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Onam 2026: जाने ओणम 2026 की तिथि, विधि और महत्व

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शालिनी मिश्रा ने लिखा: शालिनी मिश्रा
अंतिम अद्यतन:सितम्बर 2, 2025
ओणम 2026
इस लेख का सारांश एआई की सहायता से तैयार करें - ChatGPT विकलता मिथुन राशि क्लाउड Grok

ओणम 2026: भारत को त्योहारों का देश भी कहा जाता है| ऐसा इसलिए है क्योंकि यहां हर दिन कोई ना कोई त्यौहार आता ही रहता है|

लेकिन यही हम दूसरी ओर अर्थात् दक्षिण भारत की ओर देखें तो उधर ओणम का त्यौहार बड़े ही उत्साह तथा हर्षोल्लास के साथ मनाया जाता है| सिद्धांत है कि यह त्यौहार 10 दिन तक मनाया जाने वाला सबसे सुप्रसिद्ध त्यौहार है|

आपकी जानकारी के लिए बता दें कि ओणम 2026 का यह त्योहार महाराजा बलि और भगवान विष्णु के वामन अवतार के स्वागत के लिए मनाया जाता है|

ओणम 2026

इस वर्ष में ओणम 2026 (Onam 2026) का त्यौहार 16 अगस्त से लेकर 28 अगस्त तक मनाया जाएगा| ओम को दक्षिण भारत के सबसे महत्वपूर्ण त्योहार के नाम से जाना जाता है|

मलयालम कैलेंडर के अनुसार ओणम का त्यौहार चिंगम महीने में मनाया जाता है| इस कैलेंडर के अनुसार चिंगम माह मलयालम कैलेंडर का पहला महीना माना जाता है जो कि अगस्त – सितम्बर के बीच में आता है|

यह त्यौहार केरल राज्य के लोगों के लिए सबसे महत्वपूर्ण है| वहां के लोग इस त्यौहार को बहुत ही शानदार तरीके से मनाते हैं| ओणम के त्योहार को तिरुवोणम के नाम से भी जाना जाता है|

इस त्यौहार पर दक्षिण भारत के लोग बहुत ही उत्साह दिखाते हैं और अपने भगवान को प्रसन्न करने के लिए उनकी पूजा करते हैं| और उनके आशीर्वाद के लिए प्रार्थना करता हूँ| 

यह त्यौहार वैसे ही 12 दिन तक मनाया जाता है| जैसा कि हमने आपको पहले बताया था कि यह त्योहार 10 दिन तक मनाया जाता है, क्योंकि इसके 10 दिन तक सबसे शुभ और मुख्य माने जाते हैं| चिंगम माह में सावन या तिरुवोणम नक्षत्रों के सक्रिय होने पर तिरुओणम की पूजा की जाती है|

ओणम 2026 की तिथि व शुभ मुहूर्त

तारीख

  • पहला ओणम (उत्थरादम): 25 अगस्त 2026, मंगलवार
  • थिरुवोणम (मुख्य ओणम): 26 अगस्त 2026, रविवार

प्रभारी

  • त्रिवोणम नक्षत्र आरंभ : 25 अगस्त 2026 को रात्रि 10:51 बजे से
  • त्रिवोणम नक्षत्र समाप्त : 27 अगस्त 2026 से रात्रि 12:48 पूर्वाह्न (मध्यरात्रि) तक

ओम क्या है?

