Bhastrika Pranayama Explained: Techniques, Benefits, and Precautions
Bhastrika Pranayama Explained: Pranayam is the secret of life. Our life depends on the flow of breath and diseases and…
Bhagavad Gita Quotes in Sanskrit: भगवद गीता के माध्यम से भगवान श्री कृष्ण ने सभी लोगों को सही तथा गलत के बारे में बताया है| महाभारत के युद्ध में जब अर्जुन अपने चचेरे भाइयों (कौरवों) से युद्ध करने से पीछे हट रहे थे, उस समय भगवान श्री कृष्ण ने भगवद गीता के उपदेशों के द्वारा ही अर्जुन को सही मार्ग दिखाया था|
इस भगवद गीता (Bhagavad Gita Quotes in Sanskrit) में लिखा प्रत्येक श्लोक स्वयं श्री वासुदेव कृष्ण के द्वारा कहा गया है| इस पवित्र ग्रन्थ की महर्षि वेदव्यास जी के द्वारा की गई थी|
इस सम्पूर्ण भगवद गीता में कुल 18 अध्याय तथा 700 श्लोक है| यदि आप सम्पूर्ण भगवद गीता हिंदी तथा इंग्लिश अनुवाद के साथ पढना चाहते है तो वह आप हमारी वेबसाइट 99Pandit तथा मोबाइल एप्लीकेशन 99Pandit for Users की सहायता से पढ़ सकते है|
भगवद गीता (Bhagavad Gita Quotes in Sanskrit) में कई श्लोक ऐसे भी है जिन्हें पढने मात्र से ही लोगों की समस्याओं का समाधान मिल जाता है| आज इस लेख के माध्यम से हम आपको भगवद गीता के कुछ महत्वपूर्ण श्लोक के बारे में बताएँगे|
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योगस्थः कुरु कर्माणि संगं त्यक्त्वा धनंजय
हिंदी अर्थ – हे पार्थ ! तुम योग में स्थिर रहो| तुम केवल अपना कर्तव्य करते रहो एवं सफलता या असफलता जैसे सभी भावों को त्याग दो| मन की इसी समता को योग कहा जाता है|
English Meaning – Hey Parth! You remain steady in yoga. You just keep doing your duty and give up all feelings like success or failure. This equality of mind is called yoga.
मन्मना भव मद्भक्तो मद्याजी मां नमस्कुरु ।
मामेवैष्यसि सत्यं ते प्रतिजाने प्रियोऽसि मे ॥
हिंदी अर्थ – हमेशा मेरे बारे में विचार करो व मेरे भक्त बनो| मेरी पूजा करो व मुझे प्रणाम करो| इस प्रकार तुम निश्चित रूप से मेरे समीप आ सकते हो| तुम मेरे सबसे प्रिय मित्र हो इसलिए मैं तुमसे यह वादा करता हूँ|
English Meaning – Always think about me and become my devotee. Worship me and salute me. In this way, you can definitely come closer to me. You are my dearest friend so I am making this promise to you.
तं विद्यादः दुःखसंयोगवियोगं योगसज्ञितम् ।
स निश्चयेन योक्तव्यो योगोऽनिर्विण्णचेतसा ॥
हिंदी अर्थ – यह बात ज्ञात रहे कि दुःख-संयोग से विच्छेद ही योग है| इस योग का अभ्यास पूर्ण दृढ़ निश्चय एवं निश्चल मन से ही करना चाहिए|
English Meaning – Let it be known that separation from sorrow and chance is yoga. This yoga should be practised with full determination and a calm mind.
वेदविनाशिनां नित्यं या एनामजमव्ययम्
कथं स पुरुषः पार्थ कं घटयति हन्ति कम
हिंदी अर्थ – हे अर्जुन ! जो व्यक्ति इस बात को जानता है कि आत्मा अविनाशी, अपरिवर्तनीय एवं अजन्मा है| वह किसी को कैसे मार सकता है या कैसे मरवा सकता है|
English Meaning – Hey Arjun! The person who knows that the soul is indestructible, immutable and unborn. How can he kill or get someone killed?
न हि ज्ञानेन सदृशं पवित्रमिह विद्यते |
तत्स्वयं योगसंसिद्ध: कालेनात्मनि विन्दति ||
हिंदी अर्थ – इस सम्पूर्ण संसार में ज्ञान की भांति पवित्र करने वाली अन्य कोई वस्तु नहीं है| जिसने योग में पूर्णता प्राप्त कर ली है| वह समय से साथ ही इसे अपने भीतर पा लेता है|
English Meaning – There is no other thing in this entire world that purifies like knowledge. One who has attained perfection in Yoga. He finds it within himself in time.
