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Vivah Panchami 2026: कब है विवाह पंचमी, जाने पूजा विधि तथा शुभ मुहूर्त

Bhumika Singh
Written ByBhumika Singh
Last UpdatedSeptember 23, 2026
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Vivah Panchami 2026: हिन्दू धर्म की मान्यताओं के अनुसार विवाह पंचमी 2026 (Vivah Panchami 2026) के शुभ अवसर पर भगवान श्री राम तथा माता सीता का विवाह हुआ था|

विवाह पंचमी 2026 का त्यौहार मार्गशीर्ष महीने की शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि को मनाया जाता है| इसी कारण से हिन्दू धर्म में हर साल मार्गशीर्ष महीने की शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि को प्रभु श्री राम तथा माता सीता के विवाह की सालगिरह के रूप में मनाया जाता है|

विवाह पंचमी 2026

माना जाता है कि इस दिन भगवान श्री राम के द्वारा जनकपुर राज्य में माता सीता के स्वयंवर पर भगवान शिव का धनुष तोड़ा था तथा माता सीता से विवाह किया था|

विवाह पंचमी 2026 (Vivah Panchami 2026) के त्यौहार को अधिकतर अयोध्या तथा जनकपुर राज्यों में बहुत ही भव्य तरीके से मनाया जाता है|

विवाह पंचमी 2026 भगवान श्री राम तथा देवी सीता की शादी की सालगिरह के रूप में मनाया जाने वाला एक बहुत लोकप्रिय हिन्दू त्यौहार है|

विवाह पंचमी के इस शुभ अवसर पर भक्तों के द्वारा मंदिरों तथा घरों में विवाह के मंगल गीत तथा भगवान श्री राम के भजनों का गायन बहुत ही उत्साह के साथ किया जाता है|

विवाह पंचमी के दिन वृन्दावन के निधिवन में स्थित श्री बांके बिहारी जी के प्राकट्य उत्सव के रूप में भी जाना जाता है|

विवाह पंचमी 2026 शुभ मुहूर्त तथा तिथि – 

  • विवाह पंचमी 2026 का उत्सव – 14 दिसंबर 2026, सोमवार
  • पंचमी तिथि आरंभ – 13 दिसंबर 2026, रविवार; रात – 10:48 बजे
  • पंचमी तिथि समाप्त – 14 दिसंबर 2026, सोमवार; रात – 10:20 बजे

विवाह पंचमी का महत्व 

पौराणिक कथाओं तथा धार्मिक ग्रंथों के अनुसार यह माना जाता है कि इस दिन महाराजा दशरथ के पुत्र प्रभु श्री राम के साथ राजा जनक की पुत्री देवी सीता का विवाह संपन्न हुआ था|

भगवान श्री राम तथा देवी सीता के विवाह का विवरण श्रीरामचरितमानस में मिलता है| हिन्दू धर्म में भगवान श्री राम तथा माता सीता को एक आदर्श दंपत्ति माना जाता है| जैसे भगवान श्री राम ने अपनी मर्यादा को बनाए रखकर मर्यादा पुरुषोत्तम का पद हासिल किया|

उसी प्रकार माता सीता भी अपनी पवित्रता साबित कर सम्पूर्ण संसार के लिए एक बहुत ही अच्छा उदाहरण बनी| यह विवाह पंचमी का दिन बहुत ही पवित्र तथा पावन माना जाता है|

विवाह पंचमी के दिन भगवान श्री राम तथा माता सीता की पूजा करने से भक्तों को उनका आशीर्वाद प्राप्त होता है| इस दिन अयोध्या राज्य में एक भव्य समारोह का आयोजन किया जाता है|

विवाह पंचमी के व्रत करना बहुत ही शुभ माना जाता है| विवाह पंचमी 2026 के दिन भगवान श्री राम के प्रिय राम रक्षा स्तोत्र तथा मंत्रों का जाप भी करना चाहिए|

भक्तों के द्वारा विवाह पंचमी 2026 को विशेष अनुष्ठान का आयोजन किया जाता है| वर्तमान में जनकपुरी राज्य नेपाल में स्थित है|

