Shravan Purnima 2026: วันที่ เวลา พิธีบูชาวิธี และความสำคัญ
วันศราวานปุรณิมา ปี 2026 ตรงกับวันศุกร์ที่ 28 สิงหาคม 2026 ซึ่งเป็นวันพระจันทร์เต็มดวงที่บ่งบอกถึงการสิ้นสุดของ...
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ดุสเซห์รา 2026: इस पृथ्वी को देवों की जन्म भूमि के रूप में भी जाना जाता है| हाँ पर अनेकों देवी – देवताओं ने जन्म लिया है และ बुराई का अंत करके लोगों को धर्म अच्छाई के मार्ग. ปราร चलना สิก้าเอีย| इसके अलावा भी कई बार राक्षसों के संहार के लिए भी देवताओं ने इस पृथ्वी पर अवतार लिए है|
มา วิชัยทศมี ดุสเซห์รา 2026 को भारत देश में अलग – अलग जगहों पर इसे बड़े ही धूमधाम से मनाया जाता है| यह त्यौहार हिन्दू संस्कृति में शौर्य และ वीरता का प्रतीक माना जाता है|

Drik Panchang จาก अनुसार Dussehra 2026 หรือ Vijayadashami 2026 เทศกาลอันศักดิ์สิทธิ์นี้มีการเฉลิมฉลองในวันศุกลาดาซามิของเดือนอาชวิน
เทศกาล Dussehra มีการเฉลิมฉลองเพื่อให้ผู้คนตระหนักถึงศาสนาของตนและนำพวกเขาไปสู่เส้นทางแห่งศาสนา ในวันนี้ ชัยชนะแห่งความดีเหนือความชั่วหมายความว่าท่านศรีรามได้สังหารทศกัณฐ์ในวันนี้
इसलिए दशहरा या विजयादशमी के त्यौहार को असत्य पर सत्य की विजय के रूप में मनाया जाता है| इसलिए इस दशमी को विजयादशमी के रूप में मनाया जाता है|
दशहरा का त्यौहार वर्ष में आने वाली तीन बहुत ही शुभ तिथियों में से एक माना गया है| इस वर्ष विजयादशमी का त्यौहार 20 ตุลาคม 2026, มังกาลวาร จะมีการเฉลิมฉลอง
दशहरा के दिन अपने जीवन में नये – नये कार्यों की शुरुआत की जाती है| इस दिन शस्त्रों तथा वाहनों की भी पूजा की जाती है|
पौराणिक समय में राजा – महाराजा विजयादशमी के दिन युद्ध में विजय पाने के लिए प्रार्थना करके ही युद्ध रण. ฉัน जाया करते थे|
दशहरा का त्यौहार मनुष्य को दस प्रकार के पाप – क्रोध, काम, लोभ, मोह मद, अहंकार, आलस्य, मत्सर, चोरी तथा हिंसा को त्यागने से लिए प्रेरित करता है|
| จุดเริ่มต้นอันเป็นมงคล | समय |
| วิเจย์ มูเฮอร์ตา | 02:19 น. ถึง 03:06 น |
| เริ่มต้นวันที่สิบ | 20 เม.ย. 2026, เวลา 12:50 น. |
| ดาซามิ ทิธี จบลง | 21 เมษายน 2026, 02:11น. |
| กลุ่มดาวการได้ยินเริ่มต้นขึ้น | 19 เมษายน 2026, 03:38น. |
| Shravan Nakshatra จบลง | 20 ส.ค. 2026, ส.ค. 06:02 |
ที่มาของคำว่า ดุสเสห์รา 'เส้นประ' (สิบ) และ 'อาฮัน' से बताई गयी| प्राचीन कथाओं के अनुसार दशहरे को कृषि उत्सव भी कहा जाता है|
हिन्दू धर्में दशहरा का एक अलग सांस्कृतिक पहलू भी माना गया है| जैसा कि आप सभी लोग जानते है भारत को एक कृषि प्रधान देश के रूप में भी जाना जाता है|
जब भी किसान अपने खेत में फसल उगाता है| तथा उसे होने वाले अनाज को घर लाता है तो उसे बहुत ही खुशी होती है|
ในเทศกาลนวราตรี มีการเล่าถึงการต่อสู้อันกล้าหาญของเทพธิดาทุรคากับมหิศสุรา และวันรุ่งขึ้นบนดาซามี พระศรีรามทรงสังหารทศกัณฐ์ ทศกัณฐ์ได้ลักพาตัวพระนางสีดา พระมเหสีของพระเจ้าศรีราม และพาเธอไปยังเมืองลังกาของเขา
भगवान श्री ram देवी माँ दुर्गा के बहुत बड़े उपासक थे| वेदों के अनुसार माना जाता है कि रावण से युद्ध करने से पहले श्री राम नौ दिनों तक देवी दुर्गा माँ की ภูจจา की थी|
