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हम कथा सुनाते भजन हिंदी में: हम कथा सुनाते भजन हिंदी में

99 पंडित जी
द्वारा लिखित 99 पंडित जी
आखरी अपडेट अक्टूबर 28
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हम कथा सुनाते भजन लिरिक्स हिंदी में: "हम कथा सुनाते राम सकल गुणधाम की" एक बहुत ही मधुर और प्रसिद्ध भजन है, जो भगवान श्रीराम के गुणों की स्तुति सुनाते हैं। इसे सुनते ही मन में भक्ति और शांति का भाव महसूस होता है।

हम कथा सुनाते भजन लिरिक्स हिंदी में

इस भजन के शब्द इतने सरल हैं कि छोटे बच्चे से लेकर बड़े बुजुर्ग भी इसे गाना और उपदेश पसंद करते हैं। इस भजन में भगवान राम के जीवन की झलक दिखाई देती है।

कैसे उन्होंने धर्म, सच्चाई और प्रेम के मार्ग पर लोगों को प्रेरित किया यह भाव हर पंक्ति में महसूस होता है। हम कथा सुनाते भजन लिरिक्स इन हिंदी के माध्यम से भक्त रामायण की कथा को भक्ति रूप में अनुभव करते हैं।

यह भजन हमें यह सिखाता है कि सच्ची भक्ति रामभक्ति में नहीं है, बल्कि श्रीराम जैसे गुण निषेध में है। जब भी यह भजन पेंटिंग या नर्सरी में जाता है, वहां का माहौल होता है भक्ति, शांति और सकारात्मक ऊर्जा से भर जाता है।

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हम कथा सुनाते भजन लिरिक्स हिंदी में

(दोहा – ॐ श्री महागानाधिपतये नमः,
ॐ श्री उमामहेश्वराभ्याय नमः,
वाल्मिकी गुरुदेव के,
पद पंकज सिर नाय,
सुमिरे माता सरस्वती,
हम पर आपकी सहायता,
माता पिता की वंदना,
करो बारम्बर,
गुरुजन राजा पेजजन,
धन्यवाद करो स्वीकारोक्ति)

हम कथा सुनाते राम सकल गुण धाम की,
ये रामायण है पुण्य कथा श्रीराम की,
हम कथा सुनाते राम सकल गुण धाम की,
ये रामायण है पुण्य कथा श्रीराम की…

जम्बूद्वीपे, भारत खंडे, आर्योवरते भारतवर्षे,
एक नगरी है इम्तिहान अयोध्या नाम की,
यही जन्म भूमि है परम पूज्य श्रीराम की,
हम कथा सुनाते राम सकल गुण धाम की,
ये रामायण है पुण्य कथा श्रीराम की…

रघुकुल के राजा धर्मात्मा,
अंतःकरण पुण्यात्मा,
संतति यज्ञ यज्ञ,
धर्म यज्ञ का शुभफल पाया,
नृप घर सामामी चार कुमार,
रघुकुल दीप जगत आधार,
चारों ओर भारतो के शुभ नामा,
भरत, शत्रुघ्न, लक्ष्मण, राम...

गुरु शिष्य के गुरुकुल जाके,
अल्प काल विद्या सब पाके,
पूरन हुई शिक्षा, रघुवर पूरन काम की,
हम कथा सुनाते राम सकल गुण धाम की,
ये रामायण है पुण्य कथा श्रीराम की…

मृदु स्वर कोमल भावना,
रोचक ढंग से,
एक का वर्णन करे,
लव कुश राम प्रसंग,
विश्वामित्र महामुनि राय,
ये संग चले दोउ भाई,
कैसे राम ताड़का मारी,
नाथ अहिल्या तारी कैसे...

मुनिवर विश्वामित्र टैब,
संग ले लक्ष्मण राम,
सिया स्वयंवर देखना,
पइचे मिथिला धाम...
जेनपुर उत्सव है भारी,
जेनपुर उत्सव है भारी,
अपने वर का चयन करें,
सीता सुकुमारी,
जेनपुर उत्सव है भारी...

