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भाई दूज 2025 | Bhai Dooj 2025: कब है भाई दूज, तिथि, मुहूर्त और महत्व

जानिए भाई दूज 2025 की तारीख और महत्व, और इसे कैसे मनाएं। इस विशेष दिन को खास बनाने के उपाय और महत्वपूर्ण सूचनाएं। अधिक जानें।
99Pandit Ji
अंतिम अद्यतन:अक्टूबर 16
भाई दूज 2025
इस लेख का सारांश एआई की सहायता से तैयार करें - ChatGPT विकलता मिथुन राशि क्लाउड Grok

रक्षाबंधन के त्यौहार के भांति ही हिन्दू धर्म में एक त्यौहार और आता है| जो भी इसी त्यौहार की भांति ही भाई – बहन के अटूट रिश्ते को प्रदर्शित करता है| जिसे भारत देश में सर्वाधिक भाई दूज के नाम से जाना जाता है|

यह भाई दूज 2025 (भाई दूज 2025) के त्योहार को अलग-अलग तरह से जाना जाता है| जैसे - भाई रुका, भाई फोटा, भ्रातृ द्वितीया| इसके अलावा हिंदू धर्म में भाई दूज के इस त्योहार को यम द्वितीया के नाम से भी जाना जाता है|

भाई दूज या भैया दूज एक हिन्दू त्यौहार के रूप में मनाया जाता है| इस दिन सम्पूर्ण देश में सभी महिलाए अपने भाइयों की लम्बी उम्र की कामना करके भगवान से प्रार्थना करती है| तथा इसके बाद उपहार का आदान – प्रदान किया जाता है|

भाई दूज २०२०

धर्म ग्रंथों के अनुसार भाई दूज 2025 (Bhai dooj 2025) का यह पावन त्यौहार दिवाली के तीसरे  दिन के पश्चात ही भाई दूज का त्यौहार मनाया जाता है| भाई दूज का त्यौहार कार्तिक मास के उज्जवल पखवाड़े या फिर शुक्ल पक्ष के दुसरे दिन मनाया जाता है|

हर साल भाई दूज की तारीख अलग-अलग होती है लेकिन इस बार भाई दूज 2025 (भाई दूज 2025), 23 अक्टूबर 2025 - गुरुवार को मनाया जाएगा|

भाई दूज के इस त्यौहार का हिंदू धर्म में बहुत अधिक महत्व बताया गया है| इस दिन सभी अपने भाइयों को कुम्हार के फुल, चांदी के सिक्के और पान के पत्तों की सहायता से नौता देते हैं|

इस समय बहने यह बोलती है कि जिस प्रकार से यमुना जी ने यमराज जी को नौता था| उसी प्रकार से मैं भी अपने भाई को नौत रही हूं| इसलिए जिस प्रकार गंगा का जल बढ़ता है| उसी प्रकार मेरे भाई की आयु भी बढती रहे|

भाई दूज 2025 तिथि व शुभ मुहूर्त

आइये जानते इस वर्ष भाई दूज 2025 (Bhai dooj 2025) की तिथि और शुभ मुहूर्त क्या रहने वाला है| भाई दूज के बारे में अन्य सभी जानकारियां पाने के लिए हमारे इस लेख (Article) को पूरा पढ़े|

भाई दूज 2025 तारीख (तारीख)  23 अक्टूबर 2025, गुरुवार
भाई दूज शुभ मुहूर्त 23 अक्टूबर 2025, गुरुवार
दोपहर 01:18 बजे से दोपहर 03:40 बजे तक
कार्तिक मास शुक्ल पक्ष द्वितीया तिथि प्रारंभ 22 अक्टूबर 2025, रविवार, समय – रात्रि 08:16
कार्तिक मास शुक्ल पक्ष द्वितीया तिथि समाप्त 23 अक्टूबर 2025, गुरुवार, समय – रात्रि 10:46

 

भाई दूज क्या है ?

