जर्मनी में रुद्राभिषेक पूजा के लिए पंडित: लागत, लाभ और विवरण
जर्मनी में रुद्राभिषेक पूजा करना प्रवासी भारतीयों के लिए भगवान शिव का दिव्य आशीर्वाद प्राप्त करने का एक शक्तिशाली तरीका है...
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दिवाली 2026 तिथि: हमारे इस भारत में कई संप्रदाय के लोग रहते हैं। आज हम हिंदू धर्म के त्योहार के बारे में बात करेंगे। ऐसे तो हिंदू धर्म में बहुत सारे त्यौहार आते हैं।
अ दीपावली 2026 का त्यौहार हिन्दू धर्म के साथ-साथ पूरे भारत देश में बहुत ही हर्षोल्लास और खुशहाली के साथ मनाया जाता है। दीपावली को कई लोग दीवाली के नाम से भी जानेंगे।
नए साल का त्यौहार भी इसी तरह मनाया जाता है। दीपावली का त्यौहार धार्मिक दृष्टि से देखा जाए तो इसे भी हिंदू धर्म के लोगों के लिए बहुत महत्वपूर्ण माना जाता है। इस दिन सभी अपने घर में दीपक जलाते हैं।

दीपावली 2026 (दिवाली 2026) का त्यौहार बड़े – बड़े शहरों से लेकर छोटे – छोटे गाँवों में भी मनाया जाता है | इस दिन गाँवों में अपने घर के सामान के लिए भी कई साड़ी चीज़ें मिलती हैं।
जब गांव के हर घर में दीपक जलता है| तो उन सारे दीपकों की रोशनी से पूरा गाँव ही जगमगा जाता है।
दीपावली के दिन भगवान श्री राम ने अपना वनवास समाप्त कर रावण का वध करके अपनी अयोध्या नगरी में वापस आ गए थे।
इसलिए इस दिन संपूर्ण भारत और सनातन धर्म में दीपावली (दीवाली) के रूप में मनाया जाता है। प्रकाश व प्रकाश का त्यौहार भी कहा जाता है।
इस दिन को बुराई पर विजय के पर्व के रूप में भी मनाया जाता है। दिवाली 2026 का त्यौहार धनतेरस के दिन से प्रारम्भ होता है और भाई दूज का दिन ख़त्म हो जाता है.
हिंदू धर्म के पंचांग के अनुसार दीपावली का यह त्योहार हर साल कार्तिक मास के 15वें दिन को मनाया जाता है। इस वर्ष दीपावली का यह पवित्र त्यौहार 08 नवम्बर 2026 को मनाया जायेगा।
| तारीख | समय |
| दिवाली 2026 तिथि | 08 सितंबर 2026 |
| लक्ष्मी पूजा मुहूर्त | 06:27 PM से लेकर 08:27 PM तक |
| प्रदोष काल | 06:02 PM से लेकर 08:34 PM तक |
| वृषभ काल | 06:27 PM से लेकर 08:27 PM तक |
| अमावस्या तिथि का आरंभ | 08 नवंबर 2026, प्रातः – 11:27 बजे से |
| अमावस्या तिथि समाप्त | 09 नवंबर 2026, दोपहर - 12:31 बजे तक |
दीपावली के साथ अन्य भी कई सारे त्यौहार भी आते है जैसे – दीपदान, धनतेरस, गोवर्धन पूजा, तथा भाई दूज। यह त्यौहार पूरे सप्ताह चलने वाला सुप्रसिद्ध त्यौहार है।
यह त्यौहार कार्तिक मास के 15वें दिन दुर्भाग्यवश मनाया जाता है। अगर हम बात करें कि इस दीपावली का त्योहार क्यों मनाया जाता है तो इसकी कई कथाएं प्रचलित हैं, लेकिन जिस कथा के बारे में लोग जानते हैं वह भगवान श्री राम के हैं। १२ साल वनवास के आगमन की कथा है।