जनकराज का कठिन प्रश्न,
सुनो सुनो सब कोई,
जो तोड़े शिव धनुर्धर को,
सो सीता पति होई...
को तोड़े शिव धनुर्धर कठोरता,
सब के दर्शन राम की ओर,
राम विनयगुण के अवतार,
गुरुवर की आज्ञा सिद्घांत…
सहज भाव से शिव धनुर्विद्या,
जेन सुता संग नाता जोड़ा…

रघुवर और ना कोई,
सीता की समता नहीं होई,
जो करे हार कान्ति कोटि रति काम की,
हम कथा सुनाते राम सकल गुण धाम की,
ये रामायण है पुण्य कथा सिया राम की....

सब पर शब्द मोहिनी दारी,
मंत्रमुग्ध भए सब नर-नारी,
यो दिन रैन जात है डेस,
लव कुश ने सबके मन जीता,
वन गमन, सीता हरण, हनुमंत मिलन,
लंका दहन, रावण दहन, अयोध्या पुनरागमन…

सविस्तार सब कथा कहा,
राजा राम भे रघुराई,
राम राज आयो सुख दया,
सुख समृद्धि श्री घर घर…

काल चक्र ने घटना क्रमानुसार,
ऐसा चक्र रचना,
राम सिया के जीवन में फिर,
घोर अँधेरा छाया...
अवध में ऐसा, ऐसा इक दिन आया,
निष्कलंक सीता पे पेज ने,
मिथ्या दोष कल्पित,

अवध में ऐसा, ऐसा इक दिन आया...
चल दी सिया जब तोड़ कर,
सब नेह-नाते मोह के,
पाषाण हृदयो में ना,
अंगारे जगे विद्रोह के….

ममतामयी माँ के आँचल, भी सीमेंट कर रह गये,
गुरुदेव ज्ञान और नीति के, सागर भी घाट कर गये...
ना रघुकुल ना रघुकुल नायक,
कोई ना सिया का हुआ सहायक,
इंसान को खो बैठा जब,
नागालैंड नगर के निवासी,
तब सीता की हुई सहायक,
वन का एक सन्यासी...

उन ऋषि परम उदार का,
वाल्मिकी नाम,
सीता को आश्रय दिया,
ले आय निज धाम...
रघुकुल में बल्ब जलाए,
राम के दो सुत सिय ने जाय...

(श्रोता गण, जो एक राजा की बेटी है,
एक राजा की पुत्रवधू हैं,
और एक शादीशुदा राजा की पत्नी है,
महारानी सीता,
वनवास के दुखो में,
अपने दिन कैसे काटते हैं,
अपने कुल के गौरव और,
रूमानी की रक्षा करते हुए,
किसी से सहायता सहायता बिना,
कैसे अपना काम वो स्वयं करता है,
स्वयं वन से लकड़ी काटती है,
स्वयं अपना धान कूटती है,
खुद अपनी दुकान चलाते हैं,
और अपनी संतान को,
स्वावलंबी बनने की शिक्षा कैसे खोजें,
अब उसकी करुणा हुंकार देखो)

जनके दुलारी कुलवधू दिशवात्र जी की,
राज-रानी होके दिन वन में बिताती हैं...
रहते थे बाथरूम जिसे दास-दासी आठो यम,
दासी बनी अपनी उदासी को छुपाती है…
धरम प्रवीण सति परम कुलिन सब,
विधि दोषहीन जीना दुःख में सिखाती हैं,
जगमाता हरी-प्रिय लक्ष्मी स्वरूपा सिया,
कोटती है धान भोज स्वयं बनती है…

कठोर चीनी लेके लकड़िया कटती है,
करम ने लिखा को पर कट नहीं गारमेंट्स है...
फूल भी चढ़ा भारी जिस सुकुमारी को था,
दुःख अकेले जीवन का बोझ वो उठाती है...

अर्धागिनी रघुवीर की वो धरधीर,
भर्ती है नीर, नीर नैन में ना लाती है,
अन्य पेज के अपवादों कुचक्र में वो,
पीसती है रूमाल बचाती है,
पलती है बच्चों को वो कर्म योगिनी की पसंद,
रूमानी स्वावलंबी सफल रचनाकार हैं,
ऐसी सीता माता की परीक्षा लेते दुख देते,
निठुर नियति को दया भी नहीं आती है....

ओ...वो दुखिया के राज-दुलारे,
हम ही सुत श्रीराम तिहारे...

