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Jagannath ဘုရားကျောင်း- जाने जगन्नाथ मंदिर के रहस्य तथा यात्रा की जानकारी

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Last Updated:ဇူလိုင်လ 6, 2024
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भारत देश की सबसे प्राचीन तथा पवित्र सात नगरियों में से भगवान जगन्नाथ मंदिर (Jagannath ဘုရားကျောင်း) उड़ीसा राज्य में समुद्र के किनारे पर स्थित है| पौराणिक कथाओं के अनुसार यह मंदिर भगवान विष्णु के 8 वे अवतार भगवान श्री कृष्ण को समर्पित किया गया है|

भारत देश के पूर्व में बंगाल की खाड़ी के पूर्वी छोर पर स्थित यह पुरी नगरी भुवनेश्वर से थड़ी कि उड़ीसा की राजधानी है| माना जाता है कि प्राचीन समय में इस उड़ीसा राज्य को उत्कल प्रदेश के नाम से जाना जाता था| जगन्नाथ मंदिर (Jagannath ဘုရားကျောင်း) को इस धरती का वैकुंठ भी माना जाता है|

जगन्नाथ मंदिर

इस जगन्नाथ मंदिर (ဂျန္နသ်ဘုရားကျောင်း) को श्री पुरुषोत्तम क्षेत्र, नीलांचल, नीलगिरी तथा श्री जगन्नाथ पूरी के नाम से भी जाना जाता है| माना जाता है कि इस स्थान पर लक्ष्मीपति भगवान विष्णु ने तरह – तरह कार्य व लीलाएं की थी|

စာမျက်နှာများ रूप में जगन्नाथ पूरी में अवतरित हुए थे तथा वहां निवास करने वाले सबर जाति के पूज्य देवता बन गए| सबर जनजाति के मुख्य देवता होने के कारण भगवान जगन्नाथ का रूप यहाँ पर कलीबाई देवताओं की भिदां |

वैदिक पुराण के अनुसार नीलगिरी में पुरुषोत्तम भगवान श्री हरि की पूजा की जाती है| पुरुषोत्तम हरि को इस स्थान पर भगवान श्री राम का रूप माना जाता है| स्कन्द पुराण में भगवान जगन्नाथ मंदिर (ဂျန္နသ်ဘုရားကျောင်း) का भौगोलिक वर्णन किया गया है|

इस लेख के माध्यम से हम आपको जगन्नाथ मंदिर(Jagannath Temple) के बारे सभी बातें बताएँगे| अब हम आपको ၉၉ ပန်ဒစ် के बारे में बताएँगे| ၉၉ ပန်ဒစ် एक ऐसा ऑनलाइन प्लेटफार्म है| जहाँ आप घर बैठे मुहूर्त के अनुसार अपना पंडित ऑनलाइन आसानी से बुक कर सकते हो |

जगन्नाथ मंदिर में पूजा तथा दर्शन का समय — Jagannath ဗိမာန်တော်ရှိ Darshan ကိုးကွယ်ရမည့်အချိန်များ

समय  आरती / पूजा 
प्रात:काल 05:00 बजे  द्वार पीठ और मंगल आरती
प्रात:काल 06:00 बजे  मैलामा, बेशा
प्रात:काल 06:00 बजे से 06:30 बजे तक अबकाश
प्रात:काल 06:45 बजे  ကျွန်ုပ်
प्रात:काल 07:00 बजे से 08:00 बजे तक  सहनमेला
प्रात:काल 08:00 बजे  बेशालगी 
प्रात:काल 08:00 से 08:30 बजे तक  रोशा होम सूर्य पूजा और द्वारपाल
प्रात:काल 09:00 बजे  गोपाल बल्लव पूजा
प्रात:काल 10:00 बजे  सकल धूप
प्रात:काल 10:00 से 11:00 बजे तक  मैलम और भोग मंडप 
प्रातः: 11:00 बजे से दोपहर 01:00 बजे तक  मद्यनहा
दोपहर 01:00 बजे से दोपहर 01:30 बजे तक  मध्यानहा पहुधा
सायंकाल 05:30 बजे  संध्या आरती
शाम 07:00 बजे से रात्रि 08:00 बजे तक  संध्या धूप 
रात्रि 08:00 बजे  मैलम और चंदना लगी
रात्रि 09:00 बजे  बडाश्रीनगर वेशा
रात्रि 9:30 से रात्रि 10:30 बजे तक  बडाश्रीनगर भोग 
रात्रि 12:00 बजे  passाता सेजा लागी और पाहुड़ा

