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ऋषि पंचमी 2026 - जाने ऋषि पंचमी कब है? तिथि, पूजा मुहूर्त और महत्व

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अंतिम अद्यतन:अगस्त 27, 2025
ऋषि पंचमी 2026
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हिन्दू धर्म में ऋषि पंचमी 2026 के त्यौहार को बहुत ही शुभ माना जाता है| इस दिन भारत देश में ऋषियों के सम्मान के रूप में मनाया जाता है|

ऋषि पंचमी 2026 का यह पावन त्यौहार हिन्दू धर्म में सर्वज्ञानी सप्तऋषियों को समर्पित किया गया है| ऋषि शब्द सप्त ऋषियों के लिए और पंचमी का दिन पवित्र दिन से है|

ऋषि पंचमी के शुभ अवसर पर भारत देश के महान ऋषियों को याद किया जाता है| 'ऋषि पंचमी’ का यह त्यौहार भाद्रपद महीने में शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि को मनाया जाता है|

इस दिन देश के महान सप्तर्षियों के सम्मान उपवास भी रखा जाता है| ऋषि पंचमी का यह त्यौहार गणेश चतुर्थी के अगले दिन तथा हरतालिका तीज दो दिन बाद मनाया जाता है|

यह त्यौहार सप्तऋषियों को ही समर्पित है| इन सप्त ऋषियों ने मानव जाति के कल्याण के लिए अपने प्राणों का त्याग कर दिया था| यह सप्त ऋषि अत्यंत ही सिद्धांतवादी थे|

हिंदू धर्म की मान्यताओं के अनुसार उन्होंने मानव कल्याण के लिए संतों और उनके अनुयायियों की सहायता से इस देश के लोगों को सच्चाई और सिद्धांतों के मार्ग पर चलने की प्रेरणा दी|

ऐसी मान्यता है कि सभी ऋषि चाहते थे कि इस धरती पर सभी लोग दान, मानव और ज्ञान का मार्ग अपनाएं

उनका मानना ​​था कि जब लोग यहां एक धार्मिक सहायता के लिए हमेशा तत्पर रहेंगे तो इससे मानवता का विकास होता है|

एक व्यक्ति दूसरे व्यक्ति की जरूरत के समय काम आता है| हर साल भाद्रपद मास की शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि को ऋषि पंचमी का व्रत किया जाता है|

ऋषि पंचमी 2026 शुभ उत्सव तिथि – ऋषि पंचमी 2026 शुभ मुहूर्त और तिथि

तारीख – ऋषि पंचमी वर्ष 2026 में 15 सितंबर 2026 को मनाया जाएगा|

ऋषि पंचमी 2026 पूजा मुहूर्त – 15 सेकंड 2026 सुबह 11 बजे से 20 मिनट तक शुरू होगा दोपहर 01 बजे से शुरू 47 मिनट तक रहेगा|

पंचमी तिथि प्रारंभ – 15 सितम्बर 2026, प्रातः 07:44 बजे से प्रारम्भ 

पंचमी तिथि समाप्त – 16 सितम्बर 2026, प्रातः 08:59 बजे समाप्त 

ऋषि पंचमी व्रत का क्या उद्देश्य है? – ऋषि पंचमी क्या है?

हिन्दू धर्म के पंचांग के अनुसार भाद्रपद मास शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि को ये करें व्रत| इस दिन व्रत करके सप्तऋषियों की पूजा की जाती है|

यह त्यौहार खास इसलिए भी है क्योंकि इस दिन महिलाओं को सप्त ऋषियों की पूजा करके सुख - शांति और समृद्धि की प्राप्ति होती है|

हिन्दू धर्म इस सिद्धांत के अनुसार ऋषि पंचमी के दिन व्रत के साथ व्रत कथा को पढ़ने से ही सभी प्रकार के पापों से मुक्ति मिलती है| इस दिन माहेश्वरी समाज के लोग राखी का त्योहार मनाते हैं|

ऋषि पंचमी के दिन सुबह जल्दी उठकर सप्तऋषि की पूजा करने से अत्यंत पुण्य की प्राप्ति होती है| हिन्दू धर्म के अनुसार इस दिन सप्तऋषियों का पारम्परिक तरीके से पूजन करने की प्रथा है|