ओ...सीता माँ की आँख के तारे,
लव-कुश है पितु नाम हमारा…

हे पितु भाग्य हमारे जागे,
राम कथा कहि राम के आगे

अंग्रेजी में हम कथा सुनाते भजन लिरिक्स

(दोहा – ॐ श्री महागणाधिपतये नमः,
ॐ श्री उमामहेश्वराय नमः,
वाल्मीकि गुरुदेव के,
पद पंकज सर नाय,
सुमिरे मात सरस्वती,
हम पर होउ सहाय,
मात पिता की वंदना,
करते बारम्बार,
गुरुजन राजा प्रजाजन,
नमन करो स्वीकर)

हम कथा सुनते राम सकल गुण धाम की,
हम कथा सुनाते राम सकल गुण धाम की,
ये रामायण है पुण्य कथा श्री की...
जाम्बद्वीपे, भारत खण्डे, आर्यवर्ते भारतवर्षे,
एक नगरी है विख्यात अयोध्या के नाम की,
यही जन्मभूमि है परम पूज्य श्री राम की
हम कथा सुनते राम सकल गुण धाम की
ये रामायण है पुण्य कथा श्री राम की...

ये रामायण है पुण्य कथा श्री राम की...

रघुकुल के राजा धर्मात्मा,
चक्रवर्ती दशरथ पुण्यात्मा,
सन्तति हेतु यज्ञ करवाय,
धर्म यज्ञ का शुभफल मैया,
नृप घर जनमे चार कुमार,
रघुकुल दीप जगत आधार,
चारों भाइयों के शुभ नामा,
भरत, शत्रुघ्न, लक्ष्मण, राम...
गुरु वशिष्ठ के गुरुकुल जाके,
अल्प काल विद्या सब पाके,
पुराण हुई शिक्षा, रघुवर पुराण काम की,
हम कथा सुनाते राम सकल गुण धाम की,

ये रामायण है पुण्य कथा श्री राम की...

मृदु स्वर कोमल भावना,
ROCHAK PRASTUTI DHANG,
एक एक कर वर्णन करे,
लव कुश राम प्रसंग,
विश्वामित्र महामुनि राय,
इनके संग चले दो भाई,
कैसे राम तड़का मारी,
कैसे नाथ अहिल्या तारी…

मुनिवर विश्वामित्र तब,
संग ले लक्ष्मण राम,
सिया स्वयंवर देखेंगे,
पाहुंचे मिथिला धाम…

जनकपुर उत्सव है भर,
जनकपुर उत्सव है भारी,
अपने वर का चयन करेगी,
सीता सुकुमारी,
जनकपुर उत्सव है भारी…

जनकराज का कथिन प्राण,
सुनो सुनो सब कोई,
जो तोड़े शिव धनुष को,
सो सीता पति होई…

को तोड़े शिव धनुष कथोर,
सब की दृष्टि राम की ओर,
राम विनयगुण के अवतार,
गुरुवर की आज्ञा सिरधार…

सहज भाव से शिव धनु तोड़ा,
जनक सुता संग नाता जोड़ा…

रघुवर जेसा और ना कोई,
सीता की समता नहीं होई,
जो करे पराजित कांति कोटि रति काम की,
हम कथा सुनते राम सकल गुण धाम की,

ये रामायण है पुण्य कथा सिया राम की...

सब पर शब्द मोहिनी दारी,
मंत्रमुग्ध भय सब नर-नारी,
यो दिन रैन जात है बीते,
लव कुश ने सब के मन जीते,
वन गमन, सीता-हरण, हनुमत मिलन
लंका दहन, रावण वध, अयोध्या पुनरागमन...

सविस्तार सब कथा सुनाइ,
राजा राम भय रघुराय,

राम राज आयो सुख दाई,
सुख समृद्धि श्री घर घर आई…

काल चक्र ने घटना क्रम में,
ऐसा चक्र चलाय,
राम सिया के जीवन में फिर,
घोर अँधेरा छाया…

अवध में ऐसा, ऐसा इक दिन आया
निष्कलंक सीता पे प्रजा ने,
मिथ्या दोष लगाया,
अवध में ऐसा, ऐसा इक दिन आया...

चल दी सिया जब तोड़ कर,
सब नेह-नाते मोह के,
पाषाण हृदयों में ना,
ANGAARE JAGE VIDROH KE…

ममतामयी माँओं के आँचल,
भी सिमट कर रह गए,
गुरुदेव ज्ञान और नीति के,
सागर भी घाट कर रह गए...

