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रुद्राभिषेक पूजन सामग्री लिस्ट: संपूर्ण सूची, विधि और महत्व

99Pandit Ji
Last Updated:July 13, 2023

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सावन (श्रावण) के महीने में अगर भगवान शिव की उपासना पूर्ण श्रद्धा और विधि- विधान के साथ की जाये तो ऐसी कोई इच्छा या मनोकामना नहीं हो सकती जो भगवान भोले शिव उनके भगत की पूरी ना करें | रुद्राभिषेक श्रावण मास में की जाने वाली सबसे महत्वपूर्ण धार्मिक-अनुष्ठान माना जाता है | अगर हम इस धार्मिक -अनुष्ठान को पूरी श्रद्धा व समर्पित भाव के साथ करते है तो हमें रुद्राभिषेक पूजन सामग्री का ज्ञान हमारे लिए बहुत जरुरी हो जाता है | क्यों की रुद्राभिषेक पूजन सामग्री भक्त का अपना अहोभाव प्रकट करती है। 

मुख्यतय: रुद्राभिषेक शब्द “रुद्र” व “अभिषेक” के मिलने से बना है “ जहाँ “रूद्र”  भगवान शिव है शिव को ही ‘रुद्र’ कहा जाता है, क्योंकि रुतम्-दु:खम्, द्रावयति-नाशयतीतिरुद्र: यानी भगवान शिव आपके सभी दु:खों को नष्ट कर देते हैं।

“ अभिषेक” जिसका शब्दित अर्थ “जल से सींचन ” होता है |  रुद्राभिषेक के  सन्दर्भ में “अभिषेक” शब्द का मतलब भगवान शिव के शिवलिंग को जल से स्नान करवाने से होता है | यह पूर्ण विधि- विधान से किया जाने वाला कार्य होता है इसके लिए आपको पंडित जी के मार्गदर्शन की सर्वोपरि आवश्यकता होती है जो रुद्राभिषेक जैसे धार्मिक- अनुष्ठान को वैदिक शास्त्रानुसार संपन्न करवाने की योग्यता रखता हो | 

रुद्राभिषेक पूजन सामग्री

शहर में बहुत सारी सर्विस पंडित सर्विस ऐसी है जो वैदिक पंडित बुकिंग करने का न सिर्फ दिखावा  करती है बल्कि आयोजन के समय आपसे मनचाही रकम वसूलते है | अंतिम समय आप उन्हें आप ये रकम देने के लिए विवश हो जाते हो | भगतों की इसी लाचारी को ध्यान में रखते 99पंडित ने ऑनलाइन पंडित बुकिंग सर्विस की शुरुवात लगभग २ वर्ष पूर्व की गयी थी | जैसा की हमारी वेबसाइट 99पंडित नाम से ही स्पष्ट है की यह पंडित बुकिंग का एक ऐसा शुल्क आपसे प्रदान लेती है जो आपके जेब खर्च पर भारी न पड़े साथ ही आपको किसी भी धार्मिक -अनुष्ठान हेतु अधिकारित (registered) पंडित उपलब्ध करवाता है,  जिससे की हमारें द्वारा करवाई जाने वाली पूजा का पूर्ण लाभ आपको मिले सकें |  

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99पंडित पंडित बुकिंग की सर्वश्रेष्ठ सेवा है | यहाँ स्थानीय भाषा के ऐसे पंडित है जो आपको प्रासंगिक रीति-रिवाजों और अनुष्ठानों के साथ की गई पूजा का सर्वोत्तम अनुभव प्राप्त होता है  | 99पंडित पर मौजूद पंडितो की टीम रीती- रिवाज व पूजा के महत्व को ध्यान में रखकर पूजा करतें है | 

अगर आपको 99पंडित के माध्यम से रुद्राभिषेक पूजन  के आयोजन हेतु पंडित बुक करना है तो आपको 99पंडित की अधिकारित वेबसाइट पर जाकर “बूक ए पंडित ” बटन पर क्लिक करना होगा | इसके बाद अपना सामान्य विवरण जैसे नाम, जीमेल , फ़ोन नंबर ,निवास स्थान, करवायी जाने वाली पूजा का चयन कर आपको पंडित “सबमिट” बटन क्लिक करना होगा | यह प्रक्रिया बहुत आसान है | 

इसके बाद 99पंडित जल्द ही आपसे संपर्क कर लेगा | और आपको मेल या एसएमएस के माध्यम से पंडित और पूजा की सूचना मिल जाएगी | 

आप पूजा की जानकारी हमारे साथ वाहट्सएप्प के माध्यम से भी शेयर कर सकते है जिसके लिए आपको 8005663275 पर हमें वाहट्सएप्प एसएमएस करना होगा |

