Govind Dev Ji Temple Jaipur: အချိန်ဇယား၊ သမိုင်း၊ ဗိသုကာနှင့် ရောက်ရှိနည်း
ဂျိုင်ပူးမြို့ရှိ Govind Dev Ji ဘုရားကျောင်း၏ အချိန်ဇယား၊ ကြွယ်ဝသောသမိုင်း၊ ဗိသုကာလက်ရာနှင့် ခရီးသွားလမ်းညွှန်ကို လေ့လာပါ။ ဤသန့်ရှင်းသော…
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ဟိန္ဒီဘာသာဖြင့် Gishneshwar ဘုရားကျောင်း घृष्णेश्वर ज्योतिर्लिंग भारत देश के महाराष्ट्र राज्य में औरंगाबाद जिले में एलोंका की गुफा စုစည်းမှု है| यह मंदिर भारत देश में प्रसिद्ध भगवान शिव के 12 ज्योतिर्लिंगों में से एक है| मान्यताओं के अनुसार यह घृष्णेश्वर मंदिर (Grishneshwar ဘုရားကျောင်း) पूर्ण रूप से भगवान शंकर को समर्पित किया गया है|
आपकी जानकारी के लिए बता दे कि भगवान शिव के इस मंदिर को यूनेस्को ने अपनी विश्व धरोहर की सूची में शामिल किया हुआ है| माना जाता है कि इस मंदिर में आकर भगवान शिव के ज्योतिर्लिंग के दर्शन करने से भक्तोतों को म्सुख की होती है|

इसके अतिरिक्त में भक्तों को भगवान शंकर का आशीर्वाद भी प्राप्त होता है| यह मंदिर काफी पुराना बताया जाता है| कहा जाता है कि इस मंदिर की खोज 13 वी शताब्दी की गयी थी| यह मंदिर एलोरा की गुफा में स्थित माना जाता है|
इस मंदिर में भगवान शंकर शिवलिंग के रूप में विराजमान है| घृष्णेश्वर मंदिर (Grishneshwar ဗိမာန်တော်) को सबसे प्रसिद्ध तीर्थ स्थालों मे से एक माना जाता है| जैसा कि आप सभी लोगों को पता है भगवान शंकर के शिवलिंग ऐसे तो बहुत सारे स्थानों पर विराजमलान हैन इस मंदिर में स्थित भगवान शिव के इस शिवलिंग के साथ ही 11 अन्य विशेष शिवलिंग का बहुत ही हड़ा म|त्व
इन सभी दिव्य ज्योतिर्लिंगों को मिलाकर भारत देश में कुल 12 ज्योतिर्लिंग उपस्थित है जो मे शम् पूर् अलग – अलग स्थानों पर उपस्थित है|
इन्ही 12 ज्योतिर्लिंगों में से एक घृष्णेश्वर मंदिर में भी स्थित है| इस मंदिर में उपस्थित ज्योतिर्लिंग को अंतिम ज्योतिर्लिंग का दर्जा दिया गया है| माना जाता है कि बाकी 11 ज्योतिर्लिंगों के सामान ही इस मंदिर में स्थित ज्योतिर्लिंग की भी बहुत ही बड़ी महिमा मानी जाती है|
घृष्णेश्वर मंदिर (Grishneshwar Temple) को भगवान शंकर के 12 ज्योतिर्लिंगों में से एक माना गया है| भगवान शिव के इस पवित्र घृष्णेश्वर मंदिर (Grishneshwar Temple) में भक्तगणों के लरिए मंदिर म्शान भगवान समय प्रातकाल: सुबह 04:00 बजे से प्रारंभ होकर रात्रि में 10:00 बजे तक रहता है|
कुछ ख़ास अवसर जैसे श्रावण के महीने जो कि अगस्त तथा सितंबर के महीने में आते है , इस मके गवान दर्शन का समय प्रातकाल: 03:00 से प्रारंभ होकर रात्रि में 11:00 बजे तक रहता है| सामान्यत: भगवान शंकर के ज्योतिर्लिंग के दर्शन करने में लगभग 2 घंटे का समय लगता है|
