RitualsTamil Wedding Rituals in Chennai: Sacred Ceremony Guide
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calendar_today Jul 15, 2026
अंत्येष्टि संस्कार: हिन्दू धर्म की संस्कृति उनकी जीवन पद्धति के समान ही है| इस जीवन पद्धति में कुल सोलह संस्कार होते है|
हिन्दू धर्म के शास्त्रों में इन सोलह संस्कारों के अलावा भी कई संस्कार होते है| जिनका वर्तमान के समय वेदों में उल्लेख मिलता है| लेकिन समय के साथ इन संस्कारों में बहुत सारे परिवर्तन किये गए है|
इस वैदिक परंपरा के अनुसार सोलह संस्कारों में जिस प्रकार सबसे प्रारम्भ में गर्भ धारण का संस्कार आता है|
उसी प्रकार अंत में अंत्येष्टि संस्कार [Antyeshti Sanskar] भी आता है| जन्म और मृत्यु जीवन का एकमात्र ऐसा सत्य है| जिसे कोई भी झुटला नहीं सकता है| जिस व्यक्ति ने जन्म लिया है, उसकी मृत्यु भी निश्चित है|

जब मनुष्य की आत्मा उसके शरीर को त्याग देती है| तब उसके पश्चात में मनुष्य के शरीर का अंत्येष्टि संस्कार किया जाता है|
हिन्दू धर्म के अंदर इस अंत्येष्टि संस्कार को “दाह संस्कार” के नाम से भी जाना जाता है| इस संस्कार को अलग – अलग धर्मों में भिन्न – भिन्न नामों से जाना होता है|
हिन्दू धर्म में मनुष्य की मृत्यु होने के पश्चात उसे अग्नि की चिता पर जलाया जाता है| इसी के साथ ही मुखाग्नि भी दी जाती है|
मनुष्य के शरीर के पूर्ण रूप से जल जाने के बाद उसकी अस्थियों को को जमा किया जाता है| जिसे फूल चुगना भी कहते है| इसके पश्चात अस्थियों को पवित्र जल में प्रवाहित कर दिया जाता है|
ज्यादातर सभी लोग अस्थियों को गंगा नदी में ही प्रवाहित करते है| आज हम इस लेख के माध्यम से अंत्येष्टि संस्कार के महत्व और उसके कर्मकांडों के बारे सम्पूर्ण जानकारी आपको प्रदान करेंगे| आप हमारी वेबसाइट 99Pandit पर जाकर सभी तरह की पूजा या त्योहारों के बारे में सम्पूर्ण जानकारी ले सकते है|
सनातन धर्म में प्रचलित सोलह संस्कारों में अंत्येष्टि संस्कार भी शामिल है जो की मनुष्य की मृत्यु के पश्चात किया जाता है| हिन्दू धर्म में लोगों के द्वारा इस अंत्येष्टि संस्कार को अंतिम संस्कार के नाम से भी जाना जाता है|
पौराणिक शास्त्रों की मान्यता के अनुसार मृत शरीर का विधिवत रूप से अंतिम संस्कार करने व कर्मकांडों को करने से उस जीव की अतृप्त वासना (जो पूरी न हो सकी) शांत हो जाती है|
अंतिम संस्कार की प्रक्रिया पूर्ण हो जाने के पश्चात उस जीव की आत्मा पृथ्वी लोक से सीधा परलोक की ओर अपनी यात्रा प्रारम्भ करती है| जिस जीव का अंतिम संस्कार नहीं किया जाता है|
उसकी आत्मा को मुक्ति नहीं मिलती है| जिसके कारण वह परलोक ना जाकर इस भूलोक में ही भटकती रहती है|
इसी कारण से मनुष्य के देह का अंतिम संस्कार करना आवश्यक है| जिससे उनकी आत्मा को मोक्ष की प्राप्ति होती है|
