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नवरात्रि दुर्गा अष्टमी 2026: नवरात्रि में दुर्गा अष्टमी का महत्व

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ख़ुशी शर्मा ने लिखा: ख़ुशी शर्मा
अंतिम अद्यतन:सितम्बर 12, 2025
दुर्गा अष्टमी 2026
इस लेख का सारांश एआई की सहायता से तैयार करें - ChatGPT विकलता मिथुन राशि क्लाउड Grok

नवरात्रि के इस पावन त्यौहार में दुर्गा अष्टमी 2026 [दुर्गा अष्टमी 2026] की पूजा और व्रत का बहुत बड़ा महत्व बताया गया है| इस 2026 में शारदीय नवरात्रि का त्यौहार 11 अक्टूबर से शुरू होकर 19 अक्टूबर तक ख़त्म होगा और इसके अगले दिन 20 अक्टूबर को दशहरा का त्यौहार मनाया जाता है।

जिस दिन भगवान श्री राम ने रावण का वध करके असत्य पर सत्य की विजय प्राप्त की थी| इस दीपावली के त्यौहार के मध्य में आने वाली अष्टमी तिथि को महाष्टमी के नाम से भी जाना जाता है|

दुर्गा अष्टमी 2026

महाष्टमी या दुर्गा अष्टमी का त्यौहार देवी दुर्गा माँ को मनाने के लिए किया जाता है| दुर्गा अष्टमी के दिन सभी महिलाएं व्रत रखती हैं और दुर्गा माता की पूजा करती हैं|

दुर्गा अष्टमी के इस दिन दुर्गा माता की आठवीं शक्ति महागौरी का अवतरण हुआ था| इस कारण शारदीय नवरात्रि 2026 की अष्टमी तिथि को देवी महागौरी की पूजा की जाती है|

सिद्धांत है कि देवी दुर्गा महाष्टमी तिथि पर ही असुरों का संहार करने के लिए प्रकट हुई थी| इसके अलावा दुर्गा अष्टमी के दिन कन्या पूजन भी किया जाता है|

तो आइए आपको इस लेख के माध्यम से बताते हैं कि दुर्गा अष्टमी 2026 की तिथि हिंदू धर्म में इतनी महत्वपूर्ण क्यों है|

लेकिन इससे पहले यदि आप ऑनलाइन माध्यम से किसी भी पूजा जैसे नवरात्रि पूजा [Navratri Puja], दुर्गा अष्टमी पूजा, या गृह प्रवेश पूजा [Griha Pravesh Puja] के लिए पंडित जी को बुक करना चाहते है तो आप हमारी वेबसाइट 99पंडित तथा हमारे ऐप 99पंडित के लिए पंडित की सहायता से ऑनलाइन पंडित  बहुत आसानी से बुक कर सकते है|

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दुर्गा अष्टमी 2026 की शुभ तिथि व मुहूर्त

महाष्टमी 2026 / दुर्गा अष्टमी 2026 तिथि:

इस वर्ष शारदीय नवरात्रि में दुर्गा अष्टमी 2026 की तिथि 19 अक्टूबर 2026, सोमवार का दिन रहेगा।

अष्टमी तिथि आरंभ: 18 अक्टूबर 2026 को रात्रि 08:14 बजे से
अष्टमी तिथि समाप्त: 19 अक्टूबर 2026 को शाम 06:05 बजे तक

क्यों मनाया जाता है दुर्गा अष्टमी का त्योहार

हिंदू धर्म की पौराणिक कथाओं के अनुसार माना जाता है कि इस दिन माता चंड-मुंड ने राक्षसों का संहार किया था

इस कारण से इस दुर्गा अष्टमी का महत्व और अधिक वृद्धि होती है| इस तिथि को आरती की पूजा की जाती है|

इस कारण से इस तिथि को वीर अष्टमी के नाम से भी जाना जाता है| महाअष्टमी के त्यौहार को दुर्गा अष्टमी के नाम से भी जाना जाता है|

दुर्गा अष्टमी की तिथि, नवरात्रि पूजा के महत्वपूर्ण दिनों में से एक मन्त्र है| इस दिन मां दुर्गा के रूप महागौरी की पूजा की जाती है|

माँ गौरी भगवान शिव की पत्नी और भगवान गणेश जी की माता हैं| सबसे पहले भगवान श्री राम ने नौ दिन तक समुद्र तट पर माँ दुर्गा की पूजा की थी|

