श्रावण पूर्णिमा 2026: तिथि, समय, पूजा विधि और महत्व
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कृष्ण जन्माष्टमी 2026: भारत देश अपनी संस्कृति और त्योहारों को खुशहाली के साथ दुनिया भर में जाना जाता है। हमारे देश में सभी त्योहारों को काफी उत्साह के साथ मनाया जाता है। हर साल अलग-अलग प्रकार के त्योहार हर्षोल्लास से मनाए जाते हैं।
हर माह में कोई न कोई सा त्यौहार हमारे भारत देश में आता ही रहता है। अभी जो त्यौहार आने वाला है उसका लोगो को काफी बेसब्री से इंतज़ार रहता है जी हां हम बात रहे है कृष्ण जन्माष्टमी 2026 की।

जिसका लोगो को काफी इंतज़ार रहता है। वर्तमान में भगवान श्री कृष्ण के भक्तों की संख्या काफी तेजी से बढ़ती जा रही है।
लोग फिर से भक्ति के मार्ग पर लौट रहे हैं। हिन्दू पंचांग के अनुसार भाद्रपद माह की कृष्ण पक्ष की अष्टमी को कृष्ण जन्माष्टमी का पर्व मनाया जाता है।
इस दिन भगवान श्री कृष्ण के बाल्य रूप को पूजा जाता है। इस दिन महिलाएं और पुरुष दोनों ही उपवास रखते है और आधी रात्रि में यानी भगवान श्री कृष्ण के जन्म के पश्चात अपना उपवास खोला जाता है।
सिद्धांततः यह भी है कि जो भी पुरुष या महिला इस दिन व्रत करते हैं उनसे भगवान श्री कृष्ण का आशीर्वाद प्राप्त होता है। महिलाएं भगवान श्री कृष्ण से संत प्राप्ति के लिए प्रार्थना करती हैं।
इस दिन बाल गोपाल को आकर्षित करने के लिए उनके लिए कई तरह के व्यंजन बनाए जाते हैं और बाल गोपाल को झूला झुलाया जाता है और भगवान से प्रार्थना की जाती है कि वो आपकी हर परिस्थिति में सहायता करें।
तो आइये जानते है कि इस बार श्री कृष्ण जन्माष्टमी 2026 (Shree Krishna Janmashtami 2026) कब और किस तरह से मनाई जाएगी और इसका शुभ मुहूर्त क्या रहेगा।
| 5253th श्री कृष्ण जन्मोत्सव 2026 तिथि | शुक्रवार, सितम्बर 04, 2026 |
| निशिता पूजा का समय | 12:14 पूर्वाह्न से 01:01 पूर्वाह्न, 05 सितंबर |
| दही हांड़ी | शनिवार, सितम्बर 05 2026 |
| अष्टमी तिथि प्रारंभ | 04 सितम्बर 2026 को 02:25 पूर्वाह्न से |
| अष्टमी तिथि समाप्त | 05 सितम्बर 2026 को 12:13 पूर्वाह्न तक |
| रोहिणी नक्षत्र आरंभ | 04 सितम्बर 2026 को 12:29 पूर्वाह्न से |
| रोहिणी नक्षत्र | 05 सितम्बर 2026 को रात्रि 11:04 बजे से |
हिन्दू धर्म की मान्यता के अनुसार हर त्यौहार की एक निश्चित तिथि होती है। वो त्यौहार उसी तिथि के दिन मनाया जाता है।
सिर्फ त्यौहार ही नहीं बल्कि हिन्दू धर्म से सभी प्रकार की पूजा – पाठ के लिए एक निर्धारित तिथि होती है और भी कई ऐसे कार्य है जो अच्छी तिथि या मुहूर्त देखकर ही करवाए जाते है जैसे की गृह प्रवेश पूजा, विवाह और नामकरण संस्कार इत्यादि।
भाद्रपद मास के कृष्ण पक्ष में अष्टमी तिथि प्रारम्भ 04 सितम्बर 2026 को प्रातः 02 बजे से 05 मिनट तक लेकर 05 सितम्बर 2026 को प्रातः 12 बजे से 13 मिनट तक होगी।
अगर आप भारत में रहते है ऐसा हो ही नहीं सकता कि आपको कृष्ण जन्माष्टमी के बारे में पता न हो। यह भारत देश में मनाये जाने वाले त्योहारों में से एक है जिसके बारे में हम आपको आज इस आर्टिकल के माध्यम से पूर्ण जानकारी प्रदान करेंगे।
