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Shiv Tandav Stotram Lyrics: शिव तांडव स्तोत्रम हिंदी अर्थ सहित

99Pandit Ji
Last Updated:February 22, 2024

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शिव तांडव स्तोत्रम (Shiv Tandav Stotram) का जाप भगवान शिव को प्रसन्न करने का बहुत ही अच्छा साधन माना जाता है| कहा जाता है कि भगवान शिव अपने भक्तों से बहुत ही जल्दी प्रसन्न हो जाते है| जो भी शिव भक्त इस शिव तांडव स्तोत्रम (Shiv Tandav Stotram) का जाप करता है भगवान शिव उसके जीवन समस्त विपदाओं को दूर कर देते है|

शिव तांडव स्तोत्रम

शिव तांडव स्तोत्रम (Shiv Tandav Stotram) भगवान शंकर को बहुत ही प्रिय है| पौराणिक कथाओं के अनुसार इस शिव तांडव स्तोत्रम (Shiv Tandav Stotram) की रचना लंकापति रावण के द्वारा की गई थी| शिव तांडव स्तोत्रम (Shiv Tandav Stotram) पाठ के द्वारा मनुष्य अपनी किसी भी समस्या से छुटकारा पा सकता है| आइये जानते है क्या है भगवान शिव के प्रिय शिव तांडव स्तोत्रम (Shiv Tandav Stotram) का हिंदी अर्थ|

इसी के साथ यदि आप किसी भी आरती या चालीसा जैसे संकट मोचन हनुमानाष्टक [Sankat Mochan Hanumanashtak], सीता माता आरती [Sita Mata Aarti], या सफला एकादशी व्रत कथा [Saphala Ekadashi Vrat Katha] आदि भिन्न-भिन्न प्रकार की आरतियाँ, चालीसा व व्रत कथा पढना चाहते है तो आप हमारी वेबसाइट 99Pandit पर विजिट कर सकते है| इसके अलावा आप हमारे एप 99Pandit For Users पर भी आरतियाँ व अन्य कथाओं को पढ़ सकते है| इस एप में सम्पूर्ण भगवद गीता के सभी अध्यायों को हिंदी अर्थ समझाया गया है|

शिव तांडव स्तोत्रम हिंदी अर्थ सहित – Shiv Tandav Stotram Lyrics With Hindi Meaning

जटा टवी गलज्जलप्रवाह पावितस्थले गलेऽव लम्ब्यलम्बितां भुजंगतुंग मालिकाम्‌।
डमड्डमड्डमड्डमन्निनाद वड्डमर्वयं चकारचण्डताण्डवं तनोतु नः शिव: शिवम्‌ ॥1॥

हिंदी अर्थ – भगवान शिव के बालों के बहने वाले जल के कारण उनका कंठ अत्यंत पवित्र है| उनके गले में जो सर्प है, वह सदैव हार की भांति उनके गले में लटका रहता है एवं उनके डमरू से डमट् डमट् डमट् की ध्वनि निकल रही है| भगवान शंकर शुभ तांडव नृत्य कर रहे है, वह हमे संपन्नता प्रदान करें|

जटाकटा हसंभ्रम भ्रमन्निलिंपनिर्झरी विलोलवीचिवल्लरी विराजमानमूर्धनि।
धगद्धगद्धगज्ज्वल ल्ललाटपट्टपावके किशोरचंद्रशेखरे रतिः प्रतिक्षणं मम: ॥2॥

हिंदी अर्थ – मेरी भगवान शिव में बहुत ही गहरी रूचि है| जिनका मस्तक अलौकिक गंगा नदी की बहती पवित्र धाराओं से सुशोभित है| जो उनके बालों की उलझी हुई जटाओं से उमड़ रही है| जिनके मस्तक पर चमकदार अग्नि प्रज्वलित रहती है तथा जो अपने सर पर आभूषण के रूप में अर्ध-चंद्रमा को धारण किये हुए है|

धराधरेंद्रनंदिनी विलासबन्धुबन्धुर स्फुरद्दिगंतसंतति प्रमोद मानमानसे।
कृपाकटाक्षधोरणी निरुद्धदुर्धरापदि क्वचिद्विगम्बरे मनोविनोदमेतु वस्तुनि ॥3॥

हिंदी अर्थ – मैं अपने मन की ख़ुशी भगवान शिव में खोज रहा हूँ| इस सम्पूर्ण ब्रह्माण्ड के सभी प्राणी जिनके मन में वास करते है| जिनकी धर्मपत्नी पर्वत राज की पुत्री माता पार्वती है| जो अपनी करुणामयी दृष्टि से असाधारण समस्याओं को नियंत्रित करते है| जो इन दिव्य लोकों को अपनी पोशाक के रूप में धारण करते है|

जटाभुजंगपिंगल स्फुरत्फणामणिप्रभा कदंबकुंकुमद्रव प्रलिप्तदिग्व धूमुखे।
मदांधसिंधु रस्फुरत्वगुत्तरीयमेदुरे मनोविनोदद्भुतं बिंभर्तुभूत भर्तरि ॥4॥

