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Diwali 2026- जाने दीपावली की शुभ तिथि, मुहूर्त और पूजा का महत्व

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Last Updated:ဖေဖေါ်ဝါရီလ 2, 2026
ဒိဝါလီ ၂၀၂၄
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Diwali 2026 ရက်စွဲ: हमारे इस भारत में कई सम्प्रदाय के लोग निवास करते है। आज हम हिन्दू धर्म के त्यौहार के बारे में बात करेंगे. ऐसे तो हिन्दू धर्म में बहुत सारे त्यौहार आते है।

၂၀၂၅ ခုနှစ် का त्यौहार हिन्दू धर्म के साथ साथ सम्पूर्ण भारत देश में बहुत ही हर्षोल्लास व ह हैमाता शाली के दीपावली को कई लोग दिवाली के नाम से भी जानते होंगे.

दिवाली का त्यौहार हिन्दुओं में नए साल के समान ही मनाया जाता है। दीपावली का त्यौहार धार्मिक दृष्टि सेमा जाए तो भी हिन्दू धर्म के लोगों के लोगोन के लोगोन के लोगोन के लारम्ए बुत जाता है။ इस दिन सभी अपने घरों में दीपक जलाते है।

၂၀၂၅ ခုနှစ်

दीपावली 2026 (Diwali 2026) का त्यौहार बड़े – बड़े शहरों से लेकर छोटे – छोटे गाँहोता मा भी मा भिडियोहरू इस दिन गाँवों में अपने पालतू जानवरों के लिए भी कई सारी वस्तुएं खरीदी जाती है।

दिवाली के दिन जब गाँव के प्रत्येक घरों में दीपक जलते है| तो उन सारे दीपकों की रोशनी से पूरा गाँव ही जगमगा जाता है।

दीपावली.

इसलिए इस दिन को सम्पूर्ण भारत और सनातन धर्म में दीपावली (दिवाली) के रूप में मनाया जाता है။ दिवाली को प्रकाश व रोशनी का त्यौहार भी कहा जाता है।

इस दिन को बुराई पर अच्छाई की जीत के पर्व के रूप में भी मनाया जाता है। दिवाली 2026 का त्यौहार धनतेरस के दिन से प्रारम्भ होता है और भाई दूज के दिन समाप्त हो जाता है။

हिन्दू धर्म के पंचांग के अनुसार दीपावली का यह पावन त्यौहार प्रत्यवेक वर्ष में कार्तिमा मार्तिक मा से के लिए मनाया जाता है။ इस वर्ष दीपावली का यह पवित्र त्यौहार 08 नवंबर 2026 को मनाया जाएगा.

दिवाली की शुभ तिथि व मुहूर्त – အိန္ဒိယပြက္ခဒိန်တွင် 2026 ခုနှစ် ဘယ်အချိန်က ဒီဝါလီ

ရက်စွဲ  समय
दिवाली 2026 နေ့ရက် ၁၉၄၉ ခုနှစ်၊ နိုဝင်ဘာလ ၂၆ ရက်
लक्ष्मी पूजा मुहूर्त 06:27 PM से लेकर 08:27 PM तक
प्रदोष काल 06:02 PM से लेकर 08:34 PM तक
वृषभ काल 06:27 PM से लेकर 08:27 PM तक
अमावस्या तिथि प्रारम्भ 08 नवंबर 2026၊ सुबह – 11:27 से
अमावस्या तिथि समाप्त 09 नवंबर 2026၊ दोपहर – 12:31 तक

दीपावली के साथ अन्य भी कई सारे त्यौहार भी आते है जैसे – दीपदान, धनतेरस, गोवर्धन पूजा, तथा भाई दूज यह त्यौहार पुरे सप्ताह चलने वाला सुप्रसिद्ध त्यौहार है।

दीपावली का त्यौहार क्यों मनाया जाता है – အဘယ်ကြောင့် ဒီဝါလီပွဲတော်ကို ကျင်းပသနည်း။

यह त्यौहार कार्तिक मास के 15 နေ့ရက် अमावस्या को मनाया जाता है. यदि हम बात करे इस दीपावली के त्यौहार को क्यों मनाया जाता है तो उसके लिए अनेकों क थाए प्रलिल ए। के बारे लोगों को ज्ञात है वो भगवान श्री राम के ၅၅ နှစ် के वनवास के लौटने की कथा है

