भारतीय संस्कृति में धर्म और परंपरा एक सिद्धांत हैं। शतचंडी और नवचंडी दोनों ही विशेष प्रकार की दुर्गा पूजा के रूप में अलग-अलग क्षेत्रों में आयोजित की जाती हैं।
यह पर्व धार्मिक एवं सांस्कृतिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण है। शतचंडी एवं नवचंडी पूजन सामग्री का प्रयोग इस अनुष्ठान में और भक्तों के अंतरंग मन को धार्मिक उत्सव के लिए उत्साहवर्धक बनाने में सहायक सिद्ध होती है।
99पंडित पेशेवर व अनुभवी, विद्वान पंडितो का ऐसा समूह है जो आपको शतचंडी और नवचंडी पूजा बिना किसी विधान के करोड़पति कराता है |
यहां प्रचलित वैज्ञानिक सिद्धांतों के पूर्ण ज्ञाता होने के साथ – धार्मिक – अनुष्ठान को हिंदू समाज की रीति – रिवाज के अनुसार प्रमाणित करवाते हैं |
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शीघ्र ही हमारे पंडित आपसे शीघ्र संपर्क ही संपर्क करें | इस ब्लॉग के पीछे हमारा 99पंडित का उदेश्य भक्तों को शतचंडी एवं नवचंडी पूजा सामग्री, और इसके आध्यात्मिक महत्व, से ध्यान रखें, ताकि इसका लाभ भक्तों को मिल सके, और उनके हर संभव मनोभाव पूर्ण हो सकें |
आप हमें अप्लाई करके भी अपना सुझाव दे सकते हैं इसके लिए हमारा नंबर बना रहे 8005663275 साथ ही शतचण्डी एवं नवचण्डी पूजा सामग्री का विवरण निचे वर्णित है , अत : आप सामग्री सूचि वहा से देख सकते है |
आगे हम भक्तों को शतचंडी एवं नवचण्डी पूजा सामग्री की सुचि प्रस्तुति कर रहे हैं श्रद्धालु के समय पंडित जी को अवष्यता रहेगी | शतचंडी एवं नवचंडी अनुष्ठान के लिए विशेष सामग्री सूची निम्न प्रकार से है:-
| वस्तु | मात्रा |
| काला तिल | 2 वाँ |
| श्वेत तिल | 500 मिनट |
| जौ | 1 वाँ |
| चावल पूर्णपात्र हेतु | 11 वाँ |
| धूपलकडी | 500 मिनट |
| कमलबीज | 100 मिनट |
| खुशबू | 50 मिनट |
| नागरमोथा | 50 मिनट |
| खुशबू | 50 मिनट |
| जटामासी | 50 मिनट |
| इंदर जौ | 50 मिनट |
| बेलगुड़ी | 100 मिनट |
| सतवारी | 50 मिनट |
| गुर्च | 50 मिनट |
| जावित्री | 50 मिनट |
| भोजपत्र | 2 पैकेट |
| अगर-अगर | 100 मिनट |
| गुग्गुल | 50 मिनट |
| काला उड़द | 50 मिनट |
| मुंग का पापड़ | 1 पैकेट |
| आबा हल्दी | 50 मिनट |
| देशी घी | 2 वाँ |
| कूपर | 250 मिनट |
| नवग्रह समिधा | 1 पैकेट |
| केवल पाँचवाँ | 250 मिनट |
| हवनसामग्री गायत्री पूजन भंडार से | 3 वाँ |
| गारीगोला | 1 वाँ |
| जयकार | 1 नग |
| एक | 1 शीशी |
| हो गया | 1 दर्जन |
| हलवा एवं खीर आवश्यकतनुसार | - |
| केथा | 1 नग |
| त्रिशूल एक चक्र | 1 सेट |
| मला | 1 नग |
| पिली सरसो | 50 मिनट |
| शंख एवं धनुष | 1 सेट |
| राय | 50 मिनट |
| काली सरसो | 50 मिनट |
| विफल | 1 नग |
| कागजी नींबू | 2 नग |
| विजौरा नींबू | 2 नग |
| पेड़ा | 200 मिनट |
| गुड़ | 50 मिनट |
| दुग्ध | 100 मिनट |
| छोटे-छोटे टुकड़े पीस लें | 1 नग |
| लोकी | 1 नग |
| पालक | 100 मिनट |
| मुस्समी | 1 नग |
| श्वेत चन्दन बुरादा | 50 मिनट |
| लाल चन्दन बुरादा | 50 मिनट |
| केसर एवं गोरोचन | 1 डिब्बी |
| कस्तूरी | 1 डिब्बी |
| काजल | 1 डिब्बी |
| कमल पुष्प | 1 नग |
| चिरोंजी | 50 मिनट |
| गेरू | 50 मिनट |
| काली मिर्च | 50 मिनट |
| मिश्री | 50 मिनट |
| मक्खन | 50 मिनट |
| अनार का छिलका एवं अनार पुष्प | - |
| अनार दाना | 100 मिनट |
| लौंग , इलायची सुपारी, एवं तलनार | - |
| पान के पते बड़ा साइज | 50 नग |
| कनेर का पुष्प | 1 नग |
| दारू हल्दी | 50 नग |
| कुशा बण्डल पूर्णपात्र में स्थापित हेतु | 1 सेट |
| पूर्णपात्र बड़ी परात अथवा बड़ा भगोना | 1 सेट |
| आम की समिधा | 15 वाँ |
शतचंडी एवं नवचंडी पूजन सामग्री की व्यवस्था आप ऊपर वर्णित सूचि के अनुरूप कर सकते हो |