 

जगन्नाथ मंदिर कैसे पहुंचे – Jagannath ဘုရားကျောင်းကို ဘယ်လိုရောက်ရမလဲ 

भगवान जगन्नाथ मंदिर(Jagannath Temple) तक जाने के कुल 3 तरीके है, जो निम्न प्रकार है –

हवाई जहाज से जगन्नाथ मंदिर कैसे पहुंचे – ဟိန္ဒီဘာသာစကားဖြင့် လေယာဉ်ဖြင့် Jagannath ဘုရားကျောင်းသို့ မည်သို့ရောက်ရှိရမည်နည်း။

जगन्नाथ मंदिर(Jagannath Temple) के सबसे नजदीकी हवाई अड्डा भुवनेश्वर हवाई अड्डा है| यह हवाई अड्डा लगभग सभी प्रमुख शहरों के हवाई अड्डों से जुड़ा हुआ है| आपको सबसे पहले हवाई जहाज की सहायता से भुवनेश्वर हवाई अड्डे पर जाना होगा|

उसके पश्चात आपको बस या ट्रेन की सहायता से पुरी जाना होगा| पुरी रेलवे स्टेशन से भगवान जगन्नाथ मंदिर(Jagannath Temple) की दूरी लगभग 2 किलोमीटर है| रेलवे स्टेशन से जगन्नाथ मंदिर(Jagannath Temple) तक जाने के लिए आपको बहुत ही आसानी से ऑटसाकश रिक्श जाएगी| 

ट्रेन से जगन्नाथ मंदिर कैसे पहुंचे – ဟိန္ဒီဘာသာဖြင့် ရထားဖြင့် Jagannath ဘုရားကျောင်းသို့ မည်သို့ရောက်ရှိရမည်နည်း။ 

भगवान विष्णु के सुप्रसिद्ध जगन्नाथ मंदिर(Jagannath Temple) के सबसे नजदीकी रेलवे स्टेशन पुरै रेलवे न्ट जगन्नाथ मंदिर(Jagannath Temple) की दूरी रेलवे स्टेशन से 2 किमी है| यह रेलवे स्टेशन सभी शहरों से जुड़ा हुआ है| Facebook भुवनेश्वर रेलवे स्टेशन पहुँचने के पश्चात आप पुरी के लिए बस या दूसरी ट्रेन भी ले सतके |

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बस से जगन्नाथ मंदिर कैसे पहुंचे – ဟိန္ဒီလိုဘတ်စ်ကားဖြင့် Jagannath ဘုရားကျောင်းသို့ရောက်ရှိနည်း 

पुरी तक जाने के लिए बस उड़ीसा के आस – पास के राज्यों से डायरेक्ट ही बसे मिल जाएगसे, ले किन जगन्नाथ पुरी मंदिर की दूरी ज्यादा अधिक है तो हम आपको यही सलाह देंगे कि ऐसी परिस्थरिता म् आपको आपको करने से बचना चाहिए| इसके अपेक्षा आपको ट्रेन या हवाई जहाज से सफ़र करना चाहिए, जो कि आपके लिए कारफी आरामदाा | 

जगन्नाथ मंदिर का पौराणिक इतिहास – ဟိန္ဒီဘာသာဖြင့် Jagannath ဘုရားကျောင်း၏ဒဏ္ဍာရီသမိုင်း