इन सप्त ऋषियों के नाम निम्न है – ऋषि कश्यप, ऋषि भारद्वाज, ऋषि अत्रि, ऋषि विश्वामित्र, ऋषि गौतम, ऋषि जमदग्नि और ऋषि वशिष्ठ |

सभी सप्तऋषियों ने मानव एवं समाज कल्याण के लिए बहुत ही महत्वपूर्ण कार्य किया है| इसी कारण ऋषि पंचमी के दिन सातों ऋषियों की पूजा की जाती है|

ऋषि पंचमी के इस पवित्र अवसर पर कोई भी व्यक्ति विशेष रूप से महिलाएं जो सप्त ऋषियों का पूजन करती हैं उन्हें सभी पापों से मुक्ति मिल जाती है|

प्राचीन सिद्धांत के अनुसार महिला राज कोस्वला दोष लगता है| ऋषि पंचमी के पूजन से यह पाप अदृश्य है|

इस दिन सप्तऋषियों की पूजा करने से महिलाओं के द्वारा मासिक धर्म के समय अनजाने में किये पाप या गलती से मुक्ति मिल जाती है|

ऋषि पंचमी 2026 का त्यौहार सभी के लिए बहुत लाभदायक है| लेकिन इस यह व्रत महिलाओं के लिए अत्यंत लाभकारी माना गया है|

ऋषि पंचमी क्यों मनाई जाती है ? – Why is Rishi Panchami Celebrated

हमारे देश में सभी धर्मों की अलग-अलग विशेषता है| हिन्दू धर्म में पवित्रता को सबसे महत्वपूर्ण माना जाता है| हिंदू धर्म में मासिक धर्म से समय महिलाओं को संरक्षक माना जाता है|

ऐसा भी कहा जाता है कि इस समय यदि कोई महिला धार्मिक कार्यों में भाग लेती है तो उसे माहवारी दोष लग जाता है।

इसलिए यह दोष पीड़ित महिलाओं को है ऋषि पंचमी 2026 के दिन व्रत रखकर सप्त ऋषियों की पूजा करने की सलाह दी जाती है|

ऋषि पंचमी 2026

सिद्धांत है नेपाली के द्वारा ऋषि पंचमी के इस त्यौहार को बहुत अधिक उत्साह से मनाया जाता है| ऋषियों को वेदों का मूल संप्रदाय माना जाता है|

जैन धर्म में भी ऋषि पंचमी का त्यौहार सबसे बड़े हर्षोल्लास से मनाया जाता है| जैन धर्म में ऋषि पंचमी के दिन जैनों के धर्म गुरु और संतों को याद किया जाता है|

इस पूरी दुनिया को काफी महत्वपूर्ण संदेश दिया गया है| हिन्दू धर्म और जैन धर्म दोनों में ही ऋषि पंचमी के त्यौहार को सम्पूर्ण भक्ति भाव से मनाया जाता है|

ऋषि पंचमी का यह उत्सव पौराणिक एवं ज्ञान मार्ग पर चलने वाले सप्तऋषियों की स्मृति में मनाया जाता है| सप्तर्षि मंडल के प्रथम सदस्य ऋषि शिष्य थे जो राजा गणेश के कुल गुरु थे|

ऋषि वशिष्ठ ने अपनी रचित सौ सूक्तों की रचना सरस्वती नदी के किनारे की थी| तेरह सप्तर्षि ऋषि होने से पूर्व एक राजा थे|

माना जाता है कि उन्होंने ऋषि आश्रम के लिए कामधेनु गाय से भी युद्ध किया था| लेकिन इस युद्ध में हार जाने के बाद वे ऋषि बन गये| ऐसे ही सभी सात ऋषियों की अलग-अलग कहानी है|

ऋषि पंचमी पूजा विधि - ऋषि पंचमी पूजा विधि

हिंदू और जैन धर्म में ऋषि पंचमी के त्योहार को बहुत ही भक्ति भाव और धार्मिक परंपरा के अनुसार मनाया जाता है|

इस दिन व्रत और सप्तर्षियों की पारंपरिक विधि से पूजा करने पर भक्तों को सौभाग्य मिलता है| इस दिन के विधान में निर्दिष्ट सप्तर्षियों की पूजा की जाती है|

आज इस लेख के माध्यम से हम जानेंगे कि ऋषि पंचमी के दिन सात ऋषियों की पूजा किस प्रकार की जाती है|

