ဘာဒရာကယ်လ် ၂၀၂၆ ပြက္ခဒိန်- လအလိုက် ရက်စွဲများနှင့် အချိန်များ
ဘာဒရာကာလသည် ဗေဒင်နက္ခတ်ဗေဒင်၏ အရေးကြီးသော အစိတ်အပိုင်းတစ်ခုဖြစ်သည်။ ၎င်းသည် လ၏ သတ်မှတ်ထားသော အဆင့်များတွင် ပေါ်လာသည်။ ဤနာရီများသည်…
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ရှီဝ အဘိရှေကမ် အရှင်ဘုရား။ उन्ही में से एक है शिव अभिषेक करना. माना जाता है कि समस्त देवतागणों में से भगवान शिव को प्रसन्न करना बहुत ही आसान है।
इसी कारण उन्हें प्रसन्न करने के लिए भक्तों द्वारा शिव अभिषेक (Shiva Abhishekam) किया जाता है। जैसा कि आप सभी लोग जानते है सावन का महीना भगवान शंकर तथा माता पार्वती को समर्पित किया जाता है| हिन्दू धर्म में इस सावन के महीने को बहुत ही शुभ माना जाता है।

सावन के माह में शिव अभिषेक के लिए विभिन्न प्रकार की सामग्री का उपयोग होता है। अलग-अलग सामग्री द्वारा शिव अभिषेक करने से अलग-अलग ही लाभ प्राप्त होता है।
शिव अभिषेक करने में प्रत्येक सामग्री का एक अलग ही महत्व है। သူသည် မှတ်ချက်။
इसी के साथ हम राशि के अनुसार भी यह जानेंगे कि किस राशि के व्यक्ति किस सामग्री से च शिव अरिषे
इसी के साथ यदि आप ऑनलाइन माध्यम से किसी भी पूजा जैसे विवाह पूजन [Marriage Puja], रुद्राभिषेक पूजा [Rudrabhishek Puja], या गृह प्रवेश पूजा [Griha Pravesh Puja] के लिए पंडित जी को बुक करना चाहते है तो आप हमारी वेबसाइट ၉၉ ပန်ဒစ် की सहायता से ऑनलाइन पंडित बहुत आसानी से बुक कर सकते है।
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सभी शिव भक्तों के द्वारा कभी न कभी शिव अभिषेक जरुर किया गया होगा. सनातन धर्म में शिव अभिषेक का बहुत ही बड़ा महत्व है။
हिन्दू धर्म में यह माना जाता है कि अभिषेक करने से भगवान शिव अपने भक्तो से बहुत जलोतैता प्रसन्न उन्हें मनचाहा वरदान प्रदान करते है.
आज इस लेख में हम आपको बताएँगे कि शिव अभिषेक की शुरुआत किस प्रकार से हुई अरभिषात शुरुआत किस प्रकार से हुई अरभिषात शुरुआत किया जाता है။ साथ ही कथा के बारे में भी जानेंगे.
