श्रावण पूर्णिमा 2026: तिथि, समय, पूजा विधि और महत्व
श्रावण पूर्णिमा 2026 शुक्रवार, 28 अगस्त, 2026 को पड़ रही है। यह पूर्णिमा का दिन है जो…
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धनतेरस 2026: दीपावली के एक या फिर दो दिन पहले धनतेरस का त्यौहार मनाया जाता है| हिंदू धर्म में पांचवे दिन के इस दीप पर्व की शुरुआत वो धनतेरस से ही होती है|
धनतेरस के त्योहार को धनत्रयोदशी के नाम से भी जाना जाता है| हिंदू धर्म के लोगों के लिए इस त्योहार का कुछ नया सामान भी बहुत शुभ माना जाता है|
धनतेरस या धन त्रयोदशी का त्यौहार कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि को मनाया जाता है| धनतेरस को पांचवां त्योहार का पहला दिन माना जाता है|

यह त्यौहार पूरे भारत देश में बहुत ही उत्साह और धूमधाम से मनाया जाता है| धनतेरस के दिन माता लक्ष्मी, भगवान गणेश और भगवान कुबेर जी की पूजा की जाती है|
धनतेरस की माता लक्ष्मी और कुबेर जी की पूजा करने से वित्तीय समृद्धि को बढ़ावा मिलता है| तथापि उस व्यक्ति को कभी भी, किसी भी तरह की आर्थिक परेशानी का सामना नहीं करना पड़ता|
हिंदू धर्म के लोग इस दिन को अच्छा भाग्य चाहते हैं ही धनतेरस के दिन सोने और चांदी को आदर्श मानते हैं| पौराणिक पौराणिक कथाओं के अनुसार इस दिन सोना और चाँदी और अन्य प्रकार की नई वस्तुएँ लेने से घर में सुख और समृद्धि बढ़ती है|
महान ज्योतिषियों के धनतेरस 2026 पर संकेत की स्थिति के लिए बड़े समय के लिए वित्तीय वर्ष और किसी भी संपत्ति को प्राप्त करने के लिए बहुत ही शुभ मणि प्राप्त होती है|
इस साल धनतेरस 2026 का त्योहार 6 नवंबर 2026 को मनाया जाएगा| और इसके 2 दिन बाद ही दीपावली का त्यौहार मनाया जाता है|
धनतेरस 2026 का दिन घर, गाड़ी, सोना-चांदी जैसी महत्वपूर्ण और अनमोल वस्तुओं के लिए बहुत ही शुभ माना जाता है|
किसी भी त्यौहार को मनाने की तिथि और उसके अनुष्ठानों के साथ संपूर्ण रीति-रिवाजों के बारे में भी जानना बहुत जरूरी है|
अगर हम बात करें धनतेरस या धन त्रयोदशी के त्योहार की तो इस दिन खरीदारी के लिए शुभ त्योहार के बारे में भी जानना जरूरी है|
इस वर्ष धनतेरस 2026 का त्यौहार 6 नवंबर 2026 को मनाया जायेगा| तथा इसके 2 दिन बाद ही (दीपावली) का त्योहार त्यौहार मनाया जाता है|
इसके अलावा धनतेरस या धन त्रयोदशी का त्योहार कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि को मनाया जाता है|
त्रयोदशी तिथि प्रारंभ: 6 नवंबर 2026 दोपहर 10:30 बजे से
त्रयोदशी तिथि समाप्त: 7 नवंबर 2026, रात 10:47 बजे तक
धनतेरस पूजा महोत्सव: शाम 06:35 बजे से शाम 08:35 बजे तक
प्रदोष काल: शाम 06:03 बजे से शाम 08:35 बजे तक
वृषभ काल: शाम 06:35 बजे से शाम 08:35 बजे तक
दीपावली के त्यौहार से पहले धनतेरस की पूजा का बहुत बड़ा महत्व माना गया है| इस दिन भगवान गणेश जी, माता लक्ष्मी जी और धन के देवता कुबेर भगवान की पूजा की जाती है|
धनतेरस शब्द का अर्थ यह है कि इस दिन अपने धन को त्रैमासिक बनाने और धन में वृद्धि करने के लिए लोग माता लक्ष्मी, भगवान गणेश और कुबेर जी की पूजा करते हैं|
माना जाता है कि इसी दिन भगवान धन्वंतरि का भी जन्म हुआ था| जो कि समुद्र मंथन के समय अमृत का कलश और आयुर्वेद भी साथ ही लेकर आए थे|

यही कारण है कि भगवान धन्वंतरि को औषधियों के रूप में भी जाना जाता है धनतेरस 2026 का त्यौहार प्रत्येक कार्तिक वर्ष मास के कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि को मनाया जाता है|
इस दिन को सोने और चांदी के पोर्शनर्स बहुत ही शुभ माना जाता है| साथ ही इस दिन मेटल के दुकानदारों को भी बहुत अच्छा माना गया है| धनतेरस में धन का अर्थ समृद्धि और तेरस का अर्थ तीर्थ से होता है|
