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Shivashtak Mantra Lyrics: श्री शिवाष्टक स्तोत्र हिंदी में

99Pandit Ji
Last Updated:February 21, 2024

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इस शिवाष्टक स्तोत्र (Shivashtak Stotra) का पाठ भगवान शंकर जी को प्रसन्न करने के लिए किया जाता है| इस शिवाष्टक स्तोत्र (Shivashtak Stotra) का जाप करने से भगवान शिवजी अपने भक्तों को आशीर्वाद प्रदान करते है| भगवान शिव की कृपा पाने के लिए उनके भक्तों द्वारा इस शिवाष्टक स्तोत्र (Shivashtak Stotra) का जाप किया जाता है| जैसा कि आप सभी को ज्ञात है भगवान शिव को सोमवार का दिन समर्पित किया गया है| इसी वजह से सोमवार के दिन भगवान शंकर की पूजा करने तथा शिवाष्टक स्तोत्र (Shivashtak Stotra) का जाप करने से भगवान शंकर अपने भक्तो के जीवन से सभी कष्ट दूर कर देते है तो आइये जाप करते है शिवाष्टक स्तोत्र (Shivashtak Stotra) का|

शिवाष्टक स्तोत्र

इसी के साथ यदि आप किसी भी आरती या चालीसा जैसे कनकधारा स्तोत्र [Kanakdhara Strota], ओम जय जगदीश हरे आरती [Om Jai Jagdish Hare Aarti], या सत्यनारायण व्रत कथा [Satyanarayan Vrat Katha] आदि भिन्न-भिन्न प्रकार की आरतियाँ, चालीसा व व्रत कथा पढना चाहते है तो आप हमारी वेबसाइट 99Pandit पर विजिट कर सकते है| इसके अलावा आप हमारे एप 99Pandit For Users पर भी आरतियाँ व अन्य कथाओं को पढ़ सकते है| इस एप में सम्पूर्ण भगवद गीता के सभी अध्यायों को हिंदी अर्थ समझाया गया है|

शिवाष्टक स्तोत्र लिरिक्स हिंदी में | Shivashtak Stotra Lyrics in Hindi

|| शिवाष्टक स्तोत्र ||

आदि अनादि अनंत अखंङ, अभेद अखेद सुबेद बतावैं ।
अलख अगोचर रुप महेस कौ, जोगि जती मुनि ध्यान न पावैं ॥

आगम निगम पुरान सबै, इतिहास सदा जिनके गुन गावैं ।
बङभागी नर नारि सोई, जो सांब सदासिव कौं नित ध्यावैं ॥

सृजन सुपालन लय लीला हित, जो विधि हरि हर रुप बनावैं ।
एकहि आप विचित्र अनेक, सुबेष बनाइ कैं लीला रचावैं ॥

सुंदर सृष्टि सुपालन करि, जग पुनि बन काल जु खाय पचावैं ।
बङभागी नर नारि सोई, जो सांब सदासिव कौं नित ध्यावैं ॥

अगुन अनीह अनामय अज, अविकार सहज निज रुप धरावैं ।
परम सुरम्य बसन आभूषण, सजि मुनि मोहन रुप करावैं ॥

ललित ललाट बाल बिधु विलसै, रतन हार उर पै लहरावैं ।
बङभागी नर-नारि सोई, जो सांब सदासिव कौं नित ध्यावैं ॥

अंग विभूति रमाय मसान की, विषमय भुजगनि कौं लपटावैं ।
नर कपाल कर मुंङमाल गल, भालु चरम सब अंग उढावैं ॥

घोर दिगंबर लोचन तीन, भयानक देखि कैं सब थर्रावैं ।
बङभागी नर नारि सोई, जो सांब सदासिव कौं नित ध्यावैं ॥

सुनतहि दीन की दीन पुकार, दयानिधि आप उबारन धावैं ।
पहुँच तहाँ अबिलंब सुदारुन, मृत्यु को मर्म विदारि भगावैं ॥

मुनि मृकंङु सुत की गाथा, सुचि अजहुँ बिग्यजन गाइ सुनावैं ।
बङभागी नर नारि सोई, जो सांब सदासिव कौं नित ध्यावैं ॥

