होली गीते: होलीचे सर्वोत्कृष्ट लोकप्रिय गीत
होली रंगांची साथ-सोबत भक्ति आणि परंपराही तीहार आहे. ढोलक की थाप आणि पारंपरिक फाग याशिवाय…
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हिंदीत हम कथा सुनाते भजन गीत: “हम सुनाते राम सकल गुणधाम की” एक बहुत ही मधुर आणि प्रसिद्ध भजन आहे, जो भगवान श्रीराम के गुण की स्तुति सुनाता आहेत. ते सुनते ही मनांत भक्ति आणि शांति का भाव होता.

हे भजन के शब्द सरल आहेत कि छोटे बच्चेसेना बड़ा बुज़ुर्ग भी इसे गाना और सुनना पसंद करते हैं। हे भजन भगवान राम के जीवनाची झलक दाखवते।
त्यांनी कसे धर्म, सचाई आणि प्रेम के मार्गावर चालकर लोकांना हे भाव हर पंक्तिमध्ये अनुभवले होते. आम्ही कथा सुनाते भजन गीते हिंदीत के माध्यम से भक्त रामायण की कथा को भक्ति रूप में अनुभव करते.
यह भजन हमे यह सिखाता है कि सच्ची भक्ती पूजा करणे नाही, उलट श्रीराम जैसे गुण अपनाने में है। जब भी यह भजन मंदिरों या घरों में जाता है, दूर का वातावरण भक्ति, शांती आणि सकारात्मक ऊर्जा से भरत आहे.
(दोहा – ॐ श्री महागणाधिपते नमः,
ॐ श्री उमाहेश्वराभ्याय नमः,
वाल्मीकि गुरुदेव के,
पद पंकज सिराय,
सुमिरे मात सरस्वती,
हम पर करू सहाय,
मात पिता की वंदना,
ते बारम्बार,
गुरुजन राजा प्रजाजन,
नमन करा)
हम सुनाते राम सकल गुण धाम की,
ये रामायण आहे पुण्य कथा श्रीराम की,
हम सुनाते राम सकल गुण धाम की,
ये रामायण आहे पुण्य कथा श्रीराम की…
जम्बुद्वीपे, भरत खंडे, आरवरते भारतवर्षे,
एक नगरी आहे विख्यात अयोध्या नाम की,
ही जन्मभूमी परम पूज्य श्रीराम की,
हम सुनाते राम सकल गुण धाम की,
ये रामायण आहे पुण्य कथा श्रीराम की…
रघुकुल के राजा धर्मात्मा,
चक्रवर्ती दशरथार्थ्मा,
संतति हेतु यज्ञ करवाया,
धर्म यज्ञ का शुभफल पाया,
नृप घरे चार कुमारा,
रघुकुल दीप जगत आधारा,
संपूर्ण भारतो के शुभ नामा,
भरत, शत्रुघ्न, लक्ष्मण, रामा…
गुरु वशिष्ठ के गुरुकुल जाके,
अल्प काल विद्या सब पाके,
पूरण शिक्षा, रघुवर पूर्ण काम,
हम सुनाते राम सकल गुण धाम की,
ये रामायण आहे पुण्य कथा श्रीराम की…
मृदु स्वर कोमल भावना,
रसिक प्रस्तुत,
एक करा वर्णन,
लवकुश राम प्रसंग,
विश्वामित्र महामुनि राई,
दिल्ली संग चले दोउ भाई,
राम ताड़का मारी,
कसे नाथ अहिल्या तारी…
मुनिवर विश्वामित्र तेव्हा,
संगले लक्ष्मण राम,
सिया स्वयंवर पहा,
पाहुचे मिथिला धाम…
जनकपुर उत्सव आहे भारी,
जनकपुर उत्सव आहे भारी,
तुमची निवड करा,
सीता सुकुमारी,
जनकपुर उत्सव भारी…
जनराज का कष्ट प्रण,
सुन सुन सब कोई,
जो तोडे शिव धनुष को,
सो सीता पति होई…
कोडे शिव धनुष कठोर,
सर्व की दृष्टी राम की ओर,
राम विनयगुण के अवतार,
गुरुवरची आज्ञा प्रधान…
सहज भाव से शिव धनु तोड़ा,
जनक सुता संगता जोडली…
रघुवर जैसा आणि ना,
सीता की समता नाही होई,
जो करे बल कान्ति कोटी रति काम की,
हम सुनाते राम सकल गुण धाम की,
ये रामायण आहे पुण्य कथा सिया राम की….
