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Karwa Chauth 2026- यहाँ जाने करवा चौथ की शुभ तिथि, सामग्री व विधि

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Khushi Sharma ကရေးသား: Khushi Sharma
Last Updated:အောက်တိုဘာလ 9, 2025
ကာဝါချောက် ၂၀၂၅
ဤဆောင်းပါးကို Ai ဖြင့် အကျဉ်းချုပ်ဖော်ပြပါ။ GPT ချတ် မငြိမ်မသက်စိုးရိမ်ကြောင့်ကြ Gemini Claude Grok

Karwa Chauth 2026 ရက်စွဲ။ हिन्दू धर्म मे करवा चौथ 2026 के व्रत को बहुत ही शुभ माना जाता है।

सुहागन स्त्रिया अपने पति की लंबी आयु आयु और अच्छे स्वास्थ्य के लिए करवा चौथ का उरपवकता उरपवतकता उरपवतकता उरपवतकता उरपवतकता उरपवाती है। – पत्नी के रिश्ते को मजबूत करने वाला त्यौहार है।

आजकल कुंवारी कन्याए भी करवा चौथ का व्रत करती है। वो अपने लिए अच्छा वर पाने के लिए करवा चौथ का व्रत करती है।

करवा चौथ 2026

यह करवा चौथ का त्यौहार केवल राजस्थान में ही नहीं बल्कि उत्तर प्रदेश, पंजाब और गुजरायात में भी जाता है။

हिन्दू धर्म के पंचांग के अनुसार करवा चौथ का व्रत कार्तिक मास के कृष्थ पक्ष में चात्रोदय किया जाता है။ करवा चौथ का यह पावन व्रत स्त्रियों में काफी ज्यादा प्रचलित है।

करवा चौथ के व्रत वाले दिन सभी सुहागन स्त्रियां अपने अटल सुहाग, अपने पति की लम्बी आयछे अल्छ। उपवास रखती है और भगवान शिव व माता पार्वती से प्रार्थना करती है।

करवा चौथ का व्रत सभी हिंदू धर्म की महिलाएं पूर्ण श्रद्धा व सम्पूथर्ण विधति विधान इस दिन महिलाएं कठोर व्रत का पालन करती है।

जिसमे वह पानी भी चंद्रमा को पने के पश्चात ही ग्रहण करत है इसके अलावा सभी महिलाए।

यदि आपको करवा चौथ की पूजा करवाने के लिए किसी अनुभवी पंडित जी की तलाश है। तो आप हमारी वेबसाइट ၉၉ ပန်ဒစ် की सहायता से आसानी से पंडित जी के संपर्क कर सकते है।

करवा चौथ 2026 शुभ मुहूर्त व तिथि

ဘာပဲဖြစ်ဖြစ် - တိသီ

इस वर्ष करवा चौथ का व्रत अक्टूबर के महीने में पड़ेगा. करवा चौथ 2026 का व्रत 29 अक्टूबर 2026 को, गुरुवार के दिन रखा जाएगा.

हिन्दू पंचांग के अनुसार कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि 28 अक्टूबर 2026 बुधवार को बजे से प्रारम्भ होगी, जो कि 29 अक्टूबर 2026 को रात्रि के समय 09:14 बजे तक समाप्त हो जाएगी.

मुहूर्त – Muhurat

हिन्दू धर्म के पंचांग के अनुसार करवा चौथ का व्रत कार्तिक मास के कृष्थ पक्ष में चात्रोदय किया जाता है။

अब जानते है कि करवा चौथ 2026 का शुभ मुहूर्त क्या रहने वाला है तथा चंद्रोदय का समय क्या होगा –

  • कार्तिक मास कृष्ण पक्ष चतुर्थी तिथि प्रारम्भ – बुधवार 28 अक्टूबर 2026, रात्रि 10:48 बजे
  • कार्तिक मास कृष्ण पक्ष चतुर्थी तिथि समाप्त – गुरुवार 29 अक्टूबर 2026, रात्रि 09:14 बजे
  • करवा चौथ व्रत का समय – 29 अक्टूबर, सुबह 06:31 बजे से रात 08:11 बजे तक
  • करवा चौथ पूजा का समय – 29 अक्टूबर, शाम 05:38 बजे से शाम 06:55 बजे तक
  • करवा चौथ वाले दिन चंद्रोदय का समय — 29 अक्टूबर, रात्रि 08:11 बजे पर