लेकिन श्रावण का महीने होता है तो घृष्णेश्वर मंदिर में इतगकी भीड़ होती है किंत भक्ते एक ज्रा दर्शन करने में 6 से 8 घंटे का भी समय लग जाता है| तो आईये इस लेख में आगे जानते है कि इस मंदिर का कार्यक्रम किस प्रकार होता है|
| .िन | आरती/पूजा | समय |
| सोमवार से रविवार | मंगल आरती | प्रातः 04:00 बजे |
| सोमवार से रविवार | जलहरि सघन | 08:00 बजे |
| सोमवार से रविवार | महाप्रसाद | 12:00 बजे |
| सोमवार से रविवार | जलहरि सघन | 16:00 बजे |
| सोमवार से रविवार | संध्या आरती – ग्रीष्म | 19:30 बजे |
| सोमवार से रविवार | संध्या आरती – शीत ऋतु | 17:40 बजे |
| सोमवार से रविवार | रात्रि आरती | 22:00 बजे |
ϟ आपको मंदिर में जाकर जानकारी प्राप्त कर सकते है लेकिन यदि आपको अपने घर पर ही रुद्राभिषेक की पूजा करवानी है तो ၉၉ ပန်ဒစ် आपके लिए एक बहुत ही अच्छा विकल्प है|
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भगवान शंकर के 12 ज्योतिर्लिंगों में से एक घृष्णेश्वर मंदिर (Grishneshwar Temple) औरंगाबात जिले में स्वार यदि आप भगवान शिव इस ज्योतिर्लिंग के दर्शन करने के लिए जाना चाहते है बो उसरके लाඏ आप 30 किमी की दूरी पर स्थित वेरुल नाम के एक गाँव में पहुंचना होगा, जिस स्थान पर मंदिर स्थित है|

इस मंदिर को घुश्मेश्वर के नाम से भी जाना जाता है| जैसा कि आपको पता है औरंगाबाद शहर महाराष्ट्र के सबसे जाने माने शहरों की सूची में होता या इलि घृष्णेश्वर मंदिर जाने के लिए साधन बहुत ही आसानी से हो जाते है| तो आइये जानते है उन साधनों के बारे में जो आपको घृष्णेश्वर मंदिर तक ले जाएगे –
आपकी जानकारी के लिए बता दे कि यदि आप सड़क मार्ग से घृष्णेश्वर मंदिर (Grishneshwar Temple) जाना उसके लिए राष्ट्रीय राजमार्ग संख्या 211 से जाना होगा क्योंकि यह राजमार्ग औरंगाबाद घृष्णे होकर ही निकलता है|
मुंबई शहर से यह दुरी 300 किमी၊ ရှီရာဒ္ဒီ से 170 किमी, नासिक से 175 तथा त्रयंबकेश्वर ज्योतिर्लिंग से लगभग 200 किमी की दूरी यात्रियों को तय करनी पड़ती है| अगर सीधी भाषा में कहे तो सड़क मार्ग भक्तों के लिए काफी ज्यादा कठिन हो जाता है| इसलिए अधिकतर सलाह यही दी जाती है कि आप महाराष्ट्र से अधिक दूर रहते है तो आहहका ट्रेन या चुनाव करना चाहिए|
यदि आप हवाई मार्ग के द्वारा घृष्णेश्वर मंदिर(Grishneshwar Temple) जावना चाहते है तो इस मंदिर से से अड्डा औरंगाबाद में ही है जो कि घृष्णेश्वर मंदिर से लगभग 30 किमी की दुरी पर स्थित है| आपको औरंगाबाद हवाई अड्डे से घृष्णेश्वर मंदिर के लिए बहुत सारे निजी साधन मिल जाए जिनकी सहायता से आप आसानी मंदिर तक जा सकते है|
