FestivalsShani Jayanti 2026: Date, Timings, Puja Rituals & Significance
Shani Jayanti 2026 is the celebration of Lord Shani’s birthday. Shani Jayanti is the birth anniversary of Lord…
calendar_today May 15, 2026
क्या आप जानते हैं कि होली से ठीक 8 दिन पहले प्रकृति अपना व्यवहार बदल लेती है? शास्त्रों में इस समय को होलाष्टक कहा गया है। साल 2026 में होलाष्टक की अवधि 24 फरवरी से 3 मार्च तक रहेगी।
ज्योतिष के अनुसार, इन 8 दिनों में ग्रह बहुत गुस्से में होते हैं। इसीलिए शादी, गृह प्रवेश या नया व्यापार शुरू करने पर पूरी तरह रोक लग जाती है।
माना जाता है कि इस दौरान किया गया कोई भी शुभ काम असफलता लाता है। लेकिन होलाष्टक 2026 इस बार बहुत अलग है। इसके आखिरी दिन ‘पूर्ण चंद्र ग्रहण‘ लग रहा है।
यह दुर्लभ संयोग इस समय को और भी गंभीर बना देता है। जानकारी न होने पर लोग अक्सर ऐसी गलतियां करते हैं, जिनका बुरा फल पूरे परिवार को मिलता है।
ऐसे में 99Pandit का यह लेख आपकी मदद करेगा। हम आपको बताएंगे कि वह कौन सी एक भूल है जो आपकी मेहनत बर्बाद कर सकती है। साथ ही, आप जानेंगे कि इस अशुभ समय में खुद को सुरक्षित कैसे रखें।
हिंदू पंचांग के अनुसार, होली से ठीक आठ दिन पहले होलाष्टक लग जाता है। साल 2026 में इसकी शुरुआत और समाप्ति की महत्वपूर्ण तिथियां इस प्रकार हैं:
| आयोजन | सटीक तिथि (2026) | विवरण |
| होलाष्टक प्रारंभ | 24 फरवरी, 2026 | फाल्गुन शुक्ल अष्टमी से ग्रहों की उग्रता शुरू। |
| होलिका दहन | 02 मार्च, 2026 | सोमवार |
| होलाष्टक समाप्ति | 03 मार्च, 2026 | मंगलवार (पूर्णिमा तिथि के साथ)। |
| धुलेंडी (होली) | 04 मार्च, 2026 | बुधवार (रंगों वाली होली)। |
Note: “पारंपरिक मान्यता के अनुसार, अष्टमी तिथि लगते ही ग्रहों का स्वभाव उग्र होने लगता है, इसलिए 24 फरवरी से मांगलिक कार्यों पर रोक की मान्यता है।”
‘होलाष्टक’ शब्द दो शब्दों से मिलकर बना है:
होला + अष्टक (यानी होली के आठ दिन)। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, इन आठ दिनों में सौरमंडल के आठ प्रमुख ग्रह उग्र अवस्था में होते हैं:
1. अष्टमी को चंद्रमा
2. नवमी को सूर्य
3. दशमी को शनि
4. एकादशी को शुक्र
5. द्वादशी को गुरु
6. त्रयोदशी को बुध
7. चतुर्दशी को मंगल
8. पूर्णिमा को राहु
इन ग्रहों की ‘उग्रता‘ के कारण व्यक्ति की निर्णय लेने की क्षमता और मानसिक स्थिति प्रभावित हो सकती हैं।
यही कारण है कि इस दौरान विवाह, मुंडन, गृह प्रवेश या नया व्यापार शुरू करना वर्जित माना जाता है। क्योंकि इन कार्यों के लिए ग्रहों का शुभ और सौम्य होना अनिवार्य है।
99Pandit Expert Advice: “इन 8 दिनों में लाल या गहरे रंग के कपड़ों के बजाय सफेद या हल्के रंगों का प्रयोग करना बेहतर माना जाता है; ऐसा माना जाता है कि यह चंद्रमा को शांत रखने में मदद करता है।”
इसे केवल अंधविश्वास कहना गलत होगा। इसके पीछे मनोवैज्ञानिक और ब्रह्मांडीय (Cosmic) कारण छिपे हैं:
नकारात्मक ऊर्जा का प्रभाव: वैज्ञानिक तरीके से देखें तो इस समय प्रकृति में बदलाव हो रहा होता है। ऋतु परिवर्तन के संधि काल में मानवीय मस्तिष्क में चंचलता और अनिश्चितता बढ़ जाती है।