प्रलय के कारण सभी महत्वपूर्ण रत्न व धियाँ समुंद्र में समा गयी. इन्हें पुनः प्राप्त करने के लिए भगवान विष्णु ने सभी देवताओं व दानवों को समुन्द्र मांथनका ई
सबसे पहले समुद्र मंथन से एक विष की प्राप्ति हुई यह कोई साधारण विष नहीं था, यह संसार का सबसे भयानक विष था. जिसका नाम हलाहल विष था
इसकी गंध के कारण सम्पूर्ण विश्व में हाहाकार मच गया. အင်တာနက် भिक्षा मांगी။
इसके बाद भगवान शंकर ने सम्पूर्ण जगत की रक्षा हेतु उस विष को ग्रहण कर लिया။ शिव के कंठ में ही रोक लिया။ जिस कारण उनका कंठ नीला हो गया|
विष को ग्रहण करने के कारण भगवान शिव के शरीर का तापमान बढ़ गया| उन्हें कैलाश जैसे ठन्डे स्थान पर भी पसीना आने लगा|
उनका जल से अभिषेक किया| तभी से भगवान शंकर को जल चढ़ाया जाने लगा व तभी से शिव अभिषेक की भी शुरुआत हुई|
शिव अभिषेक भिन्न-भिन्न सामग्रियों से किया जाता है| आज हम आपको बताएँगे कि किस सामग्री से शिव अभिषेक (Shiva Abhishekam) करने पर किस फल की पह्राप्ति हो।
दूध धर्म तथा मन पर प्रभाव के दृष्टिकोण से सात्विक माना जाता है| इसमें भी सबसे पवित्र तथा शुद्ध गाय के दूध को माना जाता है| शिव अभिषेक (Shiva Abhishekam) में दूध का एक अलग ही महत्व होता है|
कहा जाता है कि शिवलिंग का दूध से अभिषेक करने पर भक्तों की सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती है| सोमवार का दिन भगवान शिव को बहुत ही प्रिय है, इस दिन दूध का दान करने से जातक का चंहोहतैतमा ग्रह म။

देसी गाय के बिना मिलावट वाले दूध से शिव अभिषेक (Shiva Abhishekam) तथा रुद्राभिषेक करने से मक्रात की से पूर्ण होती है|
ϟ तनाव कम होता है| इस बात का अवश्य ध्यान रखे कि भगवान शिव पर चढ़ने वाला दूध कच्चा हो။
भगवान शिव का विभिन्न सामग्रियों से अभिषेक किया जाता है။ इन्ही में दही भी शामिल है| जिन जातकों को संतान प्राप्त नहीं हो रही हो या आर्थिक तंगी से परेशान हको उन्हें भगवान शिव का द ဒိहिए။
दही से भगवान शिव का अभिषेक करने से जातकों को संतान की प्राप्ति होती है ता दहवी से रुव्राभिषेक करन की प्राप्ति भी होती है။ सावन के महीने में भगवान शिव का दही से अभिषेक करने से भक्तों को सौभाग्य की प्राप्ति होती။
लिंग पुराण में यह बताया गया है कि भगवान शिव के स्थान का दर्शन करना ही पुण्यदायी होता है| उससे सौ गुना फल स्पर्श करने से मिलता है|
जल अभिषेक से सौ गुना फल दूध से अभिषेक करने से, दूध से हज़ार गुना दही से अभिषेक करने से, दुदाय से अभिषेक करने से, မည်သို့ပင် घी से शिव अभिषेक करने से अनंत गुना फल की प्राप्ति होती है။
इसके अतिरिक्त घी से शिव अभिषेक (Shiva Abhishekam) करने से भगवान शिव अपने भक्तों मोक्ष प्रदान | भगवान शिव के स्मरण मात्र से ही भक्तों की मनोकामनाएँ पूर्ण हो जाती है| इसी बीच घी से भगवान शिव का अभिषेक मनुष्यों के लिए बहुत ही लाभदायी सिद्ध होता है|
इससे पहले हमने दूध से अभिषेक करने से होने वाले फल बारे में बताया| अब हम जानेंगे शहद से अभिषेक करने से क्या लाभ होता है|
आपको बता दे कि भगवान शिव की सबसे पसंदीदा वस्तुओं में शहद को भी शामिल किया गया है| शहद से शिव अभिषेक (Shiva Abhishekam) करने का बहुत ही ख़ास महत्त्व बताया गया है|
शहद से भगवान शिव का अभिषेक करने से जातक को सम्मान तथा जीवन में तरक्की प्राप्त होती है| इसके साथ ही शहद से शिव अभिषेक करने से शुक्र ग्रह से होने वाले दुष्प्रभाव समाप्त होते है।။
महाशिवरात्रि के शुभ अवसर पर भगवान शिव का पंचामृत से अभिषेक किया जाता है| भगवान शिव को पंचामृत बहुत ही प्रिय है|
