သီရိလင်္ကာနိုင်ငံ၊ ကုန်းစ်ဝါရမ်ဘုရားကျောင်း - အချိန်ဇယား၊ သမိုင်းနှင့် ပွဲတော်များ
သီရိလင်္ကာနိုင်ငံရှိ Knoeswaram ဘုရားကျောင်းသည် ဘီစီ ၄၀၀ ခုနှစ်မှစ၍ ကိုးကွယ်ရာနေရာတစ်ခုဖြစ်ပြီး…
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हमारे इस भारत देश में हिन्दू धर्म से सम्बंधित बहुत सारे चमत्कारी मंदिर है| आज हम बात करने वाले तिरुपति बालाजी मंदिर (Tirupati Balaji Mandir) के बारे में, जो कि भारत देश के आन्ध्रप्रदेश राज्य में स्थित है| यह मंदिर भारत में उपस्थित चमत्कारी मंदिरों की सूची में आता है| यह मंदिर केवल आंध्र प्रदेश में ही नहीं बल्कि सम्पूर्ण भारत देश में भी बहुत ही अधिक प्र
जैसा कि आपको पता ही है कि यह मंदिर आंध्र प्रदेश में है लेकिन तमिलनाडु और कर्नाटोक राज्य के साथ है प्रति बहुत आस्था है| इसी कारण से आपको इस मंदिर में सबसे अधिक श्रद्धालु इन्हीं राज्यों के मिलें गे|
मान्यताओं के अनुसार भगवान तिरुपति बालाजी का मंदिर सर्वाधिक लोकप्रिय माना जाता है| इस तिरुपति बालाजी मंदिर (Tirupati Balaji Temple) में प्रतिदिन हजारों की संख्या में लोग तिरुपति बालाजर लिे दर्श न है तथा बालाजी से अपनी सभी समस्याओं को हल करने के लिए प्रार्थना करते है|

यह मंदिर सम्पूर्ण भारत के सबसे पवित्र और सुप्रसिद्ध मंदिरों में शामिल है| यह मंदिर आंध्रप्रदेश राज्य में तिरुपति जिले के तिरुमाला नामक एक पहाड़ी शहर में स्थित है| जिसमे भगवान विष्णु के अवतार भगवान वेंकटेश्वर जी विराजमान माने जाते है|
हिन्दू धर्म की पौराणिक मान्यताओं के अनुसार कहा जाता है भगवान विष्णु ने इसे माकावता को लयु कठिनाइयों से बचाने के लिए भगवान वेंकटेश्वर के रूप में इस धरती पर अवतरित हुए थे| इस तिरुपति बालाजी मंदिर (Tirupati Balaji Temple) में पर्यटकों के आने जाने की संख्या बहुत ही अधिक हात्रा | आपको बता दे कि इस तिरुपति बालाजी मंदिर को पृथ्वी के बैकुंठ के नाम से भी जाना है|
| क्र.स | समय | आयोजन |
| 1 | प्रातः 02:30- प्रातः 03:00 बजे तक | सुप्रभात सेवा/अंग प्रदक्षिणम् |
| 2 | प्रातः 03:30 – प्रातः 04:00 | थोमाला सेवा (एकन्थम) |
| 3 | प्रातः 04:00 – प्रातः 04:15 | कोलुवु और पंचांग श्रवणम (एकांतम) |
| 4 | प्रातः 04:15 – प्रातः 05:00 | प्रथम अर्चना, सहस्र नामर्चना (एकान्तम्) |
| 5 | प्रातः 05:00 – प्रातः 08:30 | वीआईपी ब्रेक दर्शन : एल1၊ एल2 (सिफारिश पत्र)၊ एल3 (कर्मचारी) |
| 6 | प्रातः 06:00 – प्रातः 07:00 | विशेष पूजा/अस्तादला पाद पद्मराधनमु/ सहस्रकलासाभिषेकम/तिरुप्पावदा၊ |
| 7 | प्रातः 07:00 – प्रातः 07:30 | शुद्धि, द्वितीय अर्चना, द्वितीय बेल |