करवा चौथ की पूजन सामग्री – Karwa Chauth Pujan Samagri

  • कुमकुम
  • ဟန်နီ
  • အမွှေးတိုင်များ
  • စာမျက်နှာ
  • သကြား
  • နို့စိမ်း
  • .ही
  • शुद्ध घी
  • मिठाई
  • गंगाजल
  • ချွန်း
  • Vermilion
  • Mehndi
  • अक्षत (चावल)
  • महावर
  • कंघा
  • bिंदी
  • चुनरी
  • चूड़ी
  • बिछुआ
  • मिट्टी का ढक्कन
  • दीपक
  • Kapoor
  • रुई
  • ဂျုံ
  • शक्कर का बूरा
  • पानी का लोटा
  • နနွင်း
  • गौरी बनाने के लिए पीली मिट्टी
  • छलनी
  • लकड़ी का आसन
  • आठ पूरियों की अठावरी
  • दक्षिणा के लिए कुछ पैसे
  • हलवा

करवा चौथ की पूजा विधि – Karwa Chauth Puja Vidhi

इस करवा चौथ व्रत के दिन सुबह जल्दी उठकर मान्यता के अनुसार स्नान करें. इसके बाद दीपक जलाकर मंदिर की सफाई करें.

Facebook भोजन करें

शाम को स्नान करने के बाद जिस स्थान पर आप करवा चौथ की पूजा करेंगे, उस स्थान पर चावं पीककार गेडां की एक छवि बनाएं။

इसके बाद आठ पूरियों बनाकर इसके साथ खीर या हलवा बनाकर ठोस भोजन तैयार करें| इस शुभ दिन पर शिव परिवार की पूजा की जाती है।

ऐसे में पीली मिट्टी से गौरी जी की मूर्ति बनाएं और उसी समय गणेश जी को उनकी गोद में बिठाश माँ गौरी को चौकी पर स्थापित करें और उन्हें लाल रंग की चुनरी पहने हुए सामान भेंट करें.

गौरी मां के सामने एक पानी से भरा जग रखें ताकि चंद्रमा को अर्घ्य दिया जा सके. यह व्रत सूर्य के ढलने और चंद्रमा को देखने के बाद ही खोला जाना चाहिए. बीच में पानी का सेवन प्रतिबंधित है။ शाम को प्रत्येक देवता को मिट्टी की वेदी पर स्थापित करें.

10 से 13 करवे (विशेष करवा चौथ मिट्टी के बर्तन)अंदर रखें. पूजा सामग्री को थाली में रखें| जिसमें धूप, अगरबत्ती, चंदन, रोली, सिंदूर और अन्य सामान शामिल हों.

दीपक में इतना ही घी होना चाहिए कि वह नियत अवधि तक लगातार जल सके. चंद्रमा के उगने से एक घंटे पहले पूजा शुरू होनी चाहिए. करवा चौथ व्रत पूजा के दौरान करवा चौथ कथा का पाठ करें.

चंद्र दर्शन करते समय छलनी का उपयोग करने और अर्घ्य के साथ चंद्रमा की पूजा करने हैती सला दी छलनी में अपने पति का चेहरामने के बाद ही अपना उपवास खोलना होता है।

करवा चौथ में करवा क्या होता है ? - Karwa Chauth Puja ရှိ Karwa ဆိုတာဘာလဲ

इस करवा चौथ के व्रत पूजन में करवा यानी मिट्टी के बर्तन का उपयोग करना बहुत ही शुभ माना जाता. इस करवे की बनावट हमारे देश को इंगित करती है।

जैसा कि सभी लोगों द्वारा ज्ञात है। मनुष्य शरीर पंचतत्व यानी पांच तत्वों से मिलकर बना होता है। आपकी जानकारी के लिए बता दे कि पंच तत्व का प्रतिनिधित्व मिट्टी के द्वारा ही किया जाता है।

करवा चौथ 2026

इसके अलावा करवे को देवी के प्रतिनिधित्व के रूप में भी जाना जाता है। जिन लोगों के पास मिट्टी का करवा नहीं होता है वे इसके विकल्प के रूप में तांबे या स्टील के कयलश का

पूजा के दौरान,दो वक्र बनाए जाते हैं. जो भी महिलाएं इस करवा चौथ के व्रत का पालन करती है। उन्हें देवी मां का रूप माना जाता है।

करवे की पूजा कैसे की जाती है

आपकी जानकारी के लिए बता दें कि पूजा करते समय दो करवा को पूजा स्थल पर छोड़ छोड़ देना चाहरिए थारवा चा ဟိန်။

एक करवा वह जो उस महिला की सासू माँ द्वारा प्रदान किया जाता है जिससे महिला चंद्रैरमा को अर्घद जबकि दूसरी यह है कि करवा बदलते समय महिला अपनी सास से चंद्रमा को अर्घ्य चढ़ाती है।

करवे को अच्छी तरह से साफ करने के बाद, आटे और हल्दी के मिश्रण से करवा में सुरकक्षा धतागा बांण बनाया जाता है။

करवे में क्या रखा होता है

गौरी जी को बनाने में मिट्टी का उपयोग किया जाता है, जिसे स्थापित करने से पहले जमीन पर हैलाय र गजि

इसके अलावा गणेश जी को बनाकर उनकी गोद में भी बिठाया जाता है। गौरी जी के लिए सुहाग अलंकरण में चुनरी, बिंदी आदि वस्तुएं अवश्य शामिल होनी चािए.

