Sanso Ki Mala Pe Lyrics in Hindi: साँसों की माला पे सिमरूं मैं भजन
नमस्ते भक्तों! क्या आप मीराबाई का वह जादुई भजन ढूँढ रहे हैं? आपकी खोज यहाँ खत्म होती है। ဟင်...
0%
အာမလကီ အီးကာဒါရှီ ဝရတ် ကထာ: हिन्दू धर्म में एकादशी तिथि का बहुत ही महत्व माना जाता है| एकादशी तिथि का दिन भगवान विष्णु को समर्पित किया जाता है| हिन्दू धर्म के अनुसार फाल्गुन माह की शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि को आमलकी एकादमाशी रू इस आमलकी एकादशी पर भगवान विष्णु के साथ – साथ आंवले के पेड़ की भी पूजा की जाती है| इस व्रत का पूर्ण रूप से फल पाने के लिए आमलकी एकादशी व्रत कथा (Amalaki Ekadashi Vrat Katha) का पाठ|करना

आमलकी एकादशी व्रत कथा (Amalaki Ekadashi Vrat Katha) का जाप तथा उपवास करने से 100 गाय दान करने पिते समा्न पुछ। होती है तो आइये जानते है कि आमलकी एकादशी व्रत कथा (Amalaki Ekadashi Vrat Katha) का महथत्व तथा आमकलाी ए Ekadashi Vrat Katha) के बारे में|
इसी के साथ यदि आप किसी भी आरती या चालीसा जैसे खाटू श्याम चालीसा [ခါတူ ရှယမ် ချာလီဆာ]၊ सरस्वती आरती [သာရာဆွာတီ အာတီ], या जया एकादशी व्रत कथा [ဂျာယာ အက်ကာဒီရှီ ဗာရတ် ကသာ] आदि भिन्न-भिन्न प्रकार की आरतियाँ, चालीसा व व्रत कथा पढना चाहते है तो आप हमारी वेबसाइट ၉၉ ပန်ဒစ် Facebook विजिट कर सकते है| इसके अलावा आप हमारे एप အသုံးပြုသူများအတွက် 99Pandit पर भी आरतियाँ व अन्य कथाओं को पढ़ सकते है| इस एप में सम्पूर्ण भगवद गीता के सभी अध्यायों को हिंदी अर्थ समझाया गया है|
युधिष्ठिर भगवान श्री कृष्ण से बोले कि – भगवन! आपने मुझसे फाल्गुन महीने के कृष्ण पक्ष में आने वाली एकादशी जिसे विजया एकादशी के नाम से भी जाना जाता है, का बहुत ही अच्छे व सरल रूप वर्णन किया है| अब मैं आपसे विनती करता हूँ कि फाल्गुन माह के शुक्ल पक्ष में आने वाली एकादशी मछ के बारे में जानकारी प्रदान करे| इस एकादशी का क्या नाम है? इसका विधान क्या है? इसका व्रत करने से किस प्रकार के फल की प्राप्ति होती है| सब विधि पूर्वक बताएं|
भगवान श्री कृष्ण ने उनसे कहा कि – हे राजन! फाल्गुन माह के शुक्ल पक्ष में आने वाली एकादशी को आमलकी एकादशी कहा जाता है| जो भी व्यक्ति इस एकादशी का व्रत करता है तथा आमलकी एकादशी व्रत कथा (Amalaki Ekadashi Vrat Katha) का पा ठा व्यक्ति के जीवन के सभी पाप नष्ट हो जाते है| एक एकादशी के व्रत करने से एक हज़ार गायों का दान करने के समान पुण्य की प्राप्ती है | हे राजन, अब मैं आपको उस कथा के बारे में कहूँगा जो महर्षि वशिष्ठ ने राजा मांधाता को सुनाई |
राजा मान्धाता ने ऋषि वशिष्ठ जी से कहा कि – हे ऋषिवर! कृपया मुझ पर कृपा करके एक ऐसी व्रत कथा कहिये, जिसको केवल सुनने मात्र से ही मेरारा उद्| इस पर ऋषि वशिष्ठ से कहा – हे मान्यवर! सभी व्रतों में से सबसे उत्तम तथा अंत में मोक्ष प्रदान करने वाली केवल आमलकी एकादशी ही है|
यह एकादशी फाल्गुन माह के शुक्ल पक्ष की तिथि को आती है| एक वैदिश नाम का राज्य था| उस राज्य में ब्राह्मण, क्षत्रिय, वैश्य तथा शुद्र चारों वर्णों के लोग बहुत हती आनंद के | उस नगरी में हमेशा केवल वेदों की ध्वनि ही सुनाई देती थी तथा पाप, द्वेष आदा उक रा |ज्य में