इसके अलावा भी और कथाए है. जिनके बारे में आपको पता नहीं है और हम आज इस लेख के माध्यम से आपको उन सभी कथाओओ से अवगतओ जिनके बारे में आपको पता नहीं है –

राम जी का पुन: आगमन

वाल्मीकि जी के द्वारा लिखी गई रामायण ने बताया है कि जब भगवान श्री राम रावण का पताध करने को बचाकर अपने भाई लक्ष्मण के साथ अयोध्या लौटे थे. उस दिन पुरे नगर के सभी घरों में दीपक जल रहे थे ។

माना जाता है कि उस दिन सम्पूर्ण अयोध्या नगरी दीपों से जगमगा उठी थी. भगवान श्री राम के वनवास पूर्ण करके लौटने पर ही दिवाली का यह पावन त्यौहार मनायह जाताै।

इस दिन प्रत्येक में गाँव में दीपक जलाए गए थे. तब से ही दिवाली को अंधकार पर विजय का पर्व भी माना गया है।

भगवान श्री कृष्ण के द्वारा नरकासुर का अंत  

माना जाता है। इस असुर को किसी स्त्री के हाथों ही मरने का श्राप मिला हुआ था.

उस दिन कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि थी ។ नरकासुर के आतंक से मुक्ति पाने की खुशी में वहां के लोगों ने दीपोत्सव मनाया था. जिसके अगले दिन दीपावली का त्यौहार मनाया गया.

पांडवों की घर वापसी  

आपकी जानकारी के लिए बता दे कि भगवान श्री राम के भांति ही पांडवो को भी अज्ञातवाोस का कारण စာမျက်နှာ

उनकी पुनः घर वापसी पर पुरे हस्तिनापुर को दीपो के द्वारा सजाया गया था. तब से ही दिवाली စတင်ခဲ့သည်။

माँ लक्ष्मी का अवतार

इस त्यौहार से सम्बंधित एक कथा यह भी है कि समुद्र मंथन के समय माता लक्ष्मी में इस पृ्लरी पर

माता लक्ष्मी जी को धन और समृद्धि प्रदान करने वाली देवी के रूप में भी जाना जाता है| इसी वजह से प्रत्येक घरों में दीपक जलने के साथ – साथ माता लक्ष्मी पूजा की जाती है|

माँ काली का रौद्र रूप

एक कथा के अनुसार माता पार्वती ने किसी असुर का वध करने के लिए जब महाकाली का रूप धाध कि करने के पश्चात भी माता पार्वती का क्रोध शांत नहीं हो रहा था|

तब माता पार्वती के क्रोध को शांत करने के लिए भगवान शिव माता पार्वती के चरणों में आे | उस समय भगवान शिव के स्पर्श से ही पार्वती माँ का क्रोध शांत हो गया था|

इसी कारण से दीपावली के दिन उनके शांत रूप माता लक्ष्मी का भी पूजन किया जाता है| အဲသည် अलावा इस दिन रात को माता काली की पूजा का भी विधान माना गया है|

दिवाली पूजन की सामग्री सूची – Diwali Pujan Samagri စာရင်း

वस्तु ပမာဏ
रोली 1 စာမျက်နှာ
कलावा (मौली)  2 नग
Vermilion 1 စာမျက်နှာ
လေးညှင်းပွင့် 1 စာမျက်နှာ
ဖာလာ 1 စာမျက်နှာ
सुपारी  4 नग
ဓမ္မချည်မျှင် 4 नग
ဟန်နီ 1 शीशी
इत्र 1 शीशी
गंगाजल 1 शीशी
पानी वाला नारियल 1 नग
पीला कपड़ा 2 လပိုင်း
धूपबत्ती 1 စာမျက်နှာ
रुई बत्ती लंबी वाली 1 စာမျက်နှာ
रुई बत्ती गोल बत्ती 1 စာမျက်နှာ
ဂျီး 500 ဂရမ်
सरसो का तेल 500 ဂရမ်
दियाळी 1 नग
ကီလိုရာ 10 नग
कमल बीज 11 नग
पंचमेवा 200 ဂရမ်
धान की खील 200 ဂရမ်
धान का चूरा 200 ဂရမ်
ဂိမ်းဆော့ 200 ဂရမ်
लक्ष्मी गणेश प्रतिमा -
लक्ष्मी यंत्र 1 नग
भगवान के वस्त्र एवं आसान -
पंचामृत की व्यवस्था पहले से निर्माण करे -
माचिस 1 नग
Kapoor 1 စာမျက်နှာ
फल (अनार सरीफा विशेष एवं अन्य फल) -
အလယ်တန်း လိုအပ်သလို
फूल माला -
फूल खुले ၉၈၀ ရူပီး
पान पते 5 नग
ကြာပန်း आवश्यकतानुसार जो वर्षभर प्रयोग कर सके
नौवीं (कॉपी एवं किताब आवश्यकतानुसार) -

