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Lakshmi Chalisa : माँ लक्ष्मी चालीसा – सिन्धु सुता मैं सुमिरौ तोही

99Pandit Ji
Last Updated:November 28, 2023

माता लक्ष्मी जी को प्रसन्न करने के लिए लक्ष्मी चालीसा [Lakshmi Chalisa] का पाठ किया जाता है| माना जाता है कि माता लक्ष्मी की पूजा करने के पश्चात लक्ष्मी चालीसा [Lakshmi Chalisa] का पाठ तथा लक्ष्मी जी की आरती [Lakshmi Ji Ki Aarti] की जाती है| धार्मिक ग्रंथों की मान्यताओं के अनुसार ही इस व्रत तथा त्योहारों के अलावा भी सुबह – शाम माता लक्ष्मी चालीसा [Lakshmi Chalisa] का पाठ करना चाहिए| यदि प्रतिदिन लक्ष्मी चालीसा [Lakshmi Chalisa] का पाठ किया जाए तो यह जातक के बहुत ही लाभदायक हो सकता है| लक्ष्मी चालीसा [Lakshmi Chalisa] का पाठ दिवाली के पावन त्यौहार पर करना बहुत ही शुभ माना जाता है|

लक्ष्मी चालीसा

शुक्रवार का दिन भी लक्ष्मी माता को समर्पित किया गया है| इस कारण लक्ष्मी चालीसा [Lakshmi Chalisa] का पाठ प्रत्येक शुक्रवार के दिन भी किया जा सकता है| लक्ष्मी चालीसा [Lakshmi Chalisa] का नियमित रूप से पाठ करने से माँ लक्ष्मी अपने सभी भक्तों के दुख व दरिद्रता को दूर कर देती है| इस लक्ष्मी चालीसा [Lakshmi Chalisa] की रचना कवि प्रदीप जी के द्वारा की गई थी|

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माँ लक्ष्मी चालीसा पाठ हिंदी में | Lakshmi Chalisa Lyrics In Hindi 

|| लक्ष्मी चालीसा ||

|| सोरठा ||

यही मोर अरदास , हाथ जोड़ विनती करुं
सब विधि करौ सुवास, जय जननि जगदंबिका ॥
सिन्धु सुता मैं सुमिरौ तोही ,ज्ञान बुद्धि विघा दो मोही ॥

