Logo 0%
Book Griha Pravesh Puja Online Book Griha Pravesh Puja Online Book Now

तुलसीदास जयंती 2026: शुभ तिथि, मुहूर्त, परिचय व महत्व

20,000+
Pandits Joined
1 Lakh+
Puja Conducted
4.9/5
Customer Rating
50,000
Happy Families
Khushi Sharma Written by: Khushi Sharma
Last Updated:July 31, 2025
तुलसीदास जयंती 2026
Summarize This Article With Ai - ChatGPT Perplexity Gemini Claude Grok

Tulsidas Jayanti 2026: क्या आप जानते है तुलसीदास जी कौन थे? क्या आप जानते है कि 2026 में तुलसीदास जयंती कब है? अगर नही तो इस लेख को पूरा जरुर पढ़े।

हमारा यह भारत देश अनेको विद्वानों की जन्म भूमि है| इस देश में ऐसे महान लोगों ने जन्म लिया है| जिन्होंने समाज के कल्याण के लिए बहुत ही बड़े बड़े कार्य किये है|

आज हम उन्ही में से एक अखंड विद्वान् की जयंती के बार में बात करेंगे| जिन्होंने अपने जीवनकाल में सबसे बड़ी और बहुत महत्वपूर्ण रचनाए की|

तुलसीदास जयंती 2026

हम बात कर रहे है महाकवि तुलसीदास जी के बारे में जो कि भगवान श्री राम के बहुत बड़े भक्त के रूप में जाने जाते थे|

इन्होने अपनी रचनाओं के माध्यम से भगवान राम के जीवन के बारे में लोगों को अवगत करवाया| तुलसीदास जयंती 2026 (Tulsidas Jayanti 2026) हिन्दू धर्म के महान संत तुलसीदास जी के जन्म के रूप में मनाई जाती है|

तुलसीदास जी के द्वारा कई चमत्कारी रचनाए की गई है| भगवान राम जी के जीवन पर आधारित रामचरितमानस की रचना भी महाकवि तुलसीदास जी के द्वारा की गई है|

इतना ही नहीं इसके अलावा भी अनेकों ऐसी रचनाए है जो कलयुग में भी लोगों में प्रचलित है| विकिपीडिया के अनुसार सावन मास के शुक्ल पक्ष में अमावस्या के सातवे दिन तुलसीदास जयंती का यह पावन पर्व मनाया जाता है|

महाकवि तुलसीदास जी के द्वारा कुल 12 पुस्तकों की रचना की गई थी| जिसमे में सबसे प्रसिद्ध पुस्तक श्री रामचरितमानस है| तुलसीदास जी ने इस पुस्तक को अवधी भाषा में लिखा था|

जो उत्तर भारत के लोगों की भाषा है| आगे हम इस आर्टिकल के माध्यम से तुलसीदास जयंती के बारे सम्पूर्ण जानकारी देंगे तो तुलसीदास जयंती 2026 से जुडी सभी जानकारी, शुभ तिथि और मुहूर्त जानने के लिए आर्टिकल पूरा पढ़े|

तुलसीदास जयंती 2026 की शुभ तिथि व मुहूर्त

तुलसीदास जयंती 2026 20 अगस्त 2026
तिथि सप्तमी
दिन बृहस्पतिवार
सप्तमी तिथि प्रारम्भ अगस्त 19, 2026 को रात 10:20 से
सप्तमी तिथि समाप्त अगस्त 21, 2026 को सुबह 12:45 बजे

संत तुलसीदास जी का जीवन परिचय

महाकवि तुलसीदास जी का जन्म विक्रम संवत 1589 या 1532 ई. में उत्तर प्रदेश राज्य के बांदा जिला के राजपुर नामक स्थान पर हुआ था|

तुलसीदास जी के पिताजी का नाम आत्माराम शुक्ल दुबे तथा उनकी माता का नाम हुलसी था| संत तुलसीदास जी का जन्म ही एक असाधारण बालक के रूप में हुआ था|

ऐसा इस कारण से कहा जा रहा है क्योंकि जब कोई साधारण बच्चा पैदा होता है| तो वह पैदा होते ही रोने लगता है लेकिन जब तुलसीदास जी का जन्म हुआ था| तब में बिल्कुल नहीं रोए थे|

इसके अलावा सबसे चौकाने वाली बात यह थी कि जब तुलसीदास जी का जन्म हुआ था| उस समय उनके मुख में पुरे दांत उपस्थित थे| जो कि कोई साधारण बात नहीं है|

तुलसीदास जी का नाम पहले तुलसीदास जी नहीं था| इससे पहले उन्हें रामबोला के नाम से जाना जाता था| तुलसीदास की एक पत्नी थी|

