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Dussehra 2025 (Vijayadashami): समय,पूजा विधि व महत्व

दशहरा 2025 को हर्षोल्लास और भक्ति के साथ मनाएँ। इस त्यौहार की तिथि, इतिहास, महत्व और परंपराओं के बारे में जानें। और जानें!
99Pandit Ji
अंतिम अद्यतन:सितम्बर 30, 2025
दशहरा 2025
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दशहरा 2025: यह पृथ्वी को देवों की जन्म भूमि के रूप में भी जाना जाता है| यहां पर अनेकों देवी-देवताओं ने जन्म लिया और दुष्टों का अंत करके लोगों को धर्म और अच्छाइयों के मार्ग पर चलना सिखाया| इसके अलावा कई बार राक्षसों के संहार के लिए भी देवताओं ने इस पृथ्वी पर अवतार लिया है|

आओ विजयादशमी दशहरा 2025 (Dussehra 2025) भारत देश में अलग-अलग जगहों पर इसे बड़े ही धूमधाम से मनाया जाता है| यह त्यौहार हिन्दू संस्कृति में शौर्य और वीरता का प्रतीक माना जाता है|

दशहरा 2025

आस्था के अनुसार दशहरा 2025 या विजयादशमी 2025 (Vijayadashami 2025)का त्यौहार आश्विन मास की शुक्ल दशमी को यह पावन पर्व मनाया जाता है|

लोगों को अपने धर्म के प्रति जागरूक करने और उन्हें धर्म के मार्ग लाने के लिए दशहरा का त्यौहार मनाया जाता है| इस दिन बुराई पर अच्छाई की जीत यानी भगवान श्री राम ने इस दिन रावण का वध किया था|

इसलिए दशहरा या विजयादशमी का त्यौहार सत्य की विजय के रूप में मनाया जाता है| इसलिए इस दशमी को विजयादशमी के रूप में मनाया जाता है|

दशहरा का त्यौहार वर्ष में आने वाली तीन बहुत ही शुभ तिथियों में से एक माना जाता है| इस वर्ष विजयादशमी का त्यौहार 02 सेकंड 2025, गुरुवार को मनाया गया|

दशहरा के दिन आपके जीवन में नए-नए कार्य की शुरुआत होती है| इस दिन शस्त्रों और सामुहिक की भी पूजा की जाती है|

पौराणिक काल में राजा-महाराजा विजयादशमी के दिन युद्ध में विजय प्राप्त करने के लिए प्रार्थना करते थे कि वे भी युद्ध में ही जायें।

दशहरा 2025 का त्यौहार मनुष्य को दस प्रकार के पाप - क्रोध, काम, लोभ, मोह मद, व्यवहार, आलस्य, मत्सर, चोरी और हिंसा को त्यागने के लिए प्रेरित करता है|

दशहरा 2025 शुभ मुहूर्त व तिथि – Dussehra 2025 Shubh Muhurat

प्रभारी  समय  
विजय मुहूर्त  दोपहर 02:02 से दोपहर 02:50 तक
अपराह्न पूजा समय  दोपहर 01:14 से दोपहर 03:37 तक 
दशमी तिथि का आरंभ  01 अक्टूबर 2025, शाम 07:01
दशमी तिथि समाप्त  02 अक्टूबर 2025, शाम 07:10
श्रवण नक्षत्र प्रारम्भ  02 अक्टूबर 2025, सुबह 09:13
श्रवण नक्षत्र समाप्त  03 अक्टूबर 2025, सुबह 09:34
रावण दहन समय  दोपहर 03:35 से दोपहर 04:22 तक

 

विजयादशमी (दशहरा) 2025 क्या है - दशहरा 2025 क्या है

दशहरा शब्द की उत्पत्ति 'डैश' (दस) तथा 'अहं' से बताया गया| प्राचीन दंतकथाओं के अनुसार दशहरे को कृषि उत्सव भी कहा जाता है|

हिंदू धर्म में दशहरा का एक अलग सांस्कृतिक प्रभाव भी माना जाता है जैसा कि आप सभी लोग जानते हैं कि भारत एक कृषि प्रधान देश के रूप में भी जाना जाता है