इस दिन को भगवान श्री हरि विष्णु के आठवें अवतार भगवान श्री कृष्ण के जन्मोत्सव के रूप में भी जाना जाता है।
कृष्ण जन्माष्टमी को हर जगहों पर अलग – अलग तरीके से मनाकर भगवान श्री कृष्ण को खुश करने का प्रयास किया जाता है। इस दिन भगवान कृष्ण के सभी मंदिरों को फूलो और उनकी झांकियों से सजाया जाता है।

गोविन्द, गोपाल, और कान्हा जैसे अन्य 108 नामो से जाने गए भगवान कृष्ण ने अपनी लीला और मनमोहक रूप की वजह से लोगो के दिलो में अपनी एक छवि बना दी।
श्री कृष्ण ने पृथ्वी पर एक साधारण मनुष्य के रूप में जन्म लेकर दुष्टों का संहार करके इस धरती को पाप से मुक्त किया था।
इसके अलावा भी ऐसे कई महान कार्य है जिन्हें भगवान श्री कृष्ण ने पापियों का अंत करने के लिए किया है इसलिए हमे भी उनसे सम्बंधित हर इतिहास को जानना जरूरी है। तो इस आर्टिकल के माध्यम से हम आपको श्री कृष्ण के जन्म से जुड़ी हर जानकारी देने की कोशिश करेंगे।
यह पावन पर्व हिंदू धर्म के लोगों के लिए काफी महत्वपूर्ण है। इस दिन भगवान श्री कृष्ण के बाल गोपाल रूप की पूजा की जाती है और भगवान से सुख-समृद्धि और संतान प्राप्ति की प्रार्थना की जाती है।
श्री कृष्ण के जन्मोत्सव को कृष्ण जयंती के रूप में भी मनाया जाता है। इस दिन भगवान को खुश करने के लिए मध्य रात्रि तक उपवास किया जाता है|
कृष्ण जन्माष्टमी के दिन पूरे देश में – पूरे देश में त्यौहार लेकर सभी में उत्साह बना रहता है। यही एकमात्र ऐसा त्यौहार है जो भारत देश के साथ ही विदेशो में भी बड़े उत्साह से मनाया जाता है।
श्री कृष्ण के भक्त इस दिन उनकी प्राप्ति के लिए आशीर्वाद देते हैं। पूरे भारत देश में हर जगह पर सभी मंदिरों को बेचा जाता है।

इस दिन श्री कृष्ण के बाल रूप जिन्हे लोध गोपाल जी इनके नाम से भी जानिए इनकी पूजा पूरे देश में होती है। पादरियों में भजन कीर्तन की तरह मिलता है। युवाओं द्वारा दही हांडी का आयोजन किया जाता है।
इसके अलावा श्री कृष्ण की नगरी मथुरा में भी इस दिन भक्त काफी बड़ी संख्या में भगवान के दर्शन के लिए आते हैं। मथुरा का दही हांडी महोत्सव काफी प्रसिद्ध है।
कृष्ण जन्मोत्सव के दिन श्री कृष्ण के मंदिर के साथ ही पूरी की पूरी मथुरा नगरी को भिन्न – भिन्न प्रकार के फूलो से सजाया जाता है।
भगवान श्री कृष्ण के जन्मोत्सव के दिन पूरी मथुरा नगरी चमचमाती रहती है। श्री कृष्ण के मंदिर में लगी हुई लाइट पुरे मंदिर की शोभा को और ज्यादा बढ़ा देती है।
जैसा कि आप सभी लोग जानते ही है कि श्री कृष्ण बचपन में काफी शरारती थे और उनकी सबसे पसंदीदा चीज़ माखन ही थी।
इसे खाने के लिए वो दुसरो की मटकी भी फोड़ देते थे जिसमे माखन होता था। तो भगवान श्री कृष्ण की लीला को पुनः दोहराया जाता है हांड़ी महोत्सव के जरिये।
कई – कई जगहों पर तो हांड़ी फोड़ने का कार्यक्रम भी आयोजित किया जाता है। इस मटकी को तोड़ने से भक्तों के मन ने भगवान की यादें फिर से ताजा हो जाती है।
कृष्ण जन्माष्टमी का हिंदू धर्म में काफी महत्व है। इस दिन भगवान श्री कृष्ण के बाल रूप की पूजा की जाती है जिन्हे कई स्थानों पर लोध गोपाल जी यह भी कहा जाता है.
श्री कृष्ण जन्माष्टमी को भगवान श्री कृष्ण के जन्म दिवस के रूप में मनाया जाता है। इस दिन उपवास करने का नियम है।
ऐसा कहा जाता है कि जो भी इस दिन सात्विकता लेकर मन से भगवान का नाम जपता है तो भगवान भी उसके सारे संकट दूर कर देते हैं और हमेशा के लिए अपना भाग्य बना लेते हैं।
इस दिन भगवान को खुश करने के लिए उनका अच्छे से श्रृंगार किया जाता है और झूला झुलाया जाता है। भगवान के मंदिर को अद्भुत रोशनी से और फूल मालाओं से सजाया जाता है।। कई जगहों पर तो हांडी फोड़ने का कार्यक्रम भी आयोजित किया जाता है।
इस मटकी को तोड़ने से भक्तों के मन में भगवान की यादें फिर से ताजा हो जाती हैं। पूरे भारत देश में सभी स्थानों पर मूर्तियों को नामांकित किया जाता है।
जन्माष्टमी वाले दिन श्री कृष्ण के बाल रूप जिन्हे लोध गोपाल जी के नाम से भी जानिए उनकी पूजा पूरे देश में की जाती है। पादरियों में भजन कीर्तन की तरह मिलता है।
भगवान कृष्ण ने मनुष्य के रूप में जन्म लिया उस समय कंश का आतंक काफी बढ़ गया था, जिसे समाप्त करने के लिए विष्णु भगवान ने श्री कृष्ण के रूप में अपना आठवा अवतार लिया।
जिसके माध्यम से उन्होंने हमें ज्ञान की कई सारी बातें बताईं। इसके अलावा उन्होंने महाभारत के युद्ध के समय भी अपनी मित्रता का धर्म और अर्जुन को सही मार्ग दिखाया।
कृष्ण जन्माष्टमी 2026 केवल एक त्योहार नहीं है, बल्कि जीवन के हर पहलू में प्रेम, धैर्य, भक्ति और करुणा की गहरी सीख देने वाला पर्व है।
यह दिन हमें याद है कि सत्य और धर्म की सदैव विजय होती है, तूफ़ानी परिस्थितियाँ इतनी भी कठिन क्यों नहीं। भक्ति भाव से मनाए जाने वाले जन्माष्टमी का उत्सव हमारे मन को शांति, सकारात्मकता और सकारात्मकता से भर देता है।
यदि आप मथुरा के पुजारियों और मूर्तियों में हो, घर पर कर रहे हो, या दोस्तों के साथ कार्यक्रम में शामिल हो, इस दिन का मूल उद्देश्य है भगवान श्रीकृष्ण के प्रति सच्चा प्रेम और उपहार।
आइये हम सब मिलकर इस जन्माष्टमी को उत्साह, सादगी और आनंद के साथ मनायें और कृष्ण की लीलाओं से प्रेरणा लेकर अपने जीवन को और भी बेहतर बनाएं।
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