रुद्राभिषेक पूजन सामग्री लिस्ट निम्न प्रकार है

सामग्री मात्रा
रोली 50 ग्राम
हल्दी50 ग्राम
कलावा (मौली) 5 पैकेट
सिंदूर1 पैकेट
लौंग एवं इलायची1 + 1 पैकेट
सुपारी11 नग
अबीर 1 पैकेट
गुलाल1 पैकेट
अभ्रक50 ग्राम
लाल चन्दन बुरादा50 ग्राम
श्वेत चन्दन50 ग्राम
अष्टगंध चन्दन50 ग्राम
महाराजा चन्दन1 पैकेट
कुमकुम पीला1 पैकेट
शहद1 शीशी
इत्र1 शीशी
चमेली का तेल1 शीशी
गंगाजल बड़ी बोतल1 शीशी
गुलाबजल बड़ी1 शीशी
केवड़ा जल1 शीशी
कमल बीज50 ग्राम
सप्तधान्य 50 ग्राम
काला तिल50 ग्राम
जौ50 ग्राम
गुर्च50 ग्राम
लाल कपडा1 मीटर
पीला कपडा सूती1 मीटर
श्वेत कपडा1 मीटर
पिली सरसो1 पैकेट
जनेऊ8 नग
धूपबत्ती2 पैकेट
भस्म1 पैकेट
शमीपत्र1 पैकेट
रूईबत्ती1 पैकेट
घी250 ग्राम
कपूर50 ग्राम
भांगगोला1 नग
पानी नारियल स्नान हेतु2 नग
दोना बड़ा साइज1 पैकेट
दियाळी15 नग
पञ्चमेवा200 नग
चीनी500 ग्राम
चावल250 ग्राम
पार्वती जी के लिए साडी1 नग
शृंगार सामग्री1 सेट
चांदी अथवा सवर्णाभूषणनिष्ठानुसार
भोलेनाथ हेतु वस्त्र -धोती गमछा आदि
चांदी का सिक्का (किसी देवता की आकृति विहीन)
गन्ने का रस1 + 1 लीटर
कुम्हार की मिटटी गिली वाली7 किलो
पान के पते बड़े साइज11 नग
फल एवं मिठाई आवश्यकतानुसार
गुलाब फूल2 किलो
सुरजमुखी श्वेत एवं पित पुष्प1 किलो
गेंदा के फूल1 किलो
चांदनी के फूल1 किलो
नवरग के फूल1 किलो
मदार के पुष्प250 ग्राम
धूतर पुष्प एवं फल
तुलसी मंजरी
कमल पुष्प21 या 51 या 108 नग
बेलपत्र 108 पीस
हरी भांग200 ग्राम
रुद्राक्ष माला1 नग
फलो का जूस स्नान  हेतु1 + 1
दूर्वा हरीहरी अंकुरित
फूलो की लड़ी (सजावट एवं शृंगार करना करने के लिए ) 
दूध5 अथवा 7 लीटर
दही1 किलो
बड़ी (फूलसाइज)  की परांत एवं चौकी , वस्त्रादि – पंडित के अनुसार करे | 

रुद्राभिषेक का महत्व 

रुद्राभिषेक शिव पूजा का एक महत्वपूर्ण अंग है जो शिव भक्तों के द्वारा अत्यंत श्रद्धा और भक्ति के साथ किया जाता है। इस पूजा का महत्वपूर्ण कारण यह है कि इसके माध्यम से शिव भक्तों को शिव के आशीर्वाद और कृपा प्राप्त होती है। यह पूजा शिव के गुणों, महत्वपूर्णता और ऊँचाईयों को दर्शाने का एक श्रेष्ठ तरीका है। शिव पूजा के माध्यम से भक्तों का मानसिक, शारीरिक और आध्यात्मिक विकास होता है।

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रुद्राभिषेक का लाभ 

“रुद्राभिषेक” करने से शिव भक्तों को अनेक लाभ प्राप्त होते हैं। यह पूजा शारीरिक, मानसिक और आध्यात्मिक तौर पर व्यक्ति को शक्ति, सुख, समृद्धि और मोक्ष की प्राप्ति में सहायता करती है। “रुद्राभिषेक” करने से व्यक्ति की मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं और उसे शिव की कृपा प्राप्त होती है। इस पूजा को करने से व्यक्ति में सामर्थ्य, शक्ति और सुरक्षा की भावना जाग्रत होती है।

रुद्राभिषेक क्यों किया जाता है?

शास्त्रों के अनुसार भगवान शिव को उनका रूद्र रुप सबसे प्रिय होता है | “रुद्राभिषेक” का आयोजन करने से आपकी हर मनोकामना पूर्ण होती है | “रुद्राभिषेक” करने से भगवान शिवा अत्यंत प्रसन्न होते है,और वे इस रुप में आपको मनचाहा वरदान देते  है | 

रुद्राभिषेक विधि 

सबसे पहले पूजा के लिए शुभ मुहूर्त का चयन करें और उस समय तैयार हो जाएं।यह भी समरण रहे की पूजा स्थान को साफ-सुथरा और ध्यानयोग्य बनाएं। पूजा की शुरुआत करने के लिए पहले गणेश जी की पूजा करें | फिर शिवलिंग को एक पात्र में स्थापित करें तथा साथ में ॐ नम शिवाय मंत्र”  का उच्चारण करे । तत्पश्चात शिवलिंग को जल से स्नान कराएं और उसे शुद्ध पानी से धोएं।बाद में शिवलिंग को धूप, दीपक, गंध और अच्छंबित से सजाएं। फिर अपने हाथों में रुद्राभिषेक पूजन सामग्री लेकर शिवलिंग की पूजा करें। मन्त्रों के उच्चारण के साथ  साथ शिवलिंग को जल से अभिषेक करें। पूजा समाप्त करने के बाद आरती करें और उन्हें प्रणाम करें।अंत में प्रसाद बांटें और पूजा स्थान को साफ करें।