जिसका नाम रत्नावली था| माना जाता है कि तुलसीदास जी की पत्नी बहुत ही विद्वान् थी| इनका एक पुत्र भी था| जिसका नाम तारक था|

महाकवि तुलसीदास जी को अपनी पत्नी से बहुत ही अधिक स्नेह था| वह अपनी पत्नी से ज्यादा समय तक दूर नहीं रह पाते थे|

एक बार की बात है जब उनकी पत्नी उन्हें बताए बिना ही अपने पिताजी के घर चली गयी थी| जब यह बात तुलसीदास जी को ज्ञात हुई तो वह उनके पास मिलने आधी रात को ही उनके ससुर के घर चले गए|

तुलसीदास जी को कैसे हुए श्री राम के दर्शन

अपने पति की ऐसी हरकत की वजह से रत्नावली को बहुत ही अधिक शर्म महसूस हुई| तब तुलसीदास जी से उनकी पत्नी ने कहा – मेरा शरीर केवल मांस और हड्डियों का पुतला है|

इस गंदे शरीर से प्रेम और लगाव लगाने से अच्छा यदि आप भगवान श्री राम से आधा भी प्रेम करते तो इस माया रूपी भवसागर से बाहर निकल पाते|

अपनी पत्नी से ऐसी बात सुनकर तुलसीदास जी को बहुत अधिक बुरा लगा| रत्नावली की यह बात तीर के भांति उनके दिल पर लगी| इसके पश्चात तुलसीदास जी उनके घर से तुरंत ही चले गए|

इसके पश्चात तुलसीदास जी ने अपना घर त्याग दिया और तपस्वी बन गए| अब उन्होंने चौदह वर्षों में तीर्थ के सभी पवित्र स्थानों का भ्रमण कर लिया|

एक बार जब तुलसीदास जी रोजाना की भांति नित्यकर्म करके वापिस आ रहे थे| तब उन्होंने एक पेड़ की जड़ों में बचा हुआ पानी डाला|

उस पेड़ पर एक आत्मा रहती थी, जो तुलसीदास जी से प्रसन्न हो गयी| उस आत्मा ने तुलसीदास जी कहा कि वह उनकी एक इच्छा पूरी कर सकती है|

तब तुलसीदास जी ने उस आत्मा से कहा कि उन्हें भगवान श्री राम के दर्शन चाहिए| तब आत्मा ने कहा कि हनुमान मंदिर चले जाओ|

वहा प्रतिदिन रामायण पाठ होता है तो हनुमान कोढ़ी के वेश में सबसे पहले पाठ सुनने आते है और सबसे अंत में जाते है| उनकी तलाश करो| इसमें वह आपकी मदद अवश्य करेंगे|

उस आत्मा के कहे अनुसार तुलसीदास हनुमान जी से मिले और हनुमान जी की सहायता से ही तुलसीदास जी भगवान श्री राम के भी दर्शन हो गए|

तुलसीदास जी के द्वारा की गई रचनाएं

हिन्दू संत व महाकवि के नाम से प्रसिद्ध तुलसीदास जी ने अपने जीवन काल में कुल 12 पुस्तकों की रचना की|

जिनमे से सबसे प्रसिद्ध और सर्वाधिक लोगों के द्वारा पसंद की जाने वाली पुस्तक श्री रामचरितमानस है जो भगवान श्री राम की जीवन चरित्र पर आधारित है| श्री रामचरितमानस को उत्तर भारत में बहुत ही श्रद्धा के साथ पूजा जाता है|

तुलसीदास जयंती 2026

1. रामचरितमानस

महाकवि तुलसीदास जी ने इस पुस्तक की रचना की थी और उन्होंने इस पुस्तक को सात खंडों में बांटा था|

  • बाल कांड
  • अयोध्या कांड
  • अरण्य कांड
  • किष्किंधा कांड
  • सुंदर कांड
  • लंका कांड
  • उत्तर कांड

2. हनुमान चालीसा

जब मुगल बादशाह के द्वारा तुलसीदास को कारागार में बंद कर दिया था| उस समय तुलसीदास जी ने हनुमान जी से वंदना करते हुए हनुमान चालीसा की रचना की थी| इसके बाद पुरे मुगल दरबार में बंदरो ने आतंक मचा दिया|

जिससे परेशान होकर बादशाह ने तुलसीदास जी को रिहा कर उनसे क्षमा मांगी| उस समय हनुमान जी ने प्रकट होकर तुलसीदास जी को यह वरदान दिया कि जो भी आपके द्वारा रचित इस हनुमान चालीसा को सौ बार पढ़ेगा|