उत्तर भारत के कई क्षेत्रों में लोग अपनी संतान का विवाह विवाह पंचमी के दिन नहीं करते, क्योंकि भगवान श्री राम तथा माता सीता के वैवाहिक जीवन में वनवास तथा लंबा वियोग सहना पड़ा था, इसे कुछ परिवार अपने विवाह के लिए शुभ नहीं मानते। यह एक क्षेत्रीय परंपरा है, कोई निरपेक्ष नियम नहीं|

विवाह पंचमी पूजा विधि 

  • इस दिन सुबह जल्दी उठकर भगवान श्री राम के विवाह का संकल्प लेना चाहिए|
  • विवाह पंचमी के दिन भगवान श्री राम की बारात निकाली जाती है|
  • घर में भगवान श्री राम तथा माता सीता की प्रतिमा को स्थापित किया जाता है|
  • इसके पश्चात भगवान श्री राम को पीले रंग के तथा माता सीता को लाल रंग के वस्त्र अर्पित किये जाते है|
  • भगवान गणेश जी का ध्यान करके विवाह की रस्मों को शुरू किया जाता है|
  • विवाह की रस्म शुरू करने से पहले हनुमान जी की पूजा तथा उनका आह्वान जरूर करना चाहिए|
  • हनुमान जी भगवान श्री राम के परम भक्त तथा माता सीता के प्रिय माने जाते है|
  • इसके पश्चात बालकाण्ड के विवाह प्रसंग का पाठ किया जाता है|
  • साथ में ‘ओम जानकी वल्लभाय नमः’ मंत्र का 108 बार उच्चारण किया जाता है|
  • इसके बाद में भगवान श्री राम तथा माता सीता को माला पहनाई जाती है तथा उनका गठबंधन किया जाता है|
  • श्री राम और माता सीता का गठबंधन करके उनकी आरती की जाती है|
  • विवाह की रस्म पूरी होने के पश्चात भगवान को भोग लगाया जाता है| इसके बाद पूरे घर में प्रसाद का वितरण किया जाता है|
  • माना जाता है कि विवाह पंचमी के दिन घर में श्री रामचरितमानस का पाठ करने से जीवन तथा घर में हमेशा सुख – शांति बनी रहती है|
  • विवाह पंचमी 2026 के दिन भगवान श्री राम तथा सीता माता का ध्यान करने से उनका आशीर्वाद प्राप्त होता है|

विवाह पंचमी की पौराणिक कथा – 

भगवान श्री राम तथा माता सीता को भगवान विष्णु व लक्ष्मी माता का अवतार माना जाता है| जिन्होंने इस धरती पर राजा जनक की पुत्री तथा महाराज दशरथ के पुत्र के रूप में जन्म लिया था|

पुरानी कथाओं के अनुसार यह माना जाता है कि सीता माता का जन्म धरती हुआ था| जब राजा जनक खेत में हल जोत रहे थे|

विवाह पंचमी 2026

उस समय राजा जनक को नन्ही बच्ची मिली थी| राजा जनक ने उस नन्ही बच्ची को सीता नाम दिया था| इस वजह से सीता माता को जनक पुत्री के नाम से भी जाना जाता है|

राजा जनक के पास एक शिव धनुष था| जिसे भगवान परशुराम जी के अलावा अन्य कोई भी व्यक्ति नहीं उठा सकता था| उस धनुष को बचपन में सीता माता ने उठा लिया था|

तब राजा जनक ने यह निश्चय किया था कि वह उसी व्यक्ति को अपनी पुत्री के योग्य मानेंगे, जो भगवान शिव के इस धनुष को उठाकर इस पर प्रत्यंचा चढ़ाएगा|

इसके पश्चात राजा जनक के द्वारा एक स्वयंवर का आयोजन किया गया| कई सारे लोगों ने धनुष पर प्रत्यंचा चढाने का प्रयास किया किन्तु कोई भी व्यक्ति उस धनुष को हिला ना सका|

जिससे राजा जनक काफी परेशान होने लगे| राजा की ऐसी दशा को देखकर महर्षि वशिष्ठ ने भगवान राम से इस प्रतियोगिता में भाग लेने को कहा|

अपने गुरु की आज्ञा का पालन करके भगवान श्री राम ने उस शिव धनुष को उठाया तथा उस पर प्रत्यंचा चढाने लगे किन्तु वह धनुष टूट गया|