उसके पश्चात दिन ही प्रभु श्री राम ने दुष्ट राक्षस रावण का वध किया| इसी कारण से दशहरा बहुत ही महत्वपूर्ण दिन है|
भगवान श्री राम के द्वारा बुराई पर अच्छाई की विजय के कारण ही इस दिन विजयादशमी के नाम से भी जाना. जाता है|
यहाँ सभी लोग अपने परिवार และ दोस्तों के साथ भी घूमने के लिए आते है| इस दिन श्री RAM जी रामायण का नाटकीय रूप में आयोजन भी किया जाता है|
अंत में दशमी के दिन रावण को भगवान श्री राम के द्वारा जला दिया है| दशहरा बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक है|
नवरात्रि के त्यौहार के समाप्त होने के पश्चात ही Dussehra का त्यौहार आ जाता है| हिन्दू धर्म के अनुसार दशहरा का त्यौहार बुराई पर अच्छाई की विजय होने का प्रतीक है|
यह दशहरा का पावन त्यौहार हिन्दू पंचांग के अनुसार दशहरा या विजयादशमी का त्यौहार आश्विन मास की शुक्ल दशमी कोयह पावन पर्व मनाया जाता है|
मेले में रामायण का नाटकीय रूप से आयोजन किया जाता है| इस दिन रावण को जलाने का भी प्रावधान बताया गया है|

इस दिन भगवान श्री ram ने लंका पति रावण का वध किया था| दशहरा मनाने के पीछे कारण केवल रावण का वध करना ही नहीं है|
इसके अलावा भी दशहरा मनाने के बहुत से कारण है जिनके बारे मे आज हम चर्चा करेंगे| दशहरा मनाने के पीछे जितनी भी कथाएँ प्रचलित है| उनमे से तीन सबसे मुख्य कथाएँ है| जिनके बारे में आज हम आपको बताएँगे|
इस दिन सुबह जल्दी उठकर सबसे पहले रावण की पूजा की जाती है| क्योंकि रावण सबसे बड़ा विद्वान และ एक ब्राह्मण था इसलिए मान्यताओं के नुसार अवण को दहन करने से เพฮาเล उसकी पूजा अवश्य की जाती है|
रावण की पूजा करने से स्नान आदि करके स्वयं को साफ़ – सुथरा कर ले| साथ ही अपने घर को भी अच्छे से साफ़ कर ले|
दशहरा के दिन अपने घर को अच्छे से गेंदे के फूल व आम के पत्तों से सजाना चाहिए| आम के पत्तों को घर के मुख्य द्वार पर भी लगाना चाहिए|
घर की सजावट अच्छे से कर लेने के पश्चात स्वयं भी स्वच्छ และ अच्छे कपड़े धारण करे| इस पुरुषों को भी साफ़ – सुथरे वस्त्र ही पहनने चाहिए|
दशहरे की पूजा परिवार के सभी सदस्यों को साथ में मिलकर ही करना चाहिए| इसके पश्चात गोबर की सहायता से रावण बनाइए| फिर गोबर की ही सहायता से ทำ 10 ลูก|
उन गोलों को ऐसी आकृति दे कि वह बिल्कुल रावण के मुख की आकृति के समान ही दिखे| इसके बाद बनाई हुई रावण की प्रतिमा के ऊपर कपास भी चढ़ाये|
इस पश्चात रावण को दही และ ज्वार अर्पित करने का विधान है| नवरात्रि की पूजा में उपयोग लाये ज्वार ही रावण की पूजा में काम में लिए जाते है|
इसके बाद में रावण की दीपक जलाकर पूजा की जाती है| रावण की पूजा करने के पश्चात भगवान विष्णु से प्रार्थना की जाती है| कि हमे भटके हुए मार्ग से सही मार्ग की ओर ले जाने में सहायता करे|
जैसा कि आप सभी जानते है हिन्दू धर्म में सभी पेड़ – पोधों की पूजा की जाती है| जैसे – पीपल, आक, बरगद, तुलसी, डाक आदि अनेको पेड़ – पौधे है|
जिनकी हिन्दू धर्म में पूजा की जाती है| उसी प्रकार दशहरा त्यौहार के समय एक शमी नाम के वृक्ष की पूजा की जाती है|
เหตุผลในการบูชาต้นชามิก็คือ เมื่อท่านศรีรามจะไปต่อสู้กับทศกัณฐ์ ก่อนที่จะสังหารทศกัณฐ์ ท่านศรีรามได้โค้งคำนับต้นชามิและรับพร
