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Pitru Paksha 2026 ရက်စွဲများ – कब शुरू होंगे पितृ पक्ष 2026, तिथि, समय व महत्व

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Last Updated:သြဂုတ်လ 12, 2025
စာမျက်နှာ ၂၀၂၅
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पौराणिक कथाओं के अनुसार हिन्दू धर्म में စာမျက်နှာ ၂၀၂၅ (Pitru Paksha 2026) का बहुत ही बड़ा महत्त्व गया है| हिन्दू धर्म की मान्यताओं के अनुसार इस पितृ पक्ष 2026 के समय पिंडदान, तर्पण तथा श्राद्ध कर्म किया जाता है|

माना जाता है कि जो भी व्यक्ति पितृ पक्ष 2026 के समय तर्पण, श्राद्ध कर्म और पिंडोतान क्रता है व्यक्ति को अपने पितरो का आशीर्वाद भी मिलता है|

पितरों का शरद श्राद्ध करने से मनुष्य के जीवन में चल रही सभी प्रकार की परेशानियाँ दूर है|

စာမျက်နှာ ၂၀၂၅

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार पितृ पक्ष 2026 के समय दान करने का भी बहुत ही बड़ा महतायात्व | पितृ पक्ष 2026 को श्राद्ध पक्ष के नाम से भी जाना जाता है| इन पितृ पक्ष के कुछ दिनों में हमारे पितरों की पूजा की जाती है|

इस दिन लोग अपने मृत परिजनों के लिए ईश्वर से प्रार्थना करते है| इस दिन सभी लोग अपने पूर्वजों या पितरों के नाम से ब्राह्मणों को भोजन करवाते है तथा उनक्राय वस्त्राते है तथा उनक्राय वस्त्र दान जाता है|

कई लोग यह भी मानते है कि हम जो भी दान करते करते है| वह पितरों के पास ब्राह्मणों के द्वारा ही पहुँचता है|

इसके अलावा यदि आप किसी धार्मिक स्थान पर पितृ पक्ष पूजा မည်သို့ပင် पितृ दोष पूजा करवाना चाहते है तो ၉၉ ပန်ဒစ် आपको उज्जैन जैसे धार्मिक स्थान पर पितृ दोष व पितृ पक्ष पूजा के लिए ऑनलाइन ही प्लतए

कब से शुरू है पितृ पक्ष 2026 

पितृ पक्ष 2026 (Pitru Paksha 2026) का यह समय हिन्दू धर्म के लोगों के मध्य बहुत बड़ा महत्व रखता है | पितृ पक्ष 2026 के यह 15 दिन पूर्ण रूप से पितरों तथा उनकी पूजा के लिए समर्पित हैं|

इस वर्ष पितृ पक्ष की शुरुआत भाद्रपद मास की शुक्ल पूर्णिमा तिि 26 सथितंबर 2026 शनिवार कि 10 अक्टूबर 2026 शनिवार तक रहेगा|

महत्वपूर्ण तिथियां व समय (पितृ पक्ष 2026)

ကြိုက်တယ်။ श्राद्ध .िन
26 सितंबर 2026 पूर्णिमा श्राद्ध စနေနေ့
27 सितंबर 2026 प्रतिपदा श्राद्ध रविवार
28 सितंबर 2026 द्वितीया श्राद्ध सोमवार
29 सितंबर 2026 तृतीया श्राद्ध / महा भरणी मंगलवार
30 सितंबर 2026 चतुर्थी / पंचमी श्राद्ध बुधवार
01 အောက်တိုဘာ 2026 စာတမ်းဖတ်ကြား श्राद्ध နာမည်ကြီးတွေ
02 အောက်တိုဘာ 2026 सप्तमी श्राद्ध သောကြာ
03 အောက်တိုဘာ 2026 अष्टमी श्राद्ध စနေနေ့
04 အောက်တိုဘာ 2026 नवमी श्राद्ध रविवार
05 အောက်တိုဘာ 2026 दशमी श्राद्ध सोमवार
06 အောက်တိုဘာ 2026 एकादशी श्राद्ध मंगलवार
07 အောက်တိုဘာ 2026 द्वादशी / मघा श्राद्ध बुधवार
08 အောက်တိုဘာ 2026 त्रयोदशी श्राद्ध နာမည်ကြီးတွေ
09 အောက်တိုဘာ 2026 चतुर्दशी श्राद्ध သောကြာ
10 အောက်တိုဘာ 2026 सर्व पितृ अमावस्या စနေနေ့

