logo 0%
Griha Pravesh Puja အွန်လိုင်းစာအုပ် Griha Pravesh Puja အွန်လိုင်းစာအုပ် ယခုဘွတ်ကင်လုပ်ရန်

Pradosh Vrat 2026 စာရင်း- जाने प्रदोष व्रत की शुभ तिथि, मुहूर्त व नियम

20,000 +
ပန်ဒစ်များ ပါဝင်ခဲ့သည်။
1 သိန်း+
Puja ကျင်းပခဲ့သည်။
4.9/5
ဖောက်သည်အဆင့်သတ်မှတ်ချက်
50,000
ပျော်ရွှင်သောမိသားစုများ
99PanditJi ကရေးသား: 99PanditJi
Last Updated:ဇြန္လ 17, 2025
စာမျက်နှာ 2026
ဤဆောင်းပါးကို Ai ဖြင့် အကျဉ်းချုပ်ဖော်ပြပါ။ GPT ချတ် မငြိမ်မသက်စိုးရိမ်ကြောင့်ကြ Gemini Claude Grok

प्रत्येक वर्ष तथा प्रत्येक माह इस व्रत की तिथि भिन्न होती है| पौराणिक मान्यताओं के अनुसार စာမျက်နှာ 2026 (Pradosh Vrat 2026) भगवान शिव की उपासना करके उन्हें प्रसन्न करने के लिए किया जाता है|

हिन्दू शास्त्रों के अनुसार, त्रयोदशी का दिन महादेव की विशेष कृपा पाने का सर्होतात्तम अवसर

जैसा कि आप सभी लोगो को पता ही है कि हिन्दू धर्म में प्रत्येक दिन कोई न कोई तिथि या ह्यतौार या है, जो हमारे जीवन में खुशहाली और आध्यात्मिकता का संचार करते हैं|

हिन्दू धर्म में इन सभी त्योहारों और व्रतों के नियमों को बहुत ही श्रद्धा के साथ मानते है|

आज हम एक ऐसे व्रत या जिसे हम उपवास भी कह सकते है, के बारे में बात करें गे जो हर म्रत्येले कें अलग मुहूर्त के साथ आता है| वर्ष 2026 में भी भक्त शिव भक्ति के इसी मार्ग पर चलेंगे|

စာမျက်နှာ 2026

प्रत्येक माह की त्रयोदशी तिथि को प्रदोष व्रत किया जाता है| စာမျက်နှာများ

धार्मिक ग्रंथों के अनुसार, प्रदोष काल में शिवजी की आराधना से जन्म-जन्मांतर के हाप मेिट जातं

आमतौर पर प्रदोष व्रत प्रत्येक माह की कृष्ण पक्ष ဗီ နှစ်ပတ်လုံး ပိုမှောင်တယ်။ की त्रयोदशी तिथि को ही रखा जाता है| परंतु सावन के माह में प्रदोष व्रत का महत्व ओर अधिक हो जाता है, क्योंकि सावन स्वयं शैव स्वरूप |

इस माह में पूर्ण श्रद्धा के साथ जो भी इस प्रदोष व्रत को करता है तो भगवान शिव हैसतसे बह्न न प्र उसकी सभी मनोकामनाओं को पूर्ण करते है|

စာမျက်နှာ 2026 (Pradosh Vrat 2026) एक अत्यंत महत्वपूर्ण हिन्दू व्रत है जो कि भगवान शिव को प्रसन्न करने हैता लिए कि

प्रदोष व्रत का सम्पूर्ण दिन देवों के देव भगवान शंकर को ही समर्पित किया गया है| तो आइये जानते है कि इस प्रदोष व्रत 2026 (Pradosh Vrat 2026) में प्रत्येक माह में प्रथदोष व्रत की शुभ သို့သော်လည်း

प्रदोष व्रत क्या है ?

हिन्दू धर्म की मान्यताओं के अनुसार एकादशी तिथि को भगवान विष्णु और प्रदोष व्रत की तिथि भगवान शिव को समर्पित किया गया है| प्रदोष का अर्थ होता है संध्या का वह समय जब दिन और रात का मिलन होता है।

इस तिथि को प्रदोष तिथि कहने के पीछे के बहुत बड़ा पौराणिक कारण है| अगर इस कथा के बारें में हम बात करें तो एक समय की बात है जब चंद्र को क्षय रोग हो गया था|

जिसकी वजह से चंद्र को मृत्यु के समान ही भयंकर कष्ट और पीड़ा झेलनी पड़ रही थी| उस समय करुणासागर भगवान शिव ने त्रयोदशी के दिन इस दोष का निवारण किया|

जिस प्रकार से हर माह में दो बार एकादशी की तिथि आती है| उसी प्रकार ही प्रदोष व्रत की तिथि भी प्रत्येक माह में दो बार आती है|

मान्यता है कि जब भी कोई व्यक्ति प्रदोष का व्रत करता है तो उसे कई सारी बातों का ध्मकान रखकर करना बहुत ही आवश्यक है|