सब पर शब्द मोहिनी दारी,
मंत्रमुग्ध भले सर्व नर-नारी,
ये दिन रैन जात आहे बीते,
लव कुश ने सब के मनजीते,
वन गमन, सीता हरण, हनुमंत मिलन,
लंका दहन, रावण मरण, अयोध्या पुनरागमन…
सविस्तार सब कथा सुनाई,
राजा राम भये रघुराई,
राम राज आयो सुखदायी,
सुख समृद्धी श्री घर आई…
काल चक्र ने घटनाक्रम,
ते चक्र चालया,
राम सिया के जीवनात फिर,
घोर अंधेरा छाया….
अवध करा, इक दिन आले,
निष्कलंक सीता पे प्रजा ने,
मिथ्या दोष लगाया,
अवध, ते एक दिवस आले….
चल दी सिया जब तोड़ कर,
सब नेह-नाते मोह के,
पाषाण हृदयो में ना,
अंगारे जगे विद्रोह के….
ममतामयी माँओ के आँचल, भी सिमट कर रहे,
गुरुदेव ज्ञान आणि नीति के, सागर भी घट कर रहे…
ना रघुकुल ना रघुकुल नायक,
कोई ना सिया का हुआ सहायक,
मानवता को खो बैठे,
सभ्य नगर के वासी,
तब सीता को हुआ सहायक,
वन का ऐक सन्यासी…
उन ऋषि परम उदार का,
वाल्मीकि शुभ नाम,
सीता को आश्रय दिया,
आले निज धाम…
रघुकुलमध्ये कुलदीप जलाए,
राम के दो सूत सिय ने…
(श्रोता गण, जो एक राजा की पुत्री आहे,
एक राजा की पुत्रवधू,
आणि एक चक्रवर्ती राजा ची पत्नी आहे,
वही महाराणी सीता,
वनवास के दुखणे,
तुमचे दिवस कसे कापतात,
आपले कुल गौरव आणि,
स्वाभिमान की रक्षा करते,
कोणतीही मदत मांगे शिवाय,
कसे आपले काम वो स्वयं करते,
स्वत: वन से लकड़ी कापती आहे,
स्वयं अपना विधान कुटती है,
स्वतःची चक्की पीसती आहेत,
आणि त्याचे संतान,
स्वावलंबी बनने की शिक्षा कशी देते,
आता करुण झांकी देखिये)
जनक दुलारी कुलवधु दशरथ जी की,
राज-रानी होके दिवस वनात बिताती आहेत…
तेथे राहासी दास-दासी आठवो याम,
दासी बनी त्याची उदासीनता आहे…
धर्म प्रवीण सती परम कुलीन सब,
विधि दोशहीन जीना दुखात सिखाती,
जगमाता हरी-प्रिय लक्ष्मी स्वरूपा सिया,
कूटती हे धान भोज स्वयं बनवती आहे…
कठिन कुल्हाड़ी लेके लकड़िया काटती है,
करम लिखे को पर काट नहीं पाती है…
फूल भी उठाना भारी जिस सुकुमारी को था,
दुख भरे जीवन का बोज वो उठाती है…
अर्धागिनी रघुवीर की वो धरधीर,
भरती है नीर, नीर नैन ना लाती है,
जिसकी प्रजा के अपवादों कुचक्र में वो,
पीसती है चक्की स्वाभिमान बचाव है,
पालती है बच्चो कोन्स वो कर्मयोगिनी की भंति,
स्वाभिमानी स्वावलंबी सफल बनवती आहेत,
ती सीता माता की परीक्षा घेते,
निठुर नियति को दया भी नहीं आती है….
