ရှီလာဒေဝီဘုရားကျောင်း၊ ဂျိုင်ပူးရ် - ဒါရှန်အချိန်၊ သမိုင်းနှင့် ရောက်ရှိနည်း
ဂျိုင်ပူးမြို့ရှိ Shila Devi ဘုရားကျောင်းသည် Amber Fort တွင်တည်ရှိသော နာမည်ကျော် နတ်ဘုရားမ Durga ၏ ရုပ်တုတော်၏ နေအိမ်ဖြစ်သည်။…
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हिन्दू धर्म में कुछ यात्राएं ऐसी हैं जो सिर्फ पैरों से नहीं, बल्कि पूरी आत्मा से की जात चार धाम यात्रा उन्हीं में से एक है।
मान्यता है कि जो व्यक्ति एक बार सच्चे मन से चार धाम यात्रा पूरी कर लेता है, उसके जीवन के सारे पाप धुल जाते हैं और मोक्ष का मार्ग खुल जाता है। इसीलिए हर साल लाखों श्रद्धालु उत्तराखंड की इन पवित्र पहाड़ियों की ओर निकल हड़ते।
ဟိန္ဒီဘာသာဖြင့် ချားဒမ် ယတြာ में आज हम आपको बताएंगे कि चार धाम क्या हैं, यात्रा कब शुरू होती है, हर धराम की का क्या खा पूरी जानकारी एक ही जगह.
चार धाम यात्रा में चार पवित्र तीर्थस्थल शामिल हैं:
यह चारों धाम उत्तराखंड के हिमालय में स्थित हैं और इनकी यात्रा इसी क्रम में की जाती है।
चार धाम यात्रा भारत की सबसे पवित्र और महत्वपूर्ण तीर्थ यात्राओं में से एक है। यह यात्रा सिर्फ धार्मिक नहीं है बल्कि यह एक आत्मिक अनुभव है जो इंसान को अंदर से बदल देती है।
हिन्दू शास्त्रों में कहा गया है कि चार धाम की यात्रा करने से व्यक्ति के जन्म-जन्मांताष के पटा न यह यात्रा भारत की समृद्ध सांस्कृतिक और आध्यात्मिक परंपरा का भी प्रतीक है।
उत्तराखंड को “देवभूमि” कहा जाता है और यही वह पवित्र भूमि है जहाँ चारों धाम स्थित हैं Haridwar को इस यात्रा का प्रवेश द्वार माना जाता है। अधिकांश यात्री हरिद्वार से ही यात्रा शुरू करते हैं.
चार धाम यात्रा हर साल अप्रैल या मई के महीने में शुरू होती है .र अक्टूबर या नवंबर तक चलती है။ सर्दियों में हिमालय में भारी बर्फबारी होती है जिससे रास्ते बंद हो जाते हैं.
इसीलिए नवंबर में दीपावली के आसपास चारों धामों के कपाट बंद हो जाते हैं और अगले साल अक्षय तृतीया के आसपास फिर से खुलते हैं.
यात्रा के लिए सबसे अच्छा समय:
चार धाम यात्रा का पहला पड़ाव यमुनोत्री है यह उत्तराखंड के उत्तरकाशी जिले में स्थित है और यमुना नदी के उद्गम स्थ के पास बना हुआ है।
समुद्र तल से ऊंचाई: ၃,၈၉၂ မီတာ
यमुनोत्री का मंदिर पूर्णतः देवी यमुना को समर्पित है။ यहाँ देवी यमुना की काले संगमरमर से बनी मूर्ति स्थापित है। यमुना नदी का असली उद्गम स्थान मंदिर से महज 1 किलोमीटर दूर है.
यमुनोत्री की खास बातें:
चार धाम यात्रा का दूसरा पड़ाव गंगोत्री है। यह भी उत्तरकाशी जिले में स्थित है और ဂင်္ဂါမြစ် का उद्गम स्थल माना जाता है.