|| चौपाई ||

सिन्धु सुता मैं सुमिरौ तोही।
ज्ञान बुद्धि विघा दो मोही ॥

तुम समान नहिं कोई उपकारी ।
सब विधि पुरवहु आस हमारी ॥

जय जय जगत जननि जगदम्बा ।
सबकी तुम ही हो अवलम्बा ॥

तुम ही हो सब घट घट वासी ।
विनती यही हमारी खासी ॥

जगजननी जय सिन्धु कुमारी ।
दीनन की तुम हो हितकारी ॥

विनवौं नित्य तुमहिं महारानी ।
कृपा करौ जग जननि भवानी ॥

केहि विधि स्तुति करौं तिहारी ।
सुधि लीजै अपराध बिसारी ॥

कृपा दृष्टि चितववो मम ओरी ।
जगजननी विनती सुन मोरी ॥

ज्ञान बुद्घि जय सुख की दाता ।
संकट हरो हमारी माता ॥

क्षीरसिन्धु जब विष्णु मथायो ।
चौदह रत्न सिन्धु में पायो ॥

चौदह रत्न में तुम सुखरासी ।
सेवा कियो प्रभु बनि दासी ॥

जब जब जन्म जहां प्रभु लीन्हा ।
रुप बदल तहं सेवा कीन्हा ॥

स्वयं विष्णु जब नर तनु धारा ।
लीन्हेउ अवधपुरी अवतारा ॥

तब तुम प्रगट जनकपुर माहीं ।
सेवा कियो हृदय पुलकाहीं ॥

अपनाया तोहि अन्तर्यामी ।
विश्व विदित त्रिभुवन की स्वामी ॥

तुम सम प्रबल शक्ति नहीं आनी ।
कहं लौ महिमा कहौं बखानी ॥

मन क्रम वचन करै सेवकाई ।
मन इच्छित वांछित फल पाई ॥

तजि छल कपट और चतुराई ।
पूजहिं विविध भांति मनलाई ॥

और हाल मैं कहौं बुझाई ।
जो यह पाठ करै मन लाई ॥

ताको कोई कष्ट नोई ।
मन इच्छित पावै फल सोई ॥

त्राहि त्राहि जय दुःख निवारिणि ।
त्रिविध ताप भव बंधन हारिणी ॥

जो चालीसा पढ़ै पढ़ावै ।
ध्यान लगाकर सुनै सुनावै ॥

ताकौ कोई न रोग सतावै ।
पुत्र आदि धन सम्पत्ति पावै ॥

पुत्रहीन अरु संपति हीना ।
अन्ध बधिर कोढ़ी अति दीना ॥

विप्र बोलाय कै पाठ करावै ।
शंका दिल में कभी न लावै ॥

पाठ करावै दिन चालीसा ।
ता पर कृपा करैं गौरीसा ॥

सुख सम्पत्ति बहुत सी पावै ।
कमी नहीं काहू की आवै ॥

बारह मास करै जो पूजा ।
तेहि सम धन्य और नहिं दूजा ॥

प्रतिदिन पाठ करै मन माही ।
उन सम कोइ जग में कहुं नाहीं ॥

बहुविधि क्या मैं करौं बड़ाई ।
लेय परीक्षा ध्यान लगाई ॥

करि विश्वास करै व्रत नेमा ।
होय सिद्घ उपजै उर प्रेमा ॥

जय जय जय लक्ष्मी भवानी ।
सब में व्यापित हो गुण खानी ॥

तुम्हरो तेज प्रबल जग माहीं ।
तुम सम कोउ दयालु कहुं नाहिं ॥

मोहि अनाथ की सुधि अब लीजै ।
संकट काटि भक्ति मोहि दीजै ॥

भूल चूक करि क्षमा हमारी ।
दर्शन दजै दशा निहारी ॥

बिन दर्शन व्याकुल अधिकारी ।
तुमहि अछत दुःख सहते भारी ॥

नहिं मोहिं ज्ञान बुद्घि है तन में ।
सब जानत हो अपने मन में ॥

रुप चतुर्भुज करके धारण ।
कष्ट मोर अब करहु निवारण ॥

केहि प्रकार मैं करौं बड़ाई ।
ज्ञान बुद्धि मोहि नहिं अधिकाई ॥

॥ दोहा॥

त्राहि त्राहि दुख हारिणी,
हरो वेगि सब त्रास ।
जयति जयति जय लक्ष्मी,
करो शत्रु को नाश ॥

रामदास धरि ध्यान नित,
विनय करत कर जोर ।
मातु लक्ष्मी दास पर,
करहु दया की कोर ॥

लक्ष्मी चालीसा

Lakshmi Chalisa Lyrics In English | सिन्धु सुता मैं सुमिरौ तोही

|| Lakshmi Chalisa ||

|| Sortha ||

Yahi mor ardaas,
Haath jod vinati karun |
Sab vidhi karau suvaas,
Jai Janani Jagdambika ||

|| Chaupai ||

Sindhu suta main sumirau tohi |
Gyaan buddhi vigya do mohi ||

Tum samaan nahin koi upkaari |
Sab vidhi purvahu aas hamaari ||

Jai Jai Jagat Janani Jagdamba |
Sabki tum hi ho avalamba ||

Tum hi ho sab ghat ghat vaasi |
Vinati yahi hamaari khaasi ||

Jagjanni jai Sindhu kumari |
Deenan ki tum ho hitkaari ||

Vinavau nitya tumhi maharani |
Kripa karau Jag Janani Bhavani ||

Kehi vidhi stuti karau tihari |
Sudhi lije apradh bisaari ||

Kripa drishti Chitvavo mam oree |
Jagjanni vinati sun mori ||

Gyaan buddhi jai sukh ki daata |
Sankat haro hamaari mata ||

Ksheersindhu jab Vishnu Mathaayo |
Chaudah ratna Sindhu mein Paayo ||

Chaudah ratna mein tum sukhraasi |
Seva kiyo Prabhu bani daasi ||

Jab jab janm jahaan Prabhu leenha |
Roop badal tahan seva keenha ||

Swayam Vishnu jab nar tanu dhaara |
Leenha Avadhapuri avataara ||

Tab tum pragat Janakpuri maahi |
Seva kiyo hriday pulakaahi ||

Apnaaya tohi antaryami |
Vishwa Vidit tribhuvan ki swami ||

Tum sam prabal shakti nahin aani |
Kahan lau mahima kahoon bakhaani ||

Man kram vachan karai sevakaai |
Man ichchhit vaanchhit phal paai ||

Taji chhal kapat aur chaturai |
Poojhin vividh bhaanti manlaai ||

Aur haal main kahoon bujhaai |
Jo yah paath karai man laai ||

Taako koi kasht noee |
Man ichchhit paavai phal soee ||

Traahi traahi jai dukh nivaarini |
Trividh taap bhav bandhan haarini ||

Jo chaaleesaa padhai padhaavai |
Dhyaan lagaakar sunai sunaavai ||

Taakau koi na roga sataavai |
Putra aadi dhan sampatti paavai ||

Putraheen aru sampatti heena |
Andha badhir kodhi ati deena ||

Vipra bolaaye kai paath karaavai |
Shanka dil mein kabhi na laavai ||

Paath karaavai din chaaleesaa |
Ta par kripa karai Gaurisa ||

Sukh sampatti bahut si paavai |
Kami nahin kaahoon ki aavai ||

Baarah maas karai jo pooja |
Te hi sam dhany aur nahin dooja ||

Pratidin paath karai man maahi |
Un sam koi jag mein kahun naahi ||

Bahuvidhi kya main karau badaai |
Ley pariksha dhyaan lagaai ||

Kari Vishwas karai vrata nema |
Hoy siddh upjai ur prema ||

Jai jai jai Lakshmi Bhavani |
Sab mein Vyapit ho gun khani ||

Tumharo tej prabal jag maahi |
Tum sam kou dayalu kahun naahin ||

Moi anaath ki sudhi ab lijai |
Sankat kaati bhakti moi dijai ||

Bhool chook kari kshama hamaari |
Darshan dajai dasha nihaari ||

Bin darshan vyakul adhikaari |
Tumhi achhat dukh sahate bhaari ||

Nahin moi gyaan buddhi hai tan mein |
Sab jaanat ho apne man mein ||

Roop chaturbhuj karke dharaan |
Kasht mor ab karahu nivaaran ||

Kehi prakaar main karau badaai |
Gyaan buddhi moi nahin adhikai ||

|| Doha ||

Traahi traahi dukh haarinii,
Haro vegi sab traas |
Jayati jayati jai Lakshmi,
Karo shatru ko naash ||

Ramdas dhari dhyaan nit,
Vinay karat kar jor |
Maatu Lakshmi daas par,
Karahu daya ki kor ||

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