भाई दूज रक्षाबंधन की तरह मनाया जाने वाला एक हिंदू धर्म का ही त्योहार है| इस भाई दूज 2025 (भाई दूज 2025) का त्योहार अलग-अलग गांवों से जाना जाता है|

जैसे - भाई रुका, भाई फोटा, भ्रातृ द्वितीया| इसके अलावा हिंदू धर्म में भाई दूज के इस त्योहार को यम द्वितीया के नाम से भी जाना जाता है|

हिन्दू धर्म में भाई दूज का त्यौहार भी रक्षा बंधन (रक्षा बंधन) के त्यौहार का इतना ही महत्व है| भाई दूज का यह त्योहार का तीसरा दिन मनाया जाता है|

भाई दूज का यह त्यौहार कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की द्वितीया को मनाया जाता है| यह पर्व और बहनों के मध्य के प्रेम का विवरण है|

इस दिन सभी बहने अपने भाइयों को तिलक लगता है| उनके प्रशिक्षु को भोजनालय की परंपरा है| भाई दूज के दिन अपने भाईयों-बहनों की लंबी उम्र की कामना की जाती है|

जैसा कि हमने आपको सबसे पहले बताया था कि यह भाई दूज का त्योहार रक्षाबंधन के त्योहार के समान ही भाई और बहन के प्यार और स्नेह का प्रतीक है|

यह एक बहुत ही पवित्र त्यौहार है| जिसका सभी भाई और बहनों को बेसब्री से इंतज़ार रहता है| भाई दूज का धार्मिक महत्व भी बहुत माना गया है| भाई दूज को यम द्वितीया के नाम से भी जाना जाता है|

भाई दूज को यम देखना भी एक कारण है| धार्मिक विद्वानों के अनुसार, यमुना जी ने अपने भाई यम दूज जी को इस (भाई) के दिन पूरा आदर और सत्कार के साथ भोजन कराया था|

इस वजह से भाई दूज के इस त्यौहार को यम द्वितीया के नाम से जाना जाता है|

भाई दूज पूजा के लिए सामग्री

यह त्यौहार हर साल दो बार मनाया जाता है| एक तो होली के तीन दिन बाद मनाया जाता है भाई दूज का त्यौहार|

भाई दूज २०२०

अब हम भाई दूज का त्योहार मनभावन समय जो थाली उपयोग में लायी जाती है| अप्राकृतिक प्रयोग में होने वाली सामग्री के बारे में चर्चा करेंगे|

भाई दूज 2024 की पूजा में काम आने वाली सामग्री निम्न है –

  • सिंदूर
  • फूल
  • चावल के दाने (अक्षत)
  • सुपारी
  • पान का पत्ता
  • चांदी का सिक्का
  • कोट
  • फूल माला
  • वाणिज्य
  • कलावा
  • दूब (घास)
  • फली

भाई दूज पूजा की विधि

इस त्यौहार को भी रक्षाबंधन के त्यौहार के रूप में ही मनाया जाता है| भाई दूज का यह त्यौहार कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की द्वितीया को मनाया जाता है|

यह पर्व और बहनों के मध्य के प्रेम का विवरण है| भाई दूज के इस त्यौहार पर सभी श्रमिक अपने-अपने श्रमिकों को अपने घर बुलाते हैं और फिर अपने श्रमिकों को तिलक लगवाकर भोजन भी करवाते हैं|

इस दिन की शुरुआत प्रातः काल प्रारंभिक देवता स्नान आदि से मुक्त होकर अपने इष्ट देवता और इस संसार के पालक भगवान विष्णु की पूजा और उनकी प्रार्थना करती है|

फिर उन्हें चावलों को पीसकर उनका चौका बनाना चाहिए| और उस पर अपने भाई की चटनी को लगाया|फिर इसके बाद अपने भाई की चटनी पर चावल के चटनी को लगाया|