| 8 | प्रातः 08:30 – सायं 07:00 बजे तक | सर्व दर्शन/दिव्य दर्शन/विशेष प्रवेश दर्शन |
| 9 | प्रातः 10:00 बजे | वरिष्ठ नागरिक दर्शन/शारीरिक रूप से विकलांग दर्शन/ रोगी दशान।टिकट सुबह 7:00 बजे तक लेना होगा| |
| 10 | दोपहर 12:00 बजे – शाम 05:00 बजे तक | कल्याणोत्सवम/अर्जिथा ब्रह्मोत्सवम/ वसंतोत्सवम/उंजल सेवा (डोलोत्सवम)/सुपदम दर्शन |
| 11 | अपराह्न 03:00 बजे | वरिष्ठ नागरिक दर्शन/शारीरिक रूप से विकलांग दर्शन/ रोगी दशान।टिकट दोपहर 12:00 बजे तक लेना होगा| |
| 12 | 05:30 अपराह्न – 06:30 अपराह्न | सहस्त्र दीपलांकरण सेवा |
| 13 | 07:00 अपराह्न – 08:00 अपराह्न | शुद्धि၊ कैंकर्यम् (एकन्थम), रात्रि घंटी |
| 14 | 08:00 अपराह्न – 11:30 अपराह्न | सर्व दर्शन/दिव्य दर्शन |
| 15 | रात्रि 11:30 မှ 12:00 पूर्वाह्न | शुद्धि၊ एकान्त सेवा की तैयारी |
| 16 | 12:00 बजे | एकांत सेवा |
यह मंदिर आंध्र प्रदेश में स्थित है| यहाँ पर जाने के लिए बहुत सारे साधन है| जिनके माध्यम से आप तिरुपति के लिए जा सकते है| तिरुपति बालाजी मंदिर (Tirupati Balaji Temple) आप कार, बस, फ्लाइट आदि सभी साधनों से बहुत ही आतसकानी से जा इस लेख में हम आपको जानकारी देंगे कि आप इन तीनों साधनों के माध्यम से किस प्रकार आप तिरुपद Balaji ဘုရားကျောင်း) जा सकते है|
आपकी जानकारी के लिए बता दे कि तिरुपति बालाजी मंदिर (Tirupati Balaji Temple) के सबसे नजदीक में तिरुपति अन्तराष्ट्रीय हवाई अड्डा है| इस हवाई अड्डे से तिरुपति बालाजी का मंदिर लगभग 17 किलोमीटर दूर है| जिसके लिए आपको टैक्सी या फिर बस के माध्यम से जाना होगा|
यदि आपके स्थान से तिरुपति हवाई अड्डे के लिए कोई भी फ्लाइट नहीं है तो आप केम्पेगोड़ा अनट्रा अड्डा के लिए फ्लाइट ले सकते है| इस हवाई अड्डे से तिरुपति की दुरी लगभग 250 किलोमीटर है| जिसके लिए आपको टैक्सी या बस की सुविधाएं मिल जाएगी|
तिरुपति जिले में तिरुपति रेलवे स्टेशन है| जो कि विशाखापट्टनम, चेन्नई, हैदराबाद, पूरी, सिकंदराबाद, पांडिचेरी, हजरत निजामुद्दीन, तिरुअमता, नागरकोइल, दिल्ली, जयपुर, अहमदाबाद, हावड़ा, बेंगलुरु, विजयवाड़ा तथा मुंबई के मार्ग से जुड़ा है|
इन जगहों से तिरुपति के लिए सीधे ही ट्रेने जाती है| इसके पश्चात रेलवे स्टेशन से ही आपको तिरुपति बालाजी मंदिर (Tirupati Balaji Temple) जाने के लिए मिक्सी या जाएगी|
आंध्रप्रदेश सरकार के द्वारा वहां पर विभिन्न स्थानों को जोड़ने के लिए बसों की सुविधाएं | ताकि किसी भी व्यक्ति को एक स्थान से दुसरे स्थान तक आने जाने में किसी भी प्रकार की कोई या समस् या|