आपको बता दें कि कुछ लोग करवा के ढक्कन में चीनी और गेहूं डालते हैं. सारी जानकारी अनुभवी पंडित द्वारा बताई जाती है और वही पूजा भी कराते हैं.

करवा चौथ की पूजा के लिए ऑनलाइन पंडित जी को बुक करने के लिए ၉၉ ပန်ဒစ် एक बहुत ही अच्छी वेबसाइट है।

देश के कुछ क्षेत्रों में, एक करवे को पानी से भरा जाता है, दूसरे को दूध से, और ब फिर उसकके अंदर का सिक्का रखा जाता है။

उसके बाद गौरी-गणेश की पूजा की जाती है။ चंद्रमा को अर्घ्य देने के बाद महिलाएं अपने पति की लंबी उम्र की कामना करती हैं.

महिलाएं करवा के समापन पर जल पीकर व्रत खोलती हैं. शादीशुदा महिलाएं इस तरह से अपने उपवास को सम्पन्न करती है।

करवा चौथ व्रत की कथा – Karwa Chauth Story

इस करवा चौथ के व्रत के सम्बन्ध में अनेकों कथाएँ प्रचलित थी, लेकिन आज हम जिन कथाओं के वाले है जो सबसे ज्यादा प्रचलित है।

प्रथम करवा चौथ कथा – ပထမဆုံး Karwa Chauth Story

करवा चौथ की प्रथम कथा इस प्रकार है कि करवा अपने पति के साथ तुंगभद्रा नदी के पास रहती थी ។ एक दिन.

अपनी मृत्यु को पास में पकर करवा का पति करवा को पुकारने लगा. करवा दौडकर नदी के पास आई और पति मौत के मुंह में ले जाते मगरमच्छ को और देखें मगरमच्छ को एक पेड़ से बांध दिया

इसके पश्चात करवा ने मगरमच्छ को कच्चे धागे से ऐसे बांधा कि वह अपनी जगह से बिल्पकुल ही ना करवा के पति और मगरमच्छ दोनो के प्राण संकट में फंसे थे.

करवा ने यमराज को पुकारा और अपने पति को जीवनदान देने और मगरमच्छ को मृत्युदंड देने के लिए रीाज से न्राज से

करवा की इस बात पर यमराज ने उससे कहा – मै ऐसा नही कर सकता क्योंकि अभी मगरमच्छ की आयु अभी छ।

और तुम्हारे पति की आयु पूरी हो चुकी है। क्रोधित होकर करवा ने यमराज से कहा अगर आपने ऐसा नहीं किया तो मै आपको श्राप दे दूंगी.

करवा के शाप से भयभीत होकर यमराज ने तुरंत मगरमच्छ को ဟုတ်တယ်နော်။ भेज दिया और करवा ने पति को जीवनदान दिया.

इसलिए करवा चौथ के व्रत में सुहागन महिलाएं करवा माता से प्रार्थना करती है कि हे करतिन माेता जैन मौत के मुख से बाहर निकाल लिया वैसे ही मेरे सुहाग की भी रक्षा करना.

द्वितीय करवा चौथ कथा – Second Karwa Chauth Story

करवा चौथ की दूसरी कथा में बताया गया है कि इन्द्रप्रस्थपुर नाम के एक शहर में ब्राह्मण निवास जिसके सात पुत्र और एक पुत्री थी.

