โลโก้ 0%
จอง Griha Pravesh Puja ออนไลน์ จอง Griha Pravesh Puja ออนไลน์ จองทันที

โมกษฏา เอกาทชิ วรัต กะตะ: โมกษฏา เอกาทชิ วรัต กะตะ

20,000 +
บัณฑิตเข้าร่วม
1 แสน+
พิธีบูชา
4.9/5
คะแนนลูกค้า
50,000
ครอบครัวที่มีความสุข
ภุมิกา เขียนโดย: ภุมิกา
อัพเดตครั้งล่าสุด:January 11, 2024
โมกษฏา เอกาดาชิ วรัต กะตะ
สรุปบทความนี้ด้วย AI - ChatGPT ความฉงนสนเท่ห์ เมถุน Claude กร๊าก

โมกษฏา เอกาดาชิ วรัต กะตะ: मार्गशीर्ष माह के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि को मोक्षदा एकादशी (Mokshada Ekadashi) के रूप में जाना जाता ใช่|

जैसा कि आप सभी लोगों को ज्ञात है कि हिन्दू धर्म में एकादशी तिथि का बहुत ही बड़ा महत्त्व बताया गया है| लगभग हर एकादशी तिथि में भगवान श्री विष्णु की पूजा की जाती है| मोक्षदा एकादशी (Mokshada Ekadashi) के दिन भगवान विष्णु की पूर्ण विधि-विधान से पूजा करनी चाहिए|

โมกษฏา เอกาดาชิ วรัต กะตะ

माना जाता है कि मोक्षदा एकादशी (Mokshada Ekadashi) के दिन भगवान विष्णु की पूजा करने से भक्तो को अपार सुख-समृद्धि तथा मोक्ष की प्राप्ति होती है|

इस दिन मोक्षदा एकादशी व्रत कथा (โมคชาดา เอกาดาชิ วรัต กะทะ) को पढने तथा सुनने का बहतु बड़ा महत्व बताया गया है|

आज हम इस लेख की सहायता से आपको मोक्षदा एकादशी (โมคชาดา เอกะดาชิ) के महत्व तथा मोक्षदा एकादशी व्रत कथा (โมกษฏา เอกาดาชิ วรัต กะตะ) จะบอกเกี่ยวกับ.

นอกจากนี้หากคุณต้องการบูชาออนไลน์เช่น Mangal Bhaat Puja (มังกัล บัต ปูจา) หนี้มุกติบูชา (ริน มุกติ บูชา) และสำหรับ Rudrabhishek Puja คุณสามารถจอง Pandit ออนไลน์ได้อย่างง่ายดายด้วยความช่วยเหลือจากเว็บไซต์ 99Pandit ของเรา หากต้องการเข้าร่วมกับเราคุณสามารถเยี่ยมชมเราได้ Whatsapp คุณยังสามารถติดต่อเราได้ที่

ความสำคัญของโมกษฏะ เอคาดษิ – ความสำคัญของโมกษฏะ เอคาดษี

धर्मराज युधिष्ठिर ने भगवान श्रीकृष्ण से कहा कि हे भगवन ! मैंने मार्गशीर्ष कृष्ण एकादशी जिसे मोक्षदा एकादशी (โมคชาดา เอกะดาชิ) भी कहा जाता है, के बारे सम्पूर्ण विस्तार से सुना है|

किन्तु आप अब मुझे मार्गशीर्ष शुक्ल पक्ष एकादशी में आने वाली एकादशी के बारे में बताइए कि इस एकादशी का คุณรู้ไหม? इसका विधान क्या है? इसकी व्रत करने से किस प्रकार के फल की प्राप्ति होती है|

इस पर भगवान श्रीकृष्ण बोले – हे युधिष्ठिर मार्गशीर्ष माह के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि. को मोक्षदा एकादशी (โมคชาดา เอกาดาชิ) कहा जाता है|

माना जाता है कि मोक्षदा एकादशी (โมคชาดา เอกาดาชิ) व्रत को करने मोक्ष की प्राप्ति एवं चिंतामणि की भांति ही सभी मनोकामनाएँ पूर्ण होती है|

इसकी मोक्षदा एकादशी (โมคชาดา เอกาดาชิ) व्रत की सहायता आप अपने पितरों के सभी दुखों को भी खत्म कर सकते है|

अब मैं तुम्हे मोक्षदा एकादशी व्रत कथा (โมคชาดา เอกาดาชิ วรัต กะทะ) के बारे में बताऊंगा| जिसको मोक्षदा एकादशी (โมคชาดา เอกาดาชิ) के दिन पढ़ना बहुत ही शुभ माना जाता है|

โมกชาทา เอกาดาชิ วรัต กะตะ – โมกษฏา เอกาดาชิ วรัต กะตะ

बहुत ही पुराने समय की बात है एक गोकुल नामक शहर में वैखानस नाम के राजा का शासन था| माना जाता है कि उस राजा के राज्य में चारों वेदों के बहुत बड़े ज्ञाता ब्राह्मण रहते थे|