इस मंदिर का प्रमाण सबसे पहले महाभारत के वनपर्व में बताया गया है| इस मंदिर के संदर्भ में एक बहुत ही पौराणिक कथा चली आ रही है जो इस मंदिर के इतिहैास को भी दर्छ एक समय की बात है राजा इंद्रद्युम्न मालवा का राजा था| जिनके पिता का नाम भारत तथा माता का नाम सुमति था|

राजा इंद्रद्युम्न को सपने के माध्यम से भगवान जगन्नाथ के दर्शन हुए थे| သူသည် बारे में विस्तार से बताया गया है| मान्यताओं के अनुसार राजा इंद्रद्युम्न ने कई सारे विशाल यज्ञ किये तथा एक सरोवर का निर् मा|

जगन्नाथ मंदिर

माना जाता है कि एक दिन राजा इंद्रद्युम्न के सपने में भगवान जगन्नाथ नवे दर्शन दिए हकता रा्ला सेवा स्थित एक गुफा में उनकी मूर्ति स्थित है| उसे नीलमाधव कहा जाता है| भगवान जगन्नाथ ने राजा को एक मंदिर बनवाकर उसमें उनकी मूर्ति को स्थापित करने के लिए कहा| अगले दिन तुरंत ही राजा ने अपने लोगों को नीलांचल पर्वत पर मूर्ति की खोज करने के लिए भेज दिया| राजा के द्वारा भेजे गए लोगों में एक ब्राह्मण भी था| जिसका नाम विद्यापति था| 

उस ब्राह्मण को यह बात पता थी कि सबर जाति के लोग नीलमाधव की पूजा मकरते थे था उस मूराध को फें रखा हुआ है| विद्यापति ने चालाकी से सबर कबीले के मुखिया की पुत्री से विवाह कर लिया ता उस गुफा में जाकर मूर् इसके पश्चात उसने मूर्ति राजा को दे दी| मूर्ति के चोरी हो जाने की वजह से कबीले के लोग बहुत ही दुखी हो गए| अपने भक्तों को दुखी कर भगवान भी गुफा में वापस लौट गए| 

आधी बनी मूर्ति की कहानी – 

इसके पश्चात भगवान जगन्नाथ ने राजा से कहा कि समुन्द्र में तैरती हुई एक बड़ी लकड़ी मकाकर उन निर्माण किया जाए| राजा ने अपने लोगों को लकड़ी लाने के लिए भेजा लेकिन कोई ही व्यक्ति उसे उठा नहीं पाया| तब राजा इंद्रदयूम्न ने सबर काबिले के मुखिया की सहायता ली| काबिले का मुखिया अकेला ही उस बड़ी लकड़ी को उठा कर ले आया|

इसके बाद भगवान विश्वकर्मा उससे मूर्ति का निर्माण करने के लिए एक वृद्ध व्यक्ति मे के | विश्वकर्मा जी ने मूर्ति को बनाने के लिए 21 दिन का समय माँगा| तथा उनसे कहा कि 21 दिन तक उन्हें मूर्ति बनाते हुए कोई नहीं केगा|

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किन्तु राजा के द्वारा इस शर्त का उल्लंघन करने पर भगवान विश्वकर्मा ने उन मूर्यायोां को आआश राजा इंद्रदयूम्न ने इसे भगवान जगन्नाथ की इच्छा मानकर उन आधी बनी हुई मूर्तिरपात को में दिर दिया|

उस समय से लेकर अभी तक भगवान विश्वकर्मा के द्वारा बनाई गयी भगवान नीलमाधव तथा उनके भ दोनों मूर्तियाँ इस प्रकार से ही विद्यमान है| जगन्नाथ मंदिर (Jagannath Temple) आस – पास लगभग 30 छोटे – बड़े मंदिर स्थित है| 

जगन्नाथ मंदिर पुरी मनाए जाने वाले त्यौहार – Jagannath Temple Puri တွင် ကျင်းပသော ပွဲတော်များ