हर पूजा, अनुष्ठान, समारोह और उत्सव के लिए विशेषज्ञ और विश्वसनीय पंडित उपलब्ध हैं
शतचंडी पूजा नियमित रूप से विशेष अवसरों पर आयोजित की जाती है। इस पूजा का मुख्य उद्देश्य देवी दुर्गा के नौ सिद्धांतों की पूजा करना होता है, जिसमें शतचंडी भी शामिल है।
यह नौ रूप में विचारित संसार में शक्ति के विभिन्न अंशों के प्रतीक होते हैं, जिनमें पूजने वाले व्यक्ति को अपने जीवन में साहस और सफलता प्राप्त होती है।
पूर्व में शतचंडी पूजा मुख्य रूप से बिहार और पश्चिम बंगाल के जिलों में मनाई जाती थी, लेकिन आज यह पूजा अन्य जिलों में भी प्रचलित है।
इस पूजा में संगीत, नृत्य, व्रत कथाएं और धार्मिक अनुष्ठानों का आयोजन होता है, जिससे समृद्धि, शक्ति और साहस की वापसी होती है।
शतचंडी एवं नवचंडी पूजन सामग्री 99पंडित के विद्वान पंडितो द्वारा तैयार की गयी है | शेष सामग्री की व्यवस्था हेतु आप अपने लोकाहित पंडित से विचार विमर्श कर सकते है |
नवचंडी पूजा भारत के बंगाल क्षेत्र में एक प्रसिद्ध पर्व है, जिसमें मां दुर्गा की नौ दिव्य शक्तियों की पूजा का आयोजन किया जाता है।
नवरात्रि के दौरान इस पूजा में धूमधाम से मनाई जाती है और इसमें लाखों लोग भाग लेते हैं। यह पूजा मसाला और समरसता का प्रतीक माना जाता है |
नवचंडी पूजा एक मार्गदर्शक के रूप में काम करती है, जो समरसता और एकता की भावना को स्थापित करती है।
इस पूजा में हर दिन नौ दिव्य शक्तियां विशेष रूप से पूजी जाती हैं, जो धार्मिकता, साहस और विद्या का प्रतीक हैं।
इस पूजा के दौरान लोग सामाजिक अत्याचारियों, भ्रष्टाचारियों और विद्रोहियों के विरुद्ध संघर्ष का संदेश देते हैं।
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नवचंडी पूजा के पीछे प्रथम उद्देश्य अपने सभी व्रतों को पूरा करना होता है। इसका एक और लाभ यह है कि यह पूजा आपको स्वस्थ रहने और लंबे जीवन जीने का अधिकार देती है।
इसके अलावा, धन की प्राप्ति के साथ-साथ आप यशस्वी भी बन सकते हैं। इसके अलावा, यह मोक्ष प्राप्ति का उत्तम मार्ग भी है जो शुभ संकेत के सभी प्रकार के दुष्प्रभावों को दूर करता है।
नवचंडी पूजा से मन, शरीर और आत्मा की पवित्रता होती है। इस पूजा में घर की सामग्री का अर्थ पर्यावरण को शुद्ध और शांत रखना है। मन, शरीर, आत्मा में पवित्रता लाने के लिए आप नवचंडी पूजा का आयोजन करवा सकते हैं।
शतचंडी और नवचंडी दोनों ही दुर्गा पूजाओं के अलग-अलग रूप हैं, लेकिन दोनों ही लाभकारी हैं। दोनों पर्वों का मुख्य उद्देश्य मां दुर्गा की नौ दिव्य शक्तियों का दर्शन पूजन है, जो समृद्धि, साहस और समरसता का प्रतीक हैं।
ये दोनों पूजाएँ धार्मिकता, सांस्कृतिकता और समाज में समरसता को बढ़ावा देने में मदद करती हैं। इसके अलावा शतचंडी एवं नवचंडी पूजन सामग्री का उपयोग इस पूजा में महत्वपूर्ण होता है | यह पूर्ण शुद्ध व् पवित्र हो यह भी आवश्यक है |
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शतचंडी और नवचंडी दोनों ही धार्मिक परंपराएं भारतीय संस्कृति के सिद्धांत हैं, जो धर्म, सांस्कृतिकता और समरसता को बढ़ावा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं।
ये भारतीय पर्व समुदाय की एकता का प्रतीक हैं और सभी सांस्कृतिक लोगों को एक साथ जोड़ते हैं। हम सभी को इस धार्मिक परंपरा का समर्थन करना चाहिए और इसे अपने जीवन का हिस्सा बनाना चाहिए, ताकि हम समृद्ध, समरस्त और सामूहिक समाज की रचना में सहायता कर सकें।
शतचंडी एवं नवचंडी पूजन सामग्री के द्वारा आप अपने घर में पंडित जी द्वारा सलाह के अनुसार की पूजा अर्चना सम्पन्न करवा सकते हो |
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