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वरलक्ष्मी व्रतम 2026: जानें व्रत कथा, शुभ समय और पूजा विधि

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शालिनी मिश्रा ने लिखा: शालिनी मिश्रा
अंतिम अद्यतन:अगस्त 7, 2025
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वरलक्ष्मी व्रतम्: भारत देश में अनेको देवी – देवताओं की पूजा की जाती है| सभी लोग अलग – अलग देवी – देवताओं को मानते है और उन्हें अपना इष्ट मानकर उनकी आराधना करते है| जैसा कि आप को पता है हिन्दू धर्म में हर माह ही कोई ना  कोई सा त्यौहार आता ही रहता है|

आज हम आपको इस आर्टिकल के माध्यम से वरलक्ष्मी व्रतम् के बारे में सारी आपको देंगे जैसे कि इसका शुभ मुहूर्त क्या होगा और पूजा की विधि क्या होगी| वरलक्ष्मी व्रतम् को वरलक्ष्मी व वरलक्ष्मी नोम्बू के नाम से भी जाना जाता है|

Varalakshmi Vratam

यह त्यौहार हिन्दू धर्म में काफी महत्वपूर्ण है| हिन्दू धर्म की सभी विवाहित महिलाएं इस दिन वरलक्ष्मी व्रत करती है और मां वरलक्ष्मी की पूजा.

वरलक्ष्मी में वर का अर्थ आभूषण वाली से है| यही कारण है कि वरलक्ष्मी व्रत 2026 का अरबों में अलग महत्व है| इस बार वरलक्ष्मी 2026 का त्यौहार 21 अगस्त 2026 को मनाया जायेगा|

सिद्धांत यह है कि यह व्रत श्रावण मास के अंतिम शुक्रवार को किया जाता है| इस व्रत को करने से भक्तों की दरिद्रता दूर होती है और उन पर माता रानी की कृपा होती है|

इस वरलक्ष्मी के व्रत को ज्यादातर दक्षिणी भारत के लोग मानते हैं| इस दिन पूरे भारत देश में सभी स्थानों पर महिलाएं इस व्रत को करती हैं

इस व्रत को करके वह माता वरलक्ष्मी से अपने पति, अपने बच्चों और परिवार के सभी सदस्यों की रक्षा करने के लिए प्रार्थना करती है और पूरे दिन उपवास रखकर माता वरलक्ष्मी की पूजा करती है| इस व्रत को करने से भक्त के जीवन से सभी प्रकार की धन, चिंता संबंधित परेशानियां समाप्त हो जाती है|

वरलक्ष्मी व्रत की तिथि और शुभ समय 

वरलक्ष्मी व्रतम 2026 तिथि 

इस वर्ष वरलक्ष्मी व्रत 2026 की तिथि 21 अगस्त 2026 है।

वरलक्ष्मी व्रतम 2026 शुभ मुहूर्त

  • सिंह लग्न पूजा मुहूर्त – प्रातः 05:54 से प्रातः 08:11 तक
  • वृश्चिक लग्न पूजा मुहूर्त – दोपहर 12:47 बजे से दोपहर 03:05 बजे तक
  • कुम्भ लग्न पूजा मुहूर्त – सायं 06:52 से रात्रि 08:20 तक
  • वृषभ लग्न पूजा मुहूर्त – रात्रि 11:21 से मध्यरात्रि के बाद 01:17 तक, 22 अगस्त

यह वरलक्ष्मी व्रत 2026 के लिए सबसे शुभ मुहूर्त है| आपको यही सलाह दी जाती है कि आप इन्ही में से किसी भी मुहूर्त में पूजा को संपन्न कर सकते है|

वरलक्ष्मी व्रतं क्यों मनाया जाता है  

भारत हर त्योहार से जुड़ी आस्थाओं और मिथ्याओं को अपने में शामिल करें| यहां हर दिन कोई न कोई देवी-देवताओं का त्योहार या उनके संबंधित व्रत ही आते हैं|

हमारे देश को तीज - त्यौहार व व्रत पूजा आदि के लिए जाना जाता है| यहां सप्ताह के सातों दिन किसी ना किसी भगवान को समर्पित किया जाता है|

यह वो व्रत है जो हर सप्ताह की तिथि अनुसार आते है| इनके अलावा कुछ ऐसे भी व्रत जो सप्ताह के अनुसार नहीं आते है| इनका एक निश्चित दिन होता है| जैसे कि कृष्ण जन्माष्टमी भाद्र माह कृष्ण पक्ष की अष्टमी का व्रत किया जाता है|