इस प्रकार से उस स्वयंवर को जीतकर भगवान श्री राम ने माता सीता से विवाह किया| वही माता सीता ने भी प्रसन्न मन के साथ भगवान श्री राम के गले में वरमाला डाली|

विवाह पंचमी के दिन इच्छापूर्ति के लिए करें यह उपाय 

  • वैवाहिक जीवन में चल रही किसी भी प्रकार की समस्या के लिए आपको विवाह पंचमी के दिन श्रीरामचरितमानस के राम – सीता प्रसंग का जप करना चाहिए|
  • ऐसा माना जाता है कि विवाह पंचमी का व्रत करके भगवान श्री राम तथा माता सीता की श्रद्धापूर्वक पूजा करने से वैवाहिक जीवन से जुड़ी प्रार्थनाओं में सहायता मिलती है, यह एक पारंपरिक आध्यात्मिक विश्वास है, पारिवारिक या व्यक्तिगत समस्याओं का सीधा समाधान नहीं|
  • संतान से जुड़ी प्रार्थनाओं के लिए भी भक्त इस दिन भगवान श्री राम तथा माता सीता से श्रद्धापूर्वक कामना करते हैं, यह एक पारंपरिक विश्वास है|
  • मान्यता है कि इस दिन भगवान श्री राम तथा माता सीता की पूजा करने तथा राम रक्षा स्तोत्र का पाठ करने भक्तों की सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती है|

विवाह पंचमी 2026 के दिन रखें इन बातों का विशेष ध्यान

  • शास्त्रों के अनुसार यह बताया गया है कि विवाह पंचमी 2026 (Vivah Panchami 2026) के दिन ब्रह्म मुहूर्त में स्नान करना चाहिए| इसके पश्चात भगवान श्री राम तथा माता सीता के विवाह का संकल्प ले तथा विवाह की तैयारी प्रारम्भ करें|
  • पूजा के स्थान पर भगवान श्री राम तथा माता सीता की मूर्ति को स्थापित कीजिये| इसके बाद में भगवान श्री राम को पीले रंग के तथा लाल रंग के वस्त्र माता सीता को अर्पित किया जाता है|
  • पौराणिक मान्यताओं के अनुसार सम्पूर्ण पूजा होने के पश्चात सुन्दरकाण्ड का पाठ करना चाहिए| ऐसा कहा जाता है कि सुन्दरकाण्ड का पाठ करने से व्यक्ति के जीवन से सभी प्रकार की परेशानियां दूर हो जाती है|

निष्कर्ष 

किसी भी तरह की पूजा करने के लिए हमें बहुत सारी तैयारियां करनी होती है| गावों में पूजा आसानी से हो जाती है लेकिन शहरों में लोगों के पास समय की कमी होती है|

इसके अलावा भी अगर आप किसी और पूजा जैसे पितृ पक्ष पूजा तथा त्रिपिंडी श्राद्ध पूजा (Tripindi Shradh Puja) के बारे में जानकारी लेना चाहते है। तो आप हमारी वेबसाइट पर जाकर सभी तरह की पूजा या त्योहारों के बारे में सम्पूर्ण ज्ञान ले सकते है।

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Frequently Asked Questions

विवाह पंचमी का त्यौहार कब मनाया जाता है?

विवाह पंचमी का त्यौहार मार्गशीर्ष महीने की शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि को मनाया जाता है|

विवाह पंचमी 2026 का त्यौहार क्यों मनाया जाता है?

माना जाता है कि इस दिन भगवान श्री राम के द्वारा जनकपुर राज्य में माता सीता के स्वयंवर पर भगवान शिव का धनुष तोड़ा था तथा माता सीता से विवाह किया था|

विवाह पंचमी का त्यौहार भव्य रूप से कहाँ मनाया जाता है?

विवाह पंचमी 2026 के त्यौहार को अधिकतर अयोध्या तथा जनकपुर राज्यों में बहुत ही भव्य तरीके से मनाया जाता है|

विवाह पंचमी 2026 का त्यौहार कब है?

इस वर्ष विवाह पंचमी 2026 का उत्सव - 14 दिसंबर 2026, सोमवार को है।


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