यदि आपके शहर में हवाई अड्डे की सुविधा नहीं है तो आपके लिए सबसे बेहतरीन साधा ट्रेन का | शहरों में से एक माना जाता है| इसलिए लगVideos आप मनमाड के लिए ट्रेन ले सकते है तथा इहके श्चा औरंगाबाद के लिए दूसरी ट्रेन ले सकते है| इसके पश्चात रेलवे स्टेशन से ही आपको इस मंदिर के लिए बहुत सारे निजी साधन मिल जाएगे|
महर्षि वेदव्यास जी के द्वारा लिखे हुए शिव पुराण में इस मंदिर के बारे में अनेको कैाएँ ब | इस कथा में बताया गया है कि प्राचीन समय में देवगिरी नामक एक पर्वत पर ब्रह्मवेत्ता सुधर्म नामक्ा ए था| वह ब्राह्मण अपनी पत्नी सुदेहा के साथ रहता था| लेकिन उसके कोई संतान नहीं थी|
जिस कारण सुदेहा ने अपने पति का विवाह अपनी बहन गुश्मा के साथ करवा दिया| ब्रह्मवेत्ता तथा गुश्मा ने एक पुत्र को जन्म दिया| इसके पश्चात सुदेहा को उनके पुत्र से ईर्ष्या होने लगी| इसलिए उसने उस बच्चे को मार दिया तथा उसे छोटे छोटे टुकड़ों में काटकर उस झील में फेंक दिया, जहाँ गुश्मा भगवान थ शंकर की पूजा करती|
लेकिन इसके बारे गुश्मा को पता चल गया फिर भी उसने लगातार भगवान शिव की आराधना करना चालू रखा वह प्रतिदिन “ॐ नमः शिवाय” मंत्र का जप करती थी| उसकी इस अटूट भक्ति से प्रसन्न होकर भगवान शंकर उसके पुत्र के साथ गुश्मा के समोक्ष प्रकक हु कि किस प्रकार उसकी अपनी बहन ने उसके पुत्र की हत्या की थी|
जब गुश्मा को इस बारे में पता चला तो गुश्मा ने भगवान शंकर से विनती की कि वह उसको बहीन को उसके माफ़ कर दे| गुश्मा की इस बात से भगवान शिव उससे और भी अधिक प्रसन्न हो गए तथा गुश्मा से एक वरदान मा
तब गुश्मा ने भगवान शिव के वरदान माँगा कि भगवान शंकर हमेशा के लिए ही उस स्थान पर् रहे , प्रतिदिन भगवान शंकर की पूजा करती थी| गुश्मा के इतना कहते ही भगवान शंकर ने स्वयं को एक ज्योतिर्लिंग में बदल लिया| उस समय से झील को शिवालय के नाम से जाना जाता है|
| प्रमुख शहरों के नाम | दूरी (कि.मी) |
| औरंगाबाद से घृष्णेश्वर मंदिर की दूरी | 30 कि.मी |
| अहमदनगर से घृष्णेश्वर मंदिर की दूरी | 135 कि.मी |
| बेंगलुरु से घृष्णेश्वर मंदिर की दूरी | 109 कि.मी |
| चालीसगांव से घृष्णेश्वर मंदिर की दूरी | 51 कि.मी |
| एलोरा से घृष्णेश्वर मंदिर की दूरी | 1 कि.मी |
| चेन्नई से घृष्णेश्वर मंदिर की दूरी | 1208 कि.मी |
| शिरडी से घृष्णेश्वर मंदिर की दूरी | 77 कि.मी |
| त्र्यंबकेश्वर से घृष्णेश्वर मंदिर के बीच की दूरी | 171 कि.मी |
| शनि शिंगणापुर से घृष्णेश्वर मंदिर के बीच की दूरी | 103 कि.मी |
| हैदराबाद से घृष्णेश्वर मंदिर के बीच की दूरी | 591 कि.मी |
| नासिक से घृष्णेश्वर मंदिर के बीच की दूरी | 175 कि.मी |