ओ… उस दुखिया के राज-दुलारे,
हम ही सूत श्रीराम तिहारे…
ओ… सीता माँ की आँखे के तारे,
लव-कुश है पितु नाम आमचे…
हे पितु भाग्य आमचे जागरण,
राम कथा कही राम के पुढे
(दोहा - ओम श्री महागनाधिपत्ये नमः,
ओम श्री उमामहेश्वराय नमः,
वाल्मिकी गुरुदेव के.ई.,
पाद पंकज सर नाय,
सुमेरे मात सरस्वती,
हम पर हौ सहाय,
मात पिता की वंदना,
कार्ते बारांबर,
गुरुजन राजा प्रजाजन,
नमन करो स्वीकर)
हम कथा सुनाते राम सकल गुण धाम की,
हम कथा सुनाते राम सकल गुण धाम की,
ये रामायण है पुण्य कथा श्री की…
जांबद्वीपे, भरत खांडे, आर्यवर्ते भारतवर्षे,
एक नगरी है विख्यात अयोध्या नाम की,
ही जन्मभूमी है परम पूज्य श्री राम की
हम कथा सुनाते राम सकल गुण धाम की
ये रामायण है पुण्य कथा श्री राम की…
ये रामायण है पुण्य कथा श्री राम की…
रघुकुल के राजा धर्मात्मा,
चक्रवर्ती दशरथ पुण्यत्मा,
संतति हेतु यज्ञ करवाय,
धर्म यज्ञ का शुभफल माया,
नृप घर जन्मे चार कुमार,
रघुकुल दीप जगत आधार,
चारों भारतो के शुभ नामा,
भरत, शत्रुघ्न, लक्ष्मण, रामा...
गुरु वशिष्ठ के गुरुकुल जाके,
अल्प काल विद्या सब पाके,
पुराण हुई शिक्षा, रघुवर पुराण काम की,
हम कथा सुनाते राम सकल गुण धाम की,
ये रामायण है पुण्य कथा श्री राम की…
मृदु स्वर कोमल भावना,
रोचक प्रस्तुती धांग,
एक एक कर वर्णन करेल,
लव कुश राम प्रसांग,
विश्वामित्र महामुनी राय,
इंके सांग चाले दो भाई,
कैसे राम तडका मारी,
कैसे नाथ अहिल्या तारी…
मुनिवर विश्वमित्र टॅब,
सांग ले लक्ष्मण राम,
सिया स्वयंवर देखणे,
पाहुंचे मिथिला धाम...
जनकपूर उत्सव है भर,
जनकपूर उत्सव है भारी,
आपल्या वर का छायां करेली,
सीता सुकुमारी,
जनकपूर उत्सव है भारी…
जनकराज का कथीं प्राण,
सुनो सुनो सब कोई,
जो तोड शिव धनुष को,
तर सीता पाटी होईल...
को तोड शिव धनुष कथोर,
सब की दृष्टी राम की और,
राम विनायगुण के अवतार,
गुरुवर की आग्य सिरधार…
सहज भाव से शिव धनु तोडा,
जनक सुता संग नाता जोडा…
रघुवर जेसा और ना कोई,
सीता की समता नाही होई,
जो करे पराजीत कांती कोटी राती काम की,
हम कथा सुनाते राम सकल गुण धाम की,
ये रामायण है पुण्य कथा सिया राम की…
सब पर शब्द मोहनी दारी,
मंत्रमुग्ध भय सब नर-नारी,
यो दिन पाऊस जात आहे बीते,
लव कुश ने सब के मन जीते,
वन गमन, सीता-हरण, हनुमत मिलन
लंका देहन, रावण मारन, अयोध्या पुनरागमान…
साविस्तर सब कथा सुनाई,
राजा राम भय रघुराय,
राम राज आयो सुख दाई,
सुख समृद्धी श्री घर घर आई…
कालचक्र ने घटना क्रम में,
ऐसा चक्र चालया,
राम सिया के जीवन में फिर,
घोर अंधेरा छाया…
अवध में ऐसा, ऐसा एक दिन आया
निष्कलंक सीता पे प्रजा ने,
मिथ्या दोष लगया,
अवध में ऐसा, ऐसा एक दिन आया…
चाल दी सिया जब तोड कर,
सब नेह-नाते मोह के,
पाशान हृदयें में ना,
अंगारे जागे विद्रोह के…
ममतामयी मान के आंचल,
भी सिमत कर रे गये,
गुरुदेव ज्ञान और नीती के,
सागर भी घाट कर रहेगा...