इसी वजह से यदि आप इसी राज्य में निवास करते है तो आपको तिरुपति जाने के लिए बस की हुविधा बस की हुविधा बस प्राप्त हो जायेगी| यदि आप तिरुपति से बहुत ज्यादा दुरी पर रहते है तो हम आपको यही सलाह दगे कि आपको सफेरा के लिनए चुनना चाहिए, जो कि सर्वश्रेष्ठ माना जाता है|
စာမျက်နှာများ भृगु ऋषि ने आते ही योग निद्रा में लेटे हुए भगवान विष्णु की छाती पर लात मारी| ऐसा होते ही भगवान विष्णु ने भृगु ऋषि के चरण पकड़ लिए तथा उनसे यह पूछहोते लगे िें नहीं लगी| लेकिन माता लक्ष्मी जी ऋषि भृगु का ऐसा व्यवहार बिल्कुल भी पसंद नहीं आया|
उनके ऐसे बर्ताव पर भी भगवान विष्णु ने उन्हें कोई दंड नहीं दिया| इस वजह से माता लक्ष्मी उनसे नाराज़ होकर बैकुंठ से चली गयी| इसके पश्चात भगवान विष्णु ने उन्हें खोजने की कोशिश की| उस समय भगवान विष्णु को पता चला कि माता लक्ष्मी ने पृथ्वी पर पद्मवती नाम की मन्या के रूप में जन्ई |

तब भगवान विष्णु भी अपना वेश बदलकर पद्मावती जी के पास गए और उनके समक्ष शादी का प्रस्ता रादी शादी खका प्रस्ता रादी ख| जिसे देवी ने भी स्वीकार कर लिया| अब जरूरत थी शादी करने के लिए धन की| जिसका समाधान करने के लिए भगवान विष्णु ने भगवान शंकर और ब्रह्मा जी को साक्षी मानकर कुबेर न जी शंकर भगवान कुबेर के द्वारा दिए गए इस कर्ज से भगवान विष्णु के वेंकटेश्वर तथा माता लक्ष्मी जी के पद्मावती रूप का विवाह सम्पन्न हुआ|
यह मंदिर सबसे लोकप्रिय मंदिर माना जाता है| इस मंदिर में प्रत्येक दिन पर्यटकों तथा श्रद्धालुओं का आना जाना चलता रहता है| यह एक ऐसा धार्मिक स्थान है जहाँ का आकर्षण लोगों को अपनी ओर खींचकर लाता है| သို့သော်လည်း लग जाता है| लोग यहाँ पर बहुत ही दान – पुण्य का कार्य करते है|
इस मंदिर में लोग दर्शन करने से पूर्व ही अपने द्वारा मांगी हुई मन्नत को पूरा करने के ले लाताए अलपने इस प्रक्रिया को “မိုဃ်းလင်း” भी कहा जाता है| इस प्रथा को करने के लिए मंदिर परिसर में श्रद्धालुओं के लिए एक परिसर अलग से बनाया है| प्रत्येक वर्ष यहाँ पर बहुत सारे बाल इकट्ठे हो जातें है| जिन्हें मंदिर संस्था के द्वारा नीलाम करके बेच दिया जाता है|
इस तिरुपति बालाजी के मंदिर को भूलोक वैकुण्ठं कहा जाता है| जिसका अर्थ होता है – पृथ्वी पर भगवान विष्णु का निवास| इस प्रकार से लोगों का यही मानना है कि कलयुग में भगवान विष्णु अवतार लेंगे तथा अपने सभी मक्यों को साँ जाल से मोक्ष की ओर निर्देशित करेंगे|
यहाँ पर नित्य रूप से भगवान की मूर्ति को सुन्दर कपड़ों तथा गहनों से सुशोभित किया जाता है| इसके अलावा भी मंदिर में अलग से भगवान को सजाने के लिए इस्तेमाल होने वाले सोने के गहनों का ण्डार