 

कुबेर की पोटली के लिए सामग्री

वस्तु ပမာဏ
माचिस 1 စာမျက်နှာ
गोमती चक्र 5 नग
कोढ़ी 11 नग
ဂိမ်းဆော့ 50 ဂရမ်
सुपाड़ी 11 नग
कमल बीज 11 नग
धुंधची 11 नग
चांदी अथवा स्वर्ण सिक्का 3 नग
စာမျက်နှာ 1 नग

 

दीपावली पूजन का मंत्र – Deepawali Pujan မန္တန်

दिवाली के दिन माता लक्ष्मी जी का आव्हान करते है| माँ लक्ष्मी को धन देवी भी कहा जाता है| जो भी दीपावली के दिन माता लक्ष्मी की सच्ची श्रद्धा से प्रार्थना करता है|

उसे उनकी कृपा अवश्य ही प्राप्त होती है| उनकी असीम कृपा पाने के लिए आप इस निम्न मंत्र का जप कर सकते है –

|| ॐ ह्रीं श्रीं लक्ष्मीभ्यो नमः॥ ॐ श्रीं ह्रीं श्रीं कमले कमलालये प्रसीद प्रसीद ॐ श्रीं ह्रीं श्रीं महालक्ष्मयै नम:ॐ 

इस मंत्र का दीपावली के दिन ၁၀၈ बार जप करने से माता लक्ष्मी का आशीर्वाद मिलता है| 

दीपावली 2026 की पूजन विधि – Diwali Puja Vidhi (တစ်ဆင့်ပြီးတစ်ဆင့်)

  • इस दिन भगवान Ganesha သခင် और माता लक्ष्मी जी का पूजन किया जाता है| इसके लिए आपको सबसे पहले जिस भी जगह आप पूजा कर रहे हो, उस स्थान को अच्छे से साफ़ कर ले| इसके पश्चात एक चौकी ले और उसपर लाल या पीले रंग का कपडा बिछा दीजिये|
  • इसके पश्चात भगवान गणेश जी और माता लक्ष्मी जी की मूर्तियों को चौकी पर स्थापित किया जाता है| अगर आप मूर्ति लाने में असमर्थ है| याद रखे कि माता लक्ष्मी जी मूर्ति को गणेश जी मूर्ति के दाहिनी ओर ही रखें|

၂၀၂၅ ခုနှစ်

  • पूजा के समय इनके साथ भगवान कुबेर, सरस्वती माता और कलश की भी स्थापना अवश्य करें| 
  • दीपावली की पूजा करने से पहले चौकी पर और पूजा के स्थान पर गंगाजल अवश्य छिडके| इसके पश्चात अपने हाथ में पीले या लाल रंग के फूल रखे|
  • अब पूजा की शुरुआत करते हुए सबसे पहले भगवान गणेश जी का पूजन कीजिए| और उन्हें प्रसन्न करने के लिए मंत्रों का जाप करें| 
  • भगवान गणेश जी का पूजन करते समय निम्न मंत्र का जाप लगातार करते रहे — ''गजाननम् भूत भू गणादि सेवितं कपित्थ जम्बू फलचारुभक्षणम्। उमासुतं सु शोक विनाशकारकं नमामि विघ्नेश्वरपाद पंकजम्
  • इसके पश्चात गणेश जी को तिलक लगाएं और उन्हें दूर्वा और मोदक का प्रसाद चढ़ाइए| 
  • भगवान गणेश जी के साथ ही माता लक्ष्मी जी का पूजन करें| सबसे पहले लक्ष्मी माता को लाल सिंदूर का तिलक लगाए और माता लक्ष्मी से सम्बंधित श्री श्री चाकित मंन्र जाप करें|
  • दिवाली के दिन भगवान गणेश जी और माता लक्ष्मी जी का पूजन करने के पश्चात मध्य रात्तका में काली काली पूजा करने का विधान माना गया है| 
  • इसके पश्चात गणेश जी और माता लक्ष्मी जी आरती करे और उन्हें भोग चढ़ाए| तथा आरती होने के बाद भोग को प्रसाद के रूप में सभी लोगों में बाँट दीजिये| 