इसके बाद अपने भाई के हाथों पर सा सिन्दूर लगा फूल, सुपारी और कुछ पैसे आदि रख दे और अब धीरे-धीरे – धीरे-धीरे भाई के हाथों पर पानी डाला|

इसके बाद उनके भाई के मस्तक पर तिलक लगाकर उनकी आरती उतारी और फिर उनके हाथ पर कलावा अवस्या बांधे|

अब अपने भाई को मिठाई खिला कर उनका मुंह मीठा चॉकलेट| इसके बाद अपने भाई को मिठाई और उसे पान भी खिलाएं|

हिंदू धर्म में यह मान्यता है कि भाई दूज के इस त्योहार पर अगर अपने भाई को पान खिलाती है तो भाई को पान से बहन को अद्वितीय विशिष्टता की प्राप्ति होती है|

तिलक और आरती करने के बाद भाई अपनी बहन को उपहार देता है| और हमेशा अपनी बहन की रक्षा करने का वचन देता है|

पौराणिक कथाओं में कहा गया है कि इस दिन यदि बहन अपने भाई का हाथ पकड़ कर यमुना नदी में स्नान करती है तो यमराज अपने भाई की अकाल मृत्यु को टाल देते हैं|

भाई दूज से जुड़ी पौराणिक कथा और लोक कथा

इस त्यौहार से संबंधित अनेक कथाएं प्रचलित है लेकिन हम आपको आज दो सर्वाधिक प्रचलित कथाओं के बारे में बतायेंगे|

पौराणिक कथा

इस कथा के अनुसार भगवान सूर्य देव और उनकी धर्मपत्नी का नाम बताया गया है उनके दो संतते थे| पीडीएफ से एक बेटा था और दूसरी बेटी थी|

जो पुत्र था उसका नाम यम था और पुत्री का नाम यमुना रखा गया था| भगवान सूर्य देव की पत्नी उनकी तेज सहन नहीं कर पाई थी|

इस कारण से उन्होंने एक दिन अपनी छाया का निर्माण किया और उस छाया को अपने बच्चों के साथ ठीक करने के लिए वहां से चला दिया|

भाई दूज २०२०

दोनों भाई-बहन (यम और यमुना) में बहुत प्यार था| इसी के कुछ समय बाद ही यमुना से शादी हो गई| शादी के बाद भी अपने भाई को खाना खाने के लिए अपने घर बुलाया था|

लेकिन यम किसी ना किसी काम में शामिल होने की वजह से अपनी बहन (यमुना) से उसके घर नहीं मिल पाए|

एक बार कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की द्वितीया तिथि को अपनी बहन यमुना से मिलते हुए उसके घर पहुंचे| जब आपकी बहन के घर अमेरिका तो उनकी आया देखकर यमुना भी बहुत खुश हुई|

इसकी पुरानी यमुना सबसे पहले अपने भाई का आदर – सत्कार किया| और उसके बाद उसके भाई को पूरा आदर के साथ ही यमुना ने खाना भी खिलाया|

बहन के इस आदर सत्कार से खुश होकर यम ने उन्हें एक शहंशाह के रूप में कहा - उस समय यमुना ने यह वर मांगा था कि हर साल इस दिन तुम मुझसे मिलोगी।

मेरी ही भांति जो भी बहने इस दिन अपने भाई के टिका करेंगी| उन्हें तुमसे किसी भी प्रकार का भय नहीं होगा| यमराज ने यह वरदान यमुना को किया और उसे धन – धान्य देकर वापिस यमलोक चले गए|

लोक-साहित्य

लोककथा के अनुसार किस गाँव में एक वृद्ध महिला रहती थी| जो दो संतते थी| एक बेटा और एक बेटी, जो बेटी थी वो बेटों से बढ़िया थी|

जब बेटी की शादी हुई तो बेटे ने अपनी बहन से मिलने के बारे में सोचा| तब लड़के ने भी माँ से कहा कि तेरी बहन का व्यवहार तेरे साथ बिल्कुल अच्छा नहीं है| वो हमेशा ही तुझसे लड़ती रहती है|