मात्रास्पर्शास्तु कौन्तेय शीतोष्णसुखदुःखदाः।
आगमापायिनोऽनित्यास्तांस्तितिक्षस्व भारत॥
हिंदी अर्थ – हे कुंती पुत्र अर्जुन ! सुख और दुःख का अस्थायी रूप से प्रकट होना और समय आने पर उनका चले जाना, सर्दी और गर्मी की ऋतुओं के प्रकट होने एवं उनके चले जाने के ही समान है| हे अर्जुन ! वे इन्द्रिय बोध से उत्पन्न होते है और लोगों को इनसे परेशान न होकर इन्हें सहन करना सीखना चाहिए|
English Meaning – Oh Arjun, son of Kunti! The temporary appearance of happiness and sorrow and their disappearance, when the time comes, is similar to the appearance and disappearance of winter and summer seasons. Hey Arjun! They arise from sense perception and people should learn to tolerate them rather than being troubled by them.
ज्ञानेन तु तदज्ञानं येषां नाशितामात्मनः
तेषामादित्यवज्ज्ञानं प्रकाशयति तत्परम्
हिंदी अर्थ – जिनका अज्ञान अपने ही ज्ञान से नष्ट हो जाता है| सूर्य की भांति, उन्हें ज्ञान सर्वोच्च को प्रकट करता है|
English Meaning – Whose ignorance is destroyed by his knowledge? Like the Sun, knowledge reveals the Supreme to them.
यत्र योगेश्वरः कृष्णो यत्र पार्थो धनुर्धरः
तत्र श्रीविजयो भूतिर्ध्रुवा नीतिर्मतिर्ममा
हिंदी अर्थ – जहाँ पर भी सभी रहस्यों के गुरु वासुदेव कृष्ण है और जहाँ भी सबसे उच्च धनुर्धर अर्जुन है| वहां पर निश्चित रूप से विजय, ऐश्वर्य तथा आसाधारण शक्ति भी होगी| यह मेरी राय है|
English Meaning – Wherever Vasudeva Krishna is the guruji of all secrets and wherever Arjuna is the supreme archer. There will certainly be victory, luxury and extraordinary power. This is my opinion.
कर्मण्येव अधिकारस्ते मा फलेषु कदाचन
मा कर्मफलहेतुर्भूर्मा ते सङ्गोऽस्त्वकर्मणि
हिंदी अर्थ – आपको स्वयं का कर्तव्य निभाने का अधिकार है| किन्तु आप उस कर्म से फल के हकदार नहीं है| कभी भी स्वयं को अपनी गतिविधियों का कारण न समझे तथा अपने कर्मों को ना करने में कदापि आसक्त ना हो|
English Meaning – You have the right to perform your duty. But you are not entitled to the fruits of that action. Never consider yourself the cause of your actions and never become attached to not doing your actions.
यदा यदा हि धर्मस्य ग्लानिर्भवति भारत ।
अभ्युत्थानमधर्मस्य तदात्मानं सृजाम्यहम् ॥
हिंदी अर्थ – इस श्लोक में भगवान श्री कृष्ण अर्जुन से कहते है कि जब-जब पृथ्वी पर धर्म की हानि तथा अधर्म की वृद्धि होगी| तब-तब मैं धर्म की वृद्धि के लिए अवतार लूँगा| भक्तों का उद्धार करने, अधर्मियों का नाश करने तथा धर्म की स्थापना हेतु में सदा प्रकट होता रहूँगा|
English Meaning – In this verse, Lord Shri Krishna tells Arjun that whenever there will be a loss of righteousness and an increase of unrighteousness on earth. Now and then I will incarnate for the growth of religion. I will always appear for the salvation of devotees, the destruction of unrighteous people and the establishment of religion.
ध्यायतो विषयान्पुंसः सङ्गस्तेषूपजायते ।
सङ्गात्संजायते कामः कामात्क्रोधोऽभिजायते
हिंदी अर्थ – भगवान श्री कृष्ण अर्जुन से कहते है कि किसी भी विषय के बारे सोचते रहने से मनुष्य की उनमे आसक्ति उत्पन्न हो जाती है| इससे मनुष्य में काम अर्थात इच्छाएँ पैदा होती है और काम से ही क्रोध की उत्पति होती है|
English Meaning – Lord Shri Krishna tells Arjun that by thinking about any subject a person develops an attachment to it. Due to this, lust i.e. desires arises in humans and it is from lust that anger arises.
