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Geet Govind Lyrics in Hindi: गीत गोविन्द भजन हिंदी में

Bhumika
Written By Bhumika
Last Updated April 22, 2026
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गीत गोविन्द भजन: गीत गोविन्द दुनिया की सबसे मीठी और प्यारी किताब मानी जाती है। इसे महान कवि जयदेव जी ने बहुत ही सुंदर संस्कृत में लिखा है। छोटे बच्चों से लेकर बड़ों तक, हर कोई इसकी मधुर धुन का दीवाना हो जाता है।

इस ग्रंथ की हर पंक्ति में मिश्री जैसी मिठास घुली हुई है। उनके शब्द सुनने में किसी सुंदर संगीत की तरह महसूस होते हैं। यही कारण है कि इसे संस्कृत साहित्य का सबसे दिव्य ग्रंथ कहा जाता है।

इस भजन में राधा और कृष्ण के प्रेम की जादुई कहानी है। यह हमें सिखाता है कि हमारी आत्मा भगवान से कितना प्यार करती है। यह केवल एक कहानी नहीं, बल्कि भक्ति की सच्ची यात्रा है।

राधा जी का प्रेम हमें भगवान के करीब जाने का रास्ता दिखाता है। कृष्ण की बांसुरी की तरह यह भजन भी सबको शांति और आनंद देता है। इसे पढ़ने से मन में अच्छे विचार और सच्ची खुशी आती है।

99Pandit के इस खास ब्लॉग में आपको बहुत कुछ मिलेगा। हमने यहाँ गीत गोविन्द भजन के पूरे लिरिक्स और अर्थ दिए हैं।

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गीत गोविन्द भजन के सम्पूर्ण लिरिक्स हिंदी में – Geet Govind Lyrics in Hindi

श्रितकमलाकुचमण्डल धृतकुण्डल ए।
कलितललितवनमाल जय जय देव हरे॥

दिनमणिमण्डलमण्डन भवखण्डन ए।
मुनिजनमानसहंस जय जय देव हरे ॥

कालियविषधरगंजन जनरंजन ए।
यदुकुलनलिनदिनेश जय जय देव हरे ॥

मधुमुरनरकविनाशन गरुडासन ए।
सुरकुलकेलिनिदान जय जय देव हरे ॥

अमलकमलदललोचन भवमोचन ए।
त्रिभुवनभवननिधान जय जय देव हरे ॥

जनकसुताकृतभूषण जितदूषण ए।
समरशमितदशकण्ठ जय जय देव हरे ॥

अभिनवजलधरसुन्दर धृतमन्दर ए।
श्रीमुखचन्द्रचकोर जय जय देव हरे ॥

तव चरणे प्रणता वयमिति भावय ए।
कुरु कुशलंव प्रणतेषु जय जय देव हरे ॥

श्रीजयदेवकवेरुदितमिदं कुरुते मृदम् ।
मंगलमंजुलगीतं जय जय देव हरे ॥

राधे कृष्णा हरे गोविंद गोपाला नन्द जू को लाला ।
यशोदा दुलाला जय जय देव हरे ॥

क्या है गीत गोविन्द के हर शब्द का अर्थ?

गीत गोविन्द की हर पंक्ति में एक गहरा रहस्य और मधुर भाव छिपा है। जयदेव जी ने भगवान कृष्ण के दिव्य गुणों को इन शब्दों में पिरोया है।

आइए, इस पावन भजन के अनमोल शब्दों का सरल अर्थ विस्तार से समझते हैं।

“श्रितकमलाकुचमण्डल” का अर्थ:

इसका अर्थ है कि लक्ष्मी जी (कमला) के हृदय में भगवान कृष्ण हमेशा बसते हैं। यह शब्द राधा और कृष्ण के अटूट और पवित्र प्रेम को दर्शाता है। प्रभु अपने भक्तों के प्रेम और समर्पण के वश में सदैव रहते हैं।

“दिनमणिमण्डलमण्डन” का अर्थ:

यहाँ दिनमणि का अर्थ सूर्य है, जो पूरे संसार को रोशनी देता है। श्रीकृष्ण इस सूर्य के समान तेजस्वी आभूषण की तरह पूरे ब्रह्मांड को चमकाते हैं। उनकी चमक से अज्ञान का अंधेरा हमेशा के लिए मिट जाता है।

“कालियविषधरगंजन” का अर्थ:

यह पंक्ति भगवान की उस दिव्य लीला को याद दिलाती है जब उन्होंने कालिया नाग को हराया था। कृष्ण ने जहरीले नाग के घमंड को चूर-चूर कर यमुना को शुद्ध कर दिया था। यह बुराई पर अच्छाई की जीत का सबसे सुंदर संदेश है।

“मुनिजनमानसहंस” का अर्थ:

जैसे एक हंस मानसरोवर के निर्मल जल में खुशी से तैरता है, वैसे ही प्रभु ऋषियों के मन में रहते हैं। ज्ञानी और मुनि लोग हमेशा अपने ध्यान में कृष्ण के दर्शन करते हैं। उनका मन हमेशा प्रभु के चरणों में ही सुख पाता है।

“जय जय देव हरे” का अर्थ:

यह हर पद के अंत में आने वाला एक विजय का जयघोष है। इसका अर्थ है, “हे दुखों को हरने वाले हरि, आपकी जय हो!” यह जादुई शब्द भक्तों के मन में असीम शक्ति और उत्साह भर देता है।

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क्यों इतना पवित्र और शक्तिशाली है गीत गोविन्द भजन?