जब भी किसान अपने खेत में फसल उगाता है| और जब वह अनाज घर लाता है तो उसे बहुत खुशी होती है|

नवरात्रि  के त्यौहार में दुर्गा माँ का महिषासुर के साथ में देवी माँ के साहसपूर्ण युद्ध के बारे में बताया गया है| तथा अगले दिन दशमी को भगवान श्री राम ने रावण का वध किया था| रावण भगवान श्री राम की पत्नी माता सीता का अपहरण करके अपनी लंका नगरी में ले गया था|

भगवान श्री राम देवी माँ दुर्गा के बहुत बड़े उपासक थे| वेदों के अनुसार माना जाता है कि रावण से युद्ध करने से पहले श्री राम ने नौ दिनों तक देवी दुर्गा मां की पूजा की थी|

उनके बाद दसवें दिन ही प्रभु श्री राम ने राक्षस रावण का वध किया था| इसी वजह से दशहरा 2025 (Dussehra 2025) बहुत ही महत्वपूर्ण दिन है|

भगवान श्री राम द्वारा की गई बुराई पर विजय पाने के लिए इस दिन को विजयादशमी के नाम से भी जाना जाता है|

यहां सभी लोग अपने परिवार और दोस्तों के साथ घूमने के लिए आते हैं| इस दिन श्री राम जी रामायण का नाट्य रूप में आयोजन भी किया जाता है|

अंत में दशमी के दिन रावण को भगवान श्री राम ने जला दिया| दशहरा पर अशुभ की जीत का प्रतीक है|

क्यों मनाया जाता है दशहरा का त्यौहार – Why is the festival of Dussehra celebrated?

दशहरा 2025 (Dussehra 2025) का त्योहार आ जाता है| हिंदू धर्म के अनुसार दशहरा का त्योहार बुराई, अच्छाई की विजय का प्रतीक है|

यह दशहरा का त्यौहार हिंदू पंचांग के अनुसार दशहरा या विजयादशमी का त्यौहार आश्विन मास की शुक्ल दशमी को यह त्यौहार मनाया जाता है|

मेले में रामायण का नाटकीय रूप से आयोजन किया जाता है| इस दिन रावण को जलाने का भी प्रोविजन बताया गया है|

दशहरा 2025

इस दिन भगवान श्री राम ने लंकापति रावण का वध किया था| दशहरा के पीछे कारण केवल रावण का वध करना ही नहीं है|

इसके अलावा दशहरा 2025 (विजयदशमी 2025) के बारे में भी आज हम चर्चा करेंगे।

दशहरा के पीछे उनकी भी कहानियाँ मिसाल हैं| उनमें से तीन सबसे मुख्य कहानियाँ हैं| जिसके बारे में आज हम आपको बताएंगे|

  • वाल्मीकि जी के द्वारा रचित रामायण के अनुसार बताया गया है कि भगवान श्री राम ने अश्विन मास के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि से लेकर नवमी तिथि तक माँ दुर्गा की पूजा की थी| इसके पश्चात ही देवी दुर्गा माँ के आशीर्वाद से ही दशमी तिथि को भगवान श्री राम ने लंकापति रावण का वध किया|
  • दूसरी पौराणिक कथा के अनुसार इस समय माँ दुर्गा और राक्षस महिषासुर के बीच पूरे नौ दिनों तक युद्ध चल रहा था| इसके बाद दसवें दिन मां दुर्गा ने राक्षस महिषासुर का वध किया था| नौ दिन तक युद्ध चलने के कारण दशहरे से पहले नौ दिनो को नवरात्रि के नाम से भी जाना जाता है|
  • एक पौराणिक कथा यह भी कहती है कि इस दिन पांडवों को वनवास हुआ था और बताया जाता है कि इस दिन ही इनके वनवास की तिथि भी समाप्त हुई थी|

पूजन सामग्री - दशहरा 2025 पूजन सामग्री

  • दशहरा प्रतिमा
  • गाय का गोबर
  • चाँद
  • तिलक
  • मौली
  • फूल
  • नवरात्रि के उगाए गए जौ
  • मूल
  • केले
  • ग्वार फली
  • गुड
  • खीर – पूरी
  • व्यापार के बहीखाते