| इंदौर से घृष्णेश्वर मंदिर के बीच की दूरी | 373 कि.मी |
| कोल्हापुर से घृष्णेश्वर मंदिर के बीच की दूरी | 459 कि.मी |
| मुंबई से घृष्णेश्वर मंदिर के बीच की दूरी | 355 कि.मी |
| नागपुर से घृष्णेश्वर मंदिर के बीच की दूरी | 488 कि.मी |
यह मंदिर वानर देवता भगवान ဟာနုမန် को समर्पित किया गया है| इस मंदिर में भगवान हनुमान जी की शयन की स्थिति में प्रतिमा लगी हुई है| यह मंदिर घृष्णेश्वर मंदिर (Grishneshwar Temple) से लगभग 6 किमी की दुरी पर स्थित है|

यह मंदिर महाराष्ट्र के धाधा नागनाथ नामक गाँव में स्थित है| यह मंदिर पहले ज्योतिर्लिंग के रूप में भी जाना जाता है| माना जाता है कि पांडवों के सबसे बड़े भाई युधिष्ठिर ने अपने निर्वासन के समय ही इस मंादिर नणार यह मंदिर घृष्णेश्वर मंदिर (Grishneshwar Temple) मंदिर से लगभग 227 किमी की दुरी पर स्थित है|
စာမျက်နှာများ गुफाओं के संग्रह के रूप में जानी जाती है| यह गुफाएँ धार्मिक सद्भाव का एक बहुत ही बेहतरीन उदाहरण है| एलोरा की गुफाएँ घृष्णेश्वर मंदिर (Grishneshwar ဘုရားကျောင်း) से 1 किमी की दूरी पर स्थित है|
त्र्यंबकेश्वर ज्योतिर्लिंग मंदिर नासिक के त्र्यंबक नामक शहर में स्थित है| यह मंदिर घृष्णेश्वर मंदिर (Grishneshwar Temple) से 214 किमी की दूरी पर स्थित है| माना जाता है कि इस मंदिर में जो ज्योतिर्लिंग मौजूद है| उसके तीन मुख है जिनमें से पहला मुख भगवान शिव, दूसरा भगवान विष्णु तथा तीसरा मुख भरमीमान ब्रहाम को गया है|
आज हमने इस आर्टिकल के माध्यम से घृष्णेश्वर मंदिर(Grishneshwar Temple) के बारे में काफी बात जानी | आज हमने घृष्णेश्वर मंदिर(Grishneshwar Temple) में होने वाली रुद्राभिषेक पूजा के बारे में भका जाना तथा में भका जाना लिए साधनों के बारे में भी बात की|
हम उम्मीद करते है कि हमारे द्वारा बताई गई जानकारी से आपको कोई ना कोई मदद मिली होगी| इसके अलावा भी अगर आप किसी और पूजा के बारे में जानकारी लेना चाहते है। तो आप हमारी वेबसाइट ၉၉ ပန်ဒစ် पर जाकर सभी तरह की पूजा या त्योहारों के बारे में सम्पूर्ण जानकारी ले सकते है|
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Q.घृष्णेश्वर मंदिर के पास कौन सी नदी है ?
A.इस मंदिर के पास में एलागंगा नाम की नदी है|
Q.औरंगाबाद में कौन सा शिवलिंग है
A.औरंगाबाद में घृष्णेश्वर महादेव का शिवलिंग उपस्थित है|
Q.सबसे प्रसिद्ध ज्योतिर्लिंग कौन सा है ?
A.काशी विश्वनाथ को सबसे प्रसिद्ध ज्योतिर्लिंग माना जाता है|
Q.घृष्णेश्वर मंदिर क्यों प्रसिद्ध है?
A.यह मंदिर भारत के प्रमुख हिन्दू तीर्थ स्थलों में से एक है|
အကြောင်းအရာ၏ဇယား