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Ganga Nadi: जाने गंगा नदी की उत्पत्ति, इतिहास, गंगा आरती एवं सम्पूर्ण जानकारी

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Bhumika Written by: Bhumika
Last Updated:March 16, 2026
गंगा नदी
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गंगा नदी भारत की सबसे पवित्र और सबसे प्रसिद्ध नदी है। हिन्दू धर्म में इसे माता और देवी का दर्जा दिया गया है। करोड़ों लोगों की आस्था और श्रद्धा इस नदी से जुड़ी हुई है।

गंगा नदी सिर्फ एक नदी नहीं, बल्कि भारतीय संस्कृति, परंपरा और धर्म की पहचान है। सन 2008 में भारत सरकार ने गंगा नदी को राष्ट्रीय नदी का दर्जा दिया

वैज्ञानिकों के अनुसार गंगा नदी की गहराई 100 फीट से भी अधिक है। इस नदी में गांगेय डॉल्फिन जैसी दुर्लभ प्रजातियाँ भी पाई जाती हैं।

गंगा नदी कहाँ से निकलती है? (उद्गम स्थल) – Ganga Nadi Kahan se Nikalti Hai

बहुत से लोगों के मन में यह सवाल आता है कि गंगा नदी कहाँ से निकलती है। तो इसका जवाब है – गंगा नदी का उद्गम उत्तराखंड में हिमालय पर्वत के गंगोत्री ग्लेशियर से होता है

गंगोत्री ग्लेशियर समुद्र तल से 3,892 मीटर की ऊँचाई पर स्थित है। यहाँ से निकलने वाली जलधारा को भागीरथी नदी कहते हैं। जब यह नदी देवप्रयाग में अलकनंदा नदी से मिलती है, तभी इसका नाम गंगा नदी पड़ता है।

गंगा नदी के उद्गम से जुड़ी मुख्य बातें:

  • उद्गम स्थल: गंगोत्री ग्लेशियर, उत्तराखंड
  • ऊँचाई: 3,892 मीटर
  • गंगोत्री से देवप्रयाग तक इसे भागीरथी कहते हैं।
  • देवप्रयाग के बाद इसका नाम गंगा पड़ता है।

गंगा नदी कितनी लंबी है? – Ganga Nadi Kitni Lambi Hai?

गंगा नदी की कुल लंबाई 2,525 किलोमीटर है। यह हिमालय से शुरू होकर उत्तर भारत के मैदानी इलाकों से गुजरती हुई बंगाल की खाड़ी में जाकर मिलती है।

पानी के बहाव की दृष्टि से गंगा नदी दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी नदी मानी जाती है। गंगा नदी इन राज्यों से होकर गुजरती है:

  • उत्तराखंड
  • उत्तर प्रदेश
  • बिहार
  • झारखंड
  • पश्चिम बंगाल
  • बांग्लादेश (अंत में बंगाल की खाड़ी में गिरती है)

गंगा नदी की उत्पत्ति की कथा – माँ गंगा धरती पर कैसे आईं?

ब्रह्मा जी के कमंडल से जन्म:

पौराणिक कथाओं के अनुसार जब भगवान विष्णु ने वामन अवतार लिया था और अपना दूसरा पग आकाश की ओर बढ़ाया, तब ब्रह्मा जी ने उनके चरण धोए।

उस पवित्र जल को ब्रह्मा जी ने अपने कमंडल में भर लिया। माना जाता है कि उसी जल से माता गंगा का जन्म हुआ। बाद में ब्रह्मा जी ने माता गंगा को हिमालय को पुत्री के रूप में सौंप दिया।

राजा भागीरथ ने गंगा को धरती पर क्यों बुलाया?

प्राचीन काल में राजा सगर ने अश्वमेध यज्ञ किया और यज्ञ का घोड़ा छोड़ा। भगवान इंद्र ने उस घोड़े को चुराकर कपिल मुनि के आश्रम में बाँध दिया।

जब राजा सगर के साठ हजार पुत्र घोड़े को ढूँढते हुए कपिल मुनि के आश्रम पहुँचे तो उन्होंने मुनि पर ही चोरी का इल्जाम लगा दिया। इससे क्रोधित होकर कपिल मुनि ने उन सभी को भस्म कर दिया।

बिना अंतिम संस्कार के मोक्ष न मिलने की वजह से राजा सगर के सभी पुत्र भटकते रहे। तब राजा सगर के वंशज राजा भागीरथ ने अपने पूर्वजों की मुक्ति के लिए कठोर तपस्या करके गंगा नदी को धरती पर लाने की प्रार्थना की।

गंगा माता का वेग इतना तेज था कि सीधे धरती पर आने से धरती डूब सकती थी। तब भगवान शिव ने गंगा को अपनी जटाओं में समेट लिया और धीरे-धीरे धरती पर छोड़ा। इसी वजह से गंगा नदी को भागीरथी भी कहते हैं।

गंगा नदी की सहायक नदियाँ कौन-कौन सी हैं? – Ganga Nadi Ki Sahayak Nadiyan

गंगा नदी में कई बड़ी नदियाँ आकर मिलती हैं, जिन्हें सहायक नदियाँ कहते हैं। इन नदियों की वजह से गंगा का बहाव और भी शक्तिशाली होता जाता है।

गंगा नदी की प्रमुख सहायक नदियाँ:

बाईं तरफ से मिलने वाली नदियाँ:

  • रामगंगा
  • गोमती
  • घाघरा
  • गंडक
  • कोसी
  • महानंदा

दाईं तरफ से मिलने वाली नदियाँ:

  • यमुना (प्रयागराज में)
  • सोन
  • पुनपुन
  • दामोदर

यमुना नदी गंगा की सबसे बड़ी सहायक नदी है और प्रयागराज (इलाहाबाद) में इन दोनों का संगम होता है जिसे त्रिवेणी संगम कहते हैं

गंगा नदी पश्चिम बंगाल में कहाँ जाती है? – Ganga Nadi Kahan Jati Hai?

