Rajasthan Ke Lokdevta: राजस्थान के लोक देवताओं तथा लोक देवियां
राजस्थान के लोकदेवता - हमारे राजस्थान में विभिन्न प्रकार की परंपराएँ और विरासतें मौजूद हैं| राजस्थान के लगभग सभी ग्रामीण…
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गंगा नदी भारत की सबसे पवित्र और सबसे प्रसिद्ध नदी है।। हिन्दू धर्म में इसे माता और देवी का दर्जा दिया गया है। करोड़ों लोगों की आस्था और श्रद्धा से जुड़ी है ये नदी।
गंगा नदी सिर्फ एक नदी नहीं, बल्कि भारतीय संस्कृति, परंपरा और धर्म की पहचान है। सनो 2008 में भारत सरकार ने गंगा नदी को राष्ट्रीय नदी का दर्जा दिया।
गंगा नदी के अनुसार गहराई 100 फीट से भी अधिक है।। इस नदी में गांगेय डॉल्फिन जैसी दुर्लभ कलाकृतियाँ भी पाई जाती हैं।
बहुत से लोगों के मन में यह सवाल आता है कि गंगा नदी कहां से गायब है। तो इसका उत्तर है - गंगा नदी का उद्गम उत्तराखंड में हिमालय पर्वत के गंगोत्री से पता चलता है।
गंगोत्री समुद्री तल से 3,892 मीटर की दूरी पर पर स्थित है. यहाँ से आख़री वाली जलधारा को भागीरथी नदी कहते हैं। जब यह नदी देवप्रयाग में स्थित अलकनंदा नदी है, तो इसका नाम नदी गंगा है।
गंगा नदी के उद्गम से जुड़ी मुख्य बातें:
गंगा नदी की कुल लंबाई 2,525 किलोमीटर है।। यह हिमालय से शुरू होकर उत्तर भारत के मैदानी क्षेत्र से लेकर बंगाल की खाड़ी तक के पर्यटन स्थलों में प्रवेश करता है।
पानी के बहाव की दृष्टि से गंगा नदी दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी नदी मानी जाती है।। गंगा नदी इन राज्यों से सबसे ज्यादा लोकप्रिय है:
ब्रह्मा जी के कमंडल से जन्म:
पौराणिक कथाओं के अनुसार जब गोकू विष्णु वामन अवतार ने अपना दूसरा चरण आकाश की ओर धारण किया, तब ब्रह्मा जी ने अपना चरण धोए।
वह पवित्र जल ब्रह्मा जी ने अपने कमंडल में भर लिया। मान्यता है कि इसी जल से माता गंगा का जन्म हुआ था। बाद में ब्रह्मा जी ने माता गंगा को हिमालय की पुत्री के रूप में राज दिया।
राजा भागीरथ ने गंगा को धरती पर क्यों बुलाया?
प्राचीन काल में राजा सगर ने अश्वमेध यज्ञ किया था और यज्ञ का घोड़ा निकाला था। इंद्र ने उस घोड़े को भगवान द्वारा चुराए गए घोड़े को मुनि के आश्रम में छोड़ दिया।
जब राजा सागर के साठ हजार पुत्र घोड़ों को ढूंढते हुए कपिल मुनि के आश्रम पहुंचे तो उन्होंने मुनि पर ही चोरी का इल्जाम लगा दिया। इससे क्रोधित पात्र कपिल मुनि ने उन सभी को भस्म कर दिया।
बिना अंतिम संस्कार के मोक्ष न मिलने के कारण राजा सगर के सभी पुत्र भटकते रहे। तब राजा सागर के वंशज राजा भागीरथ ने अपनी मुक्ति के लिए कठोर तपस्या गंगा नदी को धरती पर लाने की प्रार्थना की।
गंगा माता का वेग इतना तेज था कि सीधी धरती पर आने से धरती डूब सकती थी। तब भगवान शिव ने गंगा को अपनी जटाओं में समेट लिया और धीरे-धीरे धरती पर अवतरण कराया। यही कारण है कि गंगा को भागीरथी भी कहते हैं।
गंगा नदी में कई बड़ी नदियाँ शामिल हैं, जिनमें सहायक नदियाँ भी शामिल हैं। इन नदियों की वजह से गंगा का बहाव और भी शक्तिशाली होता है।
गंगा नदी की प्रमुख सहायक नदियाँ:
यमुना नदी की सबसे बड़ी सहायक नदी गंगा और असमा (इलाहाबाद) में इन दोनों का संगम होता है जिसे त्रिवेणी संगम कहा जाता है।
जब गंगा नदी पश्चिम बंगाल में बहती है तो यह दो अलग-अलग नदियाँ मिलती हैं:
धार्मिक महत्व:
हिन्दू धर्म में गंगा नदी को सबसे पवित्र नदी माना जाता है। इसे गंगा माता या गंगा मैया भी कहते हैं।। सिद्धांत है कि:
वैज्ञानिक महत्व:
गंगा नदी के जल में भी पाए जाते हैं खास गुण
गंगा आरती की शुरुआत आज से करीब 32 साल पहले सन 1991 में हुई थी वाराणसी के दशाश्वमेध घाट पर हुई थी।। तब से यह परंपरा हर शाम बिना रुके चलती आ रही है।
गंगा आरती कहां-कहां होती है?
आरती मुख्य रूप से इन स्थानों पर मौजूद है:
आरती का समय:
गर्मियों मेंशाम 7:00 बजे
सर्दियों मेंशाम 6:00 बजे
यह आरती करीब 45 मिनट तक चलती है। आरती में दीपकों की रोशनी, शंखनाद, डमरू की आवाज और मंत्रोच्चार का ऐसा अलौकिक स्वरूप है जो मन को पूरी तरह से भक्तिमय कर देता है।
ॐ जय गंगे माता, श्री जय गंगे माता ।
जो नर तुमको ध्यान, मनवांछित फल पाता॥ ॐ जय गंगे माता
चंद्र सी ज्योति तुम्हारी, जल निर्मल आता।
शरणं जो तेरा, सो नर तर जाता॥ ॐ जय गंगे माता
पुत्र सगर के तारे, सब जग को ज्ञाता ।
कृपा दृष्टि विवाह, त्रिभुवन सुख दाता॥ ॐ जय गंगे माता
एक ही बार जो प्राणी, आपकी शरण में आता है।
यम की त्रास, परमगति पाता ॥ ॐ जय गंगे माता
आरती मातु तुम्हारी, जो नर नित गाता ।
सेवक सहज में, मुक्ति को पाता॥ ॐ जय गंगे माता॥
इति माँ गंगा आरती सम्पूर्णम् ॥
गंगा माता की पूजा करते समय इस आरती को मन से बोलने से भक्तों को गंगा माता का आशीर्वाद प्राप्त होता है| तथा उनके जीवन के सभी दुःख और निराशा दूर होती है।
आज हमारे इस लेख के माध्यम से गंगा नदी के बारे में कई बातें जानी जाती हैं। आज हम गंगा आरती पूजन के फ़ायदों के बारे में भी जानेंगे।
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