माना जाता है सावन के महीने में पंचामृत द्वारा शिव अभिषेक करने से भक्तों को सीौभाग्य की प्रा्तों की थौभाग्य की प्रा्र समस्त मनोकानाएं भी पूर्ण होती है। सावन के माह में शिव अभिषेक (Shiva Abhishekam) करने का बहुत बड़ा महत्व है။
सावन में भगवान शिव का अभिषेक करने से भय, रोग से छुटकारा मिलता है तथा धन की प्राप्ती है | शक्कर शहद मिलाकर बनाया जाता है।
शिव अभिषेक (Shiva Abhishekam) के लिए पंचामृत बनाते समय शुद्धता का ध्यान रखना भी बहैत आवश
हिन्दू धर्म में भगवान शिव के अभिषेक का बहुत ही ज्यादा महत्व है| विभिन्न प्रकार की सामग्रियों से शिव अभिषेक (Shiva Abhishekam) किया जाता है|
इन्ही में चन्दन भी शामिल है| चंदन को पूजा की सबसे महत्वपूर्ण सामग्रियों में से एक माना जाता है| सावन के महीने में भगवान शिव का चंदन से अभिषेक करने पर जातक को सौभाग्य की प्राप्ति होती है|
यह महादेव के सभी भक्तों के लिए शुभता का प्रतीक माना जाता है| चन्दन से भगवान शिव का अभिषेक करना जातकों के लिए अच्छा भाग्य लावता है अभिषेक करना जातकों के लिए अच्छा भाग्य लावता है अथा इससे जातकया स्वास बना रहता है။
सावन के माह में भगवान शिव का अभिषेक करना भक्तों के लिए बहुत ही लाभदायक होता है| भगवान शिव का अभिषेक विभिन्न तरह की सामग्रियों से किया जाता है။
इसमें नारियल के जल से शिव जी का अभिषेक करना भी शामिल है| सावन के माह में शिवलिंग पर नारियल के जल से अभिषेक करने से भक्तों को नकारात्मकता एवं तनाताव से छट။
इसी के साथ ही अच्छी संतान व सुख समृद्धि का आशीर्वाद प्राप्त होता है| नारियल के जल से अभिषेक करना जातक को शांत जीवन जीने में सहायता करता है။
हिन्दू धर्म में चावल को भी पूजन सामग्री की सूची में रखा जाता है| प्रत्येक पूजा सामग्री में चावल (अक्षत) अनिवार्य माना जाता है|
इस कारण महाशिवरात्रि पर भगवान शिव का अभिषेक चावल के पाउडर से करने पर जातक की धंन संबंध सी धीरे-धीरे समाप्त होने लगती है तथा चावल के पाउडर से शिव अभिषेक करने से व्यक्ति को ह्र्र कार प्राप्त होती है။
हिन्दू शास्त्रों में बताया गया है कि गन्ने के रस से भगवान शिव का सबसे उत्तम अभिषेक है | गन्ने के रस से भगवान शिव का अभिषेक करना बहुत ही शुभ माना जाता है။
စာမျက်နှာများ။
यदि आप भी गन्ने के रस से भगवान शिव का अभिषेक करेंगे तो उनकी कवपा से आपकस ही धन तथा उद की प्राप्ति होगी။
भगवान शिव का अभिषेक महाशिवरात्रि तथा सावन के महीने में करना जातकों के लिए बहुत हैत जाना शुभ။
महाशिवरात्रि के पावन पर्व पर भगवान शिव का अभिषेक तिल के तेल से करने का बहुत महत्व है| ϟ मनोकामनाएँ पूर्ण होती है|
साथ ही इस दिन तिल के तेल से शिव जी का अभिषेक (Shiva Abhishekam) करने से जातक के ज्ञान में होैक वृद्ध लिए शिक्षा के सभी मार्ग भी खुल जाते है။
भगवान शिव को सोमवार का दिन समर्पित किया गया है| इस दिन भगवान शिव की पूजा करने से करने से शिवजी अपने भक्तों से प्रसन्न होते है။
सोमवार के दिन भगवान शिव का जल से अभिषेक करने से भक्तों की समस्त मनोकामनाएँ पूर्ण होती है। इसके अतिरिक्त शिव जी को जल चढाने से मनुष्य को मानसिक शांति भी प्राप्त होती है။
भगवान शिव की कृपा पाने ये लिए प्रत्येक सोमवार के दिन शिवजी की पूजा करने के सराथमताथ महामथ जाप करना सबसे उत्तम उपाय माना जाता है။
जिस प्रकार अलग-अलग सामग्री से भगवान से उसी प्रकार के लाभ प्राप्त होते है။ သူသည် -
इस राशि के जातकों को अपनी पूजा का अधिक लाभ प्राप्त करने के लिए जल के पात्तबर में गुड़, गगालल, सुगंध मिलाकर भगवान शिव का अभिषेक करना चाहिए။

जिन व्यक्तियों की राशि वृषभ है, उन्हें भगवान शिव की कृपा पाने के लिए सावन शम्लार वार दूध, घी तथा दही से भगवान शिव का अभिषेक करना चाहिए.