स्नान यात्रा या देव स्नान पूर्णिमा – Snan Yatra သို့မဟုတ် Dev Snan Purnima

देव स्नान का यह महोत्सव जगन्नाथ पुरी के सुप्रसिद्ध महोत्सवों में से ही एक है| इस दिन को भगवान जगन्नाथ के जन्मदिन के रूप में भी मनाया जाता है| यह त्यौहार ज्येष्ठ महीने की पूर्णिमा तिथि को मनाया जाता है| माना जाता है कि इस दिन जगन्नाथ भगवान को मंदिर के परिसर में स्थित शीतला माता मंदिर के पास स्थित 108 कुए घड़ों से स्नान करवाया जाता है|

भगवान को स्नान करवाने के पश्चात उन्हें हती वेशा धारण करवाई जाती है| भगवान को स्नान करवाने के पश्चात भगवान श्री कृष्ण के ही रूप भगवान जगन्नाथ तथा भरक्काता भ में किया अंतर नहीं होता है| जगन्नाथ मंदिर (Jagannath ဘုရားကျောင်း) में प्रतिदिन सभी भक्तों के लिए भोजन बनाया जाता है|

हेरा पंचमी – Hera Panchami 

हेरा पंचमी एक बहुत ही प्रसिद्ध अनुष्ठान माना जाता है जो कि भगवान जगन्नाथ के गुंडहैका जा ंदिर में पुरी की प्रसिद्ध रथ यात्रा तथा कार महोत्सव के पश्चात भगवान 9 दिनों तक गुंडिचा मंदिर में निवास करते है| उनके यहां निवास करने दौरान ही हेरा पंचमी का अनुष्ठान किया जाता है| 

बहुदा यात्रा – Bahuda Yatra 

यह यात्रा तीनों रथों की जगन्नाथ मंदिर (Jagannath Temple) की वापसी यात्रा मानी जाती है| गुंडिचा मंदिर में एक सप्ताह रहने के पश्चात 10 वे दिन भगवान अपनी बहुदा यात्रा शुरू करते है| वापसी यात्रा में वही समय प्रणाली काम में ली जाती है जो कि यारा के शुरू होने के समय ली गई हो | 

रथ यात्रा या श्री गुंडिचा यात्रा – Rath Yatra သို့မဟုတ် Shri Gundicha Yatra 

प्रत्येक वर्ष मानसून के समय में भगवान ဂျာနယ် अपने भाई बलभद्र तथा अपनी बहन सुभद्रा के साथ अपने मंदिर से ग्रामीण क्षेत्रों से होते हुए, अपने गीचे के महल तक भव्य रोथंके यात्रा क जाते है| हिन्दू धर्म की मान्यतायं ने भारत देश के सबसे बड़े व प्रसिद्ध धार्मिक त्यौहार को जन्म द| जिसे वर्तमान में रथ यात्रा (Rath Yatra) या रथ महोत्सव के नाम से भी जाना जाता है| 

ပန်ချား 

माना जाता है कि इस दिन लोग भगवान के विभिन्न अवतारों की प्रतीक्षा करते है| भगवान को सभी भक्तों के द्वारा अलग – अलग वेशा जैसे दलकिया वेशा, लक्ष्मी नृथविंह वेराता, त्रिविका के समय में भगवान को राजराजेश्वर वेशा में सजाया जाता है|

चंदना यात्रा – Chandana Yatra

यह चन्दन यात्रा उत्सव प्रत्येक वर्ष होने वाली रथ यात्रा के रथों के निर्माण की शुताका जा का 

जगन्नाथ मंदिर पुरी में लोकप्रिय पर्यटक स्थल – Jagannath ဘုရားကျောင်း Puri ရှိ နာမည်ကြီး ခရီးသွားနေရာများ

पुरी बीच – Puri ကမ်းခြေ 

आपकी जानकारी के लिए बता दे कि यदि आप पुरी जाते है तो आप वहा पर साफ़ सुथरे तथा पांच का से नामान का आनंद ले सकते है| हम बात कर रहे है पुरी बीच के बारे में, जो कि भगवान जगन्नाथ मंदिर (Jagannath ဘုရားကျောင်း) से लगभग 2.5 किमी की दूरी पर ही स्थित है|