उस राज्य के शासक का नाम चैतरथ था| वह राजा बहुत ही विद्वान तथा धर्मी था| उस राज्य में कोई भी व्यक्ति गरीब या कंजूस नहीं था| वहां की एक बात बहुत ही अद्भुत थी कि उस नगर के सम्पूर्ण लोग केवल भगवान विष्णु के कभ्त ले एकादशी तिथि का उपवास करते थे|
एक बार जब फाल्गुन माह के शुक्ल पक्ष की आमलकी एकादशी आई तो उस राज्य के राकाजाभ, उन लोगों के द्वारा इस एकादशी का बहुत ही उत्साह के साथ उपवास किया गया| इसके पश्चात राजा अपनी सम्पूर्ण सेना के साथ मंदिर गये व मंदिर जापकर कुंभ स्थरापित करवंके धूद, न इत्यादि से आंवले के पौधे का पूजन करने लगे|
इसके बाद इस प्रकार से स्तुति करने लगे – हे धात्री! आप ब्रह्मस्वरूप हो, आप ब्रह्माजी के द्वारा उत्पन्न हुए हो तथा समस्त पापों हो नाश | लरने कृपा करके मेरा अर्घ्य को स्वीकार करे| आप भगवान अहरी रामचंद्र जी के द्वारा समर्पित है|
मैं आपसे यह प्रार्थना करता हूँ कि आप मेरे सभी पापों को नष्ट कर दे| इसके पश्चात सभी नगरवासियों ने उस मंदिर में रात्रि को जागरण किया| रात के उस मंदिर में एक बहेलिया आया, जो की बहुत पापी तथा दुराचारी प्रवृत्ति का था| भूख तथा प्यास से परेशान होकर वह बहेलिया मंदिर में जागरण होता हुआ को एक कोने में जाकर बैं |
जागरण में वह बहेलिया भगवान विष्णु की आमलकी एकादशी के महात्म्य को सुनाने लगा| इस प्रकार उसने सभी लोगों की तरह सारी रात जागकर ही बिता दी| सुबह होने के पश्चात जब सभी लोग अपने – अपने घर चले गए तो वह बहेलिया भी अपने घर की ओर ला | घर पहुँच कर उसने भोजन किया तथा कुछ समय के पश्चात ही उस बहेलिये की मृत्यु हो गई|
किन्तु आमलकी एकादशी का महात्म्य सुनने तथा सारी रात जागरण करने के कारण उसर मा जाजा विदूर लिया एवं उसका नाम वसुरथ रखा गया| जब वह युवा हुआ तो वह उसकी चतुरंगिनी सेना के साथ तथा धन – धान्य से युक्त होकर 10 पा ज़ार लाार पोषण करने लगा| उसका तेज सूर्य से समान था, कांति में वह चंद्रमा के समान, वीरता में भगवान विष्णु की मीमांति एषवं के समान था| वह बहुत ही धार्मिक, कर्मवीर तथा भगवान विष्णु का बहुत बड़ा भक्त था|
वह उसकी प्रजा समान रूप से भरण – पोषण करता था| एक दिन राजा शिकार करने के लिए गया| လက်ဆောင်များ करने लगा| कुछ समय के पश्चात उस स्थान पहाड़ी म्लेच्छ आ गये तथा राजा को अकेला पाकर मारो, माऱ बलेज उउ हुए राजा की दौड़े| म्लेच्छ कहने लगे कि यह वही राजा ने जिसने हमारे परिवार के सदस्यों का वध किया है तथह उन्यो ले दिया| इस कारण इसे निश्चित रूप मारना चाहिए|
သူသည် प्रकार की कोई हानि नहीं हुई बल्कि वह सभी अस्त्र राजा पर फूल बनकर गिरने लगे| इसके बाद उन अस्त्रों से म्लेच्छों के अस्त्र स्वयं उन पर ही आक्रमण कर लगे जिस कारणल स भी मूर्छित हो गए| कुछ समय बाद राजा के शरीर से एक बहुत ही सुन्दर देवी प्रकट हुई| उन्होंने उन सभी म्लेच्छों का वध कर दिया|
जब राजा उठा तो उसने सभी म्लेच्छों को मरा हुआ पाया तथा वह कहने लगा कि इस वन में हितेषा ऐनसा जिसने मेरी सहायता की| वह ऐसा विचार कर ही रहा था कि कुछ समय के बाद आकाशवाणी हुई – हे राजा! इस संसार में भगवान विष्णु के अलावा और कौन है जो तेरी सहायता कर सकता है| यह आकाशवाणी सुनकर राजा अपने राज्य लौट गया तथा सुख के साथ अपना राज्य करने लगा|
အကြောင်းအရာ၏ဇယား