पितृ पक्ष 2026 का महत्व – Pitru Paksha 2026 ၏ အရေးပါမှု

हिन्दू धर्म में पितृ पक्ष को बहुत ही बड़ा महत्व दिया गया है| पितृ पक्ष की तिथियाँ 15 दिनों तक चलती है| इन 15 दिनों में सभी लोग अपने पूर्वजों या पितरों का श्राद्ध करते है|

ဒီ पितृ पक्ष 2026 (Pitru Paksha 2026) के समय पितरों का श्राद्ध करना बहुत ही शुभ माना जाता है| इस अवसर पर सभी लोग अपने पूर्वजों को श्रद्धांजलि प्रदान करके उनसे आशीर्वाद प्रारप्मकका क|रने की

စာမျက်နှာ ၂၀၂၅

इसके अलावा हिन्दू धर्म के लोगों का यह मानना ​​है कि उनके पूर्वज उनके जीवन एक बहिमका ही भड़ी

कथाओं के अनुसार यह माना जाता है कि पितृ पक्ष 2026 के समय हमारे पूर्वज पृथ्वी पर हो आते भै तथा है जैसे खाना, वस्त्र इत्यादि उन्हें प्राप्त होता है|

यह दिन पितृ तर्पण, श्राद्ध कर्म या पिंडदान के लिए अत्यंत ही शुभ माने जाते है| इस दिन लोग ब्राह्मणों को अपने घर पर बुलाकर उन्हें भोजन, वस्त्र तथा दक्षिणा देते है|

पितृ पक्ष 2026 श्राद्ध तिथियों के बारे में कुछ महत्वपूर्ण जानकारी

पूर्णिमा श्राद्ध – Purnima Shraddha 

Purnima Shraddha- हिन्दू धर्म की मान्यताओं के अनुसार इस दिन भगवान विष्णु की पूजा की जाती है| भाद्रपद पूर्णिमा के दिन भगवान सत्यनारायण की पूजा करने से मनुष्य सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती है|

शास्त्रों के अनुसार बताया गया है कि हमारे जो भी पूर्वज पूर्णिमा के दिन शांत हुए थे| उनका श्राद्ध ऋषियों को समर्पित किया जाता है|

इस दिन दिवंगत व्यक्ति को सामने रखकर पूजा – अर्चना की जाती है| पौराणिक मान्यताओं के अनुसार इस दिन पितरों को पिंड दान करना चाहिए|

इसके बाद कौआ, गाय तथा कुत्ते को प्रसाद खिलाना चाहिए| फिर ब्राह्मणों को भोजन करवा कर स्वयं भोजन करना चाहिए|

प्रतिपदा श्राद्ध – Pratipada Shraddha

Pratipada Shraddha- प्रतिपदा श्राद्ध के बारे में मत्स्य पुराण, गरुड़ पुराण, अग्नि पुराण तथा अनं्र धार्मिक विस्तार से बताया गया है| दिवंगत आत्माओं की शान्ति के लिए इस दिन तर्पण तथा अनुष्ठान की प्रक्रिया की जाती है |

इस प्रतिपदा श्राद्ध को पड़वा श्राद्ध के नाम से भी जाना जाता है| श्राद्ध करने के लिए कुटुप मुहूर्त तथा रोहिना मुहूर्त को सबसे शुभ मुहूर्त माना जाता है | यह मुहूर्त अपराह्न काल समाप्त होने तक ही रहता है|

श्राद्ध का अंत तर्पण प्रक्रिया को पूर्ण करके ही किया जाता है| माना जाता है कि प्रतिपदा तिथि के दिन नाना तथा नानी का श्राद्ध किया जाता है| इससे उनकी आत्मा बहुत ही प्रसन्न होती है तथा शांति व खुशी का आशीर्वाद देते है|

द्वितीया श्राद्ध – Dwitiya Shraddha 

Dwitiya Shraddha- यह श्राद्ध हिन्दू चन्द्र महीने के दोनों पक्षों कृष्ण पक्ष तथा शुक्ल पक्ष का दातारा निन हिन्दू धर्म की मान्यताओं के अनुसार इस दिन उन व्यक्तियों का श्राद्ध किया जाता है|