मै उसके सभी संकट में दूर कर दूंगा| यही कारण है कि कलयुग में भी हनुमान चालीसा लोगों द्वारा पढ़ी जाती है|

3. बजरंग बाण

माना जाता है कि बजरंग बाण पाठ की रचना हनुमान चालीसा के बाद ही हुई थी| बजरंग बाण ने  तुलसीदास जी की बीमारी को दूर करने में सहायता की थी| बजरंग बाण एक ऐसा पाठ है जो तुरंत कार्य करता है लेकिन इस पाठ को तभी पढना चाहिए|

जब आप के जीवन पर कोई भयंकर संकट आ रखा हो| इस बजरंग बाण का पाठ प्रतिदिन नहीं करना चाहिए क्योंकि इसमें पाठ में हम हनुमान जी को भगवान श्री राम की कसम दी जाती है| इस पाठ को बिना किसी कारण से करने पर यह मनुष्य के क्रोध को बढाता है|

4. कृष्ण गीतावली

इस ग्रंथ की रचना तुलसीदास ने 1643 वी ई. के आस – पास की थी| इस पुस्तक के अंदर कवि तुलसीदास जी ने भगवान श्री कृष्ण के बालक रूप से लेकर युवावस्था की क्रीडाओं और लीलाओं का वर्णन किया गया है|

5. गीतावली

तुलसीदास जी द्वारा रचित इस गीतावली पुस्तक में भगवान श्री राम की बचपन की लीलाओं से उनके युवावस्था तक के जीवन का वर्णन किया गया|

इसके संदर्भ में कई लोगों का यह भी मानना है कि गीतावली और कृष्ण गीतावली लगभग एक समान ही है| इसके बारे में कोई एक मत रखना संभव नहीं है|

6. विनय पत्रिका

इस पुस्तक के अंदर तुलसीदास जी ने भगवान श्री राम के प्रति अपने भक्ति – भाव को दिखाते हुए स्वयं को श्री राम के चरणों में समर्पित कर दिया है| यह तुलसीदास जी के द्वारा रचित सबसे सुन्दर रचना है|

यह तुलसीदास जी के द्वारा रचित सबसे प्रमुख रचनाएं है| इसके अलावा भी कई रचनाएँ है जो तुलसीदास जी के द्वारा की गई है| लेकिन यह सारी प्रमुख व प्रसिद्ध रचनाएँ है|

तुलसीदास जयंती कैसे मनाई जाती है?

इस त्यौहार को उतर भारत में बहुत ही उत्साह के साथ मनाया जाता है| तुलसीदास जयंती 2026 को हिन्दू धर्म में पूर्ण श्रद्धा और अध्यात्मिक तरीके से मनाया जाता है| इस दिन हिन्दू धर्म के लोग हनुमान जी और भगवान श्री राम के मंदिर में एकत्रित होते है|

इसके पश्चात बड़े ही उत्साह के साथ तुलसीदास जी की याद में भजन और कीर्तन के साथ रामायण का पाठ किया जाता है|

इस दिन लोग तुलसीदास जी द्वारा रचित श्री रामचरिमानस का भी पाठ करते है| रामचरितमानस के साथ ही मन्दिरों में गीता के उपदेश भी पढ़े जाते है|

तुलसीदास जयंती 2026

तुलसीदास जयंती के दिन देश में कई सारी जगहों पर दोहे और कविताओं की प्रतियोगिताएँ भी रखी जाती है|

जिसमे बहुत सारे लोग भाग लेते है| तथा अपने द्वारा लिखी हुई कविता और दोहों को एक सभा में सुनाते है| तुलसीदास जी के कार्य की प्रसंशा बड़े – बड़े विद्वानों तथा शोधकर्ताओं के द्वारा भी की गई है|

यह भी तुलसीदास के द्वारा लिखी हुई साहित्य कृतिया और भारत देश की संस्कृति में उनके योगदान आश्चर्यचकित है|

आज के दिन यानी तुलसीदास जयंती के दिन लोगों को उनकी आध्यामिकता पुनः याद दिलाने की कोशिश करेंगे|

तुलसीदास जयंती 2026 (Tulsidas Jayanti 2026) के दिन मंदिरों में ब्राह्मणों को भोजन करवाया जाता है|