ग्रहों की स्थिति: ज्योतिषीय गणना बताती है कि इन आठ दिनों में ग्रहों का प्रभाव पृथ्वी पर नकारात्मक और उग्र होता है। जब ग्रहों का बल कमजोर हो, तो उस समय किए गए बड़े निवेश या रिश्तों की शुरुआत में स्थायित्व (Stability) की कमी रहने की आशंका होती है।
पौराणिक संदर्भ: यह वही काल है जब भक्त प्रहलाद को उनके पिता हिरण्यकश्यप ने आठ दिनों तक भीषण यातनाएं दी थीं। अंत में होलिका दहन के बाद ही शांति स्थापित हुई थी। इसलिए यह समय उत्सव से पहले तप और भक्ति का है, न कि भौतिक सुखों के प्रदर्शन का।
होलाष्टक का प्रभाव 3 मार्च 2026 की रात को समाप्त हो जाएगा। 4 मार्च को रंगों वाली होली के बाद से सभी शुभ कार्यों पर लगा प्रतिबंध हट जाएगा।
ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, 5 मार्च से ग्रहों की स्थिति फिर से शुभ हो जाएगी। इसके बाद लोग अपनी नई योजनाओं को अमली जामा पहना सकते हैं और रुके हुए मांगलिक कार्यों की शुरुआत कर सकते हैं।
8 दिनों का यह आध्यात्मिक ‘ब्रेक’ खत्म होते ही समाज में फिर से शादियों और उत्सवों की रौनक लौट आएगी।
होलाष्टक खत्म होते ही मार्च के महीने में शादियों के कई शुभ मुहूर्त बन रहे हैं:
होलाष्टक के बाद इन तारीखों पर आप अपने मांगलिक कार्य संपन्न कर सकते हैं:
| कार्य | शुभ तिथियां (मार्च 2026) |
| गृह प्रवेश | 5, 7, और 12 मार्च |
| मुंडन संस्कार | 6, 9, और 13 मार्च |
| वाहन/संपत्ति खरीद | 5, 8, और 11 मार्च |
| नया व्यापार शुरू करना | 6, 10, और 12 मार्च |
हिंदू धर्म में होलाष्टक के 8 दिनों को बहुत महत्वपूर्ण माना जाता है। ज्योतिष के अनुसार, इस समय ग्रह उग्र हो जाते हैं, जिससे चारों ओर नकारात्मक ऊर्जा बढ़ जाती है।
इसी कारण लोग शादी, मुंडन और गृह-प्रवेश जैसे शुभ कार्य टाल देते हैं। बड़े-बुजुर्ग और पंडित इन दिनों नया काम शुरू करने की मनाही करते हैं।
ज्योतिष गणना के अनुसार, अष्टमी से पूर्णिमा तक हर दिन एक विशेष ग्रह जातक को प्रभावित करता है:
होलाष्टक के 8 दिनों में ग्रहों की स्थिति बहुत उग्र रहती है, इसलिए शास्त्र इस समय कई कार्यों की सख्त मनाही करते हैं।
इन दिनों में किए गए शुभ कार्य अक्सर सफल नहीं होते और जीवन में बाधाएं पैदा करते हैं। यहाँ वे प्रमुख कार्य दिए गए हैं जिन पर होलाष्टक के दौरान पूरी तरह रोक रहती है:
होलाष्टक केवल अंधविश्वास नहीं, बल्कि दो भयानक घटनाओं का साक्षी है। पौराणिक कथाएं बताती हैं कि इन 8 दिनों में प्रकृति ने बहुत पीड़ा झेली थी।
एक तरफ भक्त प्रह्लाद को मौत के करीब लाया गया, तो दूसरी तरफ प्रेम के देवता कामदेव को भस्म होना पड़ा। इन घटनाओं की याद में आज भी लोग मांगलिक कार्य रोक देते हैं।
यह समय उत्सव मनाने का नहीं, बल्कि संयम और तपस्या करने का है। लोग मानते हैं कि इन दिनों की हवाओं में आज भी उस काल के कष्टों की गूँज शामिल है।
भक्त प्रह्लाद की कथा हमें याद दिलाती है कि ये 8 दिन कितने कठिन थे:
1. अत्याचार की शुरुआत: हिरण्यकश्यप ने फाल्गुन शुक्ल अष्टमी से प्रह्लाद को प्रताड़ित करना शुरू किया।
2. भयानक यातनाएं: उसने अपने ही बेटे को ऊंचे पहाड़ों से नीचे फेंकवाया।
3. जहरीले सांप: राजा ने प्रह्लाद को जहरीले सांपों की कोठरी में बंद किया।
4. हाथियों का हमला: पागल हाथियों के पैरों तले प्रहलाद को कुचलने की कोशिश की गई।
