စင်ကာပူရှိ Hanuman Chalisa Path အတွက် Pandit: ကုန်ကျစရိတ်၊ အကျိုးကျေးဇူးများနှင့် အသေးစိတ်အချက်အလက်များ
ဟနုမန်ချာလီဆာလမ်းကြောင်းသည် ရှေးခေတ်ကျမ်းစာများတွင် အစွမ်းထက်ဆုံးနှင့် အမြင့်မြတ်ဆုံးဓမ္မသီချင်းများထဲမှ တစ်ခုဖြစ်သည်။ ကိုးကွယ်သူများသည် ဤအရာကို…
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हमारे भारत देश अनेकों सम्प्रदाय के लोग निवास करते है| इन सभी धर्मों में सबसे सुन्दर धर्म हिन्दू धर्म को माना गया है| ऐसा इसलिए कहा गया है क्योंकि हिंदू धर्म में इस दुनिया में उपस्थित लगभग हर एक वी जातु | Facebook की जाती है|
हिन्दू धर्म में नवग्रहों की पूजा को बहुत शुभ माना जाता है क्योंकि इससे मनुष्य की कुंडली में हो रहे दुष्प्रभाव को दूर किया जा सकता | आज हम नवग्रहों में सबसे शक्तिशाली ग्रह व देवता နေနတ်ဘုရား के बारे में बात करेंगे|
နေနတ်ဘုရား को हिन्दू धर्म के ग्रंथों में जगत की आत्मा के रूप में जाना जाता है| माना जाता है कि सूर्य के कारण ही इस धरती पर जीवन संभव है| पौराणिक काल में आर्य समाज के लोग सूर्य देव को ही एक जगत का कर्ता – धर्ता मानते थे| सभी ऋग्वेद देवताओं में सूर्य देव का स्थान काफी उच्च माना गया है|

मान्यता है कि सूर्य देव की पूजा पूर्ण निष्ठा से करने पर पुत्र प्राप्ति के लिए भी होपैता आश्राश जैसा कि आप सभी लोग जानते ही है कि हिन्दू धर्म में सप्ताह का प्रत्येक दिन किसी न हितैपि भयान को साँ जिसमे से रविवार का दिन सूर्य देव को समर्पित किया गया|
इस दिन के स्वामी सूर्य देव ही है| रविवार के दिन सूर्य देव की पूजा करने काफी शुभ माना जाता है| सूर्यदेव केवल इस ब्रह्माण्ड के कर्ता-धर्ता ही नहीं नवग्रहों के राजा भी है| इसलिए खासकर सूर्य देव की पूजा करने से जीवन में खुशियाँ ही खुशियाँ आती है|
सूर्य देव को नवग्रहों के राजा के रूप में जाना जाता है| सभी ग्रहों में सूर्य देव ही सबसे शक्तिशाली और इस धरती के कर्ता – धर्ता है| सूर्य देव के जन्म के बारे काफी सारी अलग – अलग कथाएँ प्रचलित है| सूर्य देव को अनेकों नाम से जाना जाता है| जैसे – रवि, दिनकर, दिवाकर, भानु, आदित्य ऐसे कई नामों से जाना जाता है|
आज हम सूर्य देव के आदित्य नाम की जन्म कहानी के बारे में प्रचलित कथा बताएँगे| စာမျက်နှာများ जिनका विवाह प्रजापति दक्ष की कन्याएं दीति और अदिति के साथ हुआ| दीति ने एक असुर को जन्म दिया और अदिति ने देवता को जन्म दिया, जो हमेशा एक – दुसरे से लड़ते थे |
इनको इस प्रकार लड़ते हुएसकर माता अदिति को बहुत ही दुख होता था| इसलिए उन्होंने सूर्य भगवान की प्रार्थना की| उनकी प्रार्थना से प्रसन्न होकर सूर्य देव ने उन्हें उनके घर पुत्र के रूप में जन्म लेने का वरा အင်တာနက်
जिसकी वजह से उनके स्वास्थ्य पर काफी बुरा प्रभाव पड़ता नज़र आ रहा था| इसके कारण महर्षि कश्यप को भी काफी चिंता होने लगी थी| महर्षि कश्यप भी उन्हें समझाते है कि इस अवस्था में इतना कठोर उपवास रखने से गर्भ च मी पल रे ब पड़ेगा|