अंत्येष्टि शब्द का अर्थ अंतिम यज्ञ होता है| इस यज्ञ को मृत व्यक्ति के शव के लिए किया जाता है| बौधायन पितृमेधसूत्र के अनुसार अंतिम संस्कार का बहुत बड़ा महत्व बताया गया है|
इस सूत्र में बताया गया है कि “जातसंस्कारैणेमं लोकमभिजयति मृतसंस्कारैणामुं लोकम्।” इसका अर्थ यह है कि जातकर्म आदि संस्कारों से मनुष्य इस पृथ्वी को जीत सकता है| और अंत्येष्टि संस्कार से परलोक पर विजय प्राप्त करता है|
इसके अलावा एक अन्य श्लोक में बताया गया है कि “तस्यान्मातरं पितरमाचार्य पत्नीं पुत्रं शि यमन्तेवासिनं पितृव्यं मातुलं सगोत्रमसगोत्रं वा दायमुपयच्छेद्दहनं संस्कारेण संस्कृर्वन्ति।।” इसका अर्थ यह है कि यदि किसी की मृत्यु हो जाए तो माता, पिता, आचार्य, पत्नी, पुत्र, शिष्य, चाचा, और मामा का दायित्व ग्रहण करके व्यक्ति से शव का अंतिम संस्कार करना चाहिए|
| सामग्री | मात्रा |
| लकड़ियां | साढ़े 3 क्विंटल |
| पलाश की लकड़ियां | 10 किलो |
| चंदन की लकड़ियां | 5 किलो |
| देशी घी | 20 किलो |
| हवन सामग्री | 10 किलो |
| तगर | 1 किलो |
| चंदनचुरा | 1 किलो |
| केसर | 20 ग्राम |
| कस्तूरी | 20 रत्ती |
| कपूर | 300 ग्राम |
| खोपरे गोले | 4 किलो |
| गाय का गोबर | 1 तसला |
| घी | 4 किलो |
| बांस 12 फुट के | 4 |
| बाल्टी | 1 |
| चूल्हे के लिए ईंटें | 6 |

अंत्येष्टि संकल्प लेने बाद शव का पिंडदान करने के व्यक्ति के शव को शैय्या पर लेटा दे तथा इसके पश्चात शव पर पुष्प अर्पित कीजिये| फिर शव की अंतिम यात्रा को प्रारम्भ कर दीजिये|
हिन्दू धर्म के अनुसार श्मशान में पहुचने पर शव को यथास्थान पर रख दिया जाता है| उसके पश्चात जिस स्थान पर शव को जलाया जाएगा|
सबसे पहले उस स्थान को साफ़ करें| मान्यता है कि यह सब कार्य उसी व्यक्ति के द्वारा होने चाहिए जिसने सबसे प्रथम में अंत्येष्टि का संकल्प लिया था| इसके पश्चात भूमि के चारों परिक्रमा लगाकर धरती माँ को प्रणाम करना चाहिए|
चितारोहण एक यज्ञ की प्रक्रिया है, जिसके लिए आम, शमी, वाट, गुलर तथा चन्दन की लकड़ी का इस्तेमाल किया जाता है|
इसके बाद में शव को चिता पर लिटा कर चिता में अंगार या कोयले रखकर जलाए जाते है| अब अग्नि को लेकर चिता के चारों ओर परिक्रमा लगाई जाती है|
अग्नि के जलने के बाद हवन में सात बार घी की आहुति दी जाती है| माना जाता है कि हवन में आहुति देते समय सभी लोगों को गायत्री मंत्र का जप करना चाहिए| उसके बाद सभी लोगों को प्रार्थना करनी चाहिए और तब तक करनी चाहिए जब तक की कपाल क्रिया पूर्ण ना हो जाए|
इस अंत्येष्टि संस्कार से पूर्व मृतक के परिजनों को कुछ विशेष बातों को ध्यान में रखना चाहिए| आज हम इस लेख के माध्यम से उन बातों के बारे में आपको जानकारी देंगे –
हमारे हिन्दू धर्म में अंत्येष्टि संस्कार (Antyeshti Sanskar) का बहुत बड़ा महत्व है| अंत्येष्टि संस्कार को “दाह संस्कार” के नाम से भी जाना जाता है|
