होली गीत के बोल: होली के सबसे लोकप्रिय गीत हिंदी में
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वरूथिनी एकादशी व्रत कथा: वैशाख माह के कृष्ण पक्ष की एकादशी को वरूथिनी एकादशी का व्रत किया जाता है वरुथिनी एकादशी के दिन भगवान विष्णु की पूजा की जाती है और वरुथिनी एकादशी व्रत कथा भी सुनी जाती है वरुथिनी एकादशी के दिन वरुथिनी एकादशी व्रत कथा का पाठ करने से जातकों को शुभ फलों की प्राप्ति होती है

सभी एकादशियों की तिथियों का अलग-अलग महत्व होता है वरूथिनी एकादशी का व्रत करने से जातक को शारीरिक और मानसिक कष्टों से मुक्ति मिलती है इस एकादशी का व्रत करने से व्यक्ति को मृत्यु के बाद मुक्ति भी मिलती है आइए जानते हैं वरुथिनी एकादशी और वरुथिनी एकादशी व्रत कथा के बारे में
इसके अलावा यदि आप ऑनलाइन किसी भी पूजा जैसे गृह प्रवेश पूजा (Griha Pravesh Puja), सत्यनारायण पूजा (Satyanarayan Puja), तथा विवाह पूजा (Marriage Puja) के लिए आप हमारी वेबसाइट 99Pandit की सहायता से ऑनलाइन पंडित बहुत आसानी से बुक कर सकते है|
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युधिष्ठिर भगवान श्री कृष्ण से बोले कि – भगवन ! आपने मुझसे चैत्र महीने के शुक्ल पक्ष में आने वाली एकादशी जिसे कामदा एकादशी के नाम से भी जाना जाता है, का बहुत ही अच्छे व सरल रूप वर्णन किया है| हे प्रभु आप स्वदेज, जरायुज चारों प्रकारों के जीवों को उत्पन्न, पालन तथा नाश करने वाले है|
अब मैं आपसे विनती करता हूँ कि वैशाख माह शुक्ल एकादशी के बारे में मुझे कुछ जानकारी प्रदान करे| इस एकादशी का क्या नाम है? इसका कथा क्या है? इसकी व्रत करने से किस प्रकार के फल की प्राप्ति होती है| सब विधि पूर्वक बताएं|
इस पर भगवान श्री कृष्ण ने कहा – हे राजन! वैशाख माह के कृष्ण पक्ष में आने वाली एकादशी तिथि वरूथिनी एकादशी के नाम से जाना जाता है| यह वरूथिनी एकादशी व्रत कथा का प्रभाव सौभाग्य प्रदान करने वाली, समस्त पापों को नष्ट करने वाला तथा अंत के समय में मोक्ष प्रदान करने वाला है| इस वरूथिनी एकादशी व्रत कथा (Varuthini Ekadashi Vrat Katha) के बारे में अब मैं तुमसे कहने वाला हूँ|
पौराणिक काल में नर्मदा नदी के किनारे पर एक मान्धाता नामक एक राजा राज था| कहा जाता है कि वह राजा बहुत ही तपस्वी तथा दानवीर थे| एक समय की बात है कि वह राजा जंगल के बीच में अपनी तपस्या में लीन थे| कुछ समय पश्चात वहां पर एक जंगली भालू आ गया तथा तपस्या में लीन राजा के पैर को चबाने लगा| कुछ देर के बाद वह भालू राजा का पैर चबाता हुआ उन्हें घसीट कर जंगल में ले गया|

जब वह भालू राजा को घसीट कर ले जा रहा था| तब राजा बहुत घबरा रहे थे किन्तु तापस धर्म की पालना करते हुए उन्होंने क्रोध तथा हिंसा न करके वह भगवान विष्णु से प्रार्थना करने लगा व करुणा भाव से उन्हें पुकारने लगा| राजा की पुकार सुनकर भगवान विष्णु उसकी सहायता हेतु प्रकट हुए| जिसके पश्चात भगवान विष्णु ने अपने सुदर्शन चक्र से उस भालू का वध कर दिया किंतु तब तक वह भालू राजा का पूरा पैर खा चुका था|
अपने पैर को गवाने के कारण राजा मान्धाता विलाप कर रहे थे| जिसे देख भगवान विष्णु को बहुत ही दुःख हुआ तथा उन्होंने राजा से कहा – हे वत्स! तुम इसका शोक मत करो| इस भालू ने जो तुम्हारा हाल किया है, यह तुम्हारे पिछले जन्म का अपराध है| इसकी पूर्ति के लिए तुम मथुरा में जाओ तथा वहां जाकर मेरे वराह अवतार की पूजा करो तथा वरूथिनी एकादशी व्रत करो| वरूथिनी एकादशी व्रत के प्रभाव से तुम पुनः सुदृढ़ अंगों वाले हो जाओगे|
भगवान विष्णु के कहे अनुसार राजा मान्धाता मथुरा नगरी में गए तथा पूर्ण श्रद्धा के साथ वरूथिनी एकादशी व्रत को किया| इस एकादशी व्रत के प्रभाव से राजा का शरीर पुनः सुदृढ़ अंगों वाला हो गया तथा इस वरूथिनी एकादशी का व्रत करने के कारण राजा को स्वर्ग की प्राप्ति हुई| इसलिए जो भी व्यक्ति भय से पीड़ित हो, उसे वरूथिनी एकादशी का व्रत अवश्य करना चाहिए|
Q.वरुथिनी एकादशी के दिन भगवान विष्णु के किस अवतार की पूजा होती है?
A.इस एकादशी के दिन भगवान विष्णु के वराह अवतार की पूजा की जाती है|
Q.वरुथिनी एकादशी व्रत कथा का क्या महत्व है?
A.यह वरूथिनी एकादशी तिथि सौभाग्य प्रदान करने वाली, समस्त पापों को नष्ट करने वाली तथा अंत के समय में मोक्ष प्रदान करने वाली है|
Q.वरूथिनी एकादशी कब आती है?
A.वैशाख माह के कृष्ण पक्ष की एकादशी के दिन वरूथिनी एकादशी का उपवास किया जाता है|
Q.राजा मान्धाता को भगवान विष्णु ने उनके सुदृढ़ अंगों को पुनः पाने के लिए क्या मार्ग बताया?
A.भगवान विष्णु बोले – इस भालू ने जो तुम्हारा हाल किया है, यह तुम्हारे पिछले जन्म का अपराध है| इसकी पूर्ति के लिए तुम मथुरा में जाओ तथा वहां जाकर मेरे वराह अवतार की पूजा करो तथा वरूथिनी एकादशी का व्रत करो| वरूथिनी एकादशी व्रत के प्रभाव से तुम पुनः सुदृढ़ अंगों वाले हो जाओगे|
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