तब माता अदिति ने उन्हें बताया कि यह जो बालक है वो कोई साधारण बालक नहीं है| यह बालक स्वयं सूर्य का अंश है| इसलिए इसे कुछ भी नहीं होने वाला है| कुछ ही समय के पश्चात उनकी गर्भ से एक बड़े ही तेजस्वी बच्चे ने जन्म लिया, जो सभकी देयवतालेओ असुरों का संहार किया| माता अदिति के गर्भ से जन्म लेने के कारण इनका नाम भी आदित्य ဝါသနာပါသူ गया|
စာမျက်နှာများ नहीं होती है| यही एकमात्र ऐसा देव है जो केवल उन्हें प्रणाम करने और जल अर्घ्य करने से ही प्रहसन्न जाते कई सारी कथाओं में सूर्य देव को इस धरती को ऊर्जा प्रदान करने वाला माना गया है|

यदि आपको आपके जीवन धन, सुख, समृद्धि और सम्पदा प्राप्त करनी है| तो प्रत्येक रविवार को सूर्य देव को जल चढाते हुए सूर्यदेव के 12 नाम का जप करने से आपको इन सब चीजों की प्राप्ति हो जाएगी| सूर्यदेव के 12 नाम का जप करने से वे प्रसन्न होते है और अपने भक्तों की इच्छा को पूर्ण करते है| साथ जातक की कुंडली में भी सूर्य ग्रह की स्थिति भी शक्तिशाली होती है|
सूर्य देव के 12 नाम निम्न है| जिनका प्रत्येक रविवार को जप करना चाहिए|
| ပစ္စည်း | ပမာဏ |
| रोली | 10 ဂရမ် |
| पीला सिंदूर | 10 ဂရမ် |
| पीला अष्टगंध चंदन | 10 ဂရမ် |
| लाल चन्दन | 10 ဂရမ် |
| सफ़ेद चन्दन | 10 ဂရမ် |
| लाल सिंदूर | 10 ဂရမ် |
| हल्दी (पिसी) | 50 ဂရမ် |
| हल्दी (समूची) | 50 ဂရမ် |
| सुपाड़ी (समूची बड़ी) | 100 ဂရမ် |
| လေးညှင်းပွင့် | 10 ဂရမ် |
| ဖာလာ | 10 ဂရမ် |
| सर्वौषधि | 1 ဒေါက် |
| सप्तमृत्तिका | 1 ဒေါက် |
| सप्तधान्य | 100 ဂရမ် |
| पीली सरसों | 50 ဂရမ် |
| ဓမ္မချည်မျှင် | 21 စာမျက်နှာ |
| इत्र बड़ी | 1 शीशी |
| गरी का गोला (सूखा) | 11 စာမျက်နှာ |
| पानी वाला नारियल | 1 စာမျက်နှာ |
| जटादार सूखा नारियल | 2 စာမျက်နှာ |
| अक्षत (चावल) | 11 ကီလိုဂရမ် |
| धूपबत्ती | 2 စာမျက်နှာ |
| रुई की बत्ती (गोल / लंबी) | ၁-၁ ပါက်ကေ့တ် |
| देशी घी | 1 ကီလိုဂရမ် |
| မုန်ညင်းဆီ | 1 ကီလိုဂရမ် |
| Kapoor | 50 ဂရမ် |
| कलावा | 7 စာမျက်နှာ |
| चुनरी (लाल / पीली) | 1/1 စာမျက်နှာ |
| बताशा | 500 ဂရမ် |
| लाल रंग | 5 ဂရမ် |
| पीला रंग | 5 ဂရမ် |
| काला रंग | 5 ဂရမ် |
| नारंगी रंग | 5 ဂရမ် |
| हरा रंग | 5 ဂရမ် |
| बैंगनी रंग | 5 ဂရမ် |
| अबीर गुलाल (लाल, पीला, हरा, गुलाबी) अलग-अलग | 10-10 ဂရမ် |
| बुक्का (अभ्रक) | 10 ဂရမ် |
| गंगाजल | 1 शीशी |
| နှင်းဆီရေ | 1 शीशी |
| लाल वस्त्र | 5 လပိုင်း |
| पीला वस्त्र | 5 လပိုင်း |
| सफेद वस्त्र | 5 လပိုင်း |
| हरा वस्त्र | 2 လပိုင်း |
| काला वस्त्र | 2 လပိုင်း |
| नीला वस्त्र | 2 လပိုင်း |
| बंदनवार (शुभ, लाभ) | 2 စာမျက်နှာ |
| स्वास्तिक (स्टीकर वाला) | 5 စာမျက်နှာ |
| धागा (सफ़ेद, लाल, काला) त्रिसूक्ति के लिए | 1-1 စာမျက်နှာ |
| झंडा हनुमान जी का | 1 စာမျက်နှာ |
| चांदी का सिक्का | 2 စာမျက်နှာ |
| कुश (पवित्री) | 4 စာမျက်နှာ |
| लकड़ी की चौकी | 7 စာမျက်နှာ |
| စာမျက်နှာ | 8 စာမျက်နှာ |
| रुद्राक्ष की माला | 1 စာမျက်နှာ |