जिनकी मृत्यु इन दोनों पक्षों में से किसी एक पक्ष की द्वितीया को हुई हो| द्वितीया श्राद्ध को दूज श्राद्ध के नाम से भी जाना जाता है| कुटुप तथा रोहिना मुहूर्त श्राद्ध के लिए बहुत अच्छे मुहूर्त माने जाते है|

मार्कंडेय पुराण नामक हिन्दू शास्त्र में बताया गया है कि श्राद्ध करने थे हार्दू हूर्व ज सतुष स्वास्थय तथा धन प्रदान करते है| वर्तमान पीढ़ी पितृ पक्ष में श्राद्ध कर उनके प्रति अपना ऋण चुकाते है|

तृतीया श्राद्ध – Tritiya Shraddha

Tritiya Shraddha- तृतीया श्राद्ध में तीन ब्राह्मणों को भोजन करवाने का विधान माना गया है| श्राद्ध में गंगाजल, तिल, कच्चा दूध, तुलसी पत्र तथा शहद मिश्रित जल से जलांजलि दी जाती है |

इसके पश्चात पित्तरों का विधिवत प्रक्रिया से पूजन किया जाता है| पितरों को गौघृत का दीपक लगाया जाता है तथा चंदन व गुलाबी फूल चढ़ाए जाते है|

इसके पश्चात पितरों को खीर, पुड़ी तथा सात्विक सब्जी का भोग लगाया जाता है| Facebook अन्न जल की आहुति दी जाती है|

चतुर्थी श्राद्ध – Chaturthi Shraddha

ချတုရ်သီ ရှရဒ္ဓ श्राद्ध करने के लिए कुटुप मुहूर्त तथा रोहिना मुहूर्त को सबसे शुभ मुहूर्त माना जाता है | पौराणिक ग्रन्थ गरुड़ पुराण के अनुसार यह माना जाता है कि यमपुरी जाने के लिए आतात्मा या तेरह दिनों के बाद आरंभ होती है|

စာမျက်နှာ ၂၀၂၅

आत्मा को यम दरबार तक जाने के लिए 11 महीने की यात्रा करनी पड़ती है| इस अवधि के दौरान चतुर्थी श्राद्ध में भोजन तथा जल प्रदान करने के लिए पिंडदान तथा तर्पण इससे यात्रा के समय आत्मा की भूख व प्यास संतुष्ट होती है|

पंचमी श्राद्ध – Panchami Shraddha

Panchami Shraddha- सभी हिन्दू धर्म के लोगों के लिए श्राद्ध करना आवश्यक है| जिससे इस बात की पुष्टि हो सके कि पूर्वजो को सूक्ष्म दुनिया में रहते हुए उनका भोजन प्राप्त ो|

कई सारे धार्मिक पुराण जैसे गरुड़ पुराण ၊ आत्मा को शान्ति प्रदान करने के लिए तर्पण तथा पिण्ड दान करना बहुत ही आवश्यक माना |

पिण्डदान में परिजनों को घी, चावल, शहद, चीनी तथा बकरी के दूध से बना पिण्ड चढ़ाया जाता है| तर्पण में पितरों को जौ, काले तिल, आटा तथा कुशा घास मिलाकर जल चढ़ाया जाता है|

စာတမ်းဖတ်ကြား श्राद्ध – Shashthi Shraddha

Shashthi Shraddha- मत्स्य पुराण, गरुड़ पुराण, अग्नि पुराण तथा अन्य धार्मिक ग्रंथों में बताया गयंो मकता कि दिजनगों शान्ति प्रदान करने के लिए तर्पण तथा पिण्ड दान किया जाता है|

षष्ठी श्राद्ध परिवार के उन सदस्यों के लिए किया जाता है, जिनकी मृत्यु दो चन्द्र पक्षों में की षष्ठी तिथि हुई हो|

စာမျက်နှာများ है| पितृ पक्ष 2026 (Pitru Paksha 2026) के सभी दिन अशुभ माने जाते है| စာတမ်းဖတ်ကြားများ

सप्तमी श्राद्ध – Saptami Shraddha

Saptami Shraddha- सप्तमी श्राद्ध हिन्दू चन्द्र महीने के दोनों पक्ष कृष्ण पक्ष तथा शुक्ल पक्ष हैत सातवें द|