गीत गोविन्द केवल एक कविता नहीं, बल्कि साक्षात भगवान कृष्ण का मधुर संगीत है। यह भजन इतना शक्तिशाली है कि इसे सुनने मात्र से मन के सारे दुख और चिंताएं दूर हो जाती हैं।

1. जगन्नाथ पुरी की परंपरा: भगवान जगन्नाथ को गीत गोविन्द इतना प्रिय है कि इसके बिना उनका भोग और शयन अधूरा माना जाता है। मंदिर के सेवक हर रात प्रभु को सुलाने के लिए इन मीठे पदों का गायन पूरी श्रद्धा से करते हैं।

2. भक्ति का त्रिवेणी संगम: इस ग्रंथ में संगीत, सुंदर काव्य और गहरी भक्ति का अद्भुत मेल मिलता है। इसकी हर पंक्ति एक मधुर धुन की तरह बहती है जो सीधे सुनने वाले के हृदय को स्पर्श करती है।

3. महान संतों का प्रेम: चैतन्य महाप्रभु और मीराबाई जैसे महान संत इस रचना को गाते हुए भाव-विभोर हो जाते थे। यहाँ तक कि गोस्वामी तुलसीदास जी ने भी इस ग्रंथ की दिव्यता और पवित्रता का सम्मान किया है।

4. मानसिक शांति का स्रोत: इस भजन की सकारात्मक ऊर्जा मन की अशांति को जड़ से मिटा देती है। इसे सुनने से घर का वातावरण पवित्र और खुशहाल बनता है, जिससे तनाव कम होता है।

5. विश्व की अनमोल धरोहर: अपनी सांस्कृतिक गहराई के कारण इसे UNESCO की विश्व धरोहर सूची में शामिल करने के योग्य माना जाता है। यह भारत की प्राचीन कला और संस्कृति का सबसे चमकीला और अनमोल रत्न है।

निष्कर्ष

गीत गोविन्द भजन केवल एक साधारण भजन या काव्य नहीं है। यह राधा-कृष्ण की अटूट और अनंत प्रेम कहानी का एक जीवित प्रमाण है।

सदियों से भक्त इस मधुर रचना के जरिए भगवान के सबसे करीब महसूस करते आए हैं। जयदेव जी के शब्द हमें सीधे वृंदावन की कुंज गलियों का अनुभव कराते हैं। यह ग्रंथ आत्मा का परमात्मा से मिलन की सुंदर गाथा सुनाता है।

इस दिव्य भजन को रोज़ाना सुनना आपके जीवन में अद्भुत सकारात्मकता लाता है। इसके पवित्र शब्दों की गूँज मन की अशांति और तनाव को पूरी तरह मिटा देती है।

अपनी भक्ति को और भी खास बनाने के लिए सही पूजन विधि बहुत जरूरी है। 99Pandit आपकी इस आध्यात्मिक यात्रा में सबसे भरोसेमंद और उत्तम साथी है।

Table Of Content

Frequently Asked Questions

गीत गोविन्द भजन किसने लिखा है?

इस दिव्य और मधुर ग्रंथ की रचना महाकवि जयदेव जी ने 12वीं शताब्दी में की थी। वे भगवान कृष्ण के बहुत बड़े भक्त और ओडिशा के रहने वाले एक महान संत कवि थे। उनके शब्दों में राधा-कृष्ण के प्रति अटूट प्रेम और गहरी भक्ति साफ़ झलकती है।

गीत गोविन्द भजन का अर्थ क्या है?

इसका सीधा और सरल अर्थ है "गोविन्द यानी कृष्ण के गीत"। इसमें राधा और कृष्ण के बीच के पवित्र और आध्यात्मिक प्रेम का बहुत सुंदर वर्णन किया गया है। यह भजन आत्मा का परमात्मा से मिलन की एक मधुर प्रेम गाथा को दर्शाता है।

गीत गोविन्द कहाँ गाया जाता है?

यह भजन पूरी दुनिया के कृष्ण मंदिरों में बहुत श्रद्धा के साथ गाया जाता है। विशेष रूप से पुरी के जगन्नाथ मंदिर में भगवान को सुलाने और भोग लगाने के समय इसे गाना अनिवार्य है। भारत के कोने-कोने में भक्त और शास्त्रीय गायक इसे बड़े चाव से गाते हैं।

गीत गोविन्द भजन सुनने का सही समय क्या है?

इसे सुनने का सबसे उत्तम समय सुबह का ब्रह्म मुहूर्त माना जाता है। सुबह इसे सुनने से मन को पूरे दिन के लिए शांति और सकारात्मक ऊर्जा मिलती है। शाम के समय संध्या पूजा के दौरान इसे सुनने से घर का वातावरण बहुत ही पवित्र हो जाता है।


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