इस अंत्येष्टि संस्कार में अंत्येष्टि का अर्थ अंतिम यज्ञ होता है| पौराणिक मान्यताओं के अनुसार हिन्दू धर्म में 16 संस्कार होते है|
जिसमे से अंत्येष्टि संस्कार सबसे आखिरी माना जाता है| यह 16 संस्कार समस्त मनुष्य जाति के जीवन का आधार है|
जब किसी व्यक्ति की आत्मा उसका शरीर त्याग देती है यानी जब किसी व्यक्ति की मृत्यु हो जाती है तो उसके तुरंत बाद ही अंत्येष्टि संस्कार की प्रक्रिया की जाती है|

ऐसी मान्यता है कि अंत्येष्टि संस्कार करने से मरने वाले व्यक्ति सभी अधूरी वासनाएँ शांत होती है| जिससे कि वह सब मोह – माया को त्याग कर पृथ्वी लोक से परलोक की ओर अपनी यात्रा प्रारम्भ कर सके|
हिन्दू धर्म के अनुसार व्यक्ति की मृत्यु होने के पश्चात उसे मुखाग्नि दी जाती है और फिर इसके बाद उस व्यक्ति के शव को अग्नि की चिता पर जलाया जाता है|
जब मनुष्य का सम्पूर्ण शरीर जल जाता है| तब अस्थियों को एकत्रित किया जाता हैं| जिसे हिन्दू धर्म में फूल चुगना भी कहा जाता है|
हिन्दू धर्म की मान्यताओं के अनुसार मृत व्यक्ति का अंतिम संस्कार उसके परिजनों के द्वारा ही सम्पूर्ण विधि – विधान से किया जाता है|
जिसमे माता – पिता, पुत्र, पति – पत्नी, चाचा, मामा, आदि परिजनों को इस कार्य का दायित्व लेना चाहिए| इस सभी प्रक्रियाओं का एक अलग ही धार्मिक और वैज्ञानिक महत्व माना गया है|
आज हमने इस आर्टिकल के माध्यम से अंत्येष्टि संस्कार के बारे में काफी बातें जानी है| आज हमने अंत्येष्टि संस्कार के विधि – विधान के बारे में भी जाना|
हम उम्मीद करते है कि हमारे द्वारा बताई गई जानकारी से आपको कोई ना कोई मदद मिली होगी| अंत्येष्टि संस्कार का बहुत ही बड़ा महत्व है| इसके पूर्ण होने पर मृतक की आत्मा को शांति मिलती है|
इसी कारण की वजह से अंत्येष्टि कर्म को सम्पूर्ण विधि – विधान से किया जाना चाहिए| अंत्येष्टि संस्कार के लिए अनुभवी पंडित को आप हमारी वेबसाइट 99Pandit से ऑनलाइन बुक कर सकते है| अब 99Pandit for User एप की सहायता के साथ आप श्रीमद भगवद गीता का ज्ञान भी ले सकते है|
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इस अंत्येष्टि संस्कार में अंत्येष्टि का अर्थ अंतिम यज्ञ होता है| पौराणिक मान्यताओं के अनुसार हिन्दू धर्म में 16 संस्कार होते है| जिसमे से अंत्येष्टि संस्कार सबसे आखिरी माना जाता है|
हिन्दू धर्म की मान्यताओं के अनुसार सूर्यास्त के पश्चात कभी भी अंतिम संस्कार का कार्यक्रम नहीं करना चाहिए|
सामान्यत हिन्दू धर्म में किसी की मृत्यु हो जाने के पश्चात उसे अग्नि की चिता पर जलाया जाता है| जिसमे शव को लकड़ियों के ढेर पर रखकर सर्वप्रथम मृत आत्मा को मुखाग्नि दी जाती है| तत्पश्चात उस शरीर को अग्नि को समर्पित कर दिया जाता है|
मान्यता है कि अंतिम संस्कार करने के पश्चात कभी भी किसी भी व्यक्ति को पीछे मुड़कर नहीं देखना चाहिए|