यह सप्तमी श्राद्ध उन लोगों के लिए किया जाता है, जिनकी मृत्यु दोनों पक्षो में कती से क िस उ होती है| पितृ पक्ष 2026 (Pitru Paksha 2026) एक श्राद्ध कार्यक्रम है|

हिन्दू धर्म की मान्यताओं के अनुसार इस दिन तर्पण अनुष्ठानों के अलावा सप्तमातृका या सात द की जाती है|

इस सप्तमी श्राद्ध का अनुष्ठान करने के लिए तमिल मान्यता के अनुसार तिरुवरुर के परा कुरेवी रा मोक्ष शिव मंदिर सबसे अच्छा स्थान माना गया है|

अष्टमी श्राद्ध – Ashtami Shraddha

အာရှတမီ ရှရဒ္ဒါ: अष्टमी श्राद्ध को कालाष्टमी तथा भैरव अष्टमी के नाम से भी जाना जाता है| इस तिथि को गजलक्ष्मी का व्रत भी रखा जाता है| माना जाता है कि यह व्रत दिवाली की पूजा से भी महत्वपूर्ण माना जाता है|

अष्टमी श्राद्ध की तिथि पर खरीदारी की जा सकती है| जिनका देहांत अष्टमी के दिन होता है| उनका श्राद्ध भी इसी दिन किया जाता है|

जो भी व्यक्ति अष्टमी की तिथि को श्राद्ध करता है| उसे सम्पूर्ण समृद्धि की प्राप्ति होती है| अष्टमी श्राद्ध के दिन महिलाएं अपने बच्चों तथा पूरे परिवार के लिए उपवास रखती है|

ϟ प्राप्त होता है|

नवमी श्राद्ध – Navami Shraddha 

Navami Shraddha इस नवमी श्राद्ध को हिन्दू धर्म में मातृ नवमी के नाम से भी जाना जाता है| पितृ पक्ष 2026 में पड़ने वाली यह मातृ नवमी के दिन परिवार से जुड़ी दिवंगत महिलाओं जहका - दादी, विशेष रूप से श्राद्ध किया जाता है|

जिन महिलाओं की मृत्यु सुहागिन के रूप में होती है| माना जाता है कि इस सम्पूर्ण विधि के साथ श्राद्ध को करने से उन्हें मोक्ष की पह्राप्ति | जिससे वह प्रसन्न होकर आपको खुशहाल जीवन का आशीर्वाद भी प्रदान करती है|

दशमी श्राद्ध – Dashami Shraddha 

Dashmi Shradh- शास्त्रों के अनुसार पितृ पक्ष 2026 में दशमी श्राद्ध की तिथि बहुत महत्वपूर्ण माना जैत | इस दिन उन पितरों का श्राद्ध किया जाता है|

जिनका निधन दशमी तिथि को हुआ हो| हिन्दू धर्म में मान्यता है कि दशमी का श्राद्ध पूर्ण विधि – विधान थे करनेप तातृ त आपको आशीर्वाद भी प्रदान करते है|

माना जाता है कि यदि हमारे पितर हमसे प्रसन्न रहते है तो जीवन में चल रही किसी भी प्रकार परेशानी से ऐसा कहा जाता है कि जिन जातकों की कुंडली पितृ दोष हो तो उन्हें दशमी श्राद्ध अवश्य कार्य

एकादशी श्राद्ध – Ekadashi Shraddha

Ekadashi Shraddha हिन्दू धर्म की मान्यताओं के अनुसार पितृ पक्ष 2026 में यह दिन व्यक्ति जन्म और मृत्युका के दुष पाने में सहायता करने के लिए आता है|

इस दिन व्यक्ति अपने परिवार के सदस्यों को मोक्ष प्राप्त करवाने के लिए उपवास रखता है| यह दिन एकादशी श्राद्ध के नाम से भी जाना जाता है|

इस दिन लोगों को अपने पितरों के लिए श्राद्ध तथा तर्पण करना चाहिए| एकादशी व्रत तीन दिवसीय पर्व होता है|

जिसमे पहले भक्तों को दोपहर पहला भोजन करना होता है, दूसरे दिन एक कठोर उपवास का पालन करना करालन करना था उपवास तोडना होता है|