इस वजह से उनसे मिलना नहीं चाहिए| लेकिन बेटा जाने की ही जिद करता है| तो माँ भी उसे जाने देती है|

लेकिन जब वो घर से जाने के लिए जाता है तो उसे कई साड़ी चुनौतियों का सामना करना पड़ता है| सबसे पहले एक नदी आई और उसने कहा कि मैं तेरा काल बनके आई थी| थौ मुझे समाना होगा|

लेकिन इससे बच कर वो निकल गया और फिर आगे उसको सांप भी मिला जो भी उसे मारना चाहता था| और बाद में एक शेर भी मिला लेकिन इनसे बचकर वो निकल गया| अंत में भाई अपनी बहन के घर के दरवाजे पर पहुँच गया और उसने अपनी बहन को आवाज दी|

उस समय बहन सुत कट रही थी और सुत टूट गया| मान्यता है कि बहन अपने भाई से तब तक बात नहीं कर सकती|

जब तक कि सुत को से नहीं जोड़ा जाए| अगर ऐसा हुआ तो भाई के जीवन पर संकट आ जाएगा| इसलिए भाई के गाने पर भी वह नहीं आई|

इससे भाई को भी बहुत दुख हुआ और वह स्थिर हो गई, तभी सुत के साथ जुड़ गई और वह भाग गई और अपने भाई को छोड़ गई|

उसने अपने भाई को देर से आने का कारण बताया और उसे अंदर ले लिया और उसके लिए खाना बनाया और उसे बेच दिया|

भाई दूज का महत्व

भाई दूज या भैया दूज एक हिन्दू त्यौहार के रूप में मनाया जाता है| इस दिन सम्पूर्ण देश में सभी महिलाएं अपने भाइयों की लम्बी उम्र की कामना करके भगवान से प्रार्थना करती है| भाई दूज रक्षाबंधन की ही तरह मनाया जाने वाले एक हिन्दू धर्म का ही त्यौहार है|

इस भाई दूज 2025 (भाई दूज 2025) का त्योहार अलग-अलग गांवों से जाना जाता है| इसके अलावा हिंदू धर्म में भाई दूज के इस त्योहार को यम द्वितीया के नाम से भी जाना जाता है|

हिंदू धर्म में भाई दूज का त्योहार भी रक्षाबंधन (रक्षा बंधन) के त्योहार के समान ही महत्व रखता है|

सनातन धर्म में यह मान्यता है कि भाई दूज के इस त्यौहार पर अगर अपने भाई को पान खिलाती है तो भाई को पान खिलाने से बहन को अनोखी प्रतिभा की प्राप्ति होती है|

इस दिन सभी अपने भाइयों को कुम्हार के फुल, चांदी के सिक्के और पान के पत्तों की सहायता से नौता देते हैं|

इस समय दस्तावेज़ में कहा गया है कि जिस प्रकार से यमुना जी ने यमराज जी को नौता दिया था| उसी प्रकार से मैं भी अपना भाई नौट रही हूँ| इसलिए जिस प्रकार गंगा का जल बहुत बड़ा है|

वही प्रकार मेरे भाई की आयु भी बढ़ रही| यमुना के तट पर भाई और बहन का समवेत भोजन बहुत ही छोटा माना जाता है|

अनुमान

आज हमने इस आर्टिकल के माध्यम से भाई दूज के बारें में काफी बाते जानी है| आज हमने भाई दूज पूजन के फ़ायदों के बारे में भी जाना| हम उम्मीद करते है कि हमारे द्वारा बताई गयी जानकारी से आपको कोई ना कोई मदद मिली होगी|

इसके अलावा भी अगर आप किसी और पूजा के बारे में जानकारी लेना चाहते है। तो आप हमारी वेबसाइट 99पंडित पर जाकर सभी तरह की पूजा या त्योहारों के बारे में सम्पूर्ण जानकारी ले सकते है|

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