दशहरा पूजन की विधि – दशहरा पूजा विधि 2025

इस दिन सुबह-सुबह सबसे पहले रावण की पूजा की जाती है| क्योंकि रावण सबसे बड़ा विद्वान और एक ब्राह्मण था, क्योंकि रावण का दहन करने से पहले उसकी पूजा की जाती है|

रावण की पूजा करने से स्नान आदि करके स्वयं को स्पष्ट - सुथरा कर ले| साथ ही अपने घर को भी महान से साफ कर ले|

दशहरा के दिन अपने घर को अच्छे से गेंद के फूल और आम के साथ सजाना चाहिए| आम के डॉक्टर को घर के मुख्य द्वार पर भी ले जाना चाहिए|

घर की सजावट अच्छे से कर लेने के बाद स्वयं भी अच्छी और अच्छी पोशाक धारण करे| इस पुरुष को भी साफ़ करें - सुथरे वस्त्र ही खरीदें|

दशहरे की पूजा परिवार के सभी सदस्यों को एक साथ शामिल करना चाहिए| इसके अलावा गोबर की सहायता से रावण बनाया| फिर गोबर की ही सहायता से 10 गोले बनाइए|

उन गोलों को ऐसी आकृति दे कि वह बिल्कुल रावण के मुख की आकृति के समान ही देखें| इसके बाद बनाई गई रावण की मूर्ति के ऊपर सिक्का भी चढ़ाये|

इस रावण को दही और व्यापारी को दिखाने का विधान है| नवरात्रि की पूजा में उपयोग के लिए लाएं जरा ही रावण की पूजा में काम मिलता है|

इसके बाद रावण की दीपक पूजा की जाती है| रावण की पूजा के बाद भगवान विष्णु से प्रार्थना की जाती है| कि हमें भटके हुए मार्ग से सही मार्ग की ओर ले जाने में सहायता करे|

शमी वृक्ष की पूजा विधि – Puja Vidhi of Shami Tree

जैसा कि आप सभी जानते हैं कि हिंदू धर्म में सभी वृक्ष-पोधों की पूजा होती है| जैसे – पीपल, आक, बरगद, तुलसी, डाक आदि कई पेड़ – उपाय है|

धार्मिक हिंदू धर्म में पूजा की जाती है| उसी प्रकार दशहरा उत्सव के समय एक शमी नाम के वृक्ष की पूजा की जाती है|

शमी के वृक्ष को पूजने का कारण यह है कि जब भगवान श्री राम रावण से युद्ध करने के लिए जा रहे थे तो रावण वध करने से पहले भगवान श्री राम ने शमी पेड़ को प्रणाम कर आशीर्वाद लिया था|

इसके बाद भगवान श्री राम रावण से युद्ध करने के लिए गए थे| और रावण का वध| पौराणिक कथाओं के अनुसार महाभारत के समय भी जब पांडव अज्ञातवास में थे|

तब उन्होंने अपने सभी हथियारों को शमी के पेड़ में भी छुपाया था| यही कारण है कि दशहरा के दिन शमी के पेड़ की पूजा की जाती है|

दशहरा से संबंधित प्राचीन कथाएँ

कथा के अनुसार एक भयानक राक्षस था| जिसका जन्म एक महिषी और राक्षस से हुआ था| इस कारण से वह कभी दानव और कभी भैंसे का रूप धारण कर सकता था|

उनका नाम महिषासुर रखा गया| महिषासुर ने ब्रह्मा जी की घोर तपस्या की| उनकी अत्यंत घोर तपस्या को देखकर ब्रह्मदेव की जय-जयकार हुई और वह प्रकट हुए|

ब्रह्मा जी ने महिषासुर को अमरता के लिए वरदान माँगा - तब उस असुर ने ब्रह्मा जी से अमरता का श्रृंगार माँगा| लेकिन ब्रह्मा जी ने उन्हें यह श्रृंगार दान से मना कर दिया|

दशहरा 2025

तब महिषासुर ने ब्रह्मा जी से महिमामंडन किया कि उसकी मृत्यु किसी भी देवता, दानव और मनुष्य के द्वारा ना हो सके| ब्रह्मा जी और श्रीलस्तु ने उन्हें यह शोभा दी|

