रामलला प्रतिष्ठा दिवस 2026: तिथि, पूजा अनुष्ठान, लाभ और इतिहास
रामलला प्रतिष्ठा दिवस 2026 महज एक त्योहार नहीं है। यह आस्था, आशा और भक्ति का दिन है। इस अवसर पर...
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गीता जयंती 2025 हिन्दू धर्म के लोगों के लिए बहुत महत्वपूर्ण त्यौहार माना जाता है| इस गीता जयंती 2025 [Gita Jayanti 2025] के पावन अवसर पर हिन्दू धार्मिक संस्कृति के सबसे पवित्र ग्रन्थ ‘श्रीमद्भगवदगीता’ को सम्मान दिया जाता है|
हिन्दू धर्म की मान्यताओं के अनुसार गीता जयंती 2025 [Gita Jayanti 2025] का यह पावन पर्व मार्गशीर्ष माह के 11वे दिन, यानी शुक्ल एकादशी को मनाया जाता है| श्रीमद भगवदगीता एक ऐसा ग्रन्थ है जो प्रत्येक मनुष्य के जीवन में बहुत ही बड़ा किरदार निभाती है|

पौराणिक कथाओं के अनुसार यह माना जाता है कि इसी दिन महाभारत का युद्ध प्रारंभ शुरू होने से पूर्व में कुरुक्षेत्र के युद्ध क्षेत्र में अर्जुन को भगवान श्री कृष्ण ने गीता का उपदेश दिया था| इसलिए इस दिन को गीता जयंती के रूप में मनाया जाता है|
गीता में बताया गया है कि मनुष्य को दुःख, लोभ और अज्ञानता का त्याग कर प्रत्येक परिस्थिति में धैर्य बनाये रखना चाहिए|
भारतीय संस्कृति में इस पवित्र ग्रंथ श्रीमद्भगवद्गीता को केवल एक पुस्तक ना दें, आपके अंदर ही संपूर्ण जीवन का स्वरूप माना गया है| इस धार्मिक ग्रंथ में कुल 700 श्लोक हैं| जिनमे इंसान के जीवन से जुड़ी सभी बातें बताई गई हैं|
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इस वर्ष गीता जयंती का पावन पर्व है 01 दिसंबर 2025 को है|
पौराणिक कथाओं के अनुसार यह माना जाता है कि इस दिन भगवान श्री कृष्ण ने कुरुक्षेत्र में कुंती पुत्र अर्जुन को गीता का ज्ञान दिया था| इस गीता जयंती 2025 के पर्व को हिन्दू धर्म में मोक्षदा एकादशी के रूप में भी जाना जाता है|
आपको बता दें कि मोक्षदा एकादशी के दिन भक्तों द्वारा गीता जी की आरती का भी उच्चारण किया जाता है| भगवदगीता पवित्र ग्रंथ का एक ऐसा भाग है जिसमें कुल 18 अध्याय हैं
इसमें 6 अध्याय कर्मयोग, 6 अध्याय ज्ञानयोग और अंत में 6 अध्याय में भक्तियोग के बारे में उपदेश दिया गया है| इस वर्ष गीता जयंती की 5157 वीं वर्षगांठ मनाई जाएगी|
इसका मतलब यह है कि भगवान श्री कृष्ण ने कुंती पुत्र अर्जुन को गीता का उपदेश आज से लगभग 5157 वर्ष पूर्व दिया था| सहायता सहायता से अर्जुन के ज्ञानचक्षु खुले थे|
पौराणिक कथाओं के अनुसार यह माना जाता है कि इस पवित्र ग्रंथ भगवद्गीता की उत्पत्ति कलयुग की शुरुआत लगभग 30 वर्ष पहले हुई थी|
श्रीमद्भगवद्गीता में कुल 18 अध्याय और 700 श्लोक हैं उसी के साथ गीता पुस्तक को भी गीतोपनिषद के नाम से भी पहचाना जाता है| गीता जयंती का त्यौहार प्रत्येक वर्ष मार्गशीर्ष मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि को मनाया जाता है|
इसी के साथ किसी भी प्रकार की पूजा के लिए पंडित जी को ऑनलाइन ही हमारी वेबसाइट 99Pandit से बहुत ही आसानी से बुक कर सकते है| इसके लिए आपको हमें आपकी सामान्य जानकारी प्रदान करनी होगी|
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इस वर्ष गीता जयंती के व्रत तथा पूजन करने के लिए एक अनुष्ठान निर्धारित किया गया है| जिसके बारे में आज हम आपको जानकारी देंगे कि किस प्रकार पूजा करने से आपको भगवान श्री कृष्ण का आशीर्वाद प्राप्त होगा –