वह राजा अपनी प्रजा के प्रति बहुत ही दयालु था एवं उनका पुत्रवत पालन करता है| एक बार रात्रि के समय राजा को एक स्वप्न आया|

जिसमे राजा ने यह देखा कि उनके पिता नरक में है| यह देखकर राजा को बहुत आश्चर्य हुआ| सुबह होते ही राजा अपने विद्वान ब्राह्मणों के साथ गया तथा उन्हें अपने स्वप्न के बारे में बताया|

राजा ने ब्राह्मणों से कहा कि उन्होंने अपने पिता को नरक में कष्ट सहते हुए देखा तथा उन्होंने मुझसे कहा. ใช่แล้ว ! मैं नरक में हूँ| मुझे यहाँ से मुक्त करवाओ|

जिस समय मैंने अपने पिता के द्वारा यह सुना उस समय से ही में बहुत परेशान हो रहा हूँ| मेरे मन भी अशांत है|

उस स्वप्न के बाद से ही मुझे इस राज्य, पुत्र, स्त्री, हाथी, घोड़े, धन आदि कहीं पर भी सुख प्रतीत नहीं हो रहा है|

कृपया मुझे बताइए कि मैं क्या करूँ? राजा ने उन सभी से कहा कि हे ब्राह्मण देवताओं ! इस दुःख के कारण मेरा सम्पूर्ण शरीर भीतर से जल रहा है|

मुझ पर कृपा करके तप, व्रत, दान आदि कोई ऐसा उपाय बताएं जिसे मेरे पिता को मुक्ति मिल सके| राजा ने कहा कि ऐसे पुत्रों का जीवन पूर्ण रूप से व्यर्थ है जो अपने माता-पिता का उद्धार नहीं कर सकते ใช่|

जिस प्रकार एक चंद्रमा सम्पूर्ण जगत में प्रकाश कर देता है, उसी प्रकार एक सर्वोत्तम पुत्र जो कि अपने มหา पिता का उद्धार कर सकता है, वह हजारों मूर्ख पुत्रों से बेहतर है|

ब्राह्मणों ने राजा कहा कि हे मान्यवर ! यहाँ पास ही भूत,वर्तमान तथा भविष्य के ज्ञाता पर्वत ऋषि का आश्रम है|

वह आपकी समस्या को हल करने में आपकी सहायता अवश्य करेंगे| ब्राह्मणों के कहने पर राजा उन मुनि के आश्रम में पहुंचे|

उस आश्रम बहुत सारे ऋषि-मुनि तपस्या कर रहे थे| उसी स्थान पर पर्वत ऋषि भी विराजमान थे| राजा ने पर्वत ऋषि को साष्टांग दंडवत प्रणाम किया|

ऋषि ने राजा से उनकी कुशलता के बारे में पूछा| जिसका उत्तर देते हुए राजा ने कहा कि आपकी कृपा से राज्य में सब कुछ कुशल मंगल है किन्तु कुछ समय से ฉัน मन में अशांति हो रही है|

राजा के इतना कहने पर पर्वत मुनि ने अपनी आँखे बंद की तथा भूतकाल को विचारने लगे| कुछ ही समय के पश्चात पर्वत ऋषि ने कहा – हे राजन ! मैंने अपनी योगशक्ति के बल पर तुम्हारे पिताजी के द्वारा किये गए कर्मों के बारे में पता लगाया है|

उन्होंने अपने पिछले जन्म में कामातुर होकर एक पत्नी को रति प्रदान की किन्तु सौत के कहने पर दूसरी पत्नी को ऋतुदान मांगने पर भी नहीं दिया|

उनके द्वारा किये गए इसी पापकर्म के कारण ही उन्हें नरकलोक में जाना पड़ा| पर्वत मुनि के ऐसा कहने पर राजा ने उनसे इसका समाधान बताने के लिए कहा|

तब मुनि ने कहा – हे राजन ! आपको अपने पिता की नरक से मुक्ति कराने के लिए मार्गशीर्ष एकादशी का व्रत करना चाहिए|

इस एकादशी व्रत के प्रभाव से आपके पिता को नरक से मुक्ति अवश्य मिल जाएगी| पर्वत मुनि के कहने पर वह राजा अपने महल आया एवं उनके कहे अनुसार ही अपने पूरे परिवार के साथ मोक्षदा. एकादशी (โมกษฏา เอกาดาชิ) का व्रत किया तथा उसका सम्पूर्ण पुण्य अपने पिताजी को समर्पित कर दिया|

इस मोक्षदा एकादशी (Mokshada Ekadashi) व्रत को करने उसके पिता को मुक्ति मिल गयी และ स्वर्ग जाते हुए अपने पुत्र से คองเน่ लगे – हे पुत्र तेरा कल्याण हो| यह कहकर स्वर्ग की चले गए|

สารบัญ

สอบถามตอนนี้
จอง Pandit

บริการบูชา

..
ตัวกรอง