मान्यताओं के अनुसार प्रदोष व्रत करने वाले लोगों को केवल सात्विक आहार और हो सके तो हरे मूका हान|

စာမျက်နှာများ महत्व रखता है| प्रत्येक वार के दिन प्रदोष व्रत करने के भिन्न – भिन्न आध्यात्मिक लाभ है|

स्कन्द पुराण में प्रदोष व्रत के बारे में बताया गया है कि इस दिन प्रदोष काल में भगवान शिव अपनने र करते है|

စာမျက်နှာများ मनचाहे फल की भी प्राप्ति होती है|

प्रदोष व्रत 2026 शुभ तिथि व मुहूर्त (Pradosh Vrat 2026 Shubh Muhurat)

ဒရစ် ပန်ချန် की गणना के आधार पर वर्ष 2026 की प्रमुख प्रदोष तिथियां व्रत के प्रकार निम्नलिखित हैं:

माह तिथि व वार पक्ष व व्रत प्रकार
ဂျာနယ် 01 जनवरी, गुरुवार
15 जनवरी, गुरुवार
30 जनवरी, शुक्रवार
शुक्ल (गुरु प्रदोष)
कृष्ण (गुरु प्रदोष)
शुक्ल (शुक्र प्रदोष)
फरवरी 14 फरवरी, शनिवार
28 फरवरी, शनिवार
कृष्ण (शनि प्रदोष)
शुक्ल (शनि प्रदोष)
मार्च 16 मार्च, सोमवार
30 मार्च, सोमवार
कृष्ण (सोम प्रदोष)
शुक्ल (सोम प्रदोष)
अप्रैल 14 अप्रैल, मंगलवार
28 अप्रैल, मंगलवार
कृष्ण (भौम प्रदोष)
शुक्ल (भौम प्रदोष)
मई ၂၈ मई, गुरुवार
၂၈ मई, गुरुवार
कृष्ण/शुक्ल (गुरु प्रदोष)
ဂျာနယ် ၂၆ जून, शुक्रवार
၂၆ जून, शुक्रवार
कृष्ण/शुक्ल (शुक्र प्रदोष)
ဇူလိုင်လ ၂၁ ရက်၊ ၅ ရက်
၂၁ ရက်၊ ၅ ရက်
कृष्ण/शुक्ल (रवि प्रदोष)
अगस्त 10 अगस्त, सोमवार
25 अगस्त, मंगलवार
कृष्ण (सोम प्रदोष)
शुक्ल (भौम प्रदोष)
सितंबर ၀၉ सितंबर, बुधवार
24 सितंबर, गुरुवार
कृष्ण (बुध प्रदोष)
शुक्ल (गुरु प्रदोष)
अक्टूबर ၀၈ अक्टूबर, गुरुवार
24 अक्टूबर, शनिवार
कृष्ण (गुरु प्रदोष)
शुक्ल (शनि प्रदोष)
नवम्बर ၀၇ नवंबर, शनिवार
22 नवंबर, रविवार
कृष्ण (शनि प्रदोष)
शुक्ल (रवि प्रदोष)
နေ့ရက် 06 दिसंबर, रविवार
22 दिसंबर, मंगलवार
कृष्ण (रवि प्रदोष)
शुक्ल (भौम प्रदोष)

 

प्रदोष व्रत 2026 के नियम व पूजा विधि

हिन्दू धर्म में मनाये जाने वाले सभी त्यौहार के अलग – अलग शास्त्रीय नियम निर्धारित होते है। इसलिए उन त्योहारों या उपवासों को करने के लिये कुछ नियमों का पालन करना आवश्यक है|

साथ ही भगवान को शीघ्र – अतिशीघ्र प्रसन्न करने के लिए नीचे बताई विधि से ही पूजा संरन्न|

စာမျက်နှာ 2026

  • यदि कोई भी व्यक्ति प्रदोष का व्रत करता है, तो उसे इस दिन सुबह जल्दवी उठकर स्नान ोकरना ह्रास सार धारण करने होंगे|
  • भगवान शिव की पूजा के लिए बेलपत्र, अक्षत, दीप, धूप, फल और गंगाजल को लेकर मंदवर में जाकर शिवलि करना चाहिए|
  • पूजा के प्रारंभ में व्रत का संकल्प लीजिये और अपनी मनोकामना भगवान शिव को कहिये तथा उसे पक्ण करन सच्चे मन से प्रार्थना कीजिये|
  • प्रदोष व्रत के दिन व्रती को निराहार रहना चाहिए| सूर्यास्त से करीब एक घंटा पहले पुनः स्नान करके सफेद रंग के साफ़ कपडे धारण हरने चािए |
  • अपने घर व मंदिर के चारों ओर गंगाजल का छिडकाव करें जिससे वातावरण शुद्ध हो सके| इसके बाद आप गाय के गोबर की सहायता से मंडप तैयार कर 5 रंगों से रंगोली बना सकते हैं|
  • यह सब कार्य करने के बाद में आपको उत्तर-पूर्व दिशा में मुख करके आसन पर बैठकर भगवान शिव के "ॐ नमःशिवाय" का श्रद्धापूर्वक जप करना चाहिए|
  • मंत्र जाप के साथ Shivalinga पर जल, दूध और शहद अर्पित करें| इससे भगवान शिव प्रसन्न होकर आपको सुखद जीवन का आशीर्वाद देते हैं|