၉၉ ပန်ဒစ် ऐसा साधन है जिसके माध्यम से आप गणेश चतुर्थी पूजा, सत्यनारायण पूजा, गृह प्रवेश पूजा आदि कई सारी धार्मिक पूजाओं के लिए ऑनलाइन पंडितजी भी बुक कर सकते है|
अब हम इस लेख के माध्यम से जानेंगे कि तिरुपति बालाजी के मंदिर में कौन – कौन से त्यौहार मनताये | मान्यताओं के अनुसार भगवान तिरुपति बालाजी का मंदिर सर्वाधिक लोकप्रिय माना जाता है|
इस तिरुपति बालाजी मंदिर (Tirupati Balaji Temple) में प्रतिदिन हजारों की संख्या में लोग तिरुपति बालाजर लिे दर्श न है तथा बालाजी से अपनी सभी समस्याओं को हल करने के लिए प्रार्थना करते है|
हिन्दू धर्म की पौराणिक मान्यताओं के अनुसार कहा जाता है| भगवान विष्णु ने इस मानवता को कलयुग की परेशानियों व कठिनाइयों से बचाने के लिए भगवान मकेंकटेश्रें पर अवतरित हुए थे| आइये जानते है कि वह कौन – कौन से त्यौहार है –
यह तिरुपति बालाजी मंदिर (Tirupati Balaji Temple) में मनाया जाने वाला सबसे महत्वपूर्ण त्यौहार है| यह त्यौहार कुल नौ दिनों तक मनाया जाता है| जिसकी शुरुआत सितम्बर या फिर अक्टूबर के महीने में आ जाती है| इस त्यौहार की शुरुआत “ध्वज स्तंभम” नामक एक खम्भे पर झंडे को फहराने से की जाती है| इस त्यौहार सभी भक्कतों के द्वारा बहकुत ही भलु से मनाया जाता है|
यह त्यौहार भी तिरुपति बालाजी मंदिर (Tirupati Balaji Temple) में मनाया जाने महत्वपूर्ण त्योहारो है से ए | इस त्योहार को दिसम्बर या जनवरी तक मनाया जाता है| हिन्दू धर्म की मान्यताओं के अनुसार इस दिन बैकुंठ के द्वार सभी भक्तों के लिए खोहल दिए जाते | इस दिन भगवान वेंकटेश्वर के मंदिर को फूलों से सजाया जाता है| तथा भगवान वेंकटेश्वर बहुत ही विशेष पूजा की जाती है|
यह त्यौहार फरवरी के महीने में मनाया जाता है| रथसप्तमी का त्यौहार चंद्रमा के बढ़ते हुए चरण को दर्शाता है तथा यह सूर्य देव को समर्यपित | माना जाता है कि इस दिन सूर्य भगवान अपनी दिशा दक्षिण पूर्व से उत्तर पूर्व की और बदल जाता है| इसी कारण इस दिन से वसंत ऋतू का आरम्भ हो जाता है|
तेलगु नव वर्ष को ही उगादि के नाम से भी जाना जाता है जो कि मार्च या अप्रैल के महीने महें मनाया जैता | तेलगु लोग इस त्यौहार को बहुत ही हर्षोल्लास के साथ मनाते है| इस शुभ अवसर पर भगवान तिरुपति के मंदिर को आम का पत्तों की सहायता से सजाया जाता है| इस त्यौहार की मुख्य प्रथा “पंचांग श्रवणं” है जिसमे पुजारी ज्योतिष विद्या की सहोयता से आें गे घटनाओं की भविष्य वाणी करते है|