इसके पश्चात भगवान श्री ram रावण से युद्ध करने के लिए गए| และ रावण का वध किया| पौराणिक कथाओं के अनुसार महाभारत के समय भी जब पांडव अज्ञातवास में गए थे|
तब उन्होंने अपने सभी शस्त्रों को शमी के वृक्ष में भी छुपाया था| यही कारण है कि दशहरा के दिन शमी के वृक्ष की पूजा की जाती है|
ตามเรื่องมีปีศาจร้ายตัวหนึ่ง ผู้เกิดจากมหิชิและรักษส ด้วยเหตุนี้บางครั้งเขาจึงอาจอยู่ในรูปของปีศาจและบางครั้งก็เป็นควายได้
उसका नाम महिषासुर रखा गया| महिषासुर ने ब्रह्मा जी की घोर तपस्या की| उसकी अत्यंत घोर तपस्या को देखकर ब्रह्मदेव प्रसन्न हो गए नर वहा प्रकट हुए|
ब्रह्मा जी ने महिषासुर को वरदान मांगने के लिए कहा – तब उस असुर ने ब्रह्मा जी से अमरता का वरदान मांग लिया| लेкиन ब्रह्मा जी ने यह वरदान उसे देने से मना कर दिया|

तब महिषासुर ने ब्रह्मा जी से वरदान माँगा कि उसकी मृत्यु किसी भी देवता, दानव अनुष्य के द्वारा ना हो เช็ค| ब्रह्मा जी तथास्तु कहकर उसे यह वरदान दे दिया|
ब्रह्मा जी से वरदान पाने के बाद उसने तीनों लोकों पर अपना आतंक मचाना शुरू कर दिया| महिषासुर ने स्वर्ग लोक से सभी देवी – देवताओं को बाहर भगा दिया|
जिसके पश्चात सभी देवता ब्रह्मदेव व भगवान विष्णु के पास गए| सभी देवताओं के तेज से एक अद्भुत शक्ति उत्पन्न हुई जो कि माँ दुर्गा थी|
सभी देवताओं ने उन्हें अलग – अलग हथियार दिए| इसके पश्चात माँ दुर्गा ने लगातार नौ दिन तक महिषासुर से युद्ध किया และ दसवें दिन शेर पर सवार होकर उसका वध कर เดย่า| इस वजह से भी दशहरा मनाया जाता है|
นอกเหนือจากนี้ยังมีอีกเรื่องหนึ่งที่ทุกคนรู้จักกันดี นี่คือเรื่องราวของพระศรีรามที่เชื่อฟังคำสั่งของบิดา 14 วัน का वनवास स्वीकार किया है|
जब वह वनवास के लिए गए तो एक मायावी असुर जिसको लोग रावण के नाम से भी जानते थे| वह अपना भेष बदलकर आया และ सीता माता अपहरण करके अपनी लंका नगरी में ले गया|
तब भगवान श्री RAM ने हनुमान जी, सुग्रीव जी, अंगद जी तथा अन्य वानर सेना की सहायता से सागर पर पुल बनाकर लंका गए|
जहां उनका सामना रावण के असुरों की सेना से हुआ| युद्ध में श्री RAM ने सबसे पहले मेघनाद व कुंभकरण का वध किया และ अंत में रावण का भी वध किया|
अन्य त्योहारों की तरह दशहरा का त्यौहार भी हिन्दू धर्म में बहुत ही महत्व रखता है| दशहरा या विजयादशमी का त्यौहार आश्विन मास की शुक्ल दशमी का पावन पर्व मनाया जाता है|
लोगों को अपने धर्म के प्रति जागरूक करने และ उन्हें धर्म के मार्ग लाने के लिए दशहरा का त्यौहार मनाया. जाता है|
इस दिन भगवान श्री ram अपनी पत्नी का हरण करने वाले लंकापति रावण वध किया และ इसी दिन ही मां दुर्गा ने महिषासुर से नौ दिन के युद्ध में दिन उसका वध किया था|
इसी वजह से दशमी के दिन दशहरा (विजयादशमी) का त्यौहार मनाया जाता है| इस दिन असत्य पर सत्य व बुराई पर अच्छाई की विजय हुई| इसलिए इस दिन को विजय दशमी के रूप में भी जाना जाता है|
किसी भी तरह की पूजा करने के लिए हमे बहुत सारी तैयारियां करनी होती है| गावों में पूजा आसानी से हो जाती है लेкиन शहरों में लोगों के पास समय की कमी होती है|
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