8 Sons of Lord Shiva: The Names You’ve Probably Never Heard!
8 Sons of Lord Shiva : Lord Shiva is known as Mahadev. He is the greatest god. Most people know…
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गंगा नदी भारत की सबसे पवित्र और सबसे प्रसिद्ध नदी है। हिन्दू धर्म में इसे माता और देवी का दर्जा दिया गया है। करोड़ों लोगों की आस्था और श्रद्धा इस नदी से जुड़ी हुई है।
गंगा नदी सिर्फ एक नदी नहीं, बल्कि भारतीय संस्कृति, परंपरा और धर्म की पहचान है। सन 2008 में भारत सरकार ने गंगा नदी को राष्ट्रीय नदी का दर्जा दिया।
वैज्ञानिकों के अनुसार गंगा नदी की गहराई 100 फीट से भी अधिक है। इस नदी में गांगेय डॉल्फिन जैसी दुर्लभ प्रजातियाँ भी पाई जाती हैं।
बहुत से लोगों के मन में यह सवाल आता है कि गंगा नदी कहाँ से निकलती है। तो इसका जवाब है – गंगा नदी का उद्गम उत्तराखंड में हिमालय पर्वत के गंगोत्री ग्लेशियर से होता है।
गंगोत्री ग्लेशियर समुद्र तल से 3,892 मीटर की ऊँचाई पर स्थित है। यहाँ से निकलने वाली जलधारा को भागीरथी नदी कहते हैं। जब यह नदी देवप्रयाग में अलकनंदा नदी से मिलती है, तभी इसका नाम गंगा नदी पड़ता है।
गंगा नदी के उद्गम से जुड़ी मुख्य बातें:
गंगा नदी की कुल लंबाई 2,525 किलोमीटर है। यह हिमालय से शुरू होकर उत्तर भारत के मैदानी इलाकों से गुजरती हुई बंगाल की खाड़ी में जाकर मिलती है।
पानी के बहाव की दृष्टि से गंगा नदी दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी नदी मानी जाती है। गंगा नदी इन राज्यों से होकर गुजरती है:
ब्रह्मा जी के कमंडल से जन्म:
पौराणिक कथाओं के अनुसार जब भगवान विष्णु ने वामन अवतार लिया था और अपना दूसरा पग आकाश की ओर बढ़ाया, तब ब्रह्मा जी ने उनके चरण धोए।
उस पवित्र जल को ब्रह्मा जी ने अपने कमंडल में भर लिया। माना जाता है कि उसी जल से माता गंगा का जन्म हुआ। बाद में ब्रह्मा जी ने माता गंगा को हिमालय को पुत्री के रूप में सौंप दिया।
राजा भागीरथ ने गंगा को धरती पर क्यों बुलाया?
प्राचीन काल में राजा सगर ने अश्वमेध यज्ञ किया और यज्ञ का घोड़ा छोड़ा। भगवान इंद्र ने उस घोड़े को चुराकर कपिल मुनि के आश्रम में बाँध दिया।
जब राजा सगर के साठ हजार पुत्र घोड़े को ढूँढते हुए कपिल मुनि के आश्रम पहुँचे तो उन्होंने मुनि पर ही चोरी का इल्जाम लगा दिया। इससे क्रोधित होकर कपिल मुनि ने उन सभी को भस्म कर दिया।
बिना अंतिम संस्कार के मोक्ष न मिलने की वजह से राजा सगर के सभी पुत्र भटकते रहे। तब राजा सगर के वंशज राजा भागीरथ ने अपने पूर्वजों की मुक्ति के लिए कठोर तपस्या करके गंगा नदी को धरती पर लाने की प्रार्थना की।
गंगा माता का वेग इतना तेज था कि सीधे धरती पर आने से धरती डूब सकती थी। तब भगवान शिव ने गंगा को अपनी जटाओं में समेट लिया और धीरे-धीरे धरती पर छोड़ा। इसी वजह से गंगा नदी को भागीरथी भी कहते हैं।
गंगा नदी में कई बड़ी नदियाँ आकर मिलती हैं, जिन्हें सहायक नदियाँ कहते हैं। इन नदियों की वजह से गंगा का बहाव और भी शक्तिशाली होता जाता है।
गंगा नदी की प्रमुख सहायक नदियाँ:
यमुना नदी गंगा की सबसे बड़ी सहायक नदी है और प्रयागराज (इलाहाबाद) में इन दोनों का संगम होता है जिसे त्रिवेणी संगम कहते हैं।
जब गंगा नदी पश्चिम बंगाल में पहुँचती है तो यह दो अलग-अलग नदियों में बँट जाती है:
धार्मिक महत्व:
हिन्दू धर्म में गंगा नदी को सबसे पवित्र नदी माना जाता है। इसे गंगा माता या गंगा मैया भी कहते हैं। मान्यता है कि:
वैज्ञानिक महत्व:
वैज्ञानिकों ने भी गंगा नदी के जल में खास गुण पाए हैं:
गंगा आरती की शुरुआत आज से करीब 32 साल पहले सन 1991 में वाराणसी के दशाश्वमेध घाट पर हुई थी। तब से यह परंपरा हर शाम बिना रुके चली आ रही है।
गंगा आरती कहाँ-कहाँ होती है?
आरती मुख्य रूप से इन जगहों पर होती है:
आरती का समय:
गर्मियों में: शाम 7:00 बजे
सर्दियों में: शाम 6:00 बजे
यह आरती करीब 45 मिनट तक चलती है। आरती में दीपकों की रोशनी, शंखनाद, डमरू की आवाज और मंत्रोच्चार का ऐसा माहौल बनता है जो मन को पूरी तरह भक्तिमय कर देता है।
ॐ जय गंगे माता, श्री जय गंगे माता ।
जो नर तुमको ध्याता, मनवांछित फल पाता ॥ ॐ जय गंगे माता
चंद्र सी ज्योति तुम्हारी, जल निर्मल आता।
शरण पडें जो तेरी, सो नर तर जाता ॥ ॐ जय गंगे माता
पुत्र सगर के तारे, सब जग को ज्ञाता ।
कृपा दृष्टि तुम्हारी, त्रिभुवन सुख दाता ॥ ॐ जय गंगे माता
एक ही बार जो प्राणी, शारण तेरी आता ।
यम की त्रास मिटाकर, परमगति पाता ॥ ॐ जय गंगे माता
आरती मातु तुम्हारी, जो नर नित गाता ।
सेवक वही सहज में, मुक्त्ति को पाता ॥ ॐ जय गंगे माता॥
इति माँ गंगा आरती संपूर्णम् ॥
गंगा माता की पूजा करते समय इस आरती को सच्चे मन से बोलने से भक्तों को गंगा माता का आशीर्वाद प्राप्त होता है| तथा उनके जीवन की सभी दुःख और परेशानियां दूर होती है।
आज हमने इस आर्टिकल के माध्यम से गंगा नदी के बारे में कई बातें जानी हैं। आज हमने गंगा आरती पूजन के फ़ायदों के बारे में भी जाना।
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