चाउर चारि जो फूल धतूर के, बेल के पात औ पानि चढावैं ।
गाल बजाय कै बोल जो, ‘हर हर महादेव’ धुनि जोर लगावैं ॥

तिनहिं महाफल देय सदासिव, सहजहि भुक्ति मुक्ति सो पावैं ।
बङभागी नर नारि सोई, जो सांब सदासिव कौं नित ध्यावैं ॥

बिनसि दोष दुख दुरित दैन्य, दारिद्रय नित्य सुख सांति मिलावैं ।
आसुतोष हर पाप ताप सब, निरमल बुध्दि चित्त बकसावैं ॥

असरन सरन काटि भव बंधन, भव निज भवन भव्य बुलवावैं ।
बङभागी नर नारि सोई, जो सांब सदासिव कौं नित ध्यावैं ॥

औढरदानि उदार अपार जु, नैकु सी सेवा तें ढुरि जावैं ।
दमन असांति समन सब संकट, विरद बिचार जनहि अपनावैं ॥

ऐसे कृपालु कृपामय देब के, क्यों न सरन अबहीं चलि जावैं ।
बङभागी नर नारि सोई, जो सांब सदासिव कौं नित ध्यावैं ॥

शिवाष्टक स्तोत्र

Shivashtak Stotra Lyrics in English | आदि अनादि अनंत अखंङ

|| Shivashtak Stotra ||

Aadi anadi anant akhang, abhed akhed subhed batawein.
Alakh agochar roop Mahesh ko, yogi jati muni dhyan na paavein.

Aagam nigam puran sabai, itihaas sada jinke gun gaavein.
Badbhagi nar nari soi, jo saamb sada Shiv ko nit dhyaavein.

Srujan supalan lay leela hit, jo vidhi Hari Har roop banaavein.
Ekahi aap vichitr anek, subhesh banai kain leela rachavein.

Sundar srishti supaaln kari, jag puni ban kaal ju khaay pachavein.
Banbhagi nar nari soi, jo saamb sada Shiva kaun nit dhyaavein.

Agun aneeh anaamay aj, avikaar sahaj nij roop dharaavein.
Param surmya basan aabhooshan, saji muni Mohan roop karaavein.

Lalit lalaat baal bidhu vilasai, ratan haar ur pai lehraavein.
Banbhagi nar-nari soi, jo saamb sada Shiva kaun nit dhyaavein.

Ang vibhuti ramaay masaan ki, vishmay bhujagni kaun lapataavein.
Nar kapal kar mungmaal gal, bhaalu charam sab ang udhaavein.

Ghor digambar lochan teen, bhayaanak dekhi kain sab tharraavein.
Banbhagi nar nari soi, jo saamb sada Shiva kaun nit dhyaavein.

Sunatahi deen ki deen pukaar, dayaanidhi aap ubaran dhyaavein.
Pahunch tahaa abilamb sudaarun, mrityu ko marm vidaari bhagaavein.

Muni mrikanghu sut ki gaatha, suchi ajahun bigyajan gaai sunaavein.
Banbhagi nar nari soi, jo saamb sada Shiva kaun nit dhyaavein.

Chaur chaari jo phool dhatuur ke, bel ke paat aur paani chadhaavein.
Gaale bajaay ke bol jo, ‘Har Har Mahadev’ dhuni jor lagaavein.

Tinahin mahaphal dey sadashiv, sahajahi bhukti mukti so paavein.
Banbhagi nar nari soi, jo saamb sada Shiva kaun nit dhyaavein.

Binasi dosh dukh durit dainya, daaridray nitya sukh shaanti milaavein.
Aasutosha har paap taap sab, nirmal buddhi chitt bakshaavein.

Asaran saran kaati bhav bandhan, bhav nij bhavan bhavy bulavaavein.
Banbhagi nar nari soi, jo saamb sada Shiva kaun nit dhyaavein.

Audhardaani udaar apaar ju, naiku si seva te dhur jaavein.
Daman asaanti saman sab sankat, virdad bichaar janhi apnaavein.

Aise kripalu kripaamay deb ke, kyon na saran abahi chali jaavein.
Banbhagi nar nari soi, jo saamb sada Shiva kaun nit dhyaavein.

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