दीपावली पूजन के लाभ – Deepawali Pujan ၏ အကျိုးကျေးဇူးများ

  • इस त्यौहार के दिन छोटे और बड़े दोनों व्यापारियों के लिए ख़ास कमाई के लिए होता है|
  • दीपावली का यह पावन त्यौहार आपसी रिश्तों में मिठास लाता है|
  • इस दिन सभी प्रकार के व्यापार में बहुत ज्यादा फायदा होता है| क्योंकि इस दिन सभी अपने – अपने घरों के लिए नये – नये सम्मान लेते है| जैसे – कपड़े, इलेक्ट्रॉनिक सम्मान, मिठाइयाँ आदि|
  • दिवाली के दिन सफाई का बहुत ही बड़ा महत्व है| इस दिन घर के आस – पास का परिवेश और वातावरण बहुत ही शुद्ध रहता है क्योंकि सभी अपना घर की आचे से ध्यान रखते है| इससे हमारे स्वास्थ्य में भी बहुत ही बड़ा लाभ मिलता है| इस दिन सभी अपने – अपने घर को नये रंग रंगते है|
  • इसके अलावा भी कुटीर उद्योगों को भी इस दिन व्यापार में बहुत फायदा होता है|

दिवाली के दिन ध्यान देने योग्य बातें   

दिवाली 2026 की पूजा के दौरान हमें निम्न बातो का पता होना चाहिए जैसे की –

  • दीपावली पूजन के समय अपना ध्यान केवल भगवान की सच्चे मन की गयी पूजा उपासना में होना प जाहिए तरा हो तब हल्की से मुस्कान अपने मुख पर रखे|
  • दीपावली पूजन के दौरान लक्ष्मी पूजन के बाद एकाक्षी नारियल का पूजन करना आपके लिए शुभ हो। नारियल को पीले वस्त्र में लपेटकर पूजा स्थल पर रख दें|
  • दीपावली पूजन के बाद हर कमरे में  အခွံ बजाना चाहिए जिससे सकारात्मक ऊर्जा का प्रवाह घर की चारो दिशाओ में होता है|
  • अगर पूजन के दौरान किसी प्रकार की पूजन सम्बन्धित कोई त्रुटि हो जाये तो क्रोधित बिलकयेल न हो। ऐसा न करके आप त्रुटि होने पर भगवान से क्षमा – याचना कर सकते है| इससे भगवान आपको क्षमा कर देते है|

दीपावली पूजा का महत्व – Deepawali Puja ၏ အရေးပါမှု

दिवाली का त्यौहार हिन्दुओं में नए साल के समान ही मनाया जाता है| दीपावली का त्यौहार धार्मिक दृष्टि सेमा जाए तो भी हिन्दू धर्म के लोगों के लोगोन के लोगोन के लोगोन के लारम्ए बुत जाता है|

इस दिन सभी अपने घरों में दीपक जलाते है| दीपावली का त्यौहार बड़े – बड़े शहरों से लेकर छोटे – छोटे गाँवों में भी मनाया जाता है | इस दिन गाँवों में अपने पालतू जानवरों के लिए भी कई सारी वस्तुएं खरीदी जाती है|

ဒိဝါလီ ၂၀၂၄

दिवाली के दिन जब गाँव के प्रत्येक घरों में दीपक जलते है| तो उस सारे दीपों की रोशनी से पूरा गांव ही जगमगा जाता है| दिवाली का त्यौहार धनतेरस के दिन प्रारम्भ होता है और भाई दूज के दिन समाप्त हो जाता है|

हिन्दू धर्म के पंचांग के अनुसार दीपावली 2026 का यह पावन त्यौहार प्रत्येक वर्ष में कार्तिक मास के 15वें दिन अमावस्या को मनाया जाता है|

दिवाली को प्रकाश व रोशनी का त्यौहार भी कहा जाता है| इस दिन को बुराई पर अच्छाई की जीत के पर्व के रूप में भी मनाया जाता है|

နူအာ 

आज हमने इस आर्टिकल के माध्यम से दीपावली 2026 के बारें में काफी बाते जानी है| आज हमने दीपावली 2026 (Deepawali 2026) पूजन के फ़ायदों के बारे में भी जाना| हम उम्मीद करते है कि हमारे द्वारा बताई गयी जानकारी से आपको कोई ना कोई मदद मिली होगी|

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