तुलसीदास जी के जीवन से जुडी कुछ रोचक बातें 

अब हम तुलसीदास जी से जुड़े हुए कुछ तथ्यों पर चर्चा करेंगे –

  • तुलसीदास जी का जन्म विक्रम संवत 1589 या 1532 ई. में उत्तर प्रदेश राज्य के बांदा जिला के राजपुर नामक स्थान पर हुआ था| तुलसीदास जी के पिताजी का नाम आत्माराम शुक्ल दुबे तथा उनकी माता का नाम हुलसी था| जब तुलसीदास जी का जन्म हुआ था| उस समय उनके मुख पुरे दांत उपस्थित थे|
  • जन्म लेते ही तुलसीदास ने सबसे पहले अपने मुख से भगवान श्री राम का नाम लिया| इसी कारण से प्रारम्भ में इनका नाम रामबोला ही रखा गया था|
  • विलसन के अनुसार तुलसीदास जी के गुरु जगन्नाथ थे| भविष्य पुराण के अनुसार राघवानंद ,अंतसाक्ष्य के अनुसार नरहरी और सोरों से प्राप्त हुए सबूतों के अनुसार नरसिंह चौधरी तुलसीदास के गुरु थे|
  • माना जाता है कि तुलसीदास जी का जन्म मूल नक्षत्र में हुआ था| जिस कारण से उनके पैदा होते ही उनकी माँ की मृत्यु हो गयी| इसकी वजह से उन्हें मनहूस समझकर उनके पिता जी ने भी उन्हें घर से निकल दिया| तुलसीदास जी ने अपने बचपन में बहुत कष्ट का सामना किया है|
  • उस गरीब महिला जिसने तुलसीदास जी का पालन – पोषण किया था| उसके मरने के बाद तुलसीदास जी अकेले रह गए| इसके बाद वह भिक्षा मांग कर अपना पेट भरते थे| जिसमे से भी कुछ लोग थे जो उन्हें भिक्षा देते थे|
  • माना जाता है कि माता पार्वती को तुलसीदास पर दया आ गई थी| जिस वजह से वह एक दिन अपना भेष बदल कर उनके पास गई और उन्हें भोजन करवाया|
  • भगवान शंकर और माता पार्वती की कृपा से तुलसीदास का जीवन अच्छे से बीत रहा था| फिर इनको पालक के रूप में गुरु नरहरि मिले|

तुलसीदास जयंती का महत्व

महाकवि तुलसीदास एक कवि होने साथ ही एक हिन्दू संत भी है| जिन्होंने अपनी रचना श्री रामचरितमानस के माध्यम से सम्पूर्ण जगत को भगवान श्री राम के जीवन और चरित्र के बारे में ज्ञान दिया|

तुलसीदास जी भगवान श्री राम के बहुत बड़े भक्त है| हनुमान जी के दर्शन पाने के बाद हनुमान जी ही सहायता से तुलसीदास जी ने भगवान श्री राम के भी दर्शन कर लिये|

इसके अलावा तुलसीदास जी को रामायण के रचियता वाल्मीकि जी का पुर्नजन्म भी माना जाता है| तुलसीदास जयंती 2026 के दिन हिन्दू धर्म के लोग हनुमान जी और भगवान श्री राम के मंदिर में एकत्रित होते है|

इसके पश्चात बड़े ही उत्साह के साथ तुलसीदास जी की याद में भजन और कीर्तन के साथ रामायण के पाठ को गाया जाता है|

हिन्दू पंचांग के अनुसार सावन मास में अमावस्या के सातवें दिन तुलसीदास जयंती का यह पावन पर्व मनाया जाता है|

तुलसीदास ने अपने जीवन का सर्वाधिक समय वाराणसी शहर में गुजरा था| इस वजह से वहा उपस्थित गंगा नदी का प्रसिद्ध तुलसी घाट उन्हीं के नाम से है|

निष्कर्ष 

आज हमने इस आर्टिकल के माध्यम से तुलसीदास जयंती 2026 (Tulsidas Jayanti 2026) के बारे में काफी बातें जानी है|

हमने तुलसीदास जयंती से होने वाले लाभों के बारे में भी जाना| इसके अलावा हमने आपको तुलसीदास जयंती से जुड़ी काफी सारी बातों के बारे में बताया है|

हम उम्मीद करते है कि हमारे द्वारा बताई गई जानकारी से आपको कोई ना कोई मदद मिली होगी| इसके अलावा भी अगर आप किसी और पूजा के बारे में जानकारी लेना चाहते है।

यदि आप तुलसीदास जयंती 2026 के अनुष्ठान या उसके उद्दीपन के लिए पंडित जी की तलाश कर रहे है तो हम आपको आज एक ऐसी वेबसाइट के बारे में बताने जा रहे है|

जिसकी सहायता से आप घर बैठे ही किसी भी जगह से आपकी पूजा के उपयुक्त और अनुभवी पंडित जी को खोज सकते है|

आप हमारी वेबसाइट 99Pandit पर जाकर सभी तरह की पूजा या त्योहारों के बारे में सम्पूर्ण जानकारी ले सकते है।

Table Of Content

Enquire Now

Puja Services

..
Filter