इसी प्रकार यह वरलक्ष्मी या वरलक्ष्मी नोम्बू का व्रत वर्ष में एक ही बार सावन माह के अंतिम शुक्रवार को मनाया जाता है|

आज के समय में सभी को एक सुख – समृद्धि के साथ समृद्ध जीवन जीना चाहिए| माता रानी का यह व्रत आपको अपने जीवन में सभी सामानों से मुक्ति दिलाएगा और आपके जीवन में सुख-समृद्धि प्रदान करेगा|

इस दिन माँ लक्ष्मी का व्रत करने से, जो माँ लक्ष्मी का ही एक रूप है, कभी-कभी उनके भक्तों के जीवन में धन-धान्य से जुड़ी कोई भी समस्या नहीं आती है|

हिंदू धर्म में कहा गया है कि पुरुष, महिला का भाग्य स्वयं का होता है| जैसा कि आप देखते ही होंगे कि धन की तलाश में पुरुष बहुत मेहनत करते हैं|

ये महिलाएं भी अपने पति के लिए करती हैं लंबी उम्र की प्रार्थना| वरलक्ष्मी ही एक ऐसा व्रत है जिसमें पति-पत्नी दोनों एक साथ रहते हैं|

इस व्रत के प्रभाव से घर-परिवार में सुख-समृद्धि बनी रहती है और महिलाओं को संतान प्राप्ति का सौभाग्य मिलता है|

वरलक्ष्मी पूजा के लिए सामग्री – Varalakshmi Puja Samagri

जब भी हम किसी भी देवी – देवताओं की पूजा करते है या किसी के द्वारा पूजा करवाते है तो पूजा के लिए कुछ आवश्यक सामग्री की जरूरत होती है| आज हम उन्ही सामग्री के बारे में जानेंगे|

  • देवी वरलक्ष्मी की मूर्ति 
  • फूल माला 
  • लहसुन
  • कुमकुम 
  • चन्दन का पाउडर 
  • विभूति 
  • शीशा 
  • आम पत्र 
  • कंघी 
  • फूल 
  • पान के लिए 
  • पंचामृत 
  • हो गया 
  • देही 
  • दुग्ध 
  • अगरबत्ती 
  • मौली
  • पानी 
  • कर्पुर 
  • पूजा की घंटी 
  • प्रसाद 
  • तेल का दीपक 
  • अक्षरत 

वरलक्ष्मी व्रत 2026 पूजा विधि

  • सर्वप्रथम सुबह जल्दी उठकर स्नान करके माता लक्ष्मी को नमन कीजिये और सफ़ेद रंग के वस्त्र धारण कीजिये|
  • जहाँ आप पूजा करे उस जगह पर चॉक की सहायता से रंगोली बनाना चाहिए|
  • घर के सभी कोनों में गंगाजल का छिड़काव करके घर की शुद्धि करें और व्रत का संकल्प ले|
  • देवी मां की प्रतिमा को अच्छे से वस्त्र पहना कर आभूषण व कुमकुम से माता का शृंगार करें|
  • एक चौकी लीजिये उसपर लाल कपड़ा बिछाए और गणेश जी के साथ माता रानी की प्रतिमा को स्थापित कीजिये|

वरलक्ष्मी व्रतम्

  • इस बात का अवश्य ध्यान रखें कि माँ लक्ष्मी की प्रतिमा का मुख पूर्व दिशा की ओर है| यह भक्त के लिए बहुत लाभदायक होता है|
  • पूजा वाली जगह पर थोड़े से चावल फैला दे|
  • इसके बाद एक कलश ले और उसके चारों ओर चन्दन का लेप करें|
  • कलश को आधे से ज्यादा चावल से भर दीजिये|
  • उसके पश्चात कलश में पान के पत्ते, चांदी का सिक्का और खजूर डालिए|
  • एक नारियल पर चन्दन,कुमकुम लगाकर उसे कलश के ऊपर रखिए|
  • कलश के ऊपर रखे हुए नारियल के चारों ओर आम के पत्ते लगाये|
  • एक थाली लेकर उसमे नया लाल रंग का कपड़ा बिछाकर उसे चावल के ऊपर रख दे|
  • देवी माँ की प्रतिमा के सामने तेल का दीपक अवश्य लगाये|
  • गणेश जी के सामने घी का दीपक जलाएं|
  • कलश और अक्षत से माँ वरलक्ष्मी का स्वागत कीजिये|
  • देवी माँ को चंदन पाउडर, कुमकुम, इत्र, फूलों की माला, हल्दी, धूप, कपड़े और मिठाई अर्पित कीजिये|
  • देवी लक्ष्मी को प्रसन्न करने के लिए मंत्र का जप कीजिये|
  • वरलक्ष्मी व्रत की कथा पढ़े और देवी माँ की आरती करें|
  • पूजा का समापन होने के बाद देवी माँ को भोग लगाएं और प्रसाद का वितरण कीजिये|