इसके बाद ही वे युद्ध के लिए लंका की ओर रवाना हुए थे| जिसके बाद उन्होंने रावण के विरुद्ध युद्ध किया और उस पर कर ली से विजय प्राप्त की|

इस कारण से पूर्णतः अगले दिन यानी दशमी तिथि को दशहरा मनाया जाता है| ऐसा माना जाता है कि मां दुर्गा के रूप में नवरात्रि के समय कैलाश पर्वत को छोड़कर धरती पर निवास करती हैं

दुर्गा अष्टमी वह दिन है जब नवरात्रि का त्योहार अंतिम चरण होता है| इस दिन हिंदू धर्म में माता रानी के भक्तों द्वारा छोटी कन्याओं को भोजन दिया जाता है|

हिंदू धर्म में दुर्गा अष्टमी तिथि का बहुत ही खास महत्व बताया गया है| नवरात्रि की इस दुर्गा अष्टमी तिथि के दिन माता भवानी का जन्म हुआ था| माता भवानी एक बहुत ही महानतम शक्ति है|

इस वजह से दुर्गा अष्टमी की तिथि को महाअष्टमी के नाम से भी जाना जाता है| दुर्गा अष्टमी के दिन महिलाएं कन्याओं का पूजन करके अपना व्रत खोलती हैं|