यह त्यौहार सर्वाधिक दक्षिण भारत में मनाया जाता है| मुख्यत: भारत देश के केरल राज्य में यह त्यौहार मनाया जाता है| मलयालम कैलेंडर के अनुसार ओणम 2026 (ओणम 2026) का त्यौहार शिंटम महीने में मनाया जाता है|

इस कैलेंडर के अनुसार चिंगम माह मलयालम कैलेंडर का पहला महीना माना जाता है जो कि अगस्त - सितंबर के बीच में आता है| ओणम के त्योहार को तिरुवोणम के नाम से भी जाना जाता है|

आपकी जानकारी के लिए बता दें कि ओणम का त्योहार वैसे तो 12 दिन तक मनाया जाता है लेकिन ओणम के 10 दिन पहले से ही सबसे महत्वपूर्ण माना जाता है| इसके अलावा भी ओणम के त्यौहार का हर दिन आपके लिए एक अलग खास महत्व होता है|

जब तक यह ओणम का त्योहार आता है तब तक सभी लोग अपने घरों को फूलों से सजाकर ही रखते हैं| इस दिन संपूर्ण विधि विधान के साथ भगवान विष्णु और महाराजा बलि की पूजा की जाती है

ओम का यह पवित्र त्योहार नए किसानों की खुशी में भी मनाया जाता है| ओणम का यह त्यौहार थ्रिकरा नाम का एक वामन मंदिर है जो केरल राज्य में स्थित है

इस दिन वहा के सभी घरों में फूलों की झाड़ियों की सहायता से बहुत सारी सुंदर - सुंदर रंगोलियाँ का निर्माण किया गया है| सभी युवतियां उन रंगोलियों के चारों ओर और बड़े उत्साह के साथ नृत्य करती हैं|

इस फूलों से बनी जाने वाली वृताकार रंगोलियों की संख्या कम ही होती है, लेकिन जैसे-जैसे त्योहार के दिन बढ़ते जाते हैं|

एक ही प्रकार से इन वृत्ताकार रंगोलियों की संख्या भी बढ़ती रहती है| इसी प्रकार से यह 10 दिनों में पुकलम वृहत का आकार धारण कर लेता है|

क्यों मनाया जाता है ओणम का त्यौहार

ओणम के त्योहार को मनाने के पीछे बहुत से कारण तथा अनेकों कथाएं प्रचलित है| आज हम उन्ही में से एक कथा आपको बताने वाले है, जो कि सबसे श्रेष्ठ है| तथा इस कथा का बखान भी कई ग्रंथों और वेदों में मिलता है|

कथा

एक पौराणिक कथा के अनुसार मान्यता है कि महाबली नाम का एक असुर राजा था| वैसे तो महाबली एक असुर राजा था लेकिन वह अपने प्रजा के लिए बहुत ही अच्छे काम (नेक) काम के थे|

इसलिए वह सभी देवता के समान ही मानते थे| महाबली को अपना पेज बहुत ही प्रिय था| उसे अपने पेज पर किसी भी तरह का कोई संकट नहीं आता था|

इस कारण से पेज भी महाबली से बहुत ही आकर्षक था| महाबली आपके जप और टैप की सहायता से अनेक शक्तियां प्राप्त हो रही थी|

माना जाता है कि महाबली इतने शक्तिशाली राजा थे| जिसे परास्त करना बिल्कुल संभव ही नहीं था| महाबली ने इंद्र देव को हराकर स्वर्गलोक पर कब्ज़ा कर लिया था|

ओणम 2026

इंद्र की स्थिति देखकर उनकी मां ने भगवान विष्णु की प्रार्थना की| उनकी प्रार्थना से अभिनीत वादन इंद्र देव ने माता आदित्य को यह दिया कि वह ही इंद्र देव का प्रयास करेंगे और उन्हें अपना खोया हुआ राजपाट फिर से दिलवा देंगे| इसके कुछ समय बाद ही भगवान विष्णु ने माता अदिति के गर्भ से वामन रूप में जन्म लिया|

तब भगवान श्री हरि वामन अवतार में राजा बलि के पास पहुँचे| तब राजा बलि ने उनका आदर सत्कार किया और उनसे भेट मांगने को कहा तो गोकू विष्णु अपनी तीन पैग जमीन खाली रखी|

बलि ने यह प्रस्ताव स्वीकार कर लिया| तब भगवान विष्णु ने अपना विशाल रूप धारण किया और उन्होंने पहले पग में संपूर्ण पृथ्वी, तीसरे पग में संपूर्ण आकाश नप दिया|