रुद्राभिषेक मंत्र 

शिवलिंग का जलाभिषेक करते समय हमें निम्न मन्त्र का उच्चारण करना चाहिए :- 

‘श्रीभगवते साम्बशिवाय नमः । स्नानीयं जलं समर्पयामि।’ 

गाय के दूध से रुद्राभिषेक कैसे करे 

कहते है की गाय भगवान शिव को अत्यंत प्रिय है अगर आप शाम के समय अगर भगवान शिव को गाय का तजा दूध द्वारा अभिषेक करते है तो भोले बाबा जल्दी प्रश्न होते है और वो आपकी मनोकामना जल्दी पूर्ण करेंगे | 

गाय के दूध से रुद्राभिषेक करते समय हमें निम्न मंत्रो का उच्चारण करना चाहिए |

“ॐ श्री कामधेनवे नम:” 

“ॐ नम: शिवाय” मंत्र का उच्चारण करते हुए लाल फूलों की कुछ पंखुडियां शिवलिंग को अर्पित करें।

साथ ही गाय के दूध की पतली धार बनाते हुए – “ॐ सकल लोकैक गुरुर्वै नम:” मंत्र का जाप करते रहें।

निष्कर्ष 

इस वर्ष सावन(श्रावण) महीना 59 दिन का है ,और इसमें कुल 8 सोमवार है , यदि आप सोमवार के दिन “ रुद्राभिषेक” के आयोजन करवाते है तो आपकी मनोकामना पूर्ण होने से कोई नहीं रोक सकता | 

99पंडित के माध्यम से आप “ रुद्राभिषेक” हेतु आसानी से पंडित बुक कर सकते है  | 99पंडित पर पंडित बुक करने पर पंडित जी द्वारा आपको इस श्रावण मास पर विशेष छूट भी दी जा सकती है | ये ऑफर 99पंडित द्वारा सिमित समय के लिए है , अत : बिना किसी देरी के आप अपना पंडित बुक करवायें | 

इस ब्लॉग के माध्यम से हमारा उद्देश्य आपको रुद्राभिषेक पूजन सामग्री के बारे में सही जानकारी देना था |

अब आप किसी भी वैदिक अनुष्ठान हेतु सामग्री की व्यवस्था हेतु 99पंडित की अधिकारित प्लेटफार्म पर दी गयी जानकारी के अनुसार  कर सकते हो | इसके अतिरिक्त श्रीमद भागवत महापुराण सामग्री, अखंड रामायण पाठ, सूंदरकांड पूजन सामग्री,  की जानकारी व इनके आयोजन हेतु ऑनलाइन पंडित बुक कर सकते है |     

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

Q.रुद्राभिषेक कब नहीं करना चाहिए?

A.99पंडित के अनुसार कृष्ण पक्ष सप्तमी, कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी व पूर्णिमा तिथि को हमें  रुद्राभिषेक नहीं करना चाहिए क्यों की वैदिक शास्त्रों और रुद्रसहिता की मानें तो इस  दिन  भगवन शिव का स्थान निश्चित नहीं होता और  वे समाधी में रहते है, और समाधी से जगाने का परिणाम कामदेव भुगत चुके है, अत : इसके दुष्परिणाम हो सकते है  | अगर आप किसी विशेष मनोंकामना पूर्ति है तो इन दिनों इसका आयोजन नहीं करना चाहिये |

Q.क्या मंगलवार को रुद्राभिषेक किया जा सकता है?

A.रूद्र सहिंता की माने तो अगर किसी भी प्राणी के जीवन में मंगल का दोष है ,और विवाह मार्ग में बाधा उत्पन्न हो रही है, तो मंगलवार के दिन रुद्राभिषेक का आयोजन आपके लिए अच्छा व शुभ माना जाता है |

Q.शिवलिंग पर जल कब नहीं चढ़ाना चाहिए?

A.शिवलिंग पर शाम के समय कभी भी शिवलिंग पर जल नहीं चढ़ाना चाहिए क्यों की शाम के समय जल अर्पित करने से आपके द्वारा की जाने वाली पूजा का फल आपको नहीं मिल पाता | 

Q.शिवलिंग पर दूध डालने का क्या मतलब है?

A.शिवलिंग पर दूध चढ़ाने का मतलब यह होता है कि जब ऊपर दूध डाला जाता है, तो उन्हें मूर्ति को औषधीय गुण प्राप्त होंगे और मूर्ति को ब्रह्मांड से प्राप्त होने वाली सकारात्मक कंपन भी प्राप्त होंगे । इसलिए कहा  जाता है की  हिंदू संस्कृति में जो कुछ भी भगवान को अर्पित किया जाता है वह कभी बर्बाद नहीं होता है |

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