न रघुकुल न रघुकुल नायक,
कोई ना सिया का हुआ सहायक,
मानवता को खो बैठे जब,
सभ्य नगर के वासी,
अब सीता को हुआ सहायक,
वन का एक सन्यासी…

उन ऋषि परम उदार का,
वाल्मीकि हुभ नाम,
सीता को आश्रय दिया,
ले आए निज धाम…

रघुकुल में कुलदीप जलायें,
राम के दो सुत सिय ने जाए…

(श्रोता गण, जो एक राजा की पुत्री है
एक राजा की पुत्रवधू है,
और एक चक्रवती राजा की पत्नी है,
वाहि महारानी सीता,
वनवास के दुखों में,
अपने दिन कैसे कटते हैं,
अपने कुल के गौरव और,
स्वाभिमान की रक्षा करते हुए,
किसी से सहायता मांगे बिना,
कैसे अपने काम वो स्वयं करती हैं,
स्वयं वन से लकड़ी काटती है,
स्वयं अपना धन कुट्टी है,
स्वयं अपनी चक्की पीसती है,
और अपनी संतान को,
स्वावलम्बी बनने की शिक्षा कैसे देती है,
अब उसकी करूं झांकी देखिए)

जनक दुलारी कुलवधु दशरथ जी की,
राज-रानी होके दिन वन में बिताती है...

रहते थे घेरे जैसे दास-दासि आठो यम,
दासी बनी अपनी उदासी को छुपाती है...

धरम प्रवीण सति परम कुलीन सब,
विधि दोषीन जीना दुख में सिखाती है,
जगमाता हरि-प्रिय लक्ष्मी स्वरूपा सिया,
कुत्ती है धन भोज स्वयं बनती है...

कथिन कुल्हाड़ी लेके लकड़िया कटती है,
करम लिखे को पर काट नहीं पाती है...
फूल भी उथना भारी जिस सुकुमारी को था,
दुःख भरे जीवन का बोझ वो उठती है...

अर्धांगिनी रघुवीर की वो धरधीर,
भारती है नीर, नीर नैन में न लाती है
JISKI PRAJA KE APVAADON KO KUCHAKRA MEIN VO,
पेस्टी है चक्की स्वाभिमान बचाती है,
पलती है बच्चों को वो कर्म योगिनी की भाती,
स्वाभिमानी स्वावलम्बी सफल बनती है,
ऐसी सीता माता की परीक्षा लेते दुख देते,
निठुर नियति को दया भी नहीं आती है...

ओ...उस दुखिया के राज-दुलारे,
हम ही सुत श्री राम तिहारे...

हे...सीता माँ के आँख के तारे,
लव-कुश है पितु नाम हमारे...

हे पितु भाग्य हमारे जागे,
राम कथा कही राम के आगे

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भजन की रचना और इसका इतिहास

"हम कथा सुनाते राम सकल गुणधाम की"एक बहुत ही प्रसिद्ध और मनमोहक भजन है। यह भजन भगवान श्रीराम के गुण, उनकी कृपा और उनके जीवन की सीख हमें देता है सरल और प्यारे शब्द में सुनाता हूँ।

जब यह भजन गाया जाता है, तो ऐसा लगता है जैसे हम खुद रामायण कथा सुन रहे हैं। इस भजन में लाखों लोगों के दिल में भगवान राम के लिए प्रेम और श्रद्धा भक्ति शामिल है।

हम कथा सुनाते भजन लिरिक्स हिंदी में

इस भजन का इतिहास बहुत खास है क्योंकि इसमें भारत का सबसे लोकप्रिय धार्मिक टीवी सीरियल शामिल किया गया था।

यह भजन कहाँ और कब आया?

  • यह भजन 1987 में रामानंद सागर जी निर्मित टीवी सीरियल "रामन" में आया था।
  • इसे लव-कुश द्वारा रामकथा सुनने वाले एपिसोड में रखा गया था।
  • जब यह टीवी आया तो इसके भजन को सुनकर इस सीरियल के दर्शक बेहद भावुक हो गए थे।

यह भजन कैसे बनाया गया?

  • रवीश जैन - अन्य भजन के बोल और संगीत भी तैयार किया।
  • हेमलता – अपनी सुरमयी आवाज़ से इसे बेहद सुंदर बनाया।
  • कविता कृष्णमूर्ति - उनके आवाज ने भजन में मीठा भाव और भी बढ़ा दिया।

कुल मिलाकर इस भजन को इतना खास बना दिया कि आज भी यह भजन है हर घर, हर मंदिर और हर भजन संध्या में जाना जाता है.