ब्रह्मा जी से आशीर्वाद प्राप्त करने के बाद उन्होंने त्रिलोकों पर अपना आतंक मचाना शुरू कर दिया| महिषासुर ने स्वर्ग लोक से सभी देवी-देवताओं को भगाया|

कौन से सभी देवता ब्रह्मदेव और भगवान विष्णु के पास गए| सभी देवताओं के तेज से एक अद्भुत शक्ति उत्पन्न हुई जिसकी माँ दुर्गा थी|

सभी देवताओं ने उन्हें अलग-अलग हथियार दिए| इसके बाद माँ दुर्गा ने लगातार नौ दिनों तक महिषासुर से युद्ध किया और दसवें दिन के शेर पर सवार होकर उस पर आक्रमण किया| इस वजह से भी मनाया जाता है दशहरा|

दूसरी कथा – Second Story

इसके अलावा दूसरी कहानी जो कि सभी लोगों द्वारा भली – भाँति परिचित है| यह कहानी है भगवान श्री राम की जिन्होंने अपने पिता की आज्ञा को मानकर १२ साल का वनवास स्वीकृत है|

जब वह वनवास के लिए गया तो एक मायावी असुर को रावण का नाम भी पता था वह अपना भेष मंदिर आया और सीता माता उदय होकर अपनी लंका नगरी में ले गया|

तब भगवान श्री राम ने हनुमान जी, सुग्रीव जी, अंगद जी तथा अन्य वानर सेना की सहायता से सागर पुल पर लंका प्रस्थान किया|

जहां उनका सामना रावण के असुरों की सेना से हुआ| युद्ध में श्री राम ने सबसे पहले मेघनाद और कुम्भकर्ण का वध किया और अंत में रावण का भी वध किया|

दशहरा पूजन के लाभ – Benefits of Dussehra Pujan

  • इस दिन पूजा करने से आप जो भी संकल्प लेते है| उनमे आपको हमेशा सफलता मिलती है|
  • विजयादशमी के दिन शमी वृक्ष की पूजा करने से घर में हमेशा सुख – समृद्धि आती है|
  • इस दिन भगवान श्री राम के साथ ही देवी दुर्गा माँ की भी पूजा की जाती है| इस दिन दुर्गा माता की पूजा करने माँ आपके सभी कष्टों का निवारण करती है|
  • दशहरा के दिन घर में पूजा करने से घर में से नकारात्मक ऊर्जा खत्म हो जाती है और सकारात्मक ऊर्जा का प्रवाह होता है|

दशहरा 2025 का महत्व – Importance of Dussehra 2025

अन्य त्योहारों की तरह दशहरा का त्योहार भी हिंदू धर्म में बहुत महत्वपूर्ण है| दशहरा या विजयादशमी का त्यौहार आश्विन मास की शुक्ल दशमी को यह पावन पर्व मनाया जाता है|

लोग अपने धर्म के प्रति जागरूक होकर अपने धर्म के मार्ग पर चलते हुए दशहरा का त्यौहार मनाते हैं|

इस दिन भगवान श्री राम ने अपनी पत्नी का हरण करने वाले लंकापति रावण का वध किया था और इसी दिन मां दुर्गा ने नौ दिन के युद्ध में महिषासुर से दसवें दिन का वध किया था|

इसी कारण से दशमी के दिन दशहरा (विजयादशमी) का त्योहार मनाया जाता है| इस दिन असत्य पर सत्य और बुरे पर अच्छाई की विजय हुई| इसलिए इस दिन को विजय दशमी के रूप में भी जाना जाता है|

निष्कर्ष – Conclusion

किसी भी तरह की पूजा करने के लिए हमें बहुत सारी साड़ी तैयार करनी होती है| गांवों में पूजा आसानी से हो जाती है लेकिन शहरों में लोगों के पास समय की कमी होती है|

जिस वजह से वह लोग पूजा नहीं करवा पाते है तो उनकी इस समस्या का समाधान हम लेकर आये है 99पंडित के साथ|

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