समुद्र तल से ऊंचाई: ၃,၈၉၂ မီတာ
गंगा नदी को “जीवन की धारा” कहा जाता है। गंगोत्री वह पवित्र स्थान है।
यहाँ गंगा को “ဘဂရသီ” के नाम से जाना जाता है क्योंकि राजा भागीरथ की कठोर तपस्या के कारण गंगा स्वर्ग से धरती पर उरती पर
गंगोत्री की खास बातें:
चार धाम यात्रा का तीसरा और सबसे चर्चित पड़ाव केदारनाथ है। यह उत्तराखंड के रुद्रप्रयाग जिले में स्थित है।
समुद्र तल से ऊंचाई: ၃,၈၉၂ မီတာ
केदारनाथ भगवान शिव के 12 ज्योतिर्लिंगों में से एक है။ ऊँचे बर्फीले पहाड़ों के बीच स्थित यह मंदिर अपने दिव्य दृश्य और आध्यात्मिक ऊर्जा के ले आध्यात्मिक ऊर्जा के ले प्रसिद्ध है။
“केदार” शब्द का अर्थ होता है – रक्षक. भगवान शिव का एक नाम केदार भी हैइसीलिए इस धाम का नाम केदारनाथ है.
केदारनाथ की खास बातें:
चार धाम यात्रा का चौथा और अंतिम पड़ाव बद्रीनाथ है। उत्तराखंड के चमोली जिले में अलकनंदा नदी के किनारे स्थित है।
समुद्र तल से ऊंचाई: ၃,၈၉၂ မီတာ
बद्रीनाथ धाम भगवान विष्णु को समर्पित है। मान्यता है कि इस स्थान पर साक्षात भगवान विष्णु ने तपस्या की थी. एक माना जाता है।
बद्रीनाथ की खास बातें:
एक धाम यात्रा केवल एक तीर्थ यात्रा नहीं है बल्कि यह एक जीवन बदलने वाला अनुभव है। हिन्दू शास्त्रों के अनुसार इस यात्रा को करने से –
इसके अलावा यह यात्रा भारत की प्राकृतिक सुंदरता, सांस्कृतिक विरासत और आध्यात्मिंक परमपरा का भी
चार धाम यात्रा शारीरिक और मानसिक दोनों रूप से माँगलिक यात्रा है। इसके लिए पहले से तैयारी करना ज़रूरी है।
မှတ်ပုံတင်ခြင်း ज़रूरी है:
उत्तराखंड सरकार ने चार धाम यात्रा के लिए ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन अनिवार्य कर दिया है। यात्रा से पहले မှတ်ပုံတင်ခြင်းနှင့် ခရီးသွားစောင့်ရှောက်မှု.uk.gov.in पर रजिस्ट्रेशन करें
स्वास्थ्य का ध्यान रखें:
ऊंचाई।
ज़रूरी सामान:
चार धाम यात्रा (Char Dham Yatra) हिन्दू धर्म की सबसे पवित्र और आत्मिक यात्राओं में से एक है। यमुनोत्री, गंगोत्री, केदारनाथ और बद्रीनाथ.
इन चारों धामों की यात्रा एक इंसान को अंदर से बदल देती है। पापों से मुक्ति, मन को शांति और जीवन में नई दिशा။ यही इस यात्रा का असली फल है.
अगर आप इस जीवन में एक यात्रा करना चाहते हैं जो सिर्फ आँखों को नहीं बल्कि आत्मराक भी तृप् धाम यात्रा ही है။
၉၉ ပန်ဒစ် की हमेशा यही कोशिश रहती है कि आपकी हर पूजा और हर यात्रा सही विधि और पूरी श्रद्धा के साथ.
अगर यात्रा से पहले या यात्रा के दौरान किसी पूजा अनुष्ठान के लिए अनुभवी पंडित जी चाहिए तो जोड़ा 99
အကြောင်းအရာ၏ဇယား