इस बीच को भारत के सबसे साफ़ तथा सुन्दर तटों की श्रेणी में भी शामिल किया गया है| इस बीच पर भारत देश के अलावा विदेशों से भी कई सारे पर्यटक इस समुन्द्र तट के सुन्दर दृश्यों को फोटो। है|

जगन्नाथ मंदिर

जगन्नाथ मंदिर – Jagannath ဘုရားကျောင်း

पुरी में स्थित भगवान जगन्नाथ मंदिर (Jagannath Temple) सम्पूर्ण भारत देश में सभी लोगों के द्वारा भली पर भातं उड़ीसा राज्य का पुरी शहर इस जगन्नाथ मंदिर (Jagannath Temple) के कारण ही जाना जाता है|

पौराणिक कथाओं के अनुसार यह जगन्नाथ मंदिर (Jagannath Temple) भगवान श्री कृष्ण को समर्पित किया| इस मंदिर में भगवान श्री कृष्ण के साथ उनके भाई बलभद्र तथा बहन सुभद्रा के भी हिग्रिये स्थारि है। इन तीनों विग्रह को एक बहुत ही खास प्रकार की लकड़ी से बनाया जाता है| जिसे प्रत्येक 12 साल में बदल दिया जाता है| 

नरेंद्र पोखरी – Narendra Pokhari 

यह एक बहुत ही विशाल था पवित्र तालाब है जो कि पुरी में स्थित जगन्नाथ मंदिर (Jagannath ဘုရားကျောင်း) के करीब 1 किमी दूर दंडी माला साही क्षेत्र में बना हुआ है| इस नरेंद्र पोखरी को नरेंद्र टैंक के नाम से भी जाना जाता है|

इस पोखरी को उड़ीसा राज्य का सबसे बड़ा टैंक भी माना जाता है| इसका निर्माण 15 वी शताब्दी में राजा नरेंद्र देव राय जी के द्वारा करवाया गया था| इस तालाब की गहराई ज़मीन 10 फीट तक मानी जाती है| आपकी जानकारी के लिए बता दे कि इस तालाब के बिल्कुल मध्य में एक मंदिर भी स्थित है| 

लोकनाथ मंदिर – Loknath ဘုရားကျောင်း 

यह मंदिर पुरी शहर का सबसे पुराना मंदिर है| इसका निर्माण 11 वी शताब्दी में किया गया था| यह मंदिर भगवान शिव को समर्पित किया गया है| စာမျက်နှာများ श्री राम के द्वारा किया गया है|

यह मंदिर 4 खण्डों में विभाजित किया गया है| इस मंदिर का निर्माण सामान्य पत्थरों के द्वारा तथा ज़मीन से लगभग 30 फीट की ऊंचाई पर बना है| इस मंदिर की दीवारों पर हिन्दू धर्म से संबंधित देवी – देवताओं के चित्र बने हुए है| 

पुरी जगन्नाथ मंदिर के कुछ रहस्य – Puri Jagannath ဘုရားကျောင်း၏ စိတ်ဝင်စားဖွယ်အချက်အချို့