द्वादशी श्राद्ध – Dwadashi Shraddha 

Dwadashi Shraddha इस तिथि के दिन कुतुप मुहूर्त के समय किसी योग्य ब्राह्मण को घर बुलाकर किसी अपने पितोरोतका ता साई पुलाकर किसी अपने पितोरोतका ता साई विधि – विधान के साथ तर्पण तथा दान करना चाहिए| इस बात का ध्यान रखे कि श्राद्ध कर्म में जल, कुश तथा काले तिल का विशेष रूप उपयग हो|

कई स्थानों पर साधु – संतों की आत्मा तृप्ति तथा उनका आशीर्वाद पाने के लिए भांडारा किााारा किााारा जित | साधु – संतों को भोजन कराने से पूर्व कुत्ता, गाय तथा कौए के दिन विशेष रूप से अलगर भोजकन नि कला | साधु – संतों को करवाने के पश्चात अपनी श्रद्धा के अनुसार उनके दान भी करें| 

त्रयोदशी श्राद्ध – Trayodashi Shraddha

Trayodashi Shraddha- त्रयोदशी श्राद्ध पितृ पक्ष 2026 की त्रयोदशी तिथि मानी गयी है| हिन्दू धर्म की मान्यताओं के अनुसार इस दिन उन व्यक्तियों का श्राद्ध किया जाता है| जिनकी मृत्यु इन दोनों पक्षों में से किसी एक पक्ष की त्रयोदशी तिथि को हुई हो|

पितृ पक्ष 2026 (Pitru Paksha 2026) श्राद्ध कर्म के लिए कुटुप तथा रोहिना मुहूर्त बहुत हैत शुभ मान| इसके बाद का मुहूर्त अर्पणा कला समाप्त होने तक ही रहता है|

हिन्दू धर्म के द्वारा इस पितृ पक्ष को अशुभ माना जाता है| इसलिए इस समय में कोई भी शुभ कार्य जैसे शादी इत्यादि नहीं किये जाते है|

चतुर्दशी श्राद्ध – Chaturdashi Shraddha 

Chaturdashi Shraddha- इस तिथि पर परिवार के उन सदस्यों का श्राद्ध किया जाता है जिनकी मृत्यु किसी हथियार मे, किसी दुराम आत्महत्या, किसी हिंसक मौत का सामना करना पड़ा हो या किसी के द्वारा हत्या की गई हो|

यदि किसी कारणवश इस दिन श्राद्ध नहीं किया जाए तो उस परिस्थिति में अमावस्या ह के दााा य उ है| इस चतुर्दशी श्राद्ध को घायल चतुर्दशी या घाट चतुर्दशी के नाम से भी जाना जाता है|

अमावस्या श्राद्ध – Amavasya Shraddha  

Amavasya Shraddha- कई बार ऐसा होता है कि लोगों को अपने पितरों की तिथि याद नहीं होती तो कभी ऐसा होतो हेत कि को लोगों बारे में ही पता नहीं होता तो उस परिस्थिति में इन सभी पितरों का श्राद्ध सर्व पितृ अमावस्या के

माना जाता है कि इस दिन श्राद्ध करने से ज्ञात तथा अज्ञात पितृ संतुष्ट होते है| माना जाता है कि ऐसे पितृ जिनके बारे में आपको ज्ञात नहीं है|

वह पितृ पक्ष में पृथ्वी पर आकर आपसे तृप्त होने की आशा रखते है| इस वजह से सर्व पितृ अमावस्या के दिन सभी ज्ञात तथा अज्ञात पितरों का श्राद्ध कर देना ए|

နိဂုံး - နိဂုံး

आज हमने इस आर्टिकल के माध्यम से पितृ पक्ष 2026 (Pitru Paksha 2026) के बारे में काफी बातें जानी है| हमने पितृ पक्ष 2026 की 15 के नाम के साथ – साथ उनके बारे में जानकारी भी आपको प्रदान की |

हम उम्मीद करते है कि हमारे द्वारा बताई गई जानकारी से आपको कोई ना कोई मदद मिली होगी| इसके अलावा भी अगर आप किसी और पूजा के बारे में जानकारी लेना चाहते है तो आप हमे Whatsapp पर भी सम्पर्क कर ဖြစ်နိုင်ပါတယ်။

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