| तुलसी की माला | 1 စာမျက်နှာ |
| चन्दन की माला (सफ़ेद/लाल) | 1 စာမျက်နှာ |
| स्फटिक की माला | 1 စာမျက်နှာ |
| दोना (छोटा – बड़ा) | 1-1 စာမျက်နှာ |
| मिट्टी का कलश (बड़ा) | 11 စာမျက်နှာ |
| मिट्टी का प्याला | 21 စာမျက်နှာ |
| मिट्टी की दियाली | 21 စာမျက်နှာ |
| ब्रह्मपूर्ण पात्र (अनाज से भरा पात्र आचार्य को देने हेतु) | 1 စာမျက်နှာ |
| हवन कुण्ड | 1 စာမျက်နှာ |
| माचिस | 2 စာမျက်နှာ |
| आम की लकड़ी | 5 ကီလိုဂရမ် |
| नवग्रह समिधा | 1 စာမျက်နှာ |
| हवन सामग्री | 2 ကီလိုဂရမ် |
| မှဲ့ | 500 ဂရမ် |
| မုယောစပါး | 500 ဂရမ် |
| गुड़ | 500 ဂရမ် |
| ကမာလဂတ္တ | 100 ဂရမ် |
| गुग्गुल | 100 ဂရမ် |
| धूप लकड़ी | 100 ဂရမ် |
| सुगंध बाला | 50 ဂရမ် |
| सुगंध कोकिला | 50 ဂရမ် |
| नागरमोथा | 50 ဂရမ် |
| जटामांसी | 50 ဂရမ် |
| अगर-तगर | 100 ဂရမ် |
| သိကြားမင်းမုယော | 50 ဂရမ် |
| बेलगुदा | 100 ဂရမ် |
| सतावर | 50 ဂရမ် |
| ဂူရာ့ချ် | 50 ဂရမ် |
| जावित्री | 25 ဂရမ် |
| भोजपत्र | 1 စာမျက်နှာ |
| कस्तूरी | 1 ဒေါက် |
| केसर | 1 ဒေါက် |
| ရည်းစားစာ की लकड़ी | 4 စာမျက်နှာ |
| काला उड़द | 250 ဂရမ် |
| मूंग दाल का पापड़ | 1 စာမျက်နှာ |
| ဟန်နီ | 50 ဂရမ် |
| पंचमेवा | 200 ဂရမ် |
| पंचरत्न व पंचधातु | 1 ဒေါက် |
| धोती (पीली/लाल) | 1 စာမျက်နှာ |
| अगोंछा (पीला/लाल) | 1 စာမျက်နှာ |
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सुहाग सामग्री – साड़ी, बिंदी, सिंदूर, चूड़ी, आलता, नाक की कील, पायल, इत्यादि . |
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काली मटकी (नजर वाली हाँड़ी) |
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1 चाँदी की गाय बछड़ा समेत |
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हमने आपको सूर्य ग्रह शांति की पूजा सामग्री के बारे में आपको सारी जानकारी बता दह गईै| अब हम इस आर्टिकल के माध्यम से सूर्य देव को प्रसन्न करने व उनसे आशीर्वाद प्राप्क करने के सही विधि के बारे में जानेंगे| सूर्यदेव ही एकमात्र ऐसे देव को जिनको प्रसन्न करने के लिए अधिक पूजा – पाठ की भी हैवश्यता |
यदि आप अपने जीवन ग्रहों के प्रकोप से परेशान है तो आपको नवग्रह शांति की पूजा अवश्य करवानी चाहिए| इससे आपके जीवन में चल रही सभी प्रकार की समस्याएं दूर होंगी| नवग्रह शांति पूजा के लिए आप ऑनलाइन पंडित जी को ၉၉ ပန်ဒစ် की वेबसाइट बुक कर सकते है|
तो आइये जानते है सूर्य देव की पूजा विधि –
भगवान सूर्य देव की पूजा करने के अनेकों लाभ है| आज हम इस आर्टिकल की मदद से आपको चार ऐसे महत्वपूर्ण लाभ है, जो सूर्य देव की हैत मूजा करनले सा यह लाभ अपने जीवन में सभी व्यक्तियों को चाहिए| तो आइये जानते है, वो कौन से लाभ है जो सूर्य देव की पूजा करने से मिलते है|
जब व्यक्ति भगवान सूर्य देव की पूजा करना प्रारंभ करता है तो उसके व्यक्तित्व ब वी पूर्ण रूप ले है| हिन्दू धर्म की मान्यता के अनुसार सूर्य देव की पूजा करने और उन्हें नियमित जल चढाने हैते वे प्रसन|