  • इस दिन पूजा करने से पहले ही कुछ चीज़े जैसे साफ़ कपड़ा, पंचामृत ( दूध, दही, घी, शहद और शक्कर का मिश्रण) फूल, धूप, दीपक आदि पूजा के लिए एकत्रित करके रखे|
  • फिर एक साफ़ स्थान का चुनाव करके चौकी को वहा पर रख दे और उसे फूलों से सजाए|
  • उसके बाद चौकी पर साफ़ कपड़े को बिछाकर उसपर सप्तऋषियों या अपने धार्मिक गुरुओं की तस्वीर को रखे|
  • इसके बाद उन्हें फूल, जल, धूप और अर्घ्य अर्पित किया जाता है|
  • पूजा में ऋषियों को सभी चीज़े अर्पित कर देने के पश्चात निम्न मंत्रो का जाप करें| 1. नमः शिवाय  2. ॐ नमः नारायणाय|
  • इन सभी के पश्चात पूजा करते हुए उन सप्त ऋषियों से प्रार्थना करें और उनका आशीर्वाद प्राप्त करे|

ऋषि पंचमी की व्रत कथा – ऋषि पंचमी व्रत कथा

ऋषि पंचमी के सम्बंधित कई साड़ी कथाएँ प्रचलित हैं| आज हम आपको उन्ही में से एक कथा के बारे में बताने वाले हैं|

सतयुग काल में श्येनजित नाम का एक राजा था| उसके राज्य में एक सुमित्र नाम का ब्राह्मण रहता था जो वेदों का प्रकांड विद्वान था|

सुमित्र खेती के माध्यम से ही अपने परिवार के सदस्यों का पालन-पोषण करता था| सुमित्र की पत्नी का नाम जयश्री सती थी जो कि एक पौधा था|

वह भी अपने पति के साथ खेत के सभी व्यवसायों में उसकी सहायता करती थी| इस बार जयश्री ने रजस्वला राज्य में घर के सभी काम के लिए और उसी के साथ अपने पति को भी छुआ|

ऋषि पंचमी 2026

देवयोग के कारण दोनों पति-पत्नी ने अपने शरीर का एक साथ ही त्याग कर दिया| रजस्वला राज्य में स्पर्श का ध्यान नहीं रहता पर पति को बैल और पत्नी को कुतिया की योनि प्राप्त हुई|

लेकिन पिछले जन्म में कुछ महान कर्मों के कारण उनका ज्ञान व स्मृति बनी रही| संयोग से वे दोनों अपने-अपने घर में अपने पुत्र और पुत्रवधू के साथ ही पुनः आरंभ कर रहे थे| ब्राह्मण के पुत्र का नाम सुमति था|

सुमति भी अपने पिता की सबसे प्रसिद्ध वेदों में से एक थी| पितृपक्ष में उसने अपने माता-पिता का श्राद्ध करने के विचार से अपनी पत्नी खेडबनवाई थी| तथा ब्राह्मणों को भोजन के लिए उपदेश भी दिया|

किन्तु उसी समय एक जहरीले सांप ने आकर खीर को जहरीला कर दिया| कुतिया बनी ब्राह्मणी ने यह देख लिया उसने सोचा यदि यह जहरीली खीर ब्राह्मण खाएंगे तो खीर में जहर होने की वजह से वह मर जाएंगे और उनके पुत्र सुमति को इससे पाप लगेगा|

इस वजह से उसने सुमति की पत्नी के सामने ही खीर को छु लिया| लेकिन इस वजह से सुमति की पत्नी को गुस्सा आ गया और उसने चूल्हे में से जलती हुई लकड़ी निकाल कर कुतिया की पिटाई कर दी| और उसे इस दिन खाने के लिए भी कुछ नहीं दिया| रात होते ही बैल को कुतिया ने सारी बात बताई|

बैल ने भी कहा कि आज उसे भी खाने के लिए नहीं दिया गया| बल्कि पुरे दिनभर मुझे काम भी करवाया गया| उसने कहा कि सुमति ने हमारे लिए ही श्राद्ध का आयोजन किया था लेकिन हमे ही भूखा रख रखा है| अगर ऐसा ही रहा तो उसका श्राद्ध करना व्यर्थ हो जाएगा|