प्रदोष व्रत के आध्यात्मिक लाभ

  • प्रदोष व्रत करने से सभी प्रकार के रोगों से मुक्ति मिलती है और शरीर स्वस् थ रहता है| इस व्रत से मानसिक शांति प्राप्त होती है और तनाव से भी मुक्ति मिलती है| इसके अलावा धन-धान्य की कमी दूर होती है|
  • यह व्रत विशेष रूप से वे महिलाएं करती हैं जिन्हें संतान प्राप्ति की अभिलाषा हो| मान्यताओं के अनुसार शिवजी की कृपा से जल्द ही संतान सुख की प्राप्ति होती है|
  • शत्रुओं पर विजय और आत्मविश्वास बढ़ाने के लिए यह व्रत काफी ज्यादा कारगर माना गया है| यदि आपको कोई भय सता रहा हो तो प्रदोष व्रत रखकर महादेव से प्रार्थना करने से सभी शंत्रातु परास्त |
  • ϟ नकारात्मक प्रभाव कम हो जाते हैं|

सप्ताह के वार के अनुसार प्रदोष व्रत के लाभ

रविवार प्रदोष व्रत – रविवार को प्रदोष होने से आरोग्य की प्राप्ति होती है और जातक का शरीर निरोगी हो जाता है|

सोमवार प्रदोष व्रत

मंगलवार प्रदोष व्रत – रोगों से मुक्ति और कर्ज की समस्या को दूर करने के लिए भौम प्रदोष व्रत सर्वश्रेष्ठ माना गया है|

बुधवार प्रदोष व्रत – इस दिन व्रत करने से महादेव जातक की शिक्षा और ज्ञान संबंधी मनोकामनाओं को पूर्ण करते हैं|

बृहस्पतिवार प्रदोष व्रत – इसे करने से जीवन में शत्रुओं से राहत मिलती है और समाज में मान-सम्मान की वृद्धि होती है |

शुक्रवार प्रदोष व्रत – इसे 'शुक्र प्रदोष व्रत' कहते हैं इसे करने से जीवन में हमेशा सुख-समृद्धि और सौभाग्य बना रहता है|

शनिवार प्रदोष व्रत – इस व्रत को “शनि प्रदोष व्रत” कहा जाता है။ संतान प्राप्ति के लिए इसे सबसे शुभ और फलदायी माना गया है|

प्रदोष व्रत के दौरान ध्यान रखने योग्य मुख्य बातें

  • व्रत का संकल्प लेने के बाद पूरे दिन निराहार रहने का प्रयास करना चाहिए.
  • व्रत के दौरान नमक का सेवन बिल्कुल नहीं करना चाहिए और सात्विकता का पालन करना चाहिए.
  • पूरे दिन मन में भगवान शिव का ध्यान करें और किसी के प्रति भी क्रोध या कटु शब्द न बोलें
  • इस पावन दिन ब्रह्मचर्य का पालन करना अति आवश्यक माना गया है।
  • व्रत के दिन मांसाहार, तामसिक भोजन (लहसुन, प्याज) और नशीले पदार्थों से पूरी तरह दूर रह्राता चाभिए जाता है။

နူအာ

आज हमने इस लेख के माध्यम से  စာမျက်နှာ 2026 की तिथियों और इसके धार्मिक महत्व के बारे में विस्तार से जाना है|

प्रदोष व्रत महादेव की कृपा पाने का एक सीधा और सरल मार्ग है| हमें आशा है कि यह जानकारी आपके लिए अत्यंत उपयोगी सिद्ध होगी|

यदि आप 2026 के किसी भी व्रत, अनुष्ठान या उद्यापन के लिए योग्य और अनुभवी पंडित जी हरे की तलाश ၉၉ ပန်ဒစ် आपके लिए सबसे विश्वसनीय प्लेटफार्म है|

यहाँ आप घर बैठे ही अपनी आवश्यकतानुसार अनुभवी पंडित जी बुक कर सकते हैं जो विपकाधि-विधान संपन्न कराएंगे|

अधिक जानकारी के लिए आप हमारी वेबसाइट ၉၉ ပန်ဒစ် पर विजिट कर सकते हैं और हिन्दू धर्म के त्यौहारों की विस्तृत जानकारी प्राप्त कर सकते हैं

အကြောင်းအရာ၏ဇယား

ယခုမေးမြန်းပါ
ပန်ဒစ်စာအုပ်

Puja ဝန်ဆောင်မှုများ

..
ရေစစ်