हिंदी अर्थ – जो सम्पूर्ण जीवन के रक्षक है, मुझे उन भगवान शिव में अद्भुद सुख प्राप्त होता है| उनके रेंगते हुए सांप का फन लाल-भूरा रंग का है व उसकी मणि भी चमक रही है| यह समस्त दिशाओं की देवियों पर विभिन्न रंगों को बिखेर रहा है एवं जो एक हाथी की खाल से बने दुशाले से ढंका हुआ है|

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सहस्रलोचन प्रभृत्यशेषलेखशेखर प्रसूनधूलिधोरणी विधूसरां घ्रिपीठभूः।
भुजंगराजमालया निबद्धजाटजूटकः श्रियैचिरायजायतां चकोरबंधुशेखरः ॥5॥

हिंदी अर्थ – जिनका मुकुट चंद्रमा है, वह भगवान शिव हमे संपन्नता प्रदान करे| जिनके बाल लाल नाग के हार से बंधे हुए है| जिनका पायदान फूलों की धुल बहने के कारण गहरे रंग का हो गया है जो कि विष्णु, इंद्र तथा समस्त देवताओं के सिर से गिरती है|

ललाटचत्वरज्वल द्धनंजयस्फुलिंगभा निपीतपंच सायकंनम न्निलिंपनायकम्‌।
सुधामयूखलेखया विराजमानशेखरं महाकपालिसंपदे शिरोजटालमस्तुनः ॥6॥

हिंदी अर्थ – भगवान शिव की उलझी हुई जटाओं से हम सिद्धि रूपी दौलत को प्राप्त करें| जिन्होंने अपने मस्तक पर जलने वाली अग्नि की चिंगारी मात्र से ही कामदेव को नष्ट कर दिया था| जो समस्त दैवीय लोकों के स्वामियों के द्वारा आदरणीय है तथा जो अर्ध-चंद्रमा से सुसज्जित है|

करालभालपट्टिका धगद्धगद्धगज्ज्वल द्धनंजया धरीकृतप्रचंड पंचसायके।
धराधरेंद्रनंदिनी कुचाग्रचित्रपत्र कप्रकल्पनैकशिल्पिनी त्रिलोचनेरतिर्मम ॥7॥

हिंदी अर्थ – जिनके तीन नेत्र है, मेरी रूचि उन भगवान शिव में है| जिनके द्वारा शक्तिशाली कामदेव को अग्नि देव को समर्पित किया गया था| उनके मस्तक की सतह डगद् डगद् की ध्वनि के समान जलती है| वह एकमात्र ऐसे कलाकार है जो पर्वतराज की पुत्री पार्वती (यहाँ पार्वती प्रकृति हैं, तथा चित्रकारी सृजन है) के स्तन की नोंक पर सजावटी रेखाएं खींचने में सक्षम है|

नवीनमेघमंडली निरुद्धदुर्धरस्फुर त्कुहुनिशीथनीतमः प्रबद्धबद्धकन्धरः।
निलिम्पनिर्झरीधरस्तनोतु कृत्तिसिंधुरः कलानिधानबंधुरः श्रियं जगंद्धुरंधरः ॥8॥

हिंदी अर्थ – भगवान शिव ही इस सम्पूर्ण संसार का भार उठाते है| जिनकी शोभा चंद्रमा के समान है| जिनके समक्ष आलौकिक गंगा नदी है| जिनकी गर्दन बादलों की परतो से ढकी अमावस्या की अर्धरात्रि के समान काली है|

प्रफुल्लनीलपंकज प्रपंचकालिमप्रभा विडंबि कंठकंध रारुचि प्रबंधकंधरम्‌।
स्मरच्छिदं पुरच्छिंद भवच्छिदं मखच्छिदं गजच्छिदांधकच्छिदं तमंतकच्छिदं भजे ॥9॥

हिंदी अर्थ – मैं भगवान शिव से प्रार्थना करता हूँ , जिनका कंठ मंदिरों की चमक से बंधा हुआ है| पूर्ण रूप से खिले हुए नीले कमलो की गरिमा से लटका हुआ है| जो इस ब्रह्माण्ड की कालिमा सा प्रतीत होता है| जो कामदेव को मारने वाले है तथा जिन्होंने त्रिपुर का अंत हुआ था| जिनके द्वारा सांसारिक जीवन के बंधनों को नष्ट किया गया| जिन्होंने बलि की प्रथा का अंत किया| जिन्होंने अंधक नामक दैत्य का वध किया| जिन्होंने मृत्यु के देवता को परास्त किया था|

अखर्वसर्वमंगला कलाकदम्बमंजरी रसप्रवाह माधुरी विजृंभणा मधुव्रतम्‌।
स्मरांतकं पुरातकं भावंतकं मखांतकं गजांतकांधकांतकं तमंतकांतकं भजे ॥10॥

हिंदी अर्थ – जो कल्याणमयी, समस्त कलाओं के रस का आस्वादन करने वाले है, जो कामदेव को भस्म करने वाले है| त्रिपुरासुर तथा गजासुर के संहारक तथा स्वयं यमराज के लिए भी यमस्वरूप है| मैं उन शिव को भजता हूँ|