हम कथा सुनाते भजन लिरिक्स इन हिंदी की कुछ खास बातें

  • यह भगवान राम की संपूर्ण जीवन कथा को भक्ति और प्रेम के रूप में समझाता है।
  • शब्द इतने आसान और सीधे हैं कि बच्चे भी समझ जाते हैं।
  • इसे सुनने से मन में शांति, सकारात्मकता और भक्ति की भावना प्रबल होती है।
  • यह भजन परिवार और समाज को अच्छा संस्कार सिखाता है।

यह भजन आज भी हर जगह लोगों के प्रेम और भक्ति का सबसे बड़ा साधन है। लोग यह भजन इसलिए गाते हैं ताकि उनके मन में भक्ति बनी रहे और उनका दिल हमेशा अच्छे काम के लिए तैयार रहे।

यह भजन आज भी समान रूप से ही श्रद्धा से गया है, जैन-रामायण के समय घर-घर में गूंजता था। भगवान राम की कथा को हर व्यक्ति तक बहुत आसन भाषा में पहुंचाया जा सकता है।

रामायण कथा में इस भजन का महत्व

"हम कथा सुनाते राम सकल गुणधाम की" भजन रामायण की आत्मा से डूब गया है। यह भजन भगवान श्रीराम के गुण, उनका आचरण, उनका गुणधर्म और उनका आदर्श जीवन पूरा प्रेम और भक्ति के साथ दुनिया सामने है।

इस भजन की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि यह हमें रामायण की कहानी के बहुत ही सरल, सरल और मार्मिक शब्दों में समझाता है।

हम कथा सुनाते भजन लिरिक्स हिंदी में

रामायण सिर्फ एक कहानी नहीं, यह भारत की संस्कृति, धर्म और आदर्शों की सबसे बड़ी सीख है। यही बात लोगों से लेकर व्यक्ति तक इस भजन में बहुत अहम भूमिका निभाती है।

जब यह भजन टीवी पर रामायण के समय गूंजा, तब पूरे देश में एक भक्ति का माहौल बन गया था। हर घर में बच्चे, बड़े और बुजुर्ग सभी ध्यान से रामायण सुनाते थे और यह भजन सुनकर मंत्रमुग्ध हो जाते थे।

लव-कुश द्वारा रामकथा सुनने का दृश्य

यह भजन का सबसे अच्छा भजन विशेष महत्व लव-कुश से हुआ है. जब दोनों बच्चे भगवान राम की जीवन कथा सुनते हैं।

तब यह भजन पृष्ठभूमि में बजता है। यह सिद्ध होता है कि रामकथा बिल्कुल एक राजा की कहानी नहीं, बल्कि तीसरी शताब्दी तक चलने वाली प्रेरणा स्रोत है।

उनके गानों से पूरा अयोध्या भावुक हो जाता है और सभी लोगों को भगवान राम की महानता याद आ जाती है। इसलिए इस भजन के बिना उसका दृश्य अधूरा माना जाता है।

भगवान श्रीराम के मंदिर की याददाश्त है

  • यह भजन बताता है कि भगवान श्रीराम सत्य के मार्ग पर चलते थे।
  • धर्म की रक्षा करते थे।
  • प्रतिबंध और सम्मान को जीवन में सबसे ज्यादा माना गया।
  • सबके साथ न्याय हुआ था, और सभी से प्रेम भावना थी।

भक्ति और संस्कृति से जोड़ने वाला भजन

  • यह भजन सामग्री ही मन में भक्तिभाव जगाती है।
  • बच्चे इससे संबंधित रामायण सिखाते हैं, बड़े इससे प्रेरणा लेते हैं।
  • बुज़ुर्ग ने इसे सुना अपनी पुरानी यादों से जुड़ जाते हैं, जब वो सब रामायण देखते थे।
  • भारत की धार्मिक भावनाओं को बांधे रखा गया है और हर पीढ़ी तक रामायण को पहुंचाया गया है।
  • समाज को सीख मिलती है।

यह भजन हमें सिखाया जाता है कि

  • जीवन में बुराई कितनी भी बड़ी हो, अच्छाई हमेशा जीतती है।
  • परिवार, प्रेम और सम्मान का महत्व कभी कम नहीं होता।
  • सत्य और धर्म की रक्षा करना हर मनुष्य का कर्तव्य है।
  • यही कारण है कि यह भजन रोज़ाना भी चला जाता है तो इसका भाव कम नहीं होता, बल्कि और बढ़ता है।