इसके अलावा और भी कुछ है। आपको पता नहीं है और हम आज इस लेख के माध्यम से उन सभी सिद्धांतों के बारे में जानना चाहेंगे। जिसके बारे में आपको पता नहीं है –
वाल्मिकी जी की किताब रामायण में बताया गया है कि जब भगवान श्री राम ने रावण का वध किया था और अपनी पत्नी सीता को बचाकर अपने भाई लक्ष्मण के साथ अयोध्या बंद कर दिए थे। उस दिन पूरे नगर के सभी घरों में दीपक जल रहे थे।
ऐसा माना जाता है कि उस दिन अयोध्या नगरी के दीयों से जगमगा निकला था। भगवान श्री राम के वनवास पूर्ण होने पर ही यह पर्व मनाया जाता है।
इस दिन हर गांव में दीपक जलाए गए थे। तब से ही ब्लैकआउट पर विजय का पर्व भी माना जाता है।
ऐसा माना जाता है कि इस दिन भगवान श्री कृष्ण ने अपनी पत्नी सत्यभामा की सहायता से राक्षस हेलासुर का अंत किया था। इस असुर को किसी महिला के हाथ ही देर का श्राप मिला था।
उस दिन कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि थी। हेलासुर के आतंक से मुक्ति की खुशी में वहां के लोगों ने दीपोत्सव मनाया था। जिसके अगले दिन दीपावली का त्यौहार मनाया जाता है।
आपकी जानकारी के लिए बता दें कि भगवान श्री राम के ही पांडवो को भी अज्ञातवास के कारण अपना राज्य सौंपा गया था।
उनकी पुनः वापसी घर पुरी हस्तिनापुर में दीपो द्वारा की गई थी। तब से ही दीवाली की शुरुआत हुई.
इस त्यौहार से जुड़ी एक कथा यह भी है कि समुद्र तट के समय माता लक्ष्मी ने पृथ्वी पर अवतार लिया था|
माता लक्ष्मी जी को धन और ऐश्वर्य प्रदान करने वाली देवी के रूप में भी जाना जाता है| इसी वजह से हर घर में दीपक जलने के साथ-साथ माता लक्ष्मी पूजा की जाती है|
एक कथा के अनुसार माता पार्वती ने किसी असुर का वध करने के लिए जब महाकाली को रूप धारण किया तो उनके वध के बाद भी माता पार्वती का क्रोध शांत नहीं हो रहा था|
तब माता पार्वती के क्रोध को शांत करने के लिए भगवान शिव माता पार्वती के चरण में आ गए थे| उस समय भगवान शिव के स्पर्श से ही पार्वती माँ का क्रोध शांत हो गया था|
इसी कारण से दीपावली के दिन उनके शांत रूप माता लक्ष्मी की भी पूजा की जाती है| इसके अलावा इस दिन रात को माता काली की पूजा का भी विधान माना गया है|
| वस्तु | मात्रा |
| रोली | 1 पैकेट |
| कलावा (मौली) | 2 नग |
| सिंदूर | 1 पैकेट |
| लोंग | 1 पैकेट |
| प्रतीक | 1 पैकेट |
| सुपारी | 4 नग |
| जनेऊ | 4 नग |
| एक | 1 शीशी |
| इत्र | 1 शीशी |
| गंगाजल | 1 शीशी |
| पानी वाला नारियल | 1 नग |
| पीला कपड़ा | 2 मिनट |
| धूपबत्ती | 1 पैकेट |
| रुई बत्ती लंबी वाली | 1 पैकेट |
| रुई बत्ती गोल बत्ती | 1 पैकेट |
| चोट | 500 मिनट |
| सरसो का तेल | 500 मिनट |
| दियाली | 1 नग |
| सकोरा | 10 नग |
| कमल बीज | 11 नग |
| पंचमेवा | 200 मिनट |
| धान की खील | 200 मिनट |
| धान का चूरा | 200 मिनट |
| खील खिलोने | 200 मिनट |
| लक्ष्मी गणेश प्रतिमा | - |