जयत्वदभ्रविभ्रम भ्रमद्भुजंगमस्फुरद्ध गद्धगद्विनिर्गमत्कराल भाल हव्यवाट्।
धिमिद्धिमिद्धि मिध्वनन्मृदंग तुंगमंगलध्वनिक्रमप्रवर्तित: प्रचण्ड ताण्डवः शिवः ॥11॥

हिंदी अर्थ – अत्यंत तीव्र गति से भ्रमण कर रहे सर्पों की फुफकार से क्रमश: मस्तक में बढ़ी हुई प्रचंड आग के मध्य मृदंग की मंगलकारी उच्च धिम-धिम की ध्वनि के साथ में लीन शिव जी सर्व प्रकार से सुशोभित हो रहे है|

दृषद्विचित्रतल्पयो र्भुजंगमौक्तिकमस्र जोर्गरिष्ठरत्नलोष्ठयोः सुहृद्विपक्षपक्षयोः।
तृणारविंदचक्षुषोः प्रजामहीमहेन्द्रयोः समं प्रवर्तयन्मनः कदा सदाशिवं भजे ॥12॥

हिंदी अर्थ – कठोर पत्थर व कोमल शय्या, सर्प व मोतियों की माला, बहुमूल्य रत्न व मिट्टी के टुकड़े, कमल तथा तिनको पर समान दृष्टि रखने वाले शिव को मैं भजता हूँ|

शिव तांडव स्तोत्रम

कदा निलिंपनिर्झरी निकुंजकोटरे वसन्‌ विमुक्तदुर्मतिः सदा शिरःस्थमंजलिं वहन्‌।
विमुक्तलोललोचनो ललामभाललग्नकः शिवेति मंत्रमुच्चरन्‌ कदा सुखी भवाम्यहम्‌ ॥13॥

हिंदी अर्थ – कब मैं गंगा जी के कछारगुञ में निवास करता हुआ, निष्कपट हो, अपने सिर पर अंजलि धारण कर चंचल नेत्रों वाले शिव जी का मंत्रोच्चार करते हुए अक्षय सुख को प्राप्त करूँगा|

निलिम्प नाथनागरी कदम्ब मौलमल्लिका-निगुम्फनिर्भक्षरन्म धूष्णिकामनोहरः।
तनोतु नो मनोमुदं विनोदिनींमहनिशं परिश्रय परं पदं तदंगजत्विषां चयः ॥14॥

हिंदी अर्थ – देवांगनाओं के सिर में गुंथे पुष्पों की मालाओं से झड़ते हुए सुगंधमय राग से मनोहर परम शोभा के धाम महादेव जी के अंगों की सुन्दरता परम आनंद युक्त हमारे मन की प्रसन्नता को हमेशा बढाती है|

प्रचण्ड वाडवानल प्रभाशुभप्रचारणी महाष्टसिद्धिकामिनी जनावहूत जल्पना।
विमुक्त वाम लोचनो विवाहकालिकध्वनिः शिवेति मन्त्रभूषगो जगज्जयाय जायताम्‌ ॥15॥

हिंदी अर्थ – प्रचंड वडवानल की ही भांति पापों को भस्म करने में स्त्री स्वरूपिणी अष्टमहासिद्धियों तथा चंचल नेत्रों वाली कन्याओं से शिव विवाह समय गान की मंगल ध्वनि सभी मंत्रों में से सबसे श्रेष्ठ शिव जी के मंत्र से पूरित, संसारिक दुखों पर विजय पाए|

इमं हि नित्यमेव मुक्तमुक्तमोत्तम स्तवं पठन्स्मरन्‌ ब्रुवन्नरो विशुद्धमेति संततम्‌।
हरे गुरौ सुभक्तिमाशु याति नान्यथागतिं विमोहनं हि देहिनां सुशंकरस्य चिंतनम् ॥16॥

हिंदी अर्थ – इस शिव तांडव स्तोत्रम (Shiv Tandav Stotram) जो भी व्यक्ति पढता है, याद करता है तथा सुनाता है| वह सदैव के लिए ही पवित्र हो जाता है तथा भगवान शिव की भक्ति पाता है| इस भक्ति का कोई अन्य उपाय नहीं है| केवल भगवान शिव का विचार इस भ्रम को दूर कर देता है|

पूजाऽवसानसमये दशवक्रत्रगीतं यः शम्भूपूजनपरम् पठति प्रदोषे।
तस्य स्थिरां रथगजेंद्रतुरंगयुक्तां लक्ष्मिंं सदैव सुमुखीं प्रददाति शम्भुः ॥17॥

हिंदी अर्थ – प्रदोष काल में शिवपूजन के अंतिम समय में इस रावणकृत शिव तांडव स्तोत्रम (Shiv Tandav Stotram) के गान से लक्ष्मी स्थिर रहती है| तथा वो भक्त सदैव ही रथ, गज, घोड़े आदि से सर्वदा युक्त होता है|

॥ इति श्रीरावणकृतं शिव ताण्डवस्तोत्रं सम्पूर्णम् ॥

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