हिंदू धर्म के सिद्धांत के बारे में माना जाता है कि भगवदगीता एक ऐसा धार्मिक ग्रंथ है, जिसकी संपूर्ण सृष्टि के संस्करण में सभी सिद्धांतों के अनुसार विस्तार से बताया गया है।
इस धार्मिक पुस्तक के माध्यम से भगवान श्रीकृष्ण ने हमें जो उपदेश दिया है| वह बहुत ही अलौकिक और काफी प्रेरणादायक रह रहे हैं|
कहा जाता है कि जो भी भगवद्गीता को पूर्ण श्रद्धा के साथ पढ़ता है| वह एक अलौकिक ज्ञान, प्रकाश और अपार आनंद की प्राप्ति है|
वैदिक पुराणों में भगवद्गीता की तुलना एक माँ से की जाती है जो किसी भी व्यक्ति के जीवन से सभी प्रकार के दुःखों को दूर करके उसके हर प्रकार के दुःख को दूर कर देती है|
धार्मिक धार्मिक मार्गशीर्ष के अनुसार माह के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को यदि कोई व्यक्ति भगवत गीता का पाठ करता है तो उसे अपने पिछले जन्म में सभी पापों से मुक्ति प्राप्त होती है और उस व्यक्ति को भगवान श्री कृष्ण की कृपा प्राप्त होती है और जिस व्यक्ति को भगवान श्री कृष्ण की कृपा प्राप्त होती है। उसे सदा ही मोक्ष की प्राप्ति होती है|
गीता जयंती 2025 के इस पर्व को हरियाणा राज्य के कुरुक्षेत्र में बहुत धूमधाम से मनाया जाता है|
इस त्यौहार के लिए प्रमुख स्थलों के होने के कारण कुरूक्षेत्र में बहुत ही धार्मिक भावनाएँ और पवित्र लोगों का साथ जोड़ा जाता है| इसके अलावा कुरकुरे के अलावा और भी कई वजहें जानी जाती हैं|

जैसे कि कई पौराणिक ग्रन्थ ऋग्वेद, एवं सामवेद की रचना भी हरियाणा के कुरुक्षेत्र में की गई थी| आपकी जानकारी के लिए बता दे कि सुप्रसिद्ध ऋषि मनु मनुस्मृति की रचना का स्थान भी यही था|
माना जाता है कि भगवान श्रीकृष्ण के अलावा भी गुरुओं और गौतम बुद्ध जैसे कई महान लोगों ने इस स्थान का दौरा किया है|
कुरुक्षेत्र में ही गीता जयंती के उत्सव का आयोजन होता है| सम्पूर्ण भारत से तीर्थयात्री एवं असंबद्धजन इस कार्यक्रम में भाग लेने के लिए हरियाणा के कुरूक्षेत्र इकठ्ठा होता है|
जयंती 2025 के दिन भगवान श्रीकृष्ण के सभी भक्तों को सन्निहित सरोवर तथा ब्रह्म सरोवर गीता के पवित्र जल में स्नान कराया जाता है|
इस समय बहुत बड़ी संख्या में धार्मिक आतंकवादी का आयोजन करने से वहां का संपूर्ण परिवेश आध्यात्मिक और पूर्ण रूप से शुद्ध हो जाता है| यह त्यौहार लगभग एक सप्ताह तक है|
प्रारूप नृत्य, भगवद्गीता कथा वाचन, नाटक, भजन, पुस्तक प्रदर्शन, श्लोक पाठ और चिकित्सा सुविधा जैसे कई कार्यक्रमों का आयोजन निःशुल्क किया जाता है|
आपको बता दे कि गीता जयंती का यह सम्पूर्ण समारोह कुरुक्षेत्र विकास बोर्ड, जिला प्रशासन, हरियाणा पर्यटन, कला व सांस्कृतिक मामले विभाग हरियाणा के द्वारा आयोजित किया जाता है|
आज हमने इस लेख के माध्यम से गीता जयंती 2025 के बारे में काफी बातें जानी हैं| आज हम कुरूक्षेत्र में होने वाले गीता जयंती 2025 समारोह के बारे में भी जानेंगे|
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