| लक्ष्मी यंत्र | 1 नग |
| भगवान के वस्त्र एवं आसान | - |
| पंचामृत की व्यवस्था पहले से निर्माण करे | - |
| माचिस | 1 नग |
| कूपर | 1 पैकेट |
| फल (अनार सरीफा विशेष एवं अन्य फल) | - |
| मिष्ठान | आवश्यकतानुसार |
| फूल माला | - |
| फूल खुले | 20 रु |
| पान पते | 5 नग |
| कमलो | आवश्यकतानुसार जो वर्षभर प्रयोग कर सके |
| नौवीं (कॉपी एवं किताब आवश्यकतानुसार) | - |
| वस्तु | मात्रा |
| माचिस | 1 पैकेट |
| गोमती चक्र | 5 नग |
| कोढ़ी | 11 नग |
| खड़ी धनिया | 50 मिनट |
| सुपाड़ी | 11 नग |
| कमल बीज | 11 नग |
| सांझ का | 11 नग |
| चांदी अथवा स्वर्ण सिक्का | 3 नग |
| पोटली | 1 नग |
माता लक्ष्मी जी का आह्वान करें| माँ लक्ष्मी को धन देवी भी कहा जाता है| जो भी दीपावली के दिन माता लक्ष्मी की सच्ची श्रद्धा से प्रार्थना करता है|
उन्हें उनकी कृपा अवश्य प्राप्त होती है| उनका कोटेशन अनुरोध प्राप्त करने के लिए आप इस निम्न मंत्र का जाप कर सकते हैं -
|| ॐ ह्रीं श्रीं लक्ष्मीभ्यो नमः॥ ॐ श्रीं ह्रीं श्रीं कमले कमलालये मुझ पर दया करें दया करें ॐ श्रीं ह्रीं श्रीं महालक्ष्मी
इस मंत्र का दीपावली के दिन 108 बार जप करने से माता लक्ष्मी का आशीर्वाद मिलता है|

दिवाली 2026 की पूजा के दौरान हमें निम्न बातो का पता होना चाहिए जैसे की –
नए साल का त्योहार भी इसी तरह मनाया जाता है| दीपावली का त्योहार धार्मिक दृष्टि से देखा जाए तो इसे भी हिंदू धर्म के लोगों के लिए बहुत महत्वपूर्ण माना जाता है
इस दिन सभी अपने घरों में दीपक जलाते है| दीपावली का त्यौहार बड़े – बड़े शहरों से लेकर छोटे – छोटे गाँवों में भी मनाया जाता है| इस दिन गाँवों में अपने पालतू जानवरों के लिए भी कई सारी वस्तुएं खरीदी जाती है|

दिवाली के दिन जब गाँव के प्रत्येक घरों में दीपक जलते है| तो उस सारे दीपों की रोशनी से पूरा गांव ही जगमगा जाता है| दिवाली का त्यौहार धनतेरस के दिन प्रारम्भ होता है और भाई दूज के दिन समाप्त हो जाता है|
हिन्दू धर्म के पंचांग के अनुसार दीपावली 2026 का यह पावन त्यौहार प्रत्येक वर्ष में कार्तिक मास के 15वें दिन दुर्भाग्यशाली को मनाया जाता है|
प्रकाश व प्रकाश का त्यौहार भी कहा जाता है| इस दिन को बुराई के रूप में भी मनाया जाता है
आज हमने इस आर्टिकल के माध्यम से दीपावली 2026 के बारें में काफी बाते जानी है| आज हमने दीपावली 2026 (Deepawali 2026) पूजन के फ़ायदों के बारे में भी जाना| हम उम्मीद करते है कि हमारे द्वारा बताई गयी जानकारी से आपको कोई ना कोई मदद मिली होगी|
इसके अलावा भी अगर आप किसी और पूजा के बारे में जानकारी लेना चाहते है। तो आप हमारी वेबसाइट 99पंडित पर जाकर सभी तरह की पूजा या त्योहारों के बारे में सम्पूर्ण जानकारी ले सकते है|
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