घर-घर भक्ति का माध्यम

आज भी जापानी, धार्मिक, धार्मिक और भजन संध्याओं में यह भजन बहुत पसंद आता है।

रामायण की स्मृति जीवित है

टीवी पर रामायण आने के बाद भी, यह भजन आज तक लोकप्रिय ही है। जब भी कोई इसे सुनता है, तो रामायण की यादें ताज़ा हो जाती हैं। इस भजन से यह सिद्ध हो गया कि भक्ति की शक्ति कभी पुरानी नहीं होती।

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समापन

"हम कथा सुनाते राम सकल गुणधाम की" भजन हमें भगवान राम की पूरी कहानी बहुत सरल और सरल से समझाता है। इस भजन के माध्यम से हमें पता चलता है कि भगवान राम ने अपने जीवन में सदैव सत्य, प्रेम और धर्म का साथ दिया।

यही कारण है कि आज भी लोग जीवन को अपने से सीखकर और पवित्र इंसान बनने की कोशिश कर रहे हैं। इस भजन में रामायण की पवित्र सीख को हर घर तक पहुंचाया गया है।

जो भी लोग इस भजन को पढ़ते या सुनते हैं, उनके मन में नया जोश, भक्ति और शांति पैदा होती है। यह भजन लोगों के दिलों में रामायण की यादें हमेशा जिंदा रहती है।

हम कथा सुनाते भजन लिरिक्स इन हिंदी की मदद से छोटे-बड़े सभी भगवान राम के बारे में आसानी से जान बैठते हैं।

यह भजन हमें सिखाता है कि जीवन में प्यार, सम्मान और धर्म का स्थान बहुत ऊंचा है। इसी कारण यह भजन सदैव भक्ति और प्रेरणा का सुन्दर स्त्रोत बना रहता है।

विषयसूची

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

हमने कथा सुनाते भजन लिखा और संगीत दिया?

इस भजन के बोल और संगीत दोनों महान संगीतकार संगीतकार जैन ने तैयार किए थे। रावें रामायण की भावना को बहुत ही सुंदर तरीके से शब्दों में बदला गया है। उनकी वजह से ये भजन हर किसी के दिल तक पहुंच गया। आज भी लोग अंकल ही श्रद्धा से जुड़े हुए हैं। यह उनका अमूल्य योगदान है।

“हम कथा सुनाते भजन गए हैं?

इस भजन को दो प्रसिद्ध डॉक्टरों ने गाया है, कविता कृष्णमूर्ति और हेमलता जी ने इस भजन को अपनी सुरीली आवाजों में गाया है। उनके गायक ने इस भजन में भक्ति और भावना को और भी गहरा कर दिया, उनके स्वर सुनकर मन मंत्रमुग्ध हो जाते हैं। यही कारण है कि आज भी यह भजन सबसे ज्यादा लोकप्रिय है।

यह भजन पहली बार कहा गया था?

यह भजन 1987 में आने वाले प्रसिद्ध टीवी धारावाहिक "रामायण" में पसंद किया गया था। यह लव-कुश द्वारा रामकथा सुनने वाले प्रसंग में प्रयोग किया गया था। इस दृश्य ने लोगो को मोहित कर दिया था। उसी समय से यह भजन हर घर में गूंजने लगा। और आज के समय में भी लोग इस भजन को अति स्नेह और उत्साह से याद करते हैं और सुनते हैं।

यह भजन विशेष विशेष क्यों हैं?

यह भजन भगवान राम के जीवन और उनके गुणों को बहुत ही सरल शब्दों में समझाता है। इसे बच्चे भी आसानी से सीखें लें। इसे सुनकर मन में भक्ति का भाव बढ़ जाता है। यह हमें अच्छे काम करने की प्रेरणा देता है। ये है ये खास सुविधाएं.

इस भजन का मुख्य संदेश क्या हैं?

इस भजन का संदेश है कि हमें सत्य और धर्म की राह पर चलना चाहिए। भगवान राम की तरह दयालु और न्यायप्रिय रहना चाहिए। परिवार और समाज के प्रति जिम्मेदारियाँ बहुत पहचानी जाती हैं। यह भजन जीवन को बेहतर बनाने की प्रेरणा देता है।

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