हमारे इस ऑनलाइन प्लेटफार्म ၉၉ ပန်ဒစ် की सहायता से आपको नए घर की वास्तु शांति पूजा के लिए आपके ही शहर में अनुभवी पंडित उपलब्ध हो जाएंगे|
तिरुपति के वनस्पतियों तथा जीवों के बारे में जानने के लिए आपको एक बार इस, श्ररी वीडियाेश्वर अवश्य ही आना चाहिए| इस राष्ट्रीय उद्यान को शोरिया थंबर्गगिय, रेड सैंडर्स तथा चन्दन जैसे दुर्लभ पौधतां का घर मा|
यह मंदिर तिरुमाला के पहाड़ी क्षेत्र में स्थित है| इसे पर्यटकों द्वारा घुमने के लिए सबसे लोकप्रिय स्थान माना गया है| यह श्री पद्मावती अम्मावरी मंदिर भगवान वेंकटेश्वर की पत्नी पद्मावती जी ही समर्पित किया|

अगर आप तिरुपति के आस – पास कोई घूमने योग्य स्थान की तलाश कर रहे है तो ब आपके हरमकए की आपके हरमकए क अच्छी जगह है| यह स्थान पवित्र होने के साथ ही उस धारा के नाम से भी जाना जाता है जो की भगवान शइरकार को समर्स पिद बहती है|
तिरुपति के निकट घुमने योग्य स्थानों में हिरण पार्क भी शामिल है| तिरुमाला की पहाड़ी के आधार पर स्थित यह पार्क बहुत ही बड़ी संख्या में हिरणों, मोर ताथा अन्य नवाआ गया है| यहाँ आने वाले पर्यटक पार्क में घूम सकते है, जानवरों आने आने वाले पर्यटक पार्क में घूम सकते है ၊ सकते है|
एक पत्थरों के मेहराब के रूप में है| यह स्थान तिरुपति के सबसे प्रसिद्ध पर्यटक स्थानों में से एक है| यह स्थान अपनी विशेष वास्तुकला के बारे में जाना जाता है|
आज हमने इस आर्टिकल के माध्यम से तिरुपति बालाजी मंदिर (Tirupati Balaji Temple) के बारें में काही बाते |जानी आज हमने तिरुपति बालाजी पूजन के फ़ायदों के बारे में भी जाना तथा वहां तक जाने के लिए ताधनो में
हम उम्मीद करते है कि हमारे द्वारा बताई गयी जानकारी से आपको कोई ना कोई मदद मिली होगी| इसके अलावा भी अगर आप किसी और पूजा के बारे में जानकारी लेना चाहते है। तो आप हमारी वेबसाइट ၉၉ ပန်ဒစ် पर जाकर सभी तरह की पूजा या त्योहारों के बारे में सम्पूर्ण जानकारी ले सकते है|
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Q.तिरुपति में सबसे ख़ास क्या है ?
A.इस मंदिर में भगवान वेंकटेश्वर की प्रतिमा बहुत ही ख़ास और आलोकिक है|
Q.तिरुपति बालाजी मंदिर कहा स्थित है ?
A.यह मंदिर आंध्रप्रदेश राज्य में तिरुपति जिले के तिरुमाला नामक एक पहाड़ी शहर में स्थित है|
Q.तिरुपति बालाजी मंदिर का मालिक कौन है ?
A.यह मंदिर तिरुमला तिरुपति देवस्थानम (TTD) के द्वारा संचालित किया जाता है, जो कि आंध्रक प्रदेश में है|
Q.तिरुपति बालाजी मंदिर कब जाना चाहिए ?
A.ऐसे तो आप कभी भी तिरुपति बालाजी मंदिर जा सकते है| लेकिन सबसे सही समय अक्टूबर से मार्च के बीच होता है|
အကြောင်းအရာ၏ဇယား