दुर्गा अष्टमी के शुभ अवसर पर माँ दुर्गा के 108 नाम व उनका अर्थ

  1. सती– अग्नि में जल कर भी जीवित होने वाली 
  2. साध्वी- आशावादी 
  3. भवप्रीता– भगवान शिव पर प्रीति रखने वाली 
  4. भवानी– ब्रह्मांड में निवास करने वाली 
  5. भावमोचनि– सांसारिक बंधनों से मुक्त करने वाली 
  6. आर्या– देवी 
  7. दुर्गा– अपराजेय 
  8. जया- विजयी 
  9. आद्य– शुरुआत की वास्तविकता
  10. त्रिनेत्र– तीन आंखों वाली
  11. भालाधारी– शूल धारण करने वाली 
  12. पिनाकधारिणी– शिव का त्रिशूल धारण करने वाली 
  13. चित्रा– सुरम्य, सुंदर 
  14. चण्डघण्टा– प्रचण्ड स्वर से घण्टा नाद करने वाली, घंटे की आवाज निकालने वाली 
  15. सुधा– अमृत की देवी 
  16. मन– मनन-शक्ति 
  17. बुद्धि– सर्वज्ञाता 
  18. अहंकारा– अभिमान करने वाली
  19. चित्तरूपा– वह जो सोच की अवस्था में है 
  20. चिता- मृत्यु शय्या 
  21. चिति– चेतना 
  22. सर्वमंत्रमयी– सभी मंत्रों का ज्ञान रखने वाली 
  23. 1. 1. 2. 3. 4. 5. 6. 7. 8. 9. 1 ...– सत-स्वरूपा, जो सब से ऊपर है 
  24. सत्यानन्द स्वरूपिणी– अनंत आनंद का रूप 
  25. अनंत– जिनके स्वरूप का कहीं अंत नहीं 
  26. भाविनी– सबको उत्पन्न करने वाली, खूबसूरत औरत 
  27. भाव्या– भावना एवं ध्यान करने योग्य
  28. भव्या– कल्याणरूपा, भव्यता के साथ 
  29. अभव्या– जिससे बढ़कर भव्य कुछ नहीं 
  30. सदगति– हमेशा गति में, मोक्ष दान 
  31. शाम्भवी- शिवप्रिया, शंभू की पत्नी 
  32. धर्म-माता– देवगण की माता 
  33. चिंता- चिंता 
  34. रत्नप्रिया– गहने से प्यार करने वाली 
  35. सर्वविद्या– ज्ञान का निवास 
  36. दक्षिणा– दक्ष की बेटी
  37. दाक्षयज्ञविनाशिनी– दक्ष के यज्ञ को रोकने वाली 
  38. अपर्णा– तपस्या के समय पत्ते को भी न खाने वाली 
  39. सारंग– अनेक रंगों वाली 
  40. पाटला– लाल रंग वाली 
  41. पाटलावती– गुलाब के फूल 
  42. पट्टंबर परिधान– रेशमी वस्त्र पहनने वाली 
  43. कालमांजिरारंजिनी– पायल को धारण करके प्रसन्न रहने वाली 
  44. अमेय– जिसकी कोई सीमा नहीं 
  45. विक्रमा– असीम पराक्रमी
  46. क्रूरा– दैत्यों के प्रति कठोर 
  47. सुंदरता– सुंदर रूप वाली 
  48. सुरसुन्दरी- अति खूबसूरत 
  49. वनदुर्गा– जंगलों की देवी 
  50. मातंगी– मतंगा की देवी 
  51. मातंगमुनिपूजिता– बाबा मतंगा द्वारा पूजनीय 
  52. ब्राह्मी– भगवान ब्रह्मा की शक्ति 
  53. माहेश्वरी– प्रभु शिव की शक्ति 
  54. इंद्री– इंद्र की शक्ति
  55. कौमारी– किशोरी 
  56. वैष्णवी– अजेय 
  57. चामुण्डा– चंड और मुंड का नाश करने वाली 
  58. यहां तक ​​कि हवा भी– वराह पर सवार होने वाली 
  59. लक्ष्मी– सौभाग्य की देवी 
  60. पुरुषाकृति– वह जो पुरुष धारण कर ले 
  61. विमिलौत्त्कार्शिनी– आनन्द प्रदान करने वाली 
  62. ज्ञान– ज्ञान से भरी हुई 
  63. क्रिया– हर कार्य में होने वाली
  64. नित्या- शाश्वत 
  65. ढंग– ज्ञान देने वाली 
  66. ला– विभिन्न रूपों वाली 
  67. पोलियामोरोउस- सभी प्रिय 
  68. सर्ववाहनवाहना– सभी वाहन पर विराजमान होने वाली 
  69. निशुम्भशुम्भाहनानि– शुम्भ, निशुम्भ का वध करने वाली 
  70. महिषासुरमर्दिनी– महिषासुर का वध करने वाली 
  71. मसुकैटभहंत्री– मधु व कैटभ का नाश करने वाली 
  72. चण्डमुंडा विनाशिनी– चंड और मुंड का नाश करने वाली
  73. सभी राक्षसों का नाश– सभी राक्षसों का नाश करने वाली 
  74. सर्वदानवघातिनी– संहार के लिए शक्ति रखने वाली 
  75. सारा विज्ञान– सभी सिद्धांतों में निपुण 
  76. सत्या– सच्चाई 
  77. सर्वसशस्त्र– सभी हथियारों धारण करने वाली 
  78. अनेकशस्त्रहस्ता– कई हथियार धारण करने वाली 
  79. मल्टी-आर्म्ड– अनेक हथियारों को धारण करने वाली 
  80. कुमारी– सुंदर किशोरी 
  81. एक इकलौती बेटी– कन्या
  82. कैशोरी– जवान लड़की 
  83. :(मैं)– नारी 
  84. यति– तपस्वी 
  85. अप्रौढा– जो कभी पुराना ना हो
  86. वयस्क– जो पुराना है 
  87. बूढ़ी माँ– शिथिल 
  88. बलप्रदा– शक्ति देने वाली 
  89. महोदरी– ब्रह्मांड को संभालने वाली 
  90. मुक्त बालों वाला– खुले बाल वाली
  91. घोररूपा– एक भयंकर दृष्टिकोण वाली
  92. महाबला– अपार शक्ति वाली 
  93. आग की लपट– मार्मिक आग की तरह 
  94. रौद्रमुखी– विध्वंसक रुद्र की तरह भयंकर चेहरा 
  95. कालरात्रि– काले रंग वाली 
  96. तपस्विनी– तपस्या में लगे हुए 
  97. नारायणी– भगवान नारायण की विनाशकारी रूप 
  98. भद्रकाली– काली का भयंकर रूप
  99. बिष्णुमाया– भगवान विष्णु का जादू
  100. जलोदरी– ब्रह्मांड में निवास करने वाली
  101. शिवदूती– भगवान शिव की राजदूत
  102. करली– हिंसक
  103. अनंत– विनाश रहित 
  104. परमेश्वरी– प्रथम देवी
  105. कात्यायनी– ऋषि कात्यायन द्वारा पूजनीय
  106. सावित्री– सूर्य की बेटी 
  107. दिशा– वास्तविक
  108. ब्रह्मवादिनी– वर्तमान में हर जगह वास करने वाली