क्रोधाद्भवति संमोह : संमोहात्स्मृतिविभ्रमः ।
स्मृतिभ्रंशानुद्धिनाशो बुद्धिनाशात्प्रणश्यति
हिंदी अर्थ – भगवान श्री कृष्ण कहते है कि अत्यधिक क्रोध करने से मनुष्य में अहंकार उत्पन्न हो जाता है| अहंकार उत्पन्न होने के कारण मनुष्य की स्मरण शक्ति धीरे – धीरे कम होने लगती है तथा मनुष्य की बुद्धि नष्ट हो जाती है| बुद्धि के नष्ट हो जाने पर मनुष्य का अर्ध पतन हो जाता है|
English Meaning – Lord Shri Krishna says that excessive anger creates ego in a person. Due to the emergence of ego, man’s memory power gradually starts decreasing and man’s intelligence gets destroyed. When the intellect is destroyed, man becomes semi-degenerated.
सर्वधर्मान्परित्यज्य मामेकं शरणं व्रज ।
अहं त्वां सर्वपापेभ्यो मोक्षयिष्यामि मा शुचः ॥
हिंदी अर्थ – सभी प्रकार के धर्मों का त्याग करके मेरी शरण में आ जाओ| घबराओ नहीं ! मैं सभी प्रकार के पापों से तुम्हारा उद्धार करूँगा|
English Meaning – Abandon all types of religions and take refuge in me. do not sweat! I will save you from all kinds of sins.
श्रद्धावान्ल्लभते ज्ञानं तत्पर : संयतेन्द्रियः ।
ज्ञानं लब्ध्वा परां शान्तिमचिरेणाधिगच्छति
हिंदी अर्थ – जो भी श्रद्धा रखने वाले मनुष्य ज्ञान को प्राप्त करते है तथा अपनी समस्त इन्द्रियों पर नियंत्रण पा लेते है| केवल वही मनुष्य इस ज्ञान को प्राप्त करने का अधिकारी है| इस ज्ञान को प्राप्त करने के बाद वह अध्यात्मिक शांति को प्राप्त हो जाता है|
English Meaning – Whoever has faith attains knowledge and gets control over all his senses. Only human beings have the right to achieve this knowledge. After attaining this knowledge he attains spiritual peace.
जन्म कर्म च मे दिव्यमेवं यो वेत्ति तत्त्वतः ।
त्यक्त्वा देहं पुनर्जन्म नैति मामेति सोऽर्जुन ॥
हिंदी अर्थ – इस संसार में जो भी मनुष्य मेरी दिव्य प्रकृति को जानता है| वह इस शरीर को त्यागने के पश्चात पुनः जन्म नहीं लेता है, अपितु वह मेरे धाम को प्राप्त होता है|
English Meaning – Every human being in this world knows my divine nature. He does not birth again after leaving this body, but he reaches my abode.
Q.भगवद गीता की रचना किसके द्वारा की गई है?
A.इस पवित्र ग्रन्थ की रचना महर्षि वेदव्यास के द्वारा की गई थी|
Q.इस भगवद गीता में कर्म के बारे में क्या कहा गया है?
A.आपको स्वयं का कर्तव्य निभाने का अधिकार है| किन्तु आप उस कर्म से फल के हकदार नहीं है| कभी भी स्वयं को अपनी गतिविधियों का कारण न समझे तथा अपने कर्मों को ना करने में कदापि आसक्त ना हो|
Q.गीता का उद्देश्य क्या है?
A.परमात्मा के ज्ञान, सृष्टि विधान के ज्ञान एवं आत्मा के ज्ञान को स्पष्ट करना ही गीता का मुख्य उद्देश्य है|
Q.भगवान श्रीकृष्ण ने अर्जुन को गीता का उपदेश कब दिया था?
A.महाभारत के युद्ध में जब अर्जुन अपने चचेरे भाइयों से युद्ध करने से पीछे हट रहे थे, उस समय भगवान श्री कृष्ण ने भगवद गीता के उपदेशों के द्वारा ही अर्जुन को सही मार्ग दिखाया था|
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