माँ वरलक्ष्मी की आरती – Maa Varalakshmi Ki Aarti

ॐ जय लक्ष्मी माता, मैया जय लक्ष्मी माता |
तुमको निस दिन सेवत हर – विष्णु – विधाता || ॐ जय....

उमा , रमा ,ब्रह्माणी, तुम ही जग माता |
सूर्य-चन्द्रमा ध्यान करते, नारद ऋषि गाते || ॐ जय....

आप पाताल-निरंजनी, सुख-संपत्ति दाता हैं
जो कोई तुमको ध्याता, वह ऋद्धि-सिद्धि-धन पाता || ॐ जय....
तुम पाताल – निवासिनि, तुम ही शुभदाता |
कर्म – प्रभाव – प्रकाशिनी, भवनिधि की त्राता || ॐ जय....

जिस घर तुम रहती, तहं सब सद्गुण आता |
सब संभव हो जाता, मन नहिं घबराता || ॐ जय….

तुम बिन यज्ञ न होते, वस्त्र न कोई पाता |
खान – पान का वैभव सब तुमसे आता || ॐ जय….

शुभ – गुण मंदिर सुंदर, क्षीर निधि जाता |
रत्न चतुर्दश तुम बिन कोई नहीं पता || ॐ जय....

महालक्ष्मीजी जी की आरती, जो कोई नर गाता |
उर आनंद समाता, पाप उतर जाता || ॐ जय……

माता वरलक्ष्मी को प्रसन्न करने का मंत्र

या श्री: स्वयं सुकृतिना भवनेश्वालक्ष्मि: |
पापियों के हृदय में बुद्धि

विश्वास उन सद्गुणों के लिए शर्म की बात है जो परिवार से उत्पन्न होते हैं
हम आपको नमस्कार करते हैं, हे देवी, उस ब्रह्मांड की रक्षा करें

वरलक्ष्मी व्रत कथा – varalakshmi vrat katha

इस व्रत से जुड़ी एक दिलचस्प कहानी के बारे में आज हम इस आर्टिकल के माध्यम से आपको बताएंगे| इस व्रत से जुड़ी एक पौराणिक कथा के अनुसार मगध राज्य में एक कुंडी नाम का गांव हुआ था|

इस गांव में रहती थी एक महिला| उनका नाम चारुमती था| जिस पर माता लक्ष्मी का बहुत अटूट विश्वास था| वह हर दिन माता लक्ष्मी की पूजा करती थी|

उनकी निस्वार्थ भक्ति से माँ लक्ष्मी की अपील हो गई| एक दिन माता लक्ष्मी चारुमती के सपने में आई और उन्हें वर लक्ष्मी व्रत करने का सुझाव दिया|

चारुमती ने यह बात अपने आस-पास की सभी महिलाओं को बताई| श्रावण मास के अंतिम शुक्रवार का व्रत सभी ने एक साथ रखा|

चारुमती के साथ ही सभी महिलाओं ने भी किया यह व्रत| सभी ने माता लक्ष्मी की पूजा और कलश स्थापना की| उन्होंने चारों तरफ देवी मां की पूजा करते हुए कलश स्थापना की

उनकी वजह से लक्ष्मी मां ने अपने घर को सोने से भर दिया, उन्हें सोने के गहनों से अलंकृत कर दिया|

सभी महिलाओं ने चारुमती को धन्यवाद दिया क्योंकि उन्होंने ही उन्हें इस व्रत के बारे में बताया था| सिद्धांत यह भी हैं कि इस व्रत के विषय में भगवान शिव ने मां पार्वती को भी बताया था|