इस राशि वाले शिव भक्तों को गन्ने के रस से अभिषेक करना बहुत ही लाभदायक होता है| इसलिए इन्हें सावन सोमवार को गन्ने के रस से शिव जी का अभिषेक (Shiva Abhishekam) करना चाहिए| इससे उन्हें धन की प्राप्ति भी होगी.
कर्क राशि के जातकों को भगवान शंकर की कृपा पाने के सावन माह के प्रत्येक सोमवार के दिन शगवान शगवान अभिषेक करना चाहिए။
इस राशि के सभी जातकों को भगवान शिव की कृपा पाने के लिए जल के पात्र में लाल पुष्प, शले तुल, मिलाकर भगवान शिव का अभिषेक करना चाहिए
जिन भी जातक की राशि कन्या है इन्हें सावन के पहले सोमवार के दिन गन्ने के रस में शहद को ालाभिर भगव करने से सौभाग्य की प्राप्ति होती है।
तुला राशि वाले जातकों को भगवान शिव का आशीर्वाद प्राप्त करने के लिए जल के पात्र में शहुद၊ का तेल मिलाकर उससे भगवान शिव का अभिषेक करना चाहिए.
इन राशि के जातकों को अपनी पूजा का सम्पूर्ण लाभ प्राप्त करने के लिए सावन सोमवार के हीणदिन दूध , इत्यादि से भगवान शिव का अभिषेक करना चाहिए.
इस राशि के आराध्य देव भगवान शिव ही है| मकर राशि वाले भक्तों के लिए नारियल के जल से अभिषेक करना बहुत ही शुभ माना जाता है।
इस राशि के समस्त जातकों को भगवान शिव को प्रसन्न करने के लिए सावन माह के प्रथम सोमहार को जल यला दू भगवान शिव का अभिषेक करना चाहिए.
इस राशि के जातक भी भगवान शिव को माना जाता है| इस राशि के भक्तों को भगवान शिव का आशीर्वाद प्राप्त करने के लिए गंगाजल में सुगंध काले भगवान शिव का अभिषेक करना चाहिए.
मीन राशि के जातकों के लिए सबसे लाभदायक यही रहेगा कि वह सावन सोमवार के दिन दूध या जल में ले भगवान शिव का अभिषेक करें.
आज इस लेख के माध्यम हमने आपको बहुत सारी बातों के बारे में बताया| जैसे शिव अभिषेक विभिन्न सामग्री का उपयोग करके किया जाता है।
उन सभी सामग्रियों से शिव अभिषेक (Shiva Abhishekam) करने का अलग महत्व है| इसके अलावा हमने विभिन्न राशियों के लिए अलग-अलग शिव अभिषेक की प्रक्रिया के बारे में बताया है।
इसकी सहायता से आप अपनी राशि के अनुसार भगवान शिव की कृपा प्रापक्त करने के लिए उानकी पजू
हिन्दू धर्म में बताया गया है कि भगवान शिव स्वभाव के बहुत ही भोले है| भगवान शंकर केवल एक लोटा जल से ही अपने भक्तों से प्रसन्न हो जाते है।
आमतौर पर शिव अभिषेक एक लिंगम पर किया जाता है| अभिषेक शब्द संस्कृत भाषा से लिया गया है जो किसी भी भगवान को पवित्र स्नान कराने की भक्ति पूर् दर्शाता है။
जब आप शिव जी का अभिषेक करते है तो उस समय आपका मन एकाग्र होता है। आपका सम्पूर्ण मन व हृदय भगवान शिव की छवि तथा दिव्य विचारों से भरा हुआ रहता है। शिव जी का अभिषेक करते समय मनुष्य का अहंकार धीरे-धीरे नष्ट हो जाता है।
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အကြောင်းအရာ၏ဇယား