12: 21 - 13: 09 |
| 20 नवम्बर | मस्तक | 06:06 - 08:16, 12:49 - 15:09 |
| 24 नवम्बर | शुक्रवार | 06:08 - 08:00, 08:00 - 09:43 |
| 29 नवम्बर | जून | 09:58 - 12:14, 12:14 - 14:33 |
| तारीख | दिन | समय अंतराल |
| 3 अग | मस्तक | 09: 37 - 16: 32 |
| 5 अग | जून | 11: 46 - 18: 28 |
| 7 अग | शुक्रवार | 21: 30 - 22: 55 |
| 10 अग | मस्तक | 16: 04 - 21: 18 |
| 17 अग | मस्तक | 06:25 - 10:59, 13:18 - 17:41 |
| 26 अग | जून | 06: 27 - 10: 23 |
| 28 अग | शुक्रवार | 06: 28 - 12: 35 |
| तारीख | दिन | समय अंतराल |
| 14 सेकंड | मस्तक | 06:36 - 06:53, 06:53 - 07:37 |
| 17 सेकंड | गुरूवार | 13: 35 - 15: 39 |
| 21 सेकंड | मस्तक | 06:39 - 07:29, 08:42 - 11:01, 13:20 - 15:24 |
| 24 सेकंड | गुरूवार | 08:30 - 10:49, 13:08 - 15:12 |
| तारीख | दिन | समय अंतराल |
| 12 . वस्तु | मस्तक | 06:50 - 07:19, 11:57 - 14:01 |
| 21 . वस्तु | जून | 06:56 - 07:30, 11:22 - 13:26 |
| 26 . वस्तु | मस्तक | 06: 59 - 08: 44 |
| 30 . वस्तु | शुक्रवार | 07: 03 - 08: 27 |
| तारीख | दिन | समय अंतराल |
| 11 नवंबर | जून | 07:11 - 07:41, 09:59 - 12:03, 12:03 - 12:08 |
| 16 नवंबर | मस्तक | 07:15 - 07:21, 09:40 - 11:44 |
| तारीख | दिन | समय अंतराल |
| 14 घंटे पहले | मस्तक | 07:49 - 09:42, 11:36 - 13:03 |
| 16 घंटे पहले | जून | 07:42 - 09:46, 09:46 - 10:38 |
अन्नप्राशन का सरल अर्थ है -'अन्न की शुरुआत'। यह हिंदू धर्म के 16 संस्कारों से 7वां संस्कार है।। यह संस्कार आपके बच्चे के लिए क्यों जरूरी है? इसका मुख्य कारण नीचे दिये गये हैं:
99पंडित का सुझाव: अगर आप चाहते हैं कि आपका बच्चा उभरे और निरोगी बने, तो 2026 के इन विशेष चूहों को बिल्कुल न खोएं।
अन्नप्राशन केवल एक तिथि सूची नहीं है। यह चिह्न के खेल को इंगित करने जैसा है। क्या आप जानते हैं कि अन्नप्राशन मुहूर्त की गणना करते समय पंडित जी किन-किन बातों पर ध्यान देते हैं?
शुद्धि: पूजा प्रारंभ करते समय'एन.एन.ई' का मजबूत होना बहुत जरूरी है। यह बच्चों के भविष्य की नींव है।
चंद्रमा की स्थिति: चंद्रमा मन का कारक है। यदि चंद्रमा चौथा, नासा या बारहवें भाव में हो, तो उस समय को अशुभ माना जाता है।
पाप संकेत से बचाव: राहु, केतु और शनि की टेढ़ी नजर से बच्चे को बचाना जरूरी है। इसलिए दोष गणना ही काम आती है।
क्या आपने कभी सोचा है? कुछ विशेष नक्षत्रों की पूजा ही सफल क्यों होती है? ज्योतिष के अनुसार नक्षत्रों का प्रभाव बच्चे के स्वभाव पर पड़ता है।
Annaprashan Puja सही नक्षत्र और दिन का चुनाव इस प्रकार करें:
अन्नप्राशन केवल खाना खिलाना नहीं है। यह एक पवित्र विधि है। आपको क्या पता है? पहले निवाले में कुछ खास चीजें मिलाना जरूरी है। यहां इसकी पूरी विधि बताई गई है:
यह महोत्सव बहुत ही रोचक है। बच्चे के सामने कुछ चीज़ें राखियां बनाई जाती हैं। बच्चा जिसे पहले देखेगा, वही उसका भविष्य होगा:
आप क्या जानते हैं? एक छोटे सी कुकृत्य संस्कार का फल कम हो सकता है। अन्नप्राशन के दौरान सही समय का चुनाव करना जरूरी है, गलत समय से भी बचना चाहिए।
यहां कुछ खास बातें हैं जिन पर आपको ध्यान देना चाहिए:
भद्रा और राहुकाल का डार्: कभी भी भद्रा या राहुकाल में अन्नप्राशन न करें। शास्त्र के अनुसार, इस समय दिए गए कार्य में विघ्न आते हैं। यह बच्चों की सेहत के लिए अशुभ माना जाता है।
रिक्त तिथियों का त्याग: चौथी (चतुर्थी),वां (नवमी) और चौदहवीं (चतुर्दशी) तारीखों को 'रिक्त' माना जाता है। इनका काम अधूरा रह कर शुरू किया जा सकता है। अन्नप्राशन मुहूर्त चारित्रिक समय अनैच्छिक।
मंगलवार और रविवार: अन्नप्राशन के लिए मंगलवार को बहुत कठोर और रविवार को बहुत कठोर माना गया है। सौम्य फल के लिए सोमवार, बुधवार या गुरुवार को ही चुनें।
ग्रहण का सूतक: यदि उस दिन सूर्य या चंद्र ग्रहण हो तो सूतक काल में पूजा बिल्कुल न करें। यह नकारात्मक ऊर्जा का समय होता है।
अन्नप्राशन केवल एक पारंपरिक अनुष्ठान नहीं है। यह आपका शिशु के स्वास्थ्य, बुद्धि और उज्जवल भविष्य की पहली सीढ़ी है।
शास्त्रों के अनुसार सही समय पर पहला निवाला बच्चे के जीवन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार करता है।
याद रखें, एक छोटी सी सावधानी आपके नन्हें मेहमानों के जीवन को खुशियों से भर सकती है। 2026 के इन शुभ स्मारकों और पत्थरों का पालन करके आप अपने बच्चे को फूलों से मुक्त और भाग्यशाली बना सकते हैं।
क्या आप अपने बच्चे की राशि और शहर के अनुसार सबसे महत्वपूर्ण पात्र जानना चाहते हैं? अपनी खुशियों में देरी न करें। आज ही 99पंडित के अनुभवी-आचार्यों से संपर्क करें।
हम आपके बच्चे के लिए व्यक्तिगत अन्नप्राशन मुहूर्त 2026 की गणना करेंगे और इस पवित्र संस्कार को संपूर्ण पुस्तकालय के साथ कराएंगे।
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