जब तीसरा पग रखने के लिए कोई स्थान नहीं बचा तो राजा बलि ने अपने सिर पर तीसरा पग रखवा लिया| जिससे राजा बलि पाताल में चले गये थे|

प्रजा का बलि के लिए प्रेम

जैसे कि राजा बलि के पेज से पता चला कि उनका राजा पाताल में है| यह पूरे राज्य में ही हथकम्प मच गया|

राजा बलि के पाताल में चले जाने से संपूर्ण राज्य की प्रजा बहुत दुखी और निराश हो गई थी| भगवान भी बड़े ही दयालु हैं|

उन्होंने राजा बलि के प्रति प्रजा का इतना स्नेह देख कर भगवान विष्णु ने उन्हें यह वरदान दिया कि प्रत्येक वर्ष में किसी एक निश्चित तिथि पर राजा बलि उनसे मिलने अवश्य आयेंगे| मान्यता है कि आज भी राजा बलि अपनी प्रजा से मिलने एक निश्चित तिथि पर आते है|

इसी समय को एक त्यौहार के रूप में मनाया जाता है| जिसे हम ओणम के नाम से जानते है| ओणम को एक अन्य नाम थिरुवोणम से भी जाना जाता है|

वहां ऐसी मान्यता है कि जब भी राजा बलि से आपके पेज पर मुलाकात होती है| तो संपूर्ण राज्य में हरियाली छा जाती है| और सभी घरों में खुशहाली और समृद्धि आती है|

ओणम त्योहार के 10 दिन

दिन महत्व
अथम पहला दिन जब राजा बलि केरल जाने के लिए निकलते है|
चिथिरा फूलों का कालीन जिसे पुक्कलम कहते है, बनाना शुरू करते है|
चोधी पुक्कलम में 4 – 5 प्रकार के फूलों से अगली परत बनाई जाती है|
विशाकम इस दिन से अलग – अलग प्रकार की प्रतियोगिता प्रारम्भ हो जाती है|
अनिज्हम नौका रेस की तैयारी प्रारम्भ होती है|
थ्रिकेता छुट्टियां शुरू हो जाती है|
मूलम मंदिरों में विशेष पूजा प्रारम्भ हो जाती है|
पूरादम महाबली और वामन जी की प्रतिमा घर में स्थापित की जाती है|
उठ्रादोम इस दिन महाबली केरल में प्रवेश करते है|
थिरुवोनम मुख्य त्यौहार

 

ओणम 2026 मनाने की विधि

दक्षिण भारतबात करे तो वहां पर ओणम का त्यौहार बड़ा ही उत्साह और हर्षोल्लास के साथ मनाया जाता है| सिद्धांत है कि यह त्यौहार 10 दिन तक मनाया जाने वाला सबसे सुप्रसिद्ध त्यौहार है|

आपकी जानकारी के लिए बता दें कि ओणम 2026 का यह त्योहार महाराजा बलि और भगवान विष्णु के वामन अवतार के स्वागत के लिए मनाया जाता है|

ओणम 2026

इस त्यौहार को केरल में बहुत ही अच्छे पारंपरिक तरीके से मनाया जाता है| इस दिन होने वाली नौका रेस व अलग – अलग प्रतियोगिताओं को देखने के लिए लोग बहुत ही दूर – दूर से आते हैं| तो आइये जानते है ओणम को कैसे मनाया जाता है –