  1. माना जाता है कि भगवान जगन्नाथ मंदिर (ဂျန္နသ်ဘုရားကျောင်း) के ऊपर जो लाल रंग का ध्वज है, वह सदा ही हवा की विपरीत दिशा में लहराता है| ऐसा क्यों होता है इसके बारे में अभी तक वैज्ञानिकों को किसी भी प्रकार का प्रमाण नहीं मिला है|
  2. जगन्नाथ मंदिर (ဂျန္နသ်ဘုရားကျောင်း) दुनिया का सबसे ऊंचा तथा भव्य मंदिर माना जाता है| यह मंदिर 4 लाख वर्गफुट के क्षेत्र में फैला हुआ है तथा इसकी ऊंचाई 214 फुट है| यहाँ की एक खास बात यह है कि इस मंदिर के गुम्बद की छाया कभी नहीं बनती है| इस मंदिर को और देखें इस मंदिर का निर्माण 7वी सदी हुआ था|
  3. इस मंदिर के गुम्बद के ऊपर से आज तक एक भी पक्षी को उड़ते हुए नहींवा गया है| हालाँकि इस मंदिर के ऊपर से हवाई जहाज का उड़ना मना है| သူသည် आपको कोई पक्षी बैठा या उड़ता हुआ नहीं दिखाई देगा|
  4. माना जाता है कि इस मंदिर का रसोई घर दुनिया का सबसे बड़ा रसोई घर माना जाता है| इस मंदिर में भक्तों के लिए प्रसाद 300 रसोइए तथा 500 सहयोगियों के साथ मिलकर बनाया जाता है | इस मंदिर में जितना भी प्रसाद बनाया जाता है| वह कभी भी व्यर्थ नहीं जाता है|
  5. यह मंदिर समुन्द्र तट के काफी नजदीक है| जगन्नाथ मंदिर (Jagannath Temple) की यह मान्यता है कि जैसे ही आप इस मंदिर अन्दर प्रवेश करेंगे तो आपको पास में पका न मुद आवाज़ बिल्कुल भी नहीं आएगी| जैसे ही आप पुनः मंदिर से बाहर निकलेंगे तो आपको समुद्र की आवाज़ आने लगेगी|  

နိဂုံး - နိဂုံး

आज हमने इस लेख के माध्यम से हमने जगन्नाथ मंदिर (Jagannath ဘုရားကျောင်း) से संबंधित कई सारी बातें जानी| जैसे कि मंदिर तक कैसे पहुंचा जा सकता है| इसके अलावा हमने जगन्नाथ मंदिर (Jagannath Temple) के आस – पास के पर्यटक स्थल के बारे में आपको जानकारी दी|

हम उम्मीद करते है कि हमारे द्वारा दी गई जानकारी आपको जरूर पसंद आई होगी| इसके अलावा यदि आप किसी अन्य मंदिर जैसे तिरुपति बालाजी मंदिर (Tirupati Balaji ဘုရားကျောင်း) ဒါ श्री कालहस्ती मंदिर (Srikalahasti ဘုရားကျောင်း) के बारे में जानकारी प्राप्त करना चाहते है तो आप हमारी वेबसाइट ၉၉ ပန်ဒစ် Facebook विजिट कर सकते है| 

अगर आप हिन्दू धर्म से सम्बंधित किसी पूजा जैसे – वाहन पूजा (မော်တော်ယာဉ် Puja), भूमि पूजा (Bhoomi Puja) इत्यादि हेतु पंडित जी की तलाश कर रहे है तो आपको बता दे की ၉၉ ပန်ဒစ် စာမျက်နှာများ कर सकते हो |

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न – FAQs

Q.जगन्नाथ मंदिर में कौन से भगवान है?

A.श्री कृष्ण ही भगवान जगन्नाथ के रूप में विराजमान हैं. यहां उनके साथ उनके ज्येष्ठ भ्राता बलराम और बहन सुभद्रा भी हैं|

Q.जगन्नाथ मंदिर का चमत्कार क्या है?

A.माना जाता है कि भगवान जगन्नाथ मंदिर के ऊपर जो लाल रंग का ध्वज है, वह सदा ही हवा हैम विपारीत द

Q.जगन्नाथ मंदिर की छाया क्यों नहीं पड़ती है?

A.मुख्य गुंबद की छाया हमेशा इमारत पर ही पड़ती है, इसलिए किसी भी समय अदृश्य हो जाती है|

Q.भगवान जगन्नाथ किसके अवतार है?

A.कथाओं के अनुसार भगवान जगन्नाथ को भगवान श्री कृष्ण का अवतार माना जाता है|

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