इस दिन माँ लक्ष्मी की पूजा करने से सुख – समृद्धि और धन की प्राप्ति होती है| धनतेरस के दिन के बाद से ही एक दिन की शुरुआत हो जाती है|
लक्ष्मी माता को घर में आमंत्रित करने के लिए घर के मुख्य द्वार पर उनके पूर्वजों की पदश्रृंखला बनाई जाती है| इसके बाद शाम को कुल 13 दीपक जलाए जाते हैं माता लक्ष्मी जी की पूजा की जाती है|
धनतेरस के दिन सोने और चांदी के लिए सबसे पसंदीदा खरीदार शुभ माना जाता है| इसके अलावा जमीन, कार, निवेश और किसी भी व्यापार की नई शुरुआत के लिए यह दिन बहुत शुभ माना जाता है|
हिन्दू धर्म में प्रत्येक त्यौहार को साभार के पीछे कोई ना कोई कारण नहीं माना जाता है भारतीय संस्कृति में स्वास्थ्य को धन के कई ऊपर माना गया है|
इसलिए एक कहावत यह भी है कि पहला सुख निरोगी काया, दूसरा सुख घर में माया' इसलिए धनतेरस को सबसे पहले बहुत महत्व दिया जाता है|
धनतेरस को मान्यता के पीछे बहुत सारी पौराणिक कथाएं चली आ रही हैं| जिसके बारे में हम आपको आज बताएंगे|
एक बहुत ही पुरानी कथा के अनुसार समुद्र मंथन के समय कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि को भगवान धन्वंतरि अपने हाथों में अमृत का कलश लेकर प्रकट हुए थे|
पौराणिक कथाओं के अनुसार भगवान विष्णु ने चिकित्सा विज्ञान के विस्तार के लिए ही भगवान धन्वंतरि का अवतार लिया था| उदाहरण के लिए भगवान और देवताओं का वैद्य भी कहा जाता है|
भगवान धन्वंतरि की पूजा करने से आरोग्य सुख मिलता है| ये ही दो दिन समुद्र तट माता लक्ष्मी जी की मूर्ति थी| जिस दिन का त्योहार मनाया जाता है|
धनतेरस का त्योहार भगवान विष्णु के वामन अवतार से बहुत गहरा संबंध है| क्योंकि इस दिन गोकू विष्णु देवताओं को राजा बलि के भय से मुक्ति दिलाने के लिए वामन अवतार में जन्म लिया गया था|
भगवान वामन ने राजा बलि से तीन पग भूमि ली थी खाली| तब भगवान वामन ने पहले पग में धरती, दूसरे में आकाश नाप दिया| जब तीसरा पैर रखने के लिए कोई स्थान नहीं बचा तो राजा बलि ने अपने सिर पर उनका पैर रखवा लिया|
जहां राजा बलि पाताल लोक में चले गये थे| ऐसे ही भगवान वामन ने देवताओं को राजा के भय से मुक्ति दिलाई और उन्हें उनकी खोई हुई संपत्ति भी वापस मिल गई|
इस प्राचीन कथा के अनुसार उस समय एक हेम नाम का राजा था| रानी की एक बेटी हुई| इस बच्चे के जन्म के समय ही ज्योतिषियों ने बताया था कि जब इस बच्चे की शादी होगी तो शादी के चौथे दिन ही इसकी मृत्यु होगी|
अपने संत की मृत्यु के भय के कारण राजा ने उस बालक को गुफा में ब्रह्मचारी के रूप में रख दिया एक दिन महाराज हंस की पुत्री यमुना नदी के तट पर घूम रहे थे|
तभी उसने राजा हेमू के पुत्र को देखा| जिसे देखकर वह काफी आकर्षित हुई| और उससे गंधर्व विवाह कर लिया|
इसके बाद में वही हुआ जो कि भविष्यवाणी की गई थी| यमराज ने इस अकाल मृत्यु से बचने के लिए धनतेरस की पूजा की पूरी विधि विधान से करना बताया है|
हिन्दू धर्म के मतानुसार भगवान धन्वंतरि की धातु अधिक प्रिय है| इसलिए इस दिन को प्लास्टिक के खरीदार बहुत ही शुभ माना जाता है|
इस दिन सोने के अलावा भी चांदी के सामान के साथ-साथ चांदी के सामान भी खरीदे जा सकते हैं सोने और चांदी से बनी हुई पुराने घर में आने से घर में आरोग्यता और समृद्धि का भी आगमन होता है|
इस दिन घर में खरीदारी की दुकान भी बहुत अच्छी मानी जाती है| बौद्ध धर्म को माता लक्ष्मी का प्रतीक माना जाता है| इसलिए बुज़ुर्गों के घर आने से घर में लक्ष्मी जी का आगमन होता है|

धनतेरस के दिन लोग नए – नए सामान का मानक है लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि इस दिन कुछ भी सामान खरीदा जा सकता है | कुछ सामान ऐसे भी होते हैं जिनमें शामिल है माता लक्ष्मी के भक्तों से नाराज़गी.
