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हिन्दू धर्म में पंचांग का प्रयोग किया जाता है। सरल शब्दों में कहा गया है तो पंचांग एक ऐसा हिंदू कैलेंडर है जो हमें बताता है कि आज का दिन कैसा रहेगा, कौन-सा समय शुभ है और कौन-सा काम कब करना सही रहेगा।
दैनिक पंचांग में आपको ये सभी जानकारियाँ मिलेंगी:
99पंडित पर आपको हर दिन का ताजा दैनिक पंचांग हिंदी में मिलता है। पंचांग शब्द संस्कृत से आया है जिसका अर्थ है "पांच अंग"। ये पांच अंग हैं - तिथि, नक्षत्र, वार, योग और करण।
1. तिथि:
तिथि को आसान भाषा में मान्यता तो यह हिंदू कैलेंडर का एक दिन होता है। यह चंद्रमा और सूर्य की स्थिति का आधार तय होता है। एक माह में कुल 30 तारीखें शामिल हैं जिनमें दो पदनाम बताए गए हैं:- शुक्ल पक्ष (पूर्णिमा तक) और कृष्ण पक्ष (अमावस्या तक)।
तारीखों के नाम: प्रतिपदा, द्वितीया, तृतीया, चतुर्थी, पंचमी, षष्ठी, सप्तमी, अष्टमी, नवमी, दशमी, एकादशी, द्वादशी, त्रयोदशी, चतुर्दशी, पूर्णिमा और पूर्णिमा।
2. नक्षत्र:
तारामंडल में दिखने वाले नक्षत्रों के समूह होते हैं। कुल 27 नक्षत्र होते हैं और चंद्रमा हर दिन एक नक्षत्र में रहता है। जिस नक्षत्र में चंद्रमा होता है उसी के आधार पर उस दिन का नक्षत्र होता है।
3. वार:
युद्ध का सीधा मतलब है - दिन। सप्ताह के सात दिन जो हम रोज प्रयोग करते हैं वही सात वार हैं। ये नाम चिन्ह रखे गए हैं - सोमवार, मंगलवार, बुधवार, गुरुवार, शुक्रवार, शनिवार और रविवार।
4. योग:
सूर्य चंद्रमा और उसके बीच की दूरी के आधार पर योग बनता है। जिस तरह 27 नक्षत्र होते हैं, उसी तरह 27 योग भी होते हैं। कुछ योग बहुत शुभ माने जाते हैं, जैसे सिद्धि योग और अमृत योग, जबकि कुछ अशुभ माने जाते हैं।
5. करण:
हर तिथि के दो भाग होते हैं, पहले भाग को पूर्वार्ध और दूसरे को उत्तरार्द्ध कहा जाता है। हर हिस्से में एक करण होता है। कुल 11 करण होते हैं: बव, बालव, कौलव, तैतिल, गर, वणिज, विष्टि, शकुनि, चतुष्पद, नाग और किस्तुघ्न।
इनसे विष्टि करण को भद्रा कहते हैं। भद्रा के समय कोई भी शुभ काम शुरू नहीं होना चाहिए।
पंचांग हमें यह सुझाव देता है कि आज का दिन हमारे लिए कैसा रहेगा। अगर आप कोई नया काम शुरू करना चाहते हैं, घर खरीदना चाहते हैं, शादी की तारीख तय करना है या कोई पूजा करना है, तो पंचांग देखना सही समय तय करना आसान हो जाता है।
एक खुलासा बात, एक ही दिन का पंचांग अलग-अलग शहरों में थोड़ा अलग होता है। क्योंकि सूर्योदय का समय हर जगह अलग-अलग होता है, इसलिए राहु काल और उत्सव भी बदल जाते हैं।
आज का पंचांग पढ़ने से आप अपने दिन की सर्वोत्तम रचनाएँ प्राप्त कर सकते हैं। यदि उस दिन साइन की स्थिति ठीक नहीं है तो आप किसी भी काम को थोड़ा टाल सकते हैं या अधिक सावधानी से कर सकते हैं।
शुभ मुहूर्त वो समय होता है जब ग्रह और नक्षत्रों पर कोई भी काम शुरू करने के लिए सबसे सही स्थिति होती है। हिंदू धर्म में विवाह, गृह प्रवेश, दुकान का उद्घाटन, नामकरण जैसे हर काम के लिए शुभ उत्सव देखना बहुत माना जाता है।
हर दिन बदल रहा है शुभ मुहूर्त। यह उस दिन की तारीख, नक्षत्र और राशि की चाल पर प्रतिबंध लगाता है। पंचांग में मुख्य रूप से तीन प्रकार के शुभ समय देखे जाते हैं:
आज के शुभ उत्सव की पूरी जानकारी के लिए ऊपर दिया गया दैनिक पंचांग देखें।