ना रघुकुल ना रघुकुल नायक,
कोई ना सिया का हुआ सहायक,
मानवत को खो बेथे जब,
सभ्य नगर के वास,
अब सीता को हुआ सहायक,
वन का एक संन्यासी…
उन ऋषी परम उदार का,
वाल्मिकी हब नाम,
सीता को आश्रय द्या,
ले आए निज धाम…
रघुकुल में कुलदीप जलायें,
राम के दो सुत सिये ने जाय…
(श्रोता गं, जो एक राजा की पुत्री है
एक राजा की पुत्रवधू है,
और एक चक्रवती राजा की पटनी है,
वही महाराणी सीता,
वनवास के दुखों में,
आपने दिन कैसे काटी है,
आपने कुल के गौरव और,
स्वाभिमान की रक्षा करते हुए,
किसी से सहायता मांगे बिना,
कैसे अपने काम वो स्वयं कार्ती हैं,
स्वयम वन से लकडी काट्टी है,
स्वयं अपना धन कुट्टी है,
स्वयं अपनी चक्की पेस्ती है,
और अपनी संतान को,
स्वावलंबी बनने की शिक्षा कैसे देते है,
अब उस्की करूण झांकी देखीये)
जनक दुलारी कुलवधू दशरथ जी की,
राज-रानी होके दिन वान में बिताती है…
राहते घेरे जीसे दास-दासी आथो यम,
दासी बनी अपनी उदासी को छुपती है…
धरम प्रवीण सती परम कुलीं सब,
विधि दोषहीन जीना दुख में शिकती है,
जगमाता हरि-प्री लक्ष्मी स्वरूपा सिया,
कुटी है धन भोज स्वयम बनाती है…
कथिंन कुल्हाडी लेके लकडीया कट्टी है,
करम लिखे को पर कात नही पाने है…
फूल भी उठाना भरी जिस सुकुमारी को था,
दुख भरे जीवन का बोझ वो उठती है…
अर्धांगिनी रघुवीर की वो धरधीर,
भारती है नीर, नीर नैन में ना लाती है
जिस्की प्रजा के अपवादों को कुचक्र में वो,
पीस्ती है चक्की स्वाभिमान बचाती है,
पळती है बच्चों को वो कर्म योगिनी की भाती,
स्वाभिमानी स्वालंबी सफळ बनती है,
ऐसी सीता माता की परीक्षा लेते दुख देते,
निथूर नियाती को दया भी नही आती है…
ओ...यूएस दुखिया के राज-दुलारे,
हम ही सुत श्री राम तिहारे…
ओ… सीता माँ के आंख के तारे,
लव-कुश है पिटू नाम हमारे…
हे पिटू भाग्य हमारे जाये,
राम कथा म्हणी राम के आगे
"हम सुनाते राम सकल गुणधाम की” एक बहुत ही प्रसिद्ध आणि भावुक भजन है। साधारण आणि प्रेमळ शब्द मध्ये सुनाता आहेत.
जब यह भजन गाया जाता, असे वाटते की जेसे हम खुद रामायण कथा सांगतात. हे भजन लाखो लोकांच्या हृदयात भगवान रामासाठी प्रेम आणि श्रद्धा भक्ती वाढत आहे.

हे भजन का इतिहास खूप ख़ास आहेत.
इन्होंने मिलकर हे भजन म्हणून खास बनवले की आजही हे भजन हर घर, हर मंदिर आणि हर भजन संध्या मध्ये जाता जाता.