जब गंगा नदी पश्चिम बंगाल में पहुँचती है तो यह दो अलग-अलग नदियों में बँट जाती है:

  • पद्मा नदी: यह बांग्लादेश से होकर बंगाल की खाड़ी में गिरती है।
  • हुगली नदी: यह पश्चिम बंगाल से होकर बंगाल की खाड़ी में गिरती है।

गंगा नदी का महत्व – धार्मिक और वैज्ञानिक दोनों नजरिए से

धार्मिक महत्व:

हिन्दू धर्म में गंगा नदी को सबसे पवित्र नदी माना जाता है। इसे गंगा माता या गंगा मैया भी कहते हैं। मान्यता है कि:

  • गंगा नदी में स्नान करने से सभी पाप धुल जाते हैं।
  • इसके जल से पूजा-अर्चना करना बहुत शुभ माना जाता है।
  • मृत्यु के बाद गंगाजल मुँह में डालने की परंपरा है।
  • हरिद्वार और वाराणसी में गंगा आरती देखने के लिए दुनियाभर से लोग आते हैं।

वैज्ञानिक महत्व:

वैज्ञानिकों ने भी गंगा नदी के जल में खास गुण पाए हैं:

  • गंगाजल लंबे समय तक खराब नहीं होता।
  • इसमें बैक्टीरिया को नष्ट करने की प्राकृतिक क्षमता होती है।
  • गंगा नदी में गांगेय डॉल्फिन जैसी दुर्लभ प्रजाति पाई जाती है।
  • यह नदी करोड़ों लोगों के लिए पीने के पानी और खेती का जरिया है।

गंगा आरती कहाँ होती है और इसका महत्व क्या है? – Ganga Aarti Ka Mahatav

गंगा आरती की शुरुआत आज से करीब 32 साल पहले सन 1991 में वाराणसी के दशाश्वमेध घाट पर हुई थी। तब से यह परंपरा हर शाम बिना रुके चली आ रही है।

गंगा आरती कहाँ-कहाँ होती है?

आरती मुख्य रूप से इन जगहों पर होती है:

  • हरिद्वार: हर की पौड़ी घाट पर
  • वाराणसी (काशी): दशाश्वमेध घाट पर
  • ऋषिकेश: त्रिवेणी घाट पर
  • प्रयागराज: संगम घाट पर
  • चित्रकूट

आरती का समय:

गर्मियों में: शाम 7:00 बजे
सर्दियों में: शाम 6:00 बजे

यह आरती करीब 45 मिनट तक चलती है। आरती में दीपकों की रोशनी, शंखनाद, डमरू की आवाज और मंत्रोच्चार का ऐसा माहौल बनता है जो मन को पूरी तरह भक्तिमय कर देता है।

गंगा माता की आरती – Ganga Mata ki Aarti in Hindi

ॐ जय गंगे माता, श्री जय गंगे माता ।
जो नर तुमको ध्याता, मनवांछित फल पाता ॥ ॐ जय गंगे माता

चंद्र सी ज्योति तुम्हारी, जल निर्मल आता।
शरण पडें जो तेरी, सो नर तर जाता ॥ ॐ जय गंगे माता

पुत्र सगर के तारे, सब जग को ज्ञाता ।
कृपा दृष्टि तुम्हारी, त्रिभुवन सुख दाता ॥ ॐ जय गंगे माता

एक ही बार जो प्राणी, शारण तेरी आता ।
यम की त्रास मिटाकर, परमगति पाता ॥ ॐ जय गंगे माता 

आरती मातु तुम्हारी, जो नर नित गाता ।
सेवक वही सहज में, मुक्त्ति को पाता ॥ ॐ जय गंगे माता

इति माँ गंगा आरती संपूर्णम् ॥

गंगा माता की पूजा करते समय इस आरती को सच्चे मन से बोलने से भक्तों को गंगा माता का आशीर्वाद प्राप्त होता है| तथा उनके जीवन की सभी दुःख और परेशानियां दूर होती है।

निष्कर्ष

आज हमने इस आर्टिकल के माध्यम से गंगा नदी के बारे में कई बातें जानी हैं। आज हमने गंगा आरती पूजन के फ़ायदों के बारे में भी जाना।

हम उम्मीद करते है कि हमारे द्वारा बताई गयी जानकारी से आपको कोई ना कोई मदद मिली होगी। इसके अलावा भी अगर आप किसी और पूजा के बारे में जानकारी लेना चाहते हैं।

तो आप हमारी वेबसाइट 99Pandit पर जाकर सभी तरह की पूजा या त्योहारों के बारे में सम्पूर्ण जानकारी ले सकते है।

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