पूजा सामग्री - दुर्गा अष्टमी पूजा सामग्री

  • लाल वस्त्र
  • मौली
  • लाल चुनरी
  • तेल/घी
  • दीपक
  • श्रृंगार का सामान
  • धूप
  • कोट
  • साफ़ चावल
  • कुमकुम
  • फूल
  • पैन
  • सुपारी
  • देवी मां की प्रतिमा
  • लोंग
  • प्रतीक
  • बताशे / मिश्री
  • कलावा
  • फल – मिठाई
  • कूपर

दुर्गा अष्टमी की पूजा विधि – दुर्गा अष्टमी पूजा विधि

  • दुर्गा अष्टमी के दिन माता महागौरी की पूजा करें|
  • इस दिन आपको सुबह-सुबह प्रारंभिक इलेक्ट्रिक स्नान आदि करके अपने आप को पवित्र कर ले|
  • इसके बाद आप माता महागौरी की प्रतिमा और चित्र स्थापित कर लेंगे|
  • अब आपको एक स्टूडियो पर लाल कपडा लेकर उस महागौरी यंत्र की स्थापना करनी है|
  • इसके बाद आप महागौरी की प्रतिमा के सामने दीपक जलाएं और पुष्प निर्जीव देखें|
  • अब आपको माता दुर्गा की आरती और साथ ही उनके मंत्रों का उच्चारण करना चाहिए|
  • इसके बाद आपको दुर्गा माता के आठवें रूप महागौरी को पंचामृत का प्रसाद चढ़ाया जाता है|
  • इसके अलावा उन्हें पान, सुपारी, पांच फल, तेल, लौंग और इलायची भी नहीं मिलनी चाहिए|
  • इस दिन नारियल का भोग लगाना बहुत शुभ माना जाता है| आप नारियल के साथ आप मिठाई भी अर्पित कर सकते है|
  • माना जाता है कि अगर आप कन्या पूजन करते है तो आपके घर में सुख समृद्धि आती है| इसलिए आपको इस दिन 2 साल से 10 साल की कन्याओं को भोजन कराना चाहिए तथा इसके पश्चात उन्हें दक्षिणा भी प्रदान करनी चाहिए|

दुर्गा अष्टमी का महत्व – दुर्गा अष्टमी का महत्व

इस तिथि के दिन कुछ माता दुर्गा के भक्त कन्याओं को भोजन करवाते है तथा उनकी पूजा करते है| माना जाता है कि इस 2 साल से 10 साल तक बच्चियों को भोजन कराने तथा उनकी पूजा करने से आपको देवी माता की कृपा प्राप्त होती है|

यह शारदीय नवरात्रि दुर्गा अष्टमी 2026 की तिथि को सबसे महत्वपूर्ण माना जाता है| इस दिन मां दुर्गा के रूप महागौरी की पूजा की जा सकती है|

हिंदू धर्म के अनुसार माना जाता है कि महागौरी का रूप घर में धन और एक उत्कृष्ट विद्वतता है दुर्गा अष्टमी के दिन कई महिलाएं व्रत रखती हैं|

दुर्गा अष्टमी 2026

कुछ लोग जो पूरे नौ दिन का उपवास नहीं रखते हैं| अष्टमी तिथि का व्रत निश्चित रूप से रखना चाहिए| माना जाता है कि दुर्गा अष्टमी का व्रत लोगों के भाग्य में एक बहुत बड़ा बदलाव लाता है|

कुछ लोग अपनी सभी प्रकार की चिंताओं को दूर करने के लिए दुर्गा अष्टमी की तिथि का उपवास रखते तथा देवी दुर्गा की पूजा करते है| दुर्गा अष्टमी का त्यौहार घर तथा माता के पंडालो के लिए बहुत ही महत्वपूर्ण त्यौहार माना जाता है|

निष्कर्ष – Conclusion

किसी भी तरह की पूजा करने के लिए हमें बहुत सारी तैयारियां करनी होती है| गावों में पूजा आसानी से हो जाती है लेकिन शहरों में लोगों के पास समय की कमी होती है|

जिस वजह से वह लोग पूजा नहीं करवा पाते है तो उनकी इस समस्या का समाधान हम लेकर आये है 99पंडित के साथ|

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हालांकि, किसी भी समय भगवान की पूजा करना आपको कठिनाइयों, समस्याओं, तनाव और नकारात्मक ऊर्जाओं से हमें बचाता है। जैसा कि आज आपने इस लेख के माध्यम से दुर्गा अष्टमी 2026 के महत्व तथा पूजा की विधि के बारे में जाना|

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