उसकी पुत्री का नाम वीरवती था सात भाइयों में एकलौती बहन होने के कारण सातों भाई उससे बहुत अधिक प्रेम करते थे जैसे – जैसे सभी बड़े हुए सभी की शादी की उम्र होने लगी

कुछ समय बाद ही वीरावती की भी शादी उसके पिता से एक ब्राह्मण लड़के से कर दी शादी होने के कुछ समय बाद वीरावती अपने मायके आई हुई थी. तभी करवा चौथ का व्रत आया

वीरावती अपने माता – पिता और अपने भाइयो के घर पर ही थी. उसने पहली बार पति की लंबी आयु के लिए करवा चौथ का व्रत रखा लेकिन वह भूख प्यास बराश् तन मूर्छित होकर जमीन पर गिर पडी။

बहन को मूर्छिते उसके भाइयो ने छलनी में एक दीपक रखकर उसे पेड़ की डाल पर बवाक दियरा और बे हश है तो उसे बताया कि चांद उग गया है, छत पर जाकर चाँद के दर्शन कर ले वीरावती चौर चाकाका की पजा भोजन करने बैठ गई और भोजन करने लग गई उसने पहला निवाला लिया ही था

पहले निवाले में ही बाल आ गया और जैसे ही उसने दूसरा निवाला लिया दूसरे निवाले में छरींज आ गई निवाला लेने लगी उसके ससुराल से बुलावा आ गया. उसके पति की मौत हो गई है।

उसकी वीरावती व्याकुल होकर रोने लगी उसकी हालतेकर इंद्र देवता और उवनकी पत्नी देवी इंद्राणी उद पहुंची और उसे उसकी भूल का अहसास दिलाया साथ ही करवा चौथ के व्रत के साथ – थाथ पूरे सीकाल में आने व्रत करने की सलाह दी

करवा चौथ सरगी – Karwa Chauth Sargi

सरगी पारंपरिक रूप से सास द्वारा अपनी बहुओं को खुशहाल और समृद्ध विवाह के लिए आशीर्वाद किया जाने वाला एक भोर से पहले का भोजन है।

यह प्रथा उत्तर भारत में महिलाओं के बीच प्रचलित है, खासकर उत्तर प्रबदेश, राजस्थान, हि औरमाचल पाज्रबदेश हरियाणा राज्यों में

करवा चौथ 2026

इसमें महिलाएं सूर्योदय से पहले उठती हैं, आमतौर पर सुबह 4-5 बजे, and बिना भोजन खा पानी के को पनुदा के के लिए कई तरह के नमकीन और मीठे व्यंजनों से भरी थाली खाती हैं.

इस रस्म के अनुसार, सास अपनी बहू को मिठाई, नमकीन, सूखे मेवे, नारियल, मठरी और साड़ी और गहनरे जैसे ई थाली भेंट करती है။

यह उपवास परंपरा न केवल सहनशक्ति ओर भक्ति की परीक्षा हे बल्कि एक स्वस्थ जीवन शैलैी अपभनाने का

अपने व्रत के अनुभव को वास्तव में पौष्टिक बनाने के लिए၊ यह विशेष दिन केवल अनुष्ठानों के बारे में नहीं है, बल्कि एक संतुलित जीवन शैली को अहैमाने के बारे में

पूरे दिन हाइड्रेटेड रहने के लिए सरगी के दौरान खूब पानी पीना याद समवें, अगर आपको कोई अयतर्नि है, तो स्वास्थ्युभाल पेशेवर से परामर्श लें.

करवा चौथ पूजन के दौरान क्या करें और क्या न करें

करवा चौथ पूजन के उत्साह का स्तर बेजोड़ है और महिलाएं इस दिन को चिह्नित करने के लिए बड़ी तै त्योहार.

अगर आप पहली बार करवा चौथ रख रहे हैं या आप व्रत को अधिक स्वस्थ तरीके से रखने के संाश कुए कर रहे हैं जो आपको तनाव नहीं देंगे, तो यहां मदद है।

ဂြိုလ် –

  • सरगी, जो एक सास अपनी बहू को देती है, न केवल पारंपरिक है, बल्कि इसमें वह भोजन भी होता है जिसे आप पहले खाते हैं. चूंकि आपको केवल एक बार भोजन करने की अनुमति नहीं है, ताकि सिरदर्द, चक्कर आने आने आने खे बचा जा सके, महत्वपूर्ण है။
  • सुबह के समय प्रोटीन शामिल कार्बोहाइड्रेट से भरपूर खाद्य पदार्थों को शामिल करने की कोशिश रें.
  • विभिन्न प्रकार के मेवे, दाले और दही खाने की कोशिश करें.
  • व्रत शुरू होने से पहले जितना हो सके उतना पानी पिएं. निर्जलीकरण से सिरदर्द और थकान होने का खतरा बढ़ सकता है, जिससे आप थक सकते हैं. फलों का रस भी सहायक होता है.
  • सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि यह दिन महिलाओं का दिन होता है और इसलिए, आराम सबसे महत्वपूर् अपने शरीर पर अधिक दबाव न डाले और दिन का आनंद लें!