  • ओणम का यह त्यौहार  थ्रिकरा नामक एक वामन मंदिर से प्रारम्भ होता है जो कि केरल राज्य में स्थित है| इस दिन मंदिर में ओणम के त्यौहार बहुत ही अच्छे से मनाया जाता है|
  •  यह त्यौहार 10 दिनों तक मनाया जाने वाला बहुत ही सुप्रसिद्ध त्यौहार है| जिसमे नाच, गाना, पूजा, आरती, मेला, खरीददारी  के बाजार तथा अन्य कई चीज़ों की तैयारिया होती है|
  • ओणम के दिन बाजारों में किसानों के लिए सभी सामान जैसे – कपड़े, गहने अन्य सभी चीज़े बहुत ही सस्ते कीमत पर मिलती है| ताकि सभी लोग त्यौहार का भरपूर आनंद ले सके|
  • इस सभी लोग नये – नये कपड़े खरीदते है और उन्ही कपड़ो को ही पहनते है| इसका भी एक अलग महत्व है| इसलिए इसको ओनक्कोदी के नाम से जाना जाता है|
  • यह त्यौहार दानवीर महाबली की याद में मनाया जाता है| इसलिए इस दिन जरुरतमंदों को दान करना की भी मान्यता है| उनके राजा बलि बहुत ही प्रसन्न होते है|
  • इस त्यौहार के अंतिम दिन में अलग – अलग 26 प्रकार के पकवान का निर्माण किया जाता है| तथा इसके पश्चात उन्हें केले के पत्तों में सभी लोगों को परोसा जाता है|

ओणम 2026 का महत्व

ओम को दक्षिण भारत के सबसे महत्वपूर्ण त्योहार के नाम से जाना जाता है| मलयालम कैलेंडर के ओणम 2026 (ओणम 2026) का त्यौहार चिंगम महीने में मनाया जाता है|

इस कैलेंडर के अनुसार चिंगम माह मलयालम कैलेंडर का पहला महीना माना जाता है जो कि अगस्त - सितंबर के बीच में आता है|

यह त्यौहार केरल राज्य के लोगों के लिए सबसे महत्वपूर्ण है| वहां के लोग इस त्यौहार को बहुत ही शानदार तरीके से मनाते हैं|

ओणम के त्योहार को तिरुवोणम के नाम से भी जाना जाता है| ओणम एक बहुत ही प्राचीन त्योहार माना गया है| जिसे आज भी बड़े उत्साह के साथ मनाया जाता है|

इस महीने में ओम के साथ-साथ चावल के त्योहार के रूप में और वर्षा के फूलों के त्योहार के रूप में मनाया जाता है

जब तक यह ओणम का त्योहार आता है तब तक सभी लोग अपने घरों को फूलों से सजाकर ही रखते हैं|

इस दिन संपूर्ण विधि विधान के साथ भगवान विष्णु और महाराजा बलि की पूजा की जाती है ओम का यह पवित्र त्योहार नए किसानों की खुशी में भी मनाया जाता है|

इस दिन में यह बताया गया है कि महाबली अपने पेज से मिलते हैं और उनके सभी दुख, दर्द और कष्ट दूर कर देते हैं|

अनुमान

किसी भी तरह की पूजा करने के लिए हमें बहुत सारी तैयारियां करनी होती है| गावों में पूजा आसानी से हो जाती है लेकिन शहरों में लोगों के पास समय की कमी होती है|

जिस वजह से वह लोग पूजा नहीं करवा पाते है तो उनकी इस समस्या का समाधान हम लेकर आये है 99पंडित के साथ|

यह सबसे बेहतरीन टूल है जिसकी मदद से आप किसी भी पूजा के लिए ऑनलाइन पंडित जी को बुक कर सकते हैं आज हमने इस लेख के माध्यम से ओणम के बारे में काफी बाते जानी है|

आज हमने ओणम पूजन के फ़ायदों के बारे में भी जाना| इस दिन होने वाली अलग-अलग तरह के स्वाद के बार में भी हमने आपको बताया| हम आशा करते हैं कि हमारी द्वारा दी गई दी गई जानकारी से आपको कोई ना कोई मदद मिलेगी|

इसके अलावा भी अगर आप किसी और पूजा के बारे में जानकारी लेना चाहते है। तो आप हमारी वेबसाइट 99पंडित पर जाकर सभी तरह की पूजा या त्योहारों के बारे में सम्पूर्ण जानकारी ले सकते है|

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