सिद्धांत यह है कि धनतेरस के दिन चीनी या मिट्टी के बर्तन और लोहे का सामान नहीं खरीदा जाना चाहिए| लोहे को शनिदेव का कारक माना जाता है| जो कि अशुभ है|
पौराणिक मान्यताओं के अनुसार समुद्र मंथन के समय भगवान धन्वंतरि धनतेरस के दिन अपने हाथो मे अमृत कलश लेकर दिखे थे.
धनतेरस के दिन हम धन्वंतरि देव, लक्ष्मी जी और कुबेर देव की पूजा करते हैं। धनतेरस के दिन कुबेर देव की विधिपूर्वक पूजा करने से घर में धन की कमी नहीं होती है।
इस दिन हम अपने घर को तरह-तरह की डिजाइन वाली लाइट और दीयों से घर को सजाते हैं। कंपनी को भी पसंद-तरह की प्रियजन डिजाइन वाली लाइटों से सजाते हैं|
लाइटों से गहनों के बाद बाजार जगमगा उठता है। धनतेरस के पहले से ही घर की साफ-सफाई करें। धनतेरस के दिन सोने चांदी के आभूषण और पाइक्रो की खरीदारी करना बहुत शुभ बताया गया है|
लक्ष्मी माता को घर में आमंत्रित करने के लिए घर के मुख्य द्वार पर उनके पूर्वजों की पदश्रृंखला बनाई जाती है|
इसके बाद शाम को कुल 13 . दीपक माता लक्ष्मी जी की पूजा कैसे की जाती है? धनतेरस के दिन सोने और चांदी के लिए सबसे पसंदीदा खरीदार शुभ माना जाता है|
धनतेरस के दिन अक्षत अवश्य खरीदें इससे मां लक्ष्मी की कृपा बनी रहती है और घर में भी धन की वृद्धि होती है।
धनतेरस के दिन 11 गोमेद इस गोमेद चक्र की पूजा करनी चाहिए। इसके बाद एक पीला वस्त्र में स्टॉक में रख दिया गया।
इससे घर में किताबें आती हैं। और घर के लोग निरोगी रहते हैं। धनतेरस के दिन श्री यंत्र खरीद कर घर में लाये।
किसी भी तरह की पूजा करने के लिए हमें बहुत सारी तैयारियां करनी होती है| गावों में पूजा आसानी से हो जाती है लेकिन शहरों में लोगों के पास समय की कमी होती है|
जिस वजह से वह लोग पूजा नहीं करवा पाते है तो उनकी इस समस्या का समाधान हम लेकर आये है 99पंडित के साथ|
यह सबसे बेहतरीन प्लेटफार्म है जिससे आप किसी पूजा के लिए ऑनलाइन पंडित जी को बुक कर सकते है| आज हमने इस लेख के माध्यम से धनतेरस के बारे में काफी बाते जानी है|
आज हमने धनतेरस पूजन के फ़ायदों के बारे में भी जाना| हम आशा करते हैं कि हमारी द्वारा दी गई दी गई जानकारी से आपको कोई ना कोई मदद मिलेगी|
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