क्या न करें –

  • करवा चौथ रखने वाली महिलाओं को भोजन तैयार करने में कैंची, सुई या चाकू का उपयोग नहीं किरना चा
  • अपने भोजन में बहुत अधिक मसाले डालने से बचें
  • एसिडिटी होने की संभावना से बचने के लिए, कॉफी ແລະ चाय पीने से बचना चाहिए.
  • चूँकि इस दिन आपको लंबे समय तक उपवास रखना होता है, इसलिए महिलाओं को आमतौर पर कीमतौर पर कैमतौर पर कैमाौर पर कठिन में माओं होने की सलाह दी जाती है।
  • गर्भवती महिलाओं के लिए, उपवास सामान्य से अधिक तनावपूर्ण हो सकता है। यदि आपका परिवार इसकी अनुमति देता है, तो आप हल्का उपवास रखने का विकल्प चुन सकती हरपरिं, जिभसमें आभसमें उपवास कर सकती हैं။
  • उपवास तोड़ने और पूजा समाप्त करने के बाद, भोजन को एक साथ निगलने की कोशिश न करें. एक अच्छा सुझाव यह होगा कि पहले एक गिलास पानी पिएँ और धीरे-धीरे अपना भोजन करें.

करवा चौथ पूजन के लिए ऑउटफिट आईडिया – Karwa Chauth Puja အတွက် ဝတ်စုံဒီဇိုင်း

भारत में महिलाए। इस शुभ अवसर पर लहंगे, साड़ी और सूट पहनना बहुत अच्छा होता है, लेकिन आधुनिक महिला खरतवा ौथ के ड्रेस चुनकर अपने फैशन को और भी बेहतर बनाती है। करवा चौथ के लिए ये ड्रेस एथनिक और वेस्टर्न दोनों ही तरह के कपड़ों के साथ आती हैं.

करवा चौथ के अवसर पर सही फैशन चुनने के लिए अपनी करवा चौथ ड्रेस को सही तरीके से स्राताइल करना बारे में सबसे ज़रूरी नियम है कि आप मौसम के हिसाब से करवा चौथ के लिए अपनी ड्रेस चुनें

गर्मियों के दिनों में हवादार कॉटन ड्रेस पहनी जा सकती है, जबकि करवा चौ थक ठंडी शास के लिए आदर्श है။

ब्लॉक हील्स या स्टिलेटोज़ की एक जोड़ी, अपने पसंदीदा आभूषण और कम से कम मेकअप, बरहस आपको तैन तैयार हो जाना चाहिए။

करवा चौथ का महत्व – Karwa Chauth 2026 ၏ အရေးပါမှု

हिन्दू धर्म में करवा चौथ के व्रत का बहुत ही बड़ा महत्व बताया गया है| हिन्दू समाज की महिलाए इस दिन अपने पति की लम्बी उम्र के लिए उपवास रखती है| इस दिन भगवान शिव के साथ उनके सम्पूर्ण परिवार की पूजा की जाती है|

यह त्यौहार पति – पत्नी के रिश्ते को और भी मजबूत बनाता है| यह करवा चौथ का त्यौहार केवल राजस्थान में ही नहीं बल्कि उत्तरप्रदेश, पंजाब और गुजस्थात में भयी में जाता है|

हिन्दू धर्म के पंचांग के अनुसार करवा चौथ का व्रत कार्तिक मास के कृष्थ पक्ष में चात्रोदय Facebook सुहागन स्त्रियाँ करवा चौथ के व्रत को पूरे सच्चे मन से करे तो चौथ माता इसका फल भी पीतरे | सच्चे

နိဂုံး - နိဂုံး

आज हमने इस आर्टिकल के माध्यम से करवा चौथ 2026 के बारे में काफी बातें जानी है. हमने करवा चौथ से होने वाले लाभों के बारे में भी जाना. इसके अलावा हमने आपको करवा चौथ से जुड़ी काफी सारी बातों के बारे में बताया है।

हम उम्मीद करते है कि हमारे द्वारा बताई गई जानकारी से आपको कोई ना कोई मदद मिली हो। इसके अलावा भी अगर आप किसी और पूजा के बारे में जानकारी लेना चाहते है।

यदि आप करवा चौथ के अनुष्ठान या उसके व्रत के उद्दीपन के लिए पंडित जी की तलाश कर रहे एक ऐसी वेबसाइट के बारे में बताने जा रहे है।

जिसकी सहायता से आप घर बैठे ही किसी भी जगह से आपकी पूजा के उपयुक्त।

आप हमारी वेबसाइट ၉၉ ပန်ဒစ် पर जाकर सभी तरह की पूजा या त्योहारों के बारे में सम्पूर्ण जानकारी ले सकते है।

အကြောင်းအရာ၏ဇယား

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