इससे व्यक्ति के आत्मविश्वास में अत्यधिक वृद्धि होती है| ऐसा माना जाता है कि सूर्य ग्रह आत्मा का कारक है| इसलिए व्यक्ति की कुंडली में इसका प्रभाव उच्च होने पर व्यक्ति का आत्मविश्वास बढ़ता है|
ऐसा कहा जाता है कि सूर्य देव को नौग्रहों में पिता के रूप में जाना जाता है| इसलिए सूर्य देव की पूजा करने से पैतृक संपति में लाभ और पिता का सुख भी प्राप्त होता है| इसका लाभ पाने के लिए आपको प्रत्येक रविवार के दिन आपको सूर्य देव को जल चढ़कर इाके र्वाल लाइ। आदित्य हृदय स्त्रोत का पाठ नियमित रूप से पूर्ण विधि से करना होगा|
बहुत सारे विद्यार्थी प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए तैयारी करते है| कई लोग सरकारी नौकरी पाने की चाह रखते है तो इसके लिए आपको भगवान सूर्य देन की पहरूजा क रे उ होगा| किसी परीक्षा, नौकरी या अपने कारोबार में सफलता पाने के लिए आपको सूर्य देव की विधहोवत प|जा करनी जब आपकी कुंडली में सूर्य ग्रह की स्थिति बलवान होगी| तब ही आप किसी भी क्षेत्र में सफल हो पाएंगे|
सुबह जल्दी ब्रह्म मुहूर्त में जागने पर हमारा स्वास्थ्य अच्छा रहता है| उगते हुए सूरज को नमस्कार करना चाहिए| जब उगते हुए सूरज की किरणे हमारे शरीर पर पड़ती है| तो यह हमारे स्वास्थ्य के लिए काफी अच्छी रहती है|
जिससे व्यक्ति के जीवन में सुख – समृद्धि का संचार होता है| जिन व्यक्तियों के ऊपर सूर्य ग्रह की महादशा चल रही है| उन्हें प्रतिदिन ही सूर्योदय से पहले उठकर सूर्य देव को प्रणाम करके उनका आशीर्वाद लेना चा|
आज हमने इस आर्टिकल के माध्यम से सूर्य देव की पूजा के बारें में काफी बाते जानी है| आज हमने सूर्य देव की के फ़ायदों के बारे में भी जाना| इसके अलावा हमने आपको सूर्य देव की पूजा से जुडी काफी बातों के बारे में बताया है|
हम उम्मीद करते है कि हमारे द्वारा बताई गयी जानकारी से आपको कोई ना कोई मदद मिली होगी| इसके अलावा भी अगर आप किसी और पूजा के बारे में जानकारी लेना चाहते है। तो आप हमारी वेबसाइट ၉၉ ပန်ဒစ် पर जाकर सभी तरह की पूजा या त्योहारों के बारे में सम्पूर्ण जानकारी ले सकते है।
इसके अलावा भी अगर आपको सूर्य ग्रह शांति पूजा ဒါ नवग्रह शांति हवन या अनुष्ठान या तीनो ही चीज़े करवानी है| वो भी आपकी अपनी भाषा है| तो परेशान होने की कोई जरूरत नहीं है| अब ၉၉ ပန်ဒစ် लाया है, आपके लिए ऑनलाइन पंडित जी को बुक करने की सेवा| जो आपको किसी भी शहर में आपके लिए उचित पंडित तलाश करने का काम आसान कर देंे|
Q.सूर्य भगवान की पूजा करने से क्या होता है ?
A.इनकी कृपा आपके जीवन में सुख – समृद्धि, यश और वैभव की प्राप्ति होगी|
Q.सूर्य भगवान को जल चढाने से क्या फायदा है ?
A.सूर्य देव को जल चढाने से भक्त के जीवन के सभी दुःख व तकलीफे दूर होती है|
Q.सूर्य देव को कितनी बार जल चढ़ाना चाहिए ?
A.हिन्दू धर्म के अनुसार सूर्य देव को तीन बार जल चढाने की परंपरा है|
Q.सूर्य देव को कौनसा फूल चढ़ाना चाहिए ?
A.सूर्य देव को गुडहल का फूल अधिक प्रिय है|
အကြောင်းအရာ၏ဇယား