वरलक्ष्मी व्रत के नियम – Varalakshmi Vrat के व्रत नियम

माँ वरलक्ष्मी के व्रत को करने के भी कुछ नियम है जिनका यदि आप पालन करते है तो आपको इससे बहुत लाभ होगा किन्तु यदि आपने इनका उल्लंघन किया तो आपको इसके लिए माता रानी द्वारा दंड भी मिल सकता है तो आइये जानते है कि वो नियम क्या है :-

  • व्रत के दिन अपने दिमाग पर गलत विचारों को हावी ना होने दे|
  • इस दिन किसी के साथ भी दुर्व्यवहार ना करें|
  • व्रत वाले दिन ब्रह्मचर्य का पालन कीजिये|
  • सिगरेट और शराब जैसे नशीले पदार्थों का सेवन ना करें और मांसाहारी भोजन करने से बचें|
  • लोगो से कम मिले और अपने हृदय व शरीर को साफ़ रखे|
  • इस दिन लड़ाई – झगड़ों से बचे|
  • इस दिन किसी भी अपमानजनक शब्दों का प्रयोग न करें|
  • अपने मन से स्वार्थ की भावना को त्याग दे|

वरलक्ष्मी व्रत के दिन ध्यान देने योग्य बातें – वरलक्ष्मी व्रत के बारे में महत्वपूर्ण तथ्य

इस व्रत को करते वक्त कुछ ध्यान देने योग्य बातें :

  • इस दिन व्रत करने वाले भक्तों को साफ़ – सफाई का ध्यान खासतौर पर रखना चाहिए| सुबह जल्दी उठकर अपने सभी कामों से निवृत होकर स्नान आदि करके भगवान का ध्यान कीजिये| पूरे घर की अच्छे से सफाई कीजिये|
  • उतर – पूर्व दिशा पूजा का स्थान रखना अति उत्तम रहेगा|
  • इसके बाद देवी माँ की प्रतिमा को अच्छे से गंगाजल से स्नान करवाए उसके बाद तिलक लगाना चाहिए| गणेश जी को भी गंगाजल से स्नान कराएं| 
  • पूजा स्थल पर माँ देवी और गणेश जी की प्रतिमा के सामने एक चावल से भरा कलश रखे| 
  • इसके पश्चात दीपक जलाकर गणेश जी और माँ लक्ष्मी की पूजा करें|
  • अगर हो सके तो पूजा में घर के सभी सदस्यों को भी शामिल कीजिए| 
  • पूजा करने के पश्चात वरलक्ष्मी की व्रत कथा का पाठ करें| 
  • अंत में भोग लगाकर सभी को प्रसाद बाँटिये|  

वरलक्ष्मी व्रत का महत्व -Varalakshmi Vratm का महत्व

इस व्रत को करने का मुख्य उद्देश्य देवी माँ का आशीर्वाद पाना ही है| इस व्रत को करने के लिए कोई अधिक कठोर नियम नहीं है| ना ही इसका अनुष्ठान मुश्किल है लेकिन माँ लक्ष्मी को एक छोटी सी प्रार्थना करना काफी है|

जैसा कि आप सभी जानते हैं कि माँ लक्ष्मी धन, सुख, समृद्धि, धन, भाग्य, उदारता और साहस की देवी हैं| ज्यादातर महिलाएं यह व्रत मां लक्ष्मी को प्रणाम करके उनका आशीर्वाद लेने के लिए करती हैं

वरलक्ष्मी व्रतम्

सभी महिलाएं अपने-अपने पति की लंबी उम्र के लिए मां लक्ष्मी से प्रार्थना करती हैं और अच्छे संत की प्राप्ति के लिए माता रानी से कामना करती हैं| इसे महिलाओं का त्योहार भी कहा जाता है| स्कन्दपुराण में वरलक्ष्मी व्रत का महत्व बताया गया है|

इस व्रत को महिलाएं करती हैं जो मुख्यत: अपने पति व बच्चों की लंबी उम्र की कामना करती हैं| हिन्दू धर्म के अनुसार इस दिन माँ वरलक्ष्मी की पूजा करना अष्टलक्ष्मी की पूजा करने के समान है|

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निष्कर्ष – Conclusion

हमने आपको इस आर्टिकल के माध्यम से वरलक्ष्मी व्रतं के बारे में बहुत अच्छे से बता दिया| आपको सिर्फ सच्चे मन से देवी मां की पूजा करनी है जिससे आप को उनका आशीर्वाद मिले और उनकी कृपा आपके ऊपर बनी रहे|

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