ये बात दरवाजे पर लेते हुए सुमति ने सुन ली| सुमति सोय की भाषा भली – विपक्ष बाकी थी| उसे यह बात जानकर अत्यंत दुःख हुआ कि उसके माता-पिता की योनियों में पाला पड़ गया है|

वह एक ऋषि के पास गया और पूछा कि उसके माता-पिता सीता की योनि में क्यों समा गए और उन्हें कैसे मुक्त किया जा सकता है|

तब ऋषि ने अपने तप और योगबल की शक्ति से इसका कारण जान लिया और सुमति को भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष में आने वाली ऋषि पंचमी व्रत करने की सलाह दी गई|

इस दिन उसे अनाज खाने वाले ने बैल के जोता दिया| ऋषि ने सुमति से कहा कि इस व्रत के प्रभाव से माता-पिता को इस पशु योनि से मुक्ति मिलेगी|

उन्होंने बिल्कुल वैसा ही अभिनय किया जैसा कि ऋषि ने अपने लिए कहा था| इस सुमति के द्वारा कहे गए व्रत के प्रभाव से उसके माता-पिता को इस पशु योनि से मुक्ति मिल गई|

ऋषि पंचमी के दिन इन बातों का रखें ध्यान

इस दिन ऋषि पंचमी 2026 की पूजा करते समय कुछ बातों का विशेष रूप से ध्यान देना आवश्यक है| जो हम आपको बताने वाले है –

  • इस दिन व्रत के दौरान स्वयं पर थोड़ा संयम बनाए रखे और ध्यान का अभ्यास अवश्य करें|
  • ऋषि पंचमी के दिन दान – पुण्य करना काफी शुभ माना जाता है|
  • पूजा करने के बाद तुलसी माँ को जल चढ़ाना बहुत लाभकारी है|
  • इस दिन आपको किसी भी जीव हत्या या बलि नहीं देनी है|
  • ऋषि पंचमी व्रत के दौरान दादी से बचना चाहिए और तीसरी की बात भी इशारों की कोशिश करनी चाहिए|
  • इस दिन नशीले पदार्थों से दूरी बनाए रखना आवश्यक है|
  • पूजा करते समय अपने ध्यान को भटकने ना दे| मन को एक जगह पर एकाग्रचित करके रखे|
  • जब पूजा कर रहे हो तब फ़ालतू की बात चीत ना करें और पूजा पर ही अपना ध्यान केन्द्रित करें|
  • ऋषि पंचमी की पूजा के पश्चात सभी लोगों को प्रसाद अवश्य बांटे|

ऋषि पंचमी पर जाने वाले अनुष्ठान – ऋषि पंचमी अनुष्ठान

  • ऋषि पंचमी व्रत से संबंधित सभी रीति-रिवाजों और अनुष्ठानों को पवित्र मन और अच्छे इरादों के साथ ही पूर्ण करना चाहिए|
  • किसी भी इंसान का इरादा उसके शरीर और उसकी आत्मा के शुद्धिकरण के लिए एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है|
  • इस दिन भक्त सुबह जल्दी उठते है और उठकर सबसे पहले पवित्र रूप से स्नान आदि करना चाहिए| 
  • भक्तों के द्वारा ही इस दिन सबसे कठोर व्रत किया जाता है|
  • इस व्रत को करने से पूर्व केवल एक ही उद्देश्य का पालन करना जरूरी है कि पूजा करने से पूर्व भक्त को पवित्र होना जरूरी है|
  • ऋषि पंचमी का व्रत करने वाले व्यक्ति को जड़ी – बूटी से अपने दाँतों को साफ़ करना चाहिए और उस दिन जड़ी – बूटी से ही स्नान करना चाहिए|
  • मान्यता है कि इस दिन बाहरी शरीर का जड़ी – बूटियों की सहायता से शुद्धिकरण किया जाता है| इसके अलावा दूध, मक्खन, तुलसी और दही का मिश्रण को पिने से आत्मा का शुद्धिकरण होता है|
  • इस दिन भक्तों के द्वारा सप्तर्षियों की पूजा की जाती है| जो सभी अनुष्ठानों के अंतिम भाग का ही आखिरी पहलू है|
  • सभी सप्तऋषियों का ध्यान करने के लिए प्रार्थना के साथ ही कई सारी चीज़ों का जैसे फूल और खाद्य सामग्री का भी उपयोग किया जाता है|

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निष्कर्ष – Conclusion

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