5. विशाल समुद्र: प्रह्लाद को गहरे समुद्र में डुबोकर मारने का प्रयास हुआ।
6. भगवान की रक्षा: प्रह्लाद हर पल भगवान विष्णु का नाम लेते रहे और सुरक्षित रहे।
7. अंत में जीत: आठवें दिन होलिका की अग्नि भी प्रहलाद का कुछ नहीं बिगाड़ पाई।
होलाष्टक का सीधा संबंध भगवान शिव के क्रोध से भी जुड़ा है:
होलाष्टक के 8 दिनों में ग्रहों की ऊर्जा बहुत उग्र होती है। इसीलिए इन दिनों में शादी या नए काम की मनाही होती है। लेकिन, यही समय मंत्र साधना के लिए सबसे अच्छा है।
अगर आप सही विधि अपनाते हैं, तो ये होलाष्टक 2026 के 8 दिन आपके आने वाले पूरे साल की रक्षा कर सकते हैं।
1. सुरक्षा कवच के लिए मंत्र और गुप्त दान
नकारात्मकता को दूर रखने के लिए ये तरीके अपनाएं:
2. महामृत्युंजय जाप और विष्णु आराधना
ग्रहों के भारीपन को कम करने के लिए ये उपाय अचूक हैं:
होलाष्टक 2026 की अवधि 24 फरवरी से 3 मार्च तक रहेगी। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, इन आठ दिनों में सौरमंडल के आठ प्रमुख ग्रह उग्र अवस्था में होते हैं।
ग्रहों की यह नकारात्मक स्थिति व्यक्ति की निर्णय क्षमता और मानसिक शांति को प्रभावित करती है, इसलिए विवाह, मुंडन और गृह प्रवेश जैसे सभी मांगलिक कार्य पूरी तरह वर्जित हैं।
इस वर्ष का होलाष्टक विशेष है क्योंकि इसके अंतिम दिन ‘पूर्ण चंद्र ग्रहण’ भी लग रहा है, यह 2028 तक होने वाला आखिरी पूर्ण चंद्र ग्रहण है। हालांकि, भारत के अधिकांश हिस्सों में ग्रहण की पूर्णता चंद्रोदय से पहले ही समाप्त हो जाएगी, इसलिए यहां केवल आंशिक ग्रहण ही दिखाई देगा।
पौराणिक कथाओं में भी यह काल प्रह्लाद की यातनाओं और कामदेव के भस्म होने का प्रतीक है, जो इसे तपस्या का समय बनाता है। होलाष्टक का प्रभाव 3 मार्च की रात समाप्त होगा और 4 मार्च को होली के बाद सभी शुभ कार्य पुनः प्रारंभ हो सकेंगे।
5 मार्च से ग्रहों की अनुकूलता लौट आएगी।
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साल 2026 में होलाष्टक 24 फरवरी (मंगलवार) से शुरू होकर 3 मार्च (मंगलवार) तक रहेगा।
शास्त्रों के अनुसार, इन 8 दिनों में ग्रहों का स्वभाव उग्र होता है। इसलिए सगाई, रोका या विवाह जैसे गठबंधन वाले कार्यों की सख्त मनाही है। माना जाता है कि इस दौरान बने रिश्तों में स्थिरता की कमी रहती है।
ज्योतिष के अनुसार, इन दिनों में 'राहु' और 'शनि' जैसे ग्रह प्रभावी होते हैं, जो निर्णय क्षमता को भ्रमित कर सकते हैं। भारी निवेश या संपत्ति का सौदा होलाष्टक समाप्त होने के बाद (5 मार्च से) करना ही श्रेष्ठ है।
नकारात्मक ऊर्जा से बचने के लिए 'महामृत्युंजय मंत्र' और भगवान विष्णु के 'ॐ नमो भगवते वासुदेवाय' मंत्र का जाप करना सबसे शुभ माना जाता है। हनुमान चालीसा का पाठ भी मानसिक शांति देता है।
नहीं, होलाष्टक में जन्म लेना अशुभ नहीं है। हालांकि, इन दिनों में ग्रहों की स्थिति उग्र होती है, इसलिए बच्चे की शांति के लिए बाद में विधिवत पूजन कराया जा सकता है। ऐसे बच्चे अक्सर बहुत ऊर्जावान और साहसी होते हैं।
होलाष्टक के तुरंत बाद 5, 6, 8 और 10 मार्च 2026 विवाह के लिए अत्यंत शुभ मुहूर्त हैं। ध्यान रहे कि 14 मार्च से खरमास शुरू हो जाएगा, जिसके बाद एक महीने तक फिर से शादियां रुक जाएंगी।