शनि जयंती 2026: तिथि, समय, पूजा विधियाँ और महत्व
शनि जयंती 2026 भगवान शनि के जन्मदिन का उत्सव है। शनि जयंती भगवान शनि की जन्म वर्षगांठ है, और…
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नवरात्रि के इस पावन त्यौहार में दुर्गा अष्टमी 2026 [दुर्गा अष्टमी 2026] की पूजा और व्रत का बहुत बड़ा महत्व बताया गया है| इस 2026 में शारदीय नवरात्रि का त्यौहार 11 अक्टूबर से शुरू होकर 19 अक्टूबर तक ख़त्म होगा और इसके अगले दिन 20 अक्टूबर को दशहरा का त्यौहार मनाया जाता है।
जिस दिन भगवान श्री राम ने रावण का वध करके असत्य पर सत्य की विजय प्राप्त की थी| इस दीपावली के त्यौहार के मध्य में आने वाली अष्टमी तिथि को महाष्टमी के नाम से भी जाना जाता है|

महाष्टमी या दुर्गा अष्टमी का त्यौहार देवी दुर्गा माँ को मनाने के लिए किया जाता है| दुर्गा अष्टमी के दिन सभी महिलाएं व्रत रखती हैं और दुर्गा माता की पूजा करती हैं|
दुर्गा अष्टमी के इस दिन दुर्गा माता की आठवीं शक्ति महागौरी का अवतरण हुआ था| इस कारण शारदीय नवरात्रि 2026 की अष्टमी तिथि को देवी महागौरी की पूजा की जाती है|
सिद्धांत है कि देवी दुर्गा महाष्टमी तिथि पर ही असुरों का संहार करने के लिए प्रकट हुई थी| इसके अलावा दुर्गा अष्टमी के दिन कन्या पूजन भी किया जाता है|
तो आइए आपको इस लेख के माध्यम से बताते हैं कि दुर्गा अष्टमी 2026 की तिथि हिंदू धर्म में इतनी महत्वपूर्ण क्यों है|
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महाष्टमी 2026 / दुर्गा अष्टमी 2026 तिथि:
इस वर्ष शारदीय नवरात्रि में दुर्गा अष्टमी 2026 की तिथि 19 अक्टूबर 2026, सोमवार का दिन रहेगा।
अष्टमी तिथि आरंभ: 18 अक्टूबर 2026 को रात्रि 08:14 बजे से
अष्टमी तिथि समाप्त: 19 अक्टूबर 2026 को शाम 06:05 बजे तक
हिंदू धर्म की पौराणिक कथाओं के अनुसार माना जाता है कि इस दिन माता चंड-मुंड ने राक्षसों का संहार किया था
इस कारण से इस दुर्गा अष्टमी का महत्व और अधिक वृद्धि होती है| इस तिथि को आरती की पूजा की जाती है|
इस कारण से इस तिथि को वीर अष्टमी के नाम से भी जाना जाता है| महाअष्टमी के त्यौहार को दुर्गा अष्टमी के नाम से भी जाना जाता है|
दुर्गा अष्टमी की तिथि, नवरात्रि पूजा के महत्वपूर्ण दिनों में से एक मन्त्र है| इस दिन मां दुर्गा के रूप महागौरी की पूजा की जाती है|
माँ गौरी भगवान शिव की पत्नी और भगवान गणेश जी की माता हैं| सबसे पहले भगवान श्री राम ने नौ दिन तक समुद्र तट पर माँ दुर्गा की पूजा की थी|
इसके बाद ही वे युद्ध के लिए लंका की ओर रवाना हुए थे| जिसके बाद उन्होंने रावण के विरुद्ध युद्ध किया और उस पर कर ली से विजय प्राप्त की|
इस कारण से पूर्णतः अगले दिन यानी दशमी तिथि को दशहरा मनाया जाता है| ऐसा माना जाता है कि मां दुर्गा के रूप में नवरात्रि के समय कैलाश पर्वत को छोड़कर धरती पर निवास करती हैं
दुर्गा अष्टमी वह दिन है जब नवरात्रि का त्योहार अंतिम चरण होता है| इस दिन हिंदू धर्म में माता रानी के भक्तों द्वारा छोटी कन्याओं को भोजन दिया जाता है|
हिंदू धर्म में दुर्गा अष्टमी तिथि का बहुत ही खास महत्व बताया गया है| नवरात्रि की इस दुर्गा अष्टमी तिथि के दिन माता भवानी का जन्म हुआ था| माता भवानी एक बहुत ही महानतम शक्ति है|
इस वजह से दुर्गा अष्टमी की तिथि को महाअष्टमी के नाम से भी जाना जाता है| दुर्गा अष्टमी के दिन महिलाएं कन्याओं का पूजन करके अपना व्रत खोलती हैं|
इस तिथि के दिन कुछ माता दुर्गा के भक्त कन्याओं को भोजन करवाते है तथा उनकी पूजा करते है| माना जाता है कि इस 2 साल से 10 साल तक बच्चियों को भोजन कराने तथा उनकी पूजा करने से आपको देवी माता की कृपा प्राप्त होती है|
यह शारदीय नवरात्रि दुर्गा अष्टमी 2026 की तिथि को सबसे महत्वपूर्ण माना जाता है| इस दिन मां दुर्गा के रूप महागौरी की पूजा की जा सकती है|
हिंदू धर्म के अनुसार माना जाता है कि महागौरी का रूप घर में धन और एक उत्कृष्ट विद्वतता है दुर्गा अष्टमी के दिन कई महिलाएं व्रत रखती हैं|

कुछ लोग जो पूरे नौ दिन का उपवास नहीं रखते हैं| अष्टमी तिथि का व्रत निश्चित रूप से रखना चाहिए| माना जाता है कि दुर्गा अष्टमी का व्रत लोगों के भाग्य में एक बहुत बड़ा बदलाव लाता है|
कुछ लोग अपनी सभी प्रकार की चिंताओं को दूर करने के लिए दुर्गा अष्टमी की तिथि का उपवास रखते तथा देवी दुर्गा की पूजा करते है| दुर्गा अष्टमी का त्यौहार घर तथा माता के पंडालो के लिए बहुत ही महत्वपूर्ण त्यौहार माना जाता है|
किसी भी तरह की पूजा करने के लिए हमें बहुत सारी तैयारियां करनी होती है| गावों में पूजा आसानी से हो जाती है लेकिन शहरों में लोगों के पास समय की कमी होती है|
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हालांकि, किसी भी समय भगवान की पूजा करना आपको कठिनाइयों, समस्याओं, तनाव और नकारात्मक ऊर्जाओं से हमें बचाता है। जैसा कि आज आपने इस लेख के माध्यम से दुर्गा अष्टमी 2026 के महत्व तथा पूजा की विधि के बारे में जाना|
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