यह भजन आज भी हर लोको के प्रेम आणि भक्ति का सर्वात मोठा साधन है। लोक इस भजन को गाते आहे, त्यांच्या मनातील भक्ती बनत आहेत आणि हृदयासाठी नेहमी चांगले काम करत आहेत.
यह भजन आज भी उतनी ही श्रद्धा से गाया जाता है जितनी रामायण के समय घर-घर में गुंजता था। इसने भगवान राम की कथा को हर व्यक्ति बहुत आसन भाषा में पहुचान्या ।
“हम सुनाते राम सकल गुणधाम की” भजन रामायण की आत्मा से जुड़ा हुआ है। हे भजन भगवान श्रीराम के गुण, त्यांचे आचरण, त्यांचे विनम्रता आणि आदर्श त्यांचे जीवन सर्व प्रेमाच्या सोबत जगासमोर आणि भक्ती आहे.
यह भजन की सबसे खासियत है कि यह हमारे रामायण की कहानी को बहुत ही सरल, मीठे आणि भावुक शब्दांमध्ये स्पष्टता आहे.

रामायण केवल एक कहानी नहीं, यह भारत की संस्कृति, धर्म और आदर्शों की बहुत सीख है। ही बात को लोकांपर्यंत पोहोचवणे हे भजन ने बहुत अहम भूमिका निभाई है।
जब यह भजन टीव्ही पर रामायण के समय गूँजा, तब संपूर्ण देश में एक भक्ति का माहौल बनला होता। हर घर में बच्चे, मोठे आणि बुजुर्ग सर्व ध्यान से रामायण सुनते आणि ते भजन सुनकर भावुक होते.
हे भजन का सबसे विशेष महत्व लव-कुश से हुआ नेटवर्क है। जेव्हा दोन्ही बच्चे भगवान राम की जीवन कथा सुनाते.
तब यह भजन उत्तर में बजता है। यह कि रामकथा दाखवा एक राजा की कथा नाही, तर सदियों तक चलने वाला प्रेरणा स्रोत आहे.
गाने से पूर्ण अयोध्या भावुक आहे आणि सर्व लोगो को भगवान राम की महानता याद आ जाती आहे. त्यामुळे हे भजन के बिना हे दृश्य अधूरा माना जाते.
आज भी मंदिरों, स्कूलों, रामलीला आणि भजन संध्याओं में यह भजन बहुत प्यार से जाता है।
टीव्हीवर रामायण के बाद भी, यह भजन आज तक उतना ही लोकप्रिय आहे. जब भी कोई शब्द सुनता है, रामायण की मुले ताज़ा हो जाती हैं। हे भजन ने सिद्ध केले आहे की भक्तिची शक्ती पुरानी नाही होती.
“हम सुनाते राम सकल गुणधाम की” भजन हम भगवन राम की संपूर्ण कथा अत्यंत सरल आणि मीठे ढंगाने स्पष्टता आहे. या भजन के माध्यम से आम्हाला कळते की भगवन राम तुमच्या जीवनात नेहमीच सच्चा, प्रेम आणि धर्माचा साथ देतो.
ही घटना आज भी लोक त्यांच्या जीवनातून शिकणार आणि सच्चे इंसान बनने की कोशिश करू. हे भजन ने रामायण की पवित्र शिकण्यासाठी प्रत्येक घरापर्यंत पोहोचत आहे.
जब भी लोग इस भजन को गाते या सुनते, त्यांच्या मनात नवीन जोश, भक्ति आणि शांति पैदा होती. यह भजन लोगों के दिलों में रामायण यादों को हमेशा जिंदा की प्रमुख है।
हम कथा सुनाते भजनचे हिंदीतील गीत की मदद से छोटे-बड़े सारे भगवान राम के बारे में आसानी से जान पाते हैं।
यह भजन हम सिखाता है कि जीवनात प्रेम, आदर आणि धर्माचा स्थान खूप ऊँचा है. समान कारण हे भजन नेहमीच